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                <title>Religion News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा पर नया विवाद, पुरी गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ISKCON द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित करने पर जताई आपत्ति, शास्त्रीय परंपराओं की रक्षा और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a507984676f8/article-58357"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jagannath-rath-yatra.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को लेकर एक बार फिर परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं के बीच विवाद गहरा गया है। ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्राचीन धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत इस्कॉन (ISKCON) द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह परंपरा, शास्त्रों और भगवान जगन्नाथ की निर्धारित धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है तथा इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">8 जुलाई को लिखे गए इस पत्र में गजपति महाराज ने कहा कि जगन्नाथ संस्कृति केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में यदि अलग-अलग संस्थाएं अपनी सुविधा के अनुसार रथयात्रा की तिथियां तय करेंगी तो मूल परंपरा कमजोर होगी और श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार कर उचित कदम उठाए जाएं, ताकि भगवान जगन्नाथ की प्राचीन परंपराओं की गरिमा बनी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">गजपति महाराज दिव्यसिंह देव केवल पुरी राजघराने के प्रमुख ही नहीं, बल्कि श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के स्थायी अध्यक्ष भी हैं। जगन्नाथ परंपरा में उन्हें 'ठाकुर राजा' का विशेष सम्मान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वे भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाते हैं। हर वर्ष रथयात्रा के दौरान तीनों रथों पर सोने की झाड़ू से सफाई करने की प्रसिद्ध 'छेरा पंहरा' सेवा भी गजपति महाराज द्वारा ही संपन्न की जाती है। यह सेवा राजसत्ता के बजाय भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिव्यसिंह देव का राज्याभिषेक वर्ष 1970 में मात्र 17 वर्ष की आयु में हुआ था। उन्होंने विधि की उच्च शिक्षा प्राप्त की है और लंबे समय से श्रीजगन्नाथ मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं तथा परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके द्वारा उठाया गया यह मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विवाद की मुख्य वजह इस वर्ष विभिन्न देशों में अलग-अलग समय पर आयोजित रथयात्राएं हैं। इस्कॉन ने जून और जुलाई के दौरान लंदन, न्यूयॉर्क तथा सिडनी सहित कई शहरों में रथयात्रा निकाली, जबकि पुरी में इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को आयोजित होनी है। इसके अलावा स्नान पूर्णिमा का आयोजन 29 जून को हुआ था। गजपति महाराज का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार इन धार्मिक आयोजनों की निश्चित तिथियां निर्धारित हैं और उनसे अलग जाकर आयोजन करना उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">गजपति महाराज ने मध्य प्रदेश में प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार उज्जैन स्थित इस्कॉन मंदिर द्वारा 16 से 25 जुलाई के बीच राज्य के 66 स्थानों पर रथयात्रा निकालने की योजना बनाई गई है। इस पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में रथयात्रा को आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारंभ होने वाला नौ दिवसीय उत्सव बताया गया है। इसलिए अलग-अलग स्थानों पर अलग तिथियों में रथयात्रा आयोजित करना शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने पत्र में स्कंद पुराण का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित स्कंद पुराण में स्वयं भगवान जगन्नाथ ने स्नान यात्रा और रथयात्रा की तिथियों का उल्लेख किया है। ऐसे में इन तिथियों में परिवर्तन करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। गजपति महाराज का मानना है कि यदि इस प्रकार की परंपराएं लगातार बदलती रहीं तो आने वाली पीढ़ियों तक मूल धार्मिक स्वरूप सुरक्षित रखना कठिन हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, इस्कॉन ने अपने पक्ष में स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी भी परंपरा का उल्लंघन करना नहीं है। संगठन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ केवल पुरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। विदेशों में स्थानीय परिस्थितियां, सरकारी नियम, जलवायु और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अलग-अलग होती हैं। कई देशों में निर्धारित तिथि पर विशाल रथयात्रा निकालने की अनुमति या आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। इसलिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तिथियों पर आयोजन किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इसमें शामिल हो सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस्कॉन ने पहले भी स्पष्ट किया था कि रूस सहित