<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sanctions-relief/tag-18625" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>sanctions relief - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/18625/rss</link>
                <description>sanctions relief RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान 14 सूत्रीय डील का खुलासा, होर्मुज और परमाणु मुद्दे अहम</title>
                                    <description><![CDATA[शांति समझौते में 60 दिन की समयसीमा, प्रतिबंधों में राहत और ईरान को आर्थिक पैकेज का प्रावधान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-iran-14-point-deal-revealed-hormuz-and-nuclear-issues-important/article-56251"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/hormuz-strait-agreement-2026.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
<div>

<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
<div class="[--thread-content-max-width:40rem] @w-lg/main:[--thread-content-max-width:48rem] mx-auto max-w-(--thread-content-max-width) flex-1 group/turn-messages focus-visible:outline-hidden relative flex w-full min-w-0 flex-col agent-turn">
<div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
<div class="min-h-8 text-message relative flex w-full flex-col items-end gap-2 text-start break-words whitespace-normal outline-none keyboard-focused:focus-ring [.text-message+&amp;]:mt-1">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden">
<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद अब 14 सूत्रीय डील की पूरी जानकारी सामने आ गई है। इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने डिजिटल हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद यह तुरंत प्रभाव में आ गया। पेरिस के वर्साय पैलेस में हुए इस घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है क्योंकि इसमें युद्धविराम से लेकर परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों तक कई अहम मुद्दे शामिल हैं। इस डील का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 60 दिनों की समयसीमा है, जिसके भीतर दोनों देशों को अंतिम समझौते तक पहुंचना होगा। इस दौरान न तो कोई सैन्य कार्रवाई होगी और न ही कोई बड़ा राजनीतिक या आर्थिक दबाव बढ़ाया जाएगा। इसी समयसीमा के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को 60 दिनों के लिए शुल्क-मुक्त खोले जाने का प्रावधान भी शामिल है। यह फैसला वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित और निगरानी योग्य दायरे में रखेगा। इसके बदले अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान के लिए लगभग 300 अरब डॉलर यानी करीब 28 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पुनर्निर्माण पैकेज का संकेत दिया है। हालांकि यह फंड तुरंत जारी नहीं होगा और इसे अंतिम समझौते की शर्तों से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे प्रतिबंधों से बाहर निकालना बताया जा रहा है। डील के तहत अमेरिका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का