कई देशों में मौसम और प्रशासनिक नियमों के कारण शास्त्रों में वर्णित तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल भगवान जगन्नाथ की भक्ति और भारतीय संस्कृति का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है। रथयात्रा को लेकर यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराज ने इस्कॉन से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी रथयात्रा पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार आयोजित की जाए। हालांकि उस समय भी इस्कॉन ने स्थानीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने कार्यक्रमों का बचाव किया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:42:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जून में कालाष्टमी 2026: 8 जून को रहेगा विशेष संयोग, जानें पूजा का महत्व और व्रत नियम</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान काल भैरव की आराधना का पावन दिन, श्रद्धालु रखेंगे व्रत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/kalashtami-2026-will-be-a-special-coincidence-on-8th-june/article-55053"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kalashtami-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जून माह की मासिक कालाष्टमी इस वर्ष 8 जून 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। भगवान काल भैरव को समर्पित यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी व्रत रखा जाता है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट, भय और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। इस बार कालाष्टमी का पर्व सोमवार को पड़ रहा है, जिसे भगवान शिव का दिन माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच इस तिथि को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 8 जून को सुबह 3 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 9 जून को सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इसी अवधि में भक्त व्रत और पूजा का पालन करेंगे। बताया जा रहा है कि देश के कई शिव और काल भैरव मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान कर भगवान शिव और काल भैरव की पूजा करेंगे तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक परंपराओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन व्रत रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र स्नान करते हैं। इसके बाद भगवान काल भैरव की विधिवत पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत भी रखते हैं। शाम के समय काल भैरव मंदिरों में दर्शन और विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान भैरव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं। मान्यता है कि भगवान काल भैरव भगवान शिव का ही एक उग्र और शक्तिशाली स्वरूप हैं। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ था। उसी दौरान भगवान शिव ने क्रोधित होकर काल भैरव का रूप धारण किया और ब्रह्मा के पांचवें सिर का अंत कर दिया। इसके बाद से भगवान शिव के इस स्वरूप की पूजा काल भैरव के रूप में की जाने लगी। धार्मिक ग्रंथों में उन्हें समय का देवता भी कहा गया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति काल भैरव की आराधना करता है, उसे समय और परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने की शक्ति मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कालाष्टमी के दिन पितरों के निमित्त भी विशेष कर्मकांड किए जाते हैं। कई स्थानों पर सुबह के समय पूर्वजों के लिए तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। धार्मिक जानकारों के अनुसार इस दिन किया गया दान और सेवा कार्य विशेष फलदायी माना जाता है। काशी, उज्जैन और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। हालांकि इस बार भी स्थानीय मंदिरों में भक्तों की अच्छी खासी भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है। कालाष्टमी से जुड़ी एक और विशेष परंपरा कुत्तों को भोजन कराने की है। मान्यता है कि काला कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। इसी कारण भक्त इस दिन कुत्तों को दूध, दही, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं। कई लोग गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन भी कराते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे पुण्यदायी कार्य माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी इस अवसर पर सेवा कार्यों का आयोजन करती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक विद्वानों का कहना है कि कालाष्टमी का व्रत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी अवसर माना जाता है। भक्त इस दिन काल भैरव स्तोत्र, शिव मंत्र और काल भैरव कथा का पाठ करते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरी रात जागरण कर भगवान शिव और महाकाल की महिमा का श्रवण भी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय, रोग तथा मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है। 8 जून को पड़ने वाली मासिक कालाष्टमी को लेकर देशभर के शिव भक्तों में उत्साह का माहौल है। मंदिरों में विशेष सजावट और पूजा की तैयारियां जारी हैं। श्रद्धालु भगवान काल भैरव की आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में शुभ फल प्रदान करता है तथा भगवान शिव और काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:53:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>आज का अंक ज्योतिष 23 मई 2026: मूलांक 6 और 9 वालों को बरतनी होगी सावधानी</title>
                                    <description><![CDATA[23 मई 2026 का अंक ज्योतिष पढ़ें। मूलांक 1 से 9 तक करियर, परिवार, पढ़ाई और व्यवहार को लेकर क्या संकेत मिल रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/todays-numerology-23-may-2026-people-with-radix-number-6/article-53988"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/aaj-ka-ank-jyotish-23-may-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Aaj Ka Ank Jyotish <span lang="hi" xml:lang="hi">23</span> May </strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>2026:</strong> 23 मई 2026 का दिन अंक ज्योतिष के नजरिए से कई लोगों के लिए बदलाव और नए संकेत लाने वाला है। बन रहा भाग्यांक 2</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे चंद्रमा से जोड़ा गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस दिन खास माना जा रहा है। ज्योतिष के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका प्रभाव लोगों की भावनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्णयों और व्यवहार पर नज़र आ सकता है। ऐसे में कुछ मूलांक वाले लोगों को करियर और आर्थिक मामलों में राहत मिल सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि अन्य को रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी गई है। खासकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूलांक 1</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">4 और 7 वाले लोगों के लिए यह दिन सकारात्मक रहने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 1</strong> वाले व्यक्तियों को कार्यक्षेत्र में मेहनत का फल मिलने के संकेत हैं। उन्हें अधिकारियों से सराहना मिल सकती है और नौकरी में नई जिम्मेदारियाँ भी मिल सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 2</strong> वालों को परिवार में बातचीत के दौरान संयम बरतने की सलाह दी गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि छोटी-छोटी बातों पर मतभेद हो सकते हैं। </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 3</strong> के लोग आज काफी व्यस्त रहने वाले हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें नौकरी या काम के सिलसिले में छोटी यात्रा भी करनी पड़ सकती है। </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 4</strong> वालों के लिए आर्थिक मामलों में सकारात्मकता का माहौल है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 5</strong> वालों को मेहनत के बावजूद तुरंत परिणाम न मिलने के कारण थोड़ी निराशा हो सकती है। लेकिन जानकारों का कहना है कि धैर्य रखना जरूरी है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 6</strong> वालों के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यार्थी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ध्यान भटकने की संभावना है। इसलिए जल्दीबाजी और लापरवाही से बचने की सलाह दी गई है। </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 7</strong> वाले लोग आज अपने पसंदीदा कामों में समय बिताना चाहेंगे और मानसिक रूप से राहत महसूस कर सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 8</strong> वालों को परिवार के बड़े सदस्यों के साथ व्यवहार में सावधानी बरतने की जरूरत है। घर का माहौल सम्मान और समझदारी से भरा हो सकता है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>मूलांक 9</strong> वालों के लिए आज का दिन थोड़ा संवेदनशील रहेगा। जिद या गुस्से के चलते भाई-बहनों या करीबी लोगों के साथ विवाद बढ़ सकते हैं। जानकारी दी गई है कि धैर्य और शांति से काम लेने पर स्थिति को बेहतर किया जा सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 00:00:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या सच में अपवित्र होता है मलमास का महीना? जानिए पूरी सच्चाई</title>
                                    <description><![CDATA[मलमास 2026 को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। जानिए मलमास, अधिकमास और पुरुषोत्तम मास का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/is-the-month-of-malmas-really-impure-know-the-whole/article-53996"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/malmas-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Malmas </strong><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>2026:</strong> मलमास की शुरुआत होते ही जाने-अनजाने लोगों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं। शादी-विवाह रोक दिए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गृह प्रवेश और मुंडन जैसे दान-पुण्य के काम टाल दिए जाते हैं। कुछ घरों में लोग इस दौरान नई चीजें खरीदने से भी बचते हैं। ऐसे में हर साल एक सवाल उठता है कि आखिर मलमास को </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी अपवित्र या अशुभ महीना क्यों मानते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या वाकई ये महीने अशुभ होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या इसके पीछे कोई और बात है</span>?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के लिहाज से मलमास को अपवित्र मानना सही नहीं ठहराया जाता। असल में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यहां </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द का अर्थ गंदगी या अपवित्रता नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसे </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">अभाव</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">से जोड़ा गया है। ज्योतिष के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौर साल 365 दिनों का होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है। इससे लगभग 11 दिनों का फर्क आ जाता है। इस असंतुलन को सही करने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अधिकमास या मलमास कहा जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहा जाता है कि इस अतिरिक्त महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती। यानी इस पूरे महीने में सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में नहीं जाता। इसी संक्रांति की कमी के कारण इसे मलमास कहा गया। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इसका यह मतलब नहीं है कि ये महीना अशुभ है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह खगोलीय गणना में संतुलन बनाने का समय है। इसलिए कई विद्वान इसे आध्यात्मिक नजरिए से खास मानते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों के दिमाग में सबसे बड़ा सवाल ये होता है कि अगर मलमास अपवित्र नहीं है तो इस दौरान विवाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गृह प्रवेश और अन्य शुभ काम क्यों नहीं किए जाते। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यों में सूर्य और गुरु की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण होती है। लेकिन मलमास में संक्रांति नहीं होने की वजह से इसे सांसारिक और भौतिक कार्यों के लिए शुभ ऊर्जा का अभाव माना जाता है। इसीलिए इस समय बड़े शुभ कार्य करने से परहेज किया जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह समय बहुत शुभ माना जाता है। इस महीने में पूजा-पाठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्रत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्र जाप और भगवान विष्णु की आराधना के लिए खास महत्व है। पुरानी कथाओं में भी मलमास का जिक्र मिलता है। मान्यता है कि पहले इस महीने को लोग तिरस्कार की नजर से देखते थे। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">पुरुषोत्तम मास</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">दिया और इसका विशेष महत्व बताया। तभी से मलमास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाने लगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धर्म के जानकारों का कहना है कि मलमास को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां अब भी बनी हुई हैं। जबकि असल में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह महीना आत्मचिंतन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साधना और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण समझा जाता है। इसलिए इसे अपवित्र मानने से बेहतर है कि इसके असली धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व को समझा जाए<span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">।</span></span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 00:00:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोविंदा ने वृंदावन में बांके बिहारी के दर्शन किए, बोले- यहां आकर मन को मिली गहरी शांति</title>
                                    <description><![CDATA[वृंदावन दौरे के दौरान अभिनेता ने संत प्रेमानंद महाराज से भी की मुलाकात, बोले– यहां आकर मन को मिलती है शांति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/govinda-visited-banke-bihari-in-vrindavan-and-said-after/article-52239"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/bollywood---2026-04-27t181122.920.jpg" alt=""></a><br /><p>वृंदावन में आज सोमवार को बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा का आध्यात्मिक दौरा चर्चा का विषय बन गया। वह सुबह ठाकुर बांके बिहारी मंदिर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना की। दर्शन के बाद उन्होंने संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज से मुलाकात की। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं और फैंस की भीड़ उमड़ पड़ी। अभिनेता ने कहा कि वृंदावन आकर उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।</p>
<p>यह दौरा ऐसे समय हुआ जब धार्मिक स्थलों पर सेलेब्रिटीज की उपस्थिति लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वृंदावन में गोविंदा का यह कार्यक्रम स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा।</p>
<h5><strong>बांके बिहारी मंदिर में दर्शन</strong></h5>
<p>वृंदावन पहुंचते ही गोविंदा सीधे ठाकुर बांके बिहारी मंदिर गए। वहां पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका स्वागत किया और उन्हें दर्शन कराए। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने अभिनेता की एक झलक पाने के लिए भीड़ लगा दी।</p>
<p>दर्शन के बाद गोविंदा कुछ समय मंदिर परिसर में रुके और भक्ति भाव में नजर आए। उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि वृंदावन की पवित्रता और वातावरण उन्हें हर बार यहां खींच लाता है।</p>
<h5><strong>संत से मुलाकात</strong></h5>
<p>मंदिर दर्शन के बाद गोविंदा राधा निवास पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात संत प्रेमानंद महाराज से हुई। दोनों के बीच आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा हुई। गोविंदा ने संत से जीवन और साधना से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन लिया।यह मुलाकात काफी देर तक चली। इस दौरान गोविंदा शांत मुद्रा में संत के पास बैठे रहे और ध्यानपूर्वक उनकी बातें सुनते रहे।</p>
<h5><strong>फैंस की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था</strong></h5>
<p>जैसे ही गोविंदा के वृंदावन पहुंचने की खबर फैली, स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ देखी गई। सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।फैंस ने अपने पसंदीदा अभिनेता की तस्वीरें लीं और उन्हें देखकर उत्साहित नजर आए। गोविंदा ने भी हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।</p>
<p>मीडिया से बातचीत में गोविंदा ने कहा कि वृंदावन केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। उनके मुताबिक यहां आने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।उन्होंने कहा कि व्यस्त फिल्मी जीवन के बीच ऐसे दौरे उन्हें आत्मिक संतुलन प्रदान करते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:12:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुवार के उपायों को लेकर आस्था बढ़ी: भगवान विष्णु की पूजा और दान पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार की उपासना से आर्थिक और पारिवारिक संतुलन में सुधार के दावे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/faith-increased-regarding-thursdays-measures-emphasis-on-worship-of-lord/article-46623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/dharm-(65).jpg" alt=""></a><br /><p>गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। धर्मग्रंथों में वर्णित है कि श्रद्धा, संयम और सत्कर्म के साथ की गई उपासना से जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन किए गए निम्न उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं।</p>
<h5><strong>प्रातःकालीन पूजा विधि</strong></h5>
<p>गुरुवार को ब्रह्ममुहूर्त में जागकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान में दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु का ध्यान करें। पूजा में हल्दी, पीले पुष्प और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धा से मंत्र जप करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और आध्यात्मिक बल मिलता है।</p>
<hr />
<h5><strong> हल्दी और चने की दाल का दान</strong></h5>
<p>इस दिन पीली वस्तुओं का दान विशेष पुण्यकारी माना गया है। हल्दी, चने की दाल या पीले फल दान करने से आर्थिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है। दान सद्भाव और सेवा भावना से किया जाए तो उसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।</p>
<hr />
<h5><strong> गौसेवा का महत्व</strong></h5>
<p>आटे की लोई में गुड़ और चने की दाल मिलाकर गाय को खिलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह सेवा जीवन में आने वाले कष्टों को कम करने और पुण्य वृद्धि का माध्यम मानी जाती है।</p>
<hr />
<h5><strong>दाम्पत्य सुख के लिए विशेष उपाय</strong></h5>
<p>विवाहित दंपत्ति यदि इस दिन संयुक्त रूप से पूजा करें और भगवान के समक्ष प्रार्थना करें, तो पारिवारिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ने की मान्यता है। पूजा में हल्दी की गांठ अर्पित करना मंगलकारी माना जाता है।</p>
<hr />
<h5><strong> गुरुवार के प्रमुख मंत्र</strong></h5>
<p>श्रद्धा से इन मंत्रों का जप किया जा सकता है:</p>
<p>ॐ नमो नारायणाय॥<br />ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥</p>
<p>विष्णु गायत्री मंत्र:<br />ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।<br />तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥</p>
<hr />
<h5><strong>आचरण से जुड़े सरल नियम</strong></h5>
<p>• सत्य और मधुर वाणी का पालन करें<br />• जरूरतमंदों की सहायता करें<br />• क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें<br />• सात्विक भोजन ग्रहण करें</p>
<p>-----------------------------</p>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 08:07:27 +0530</pubDate>
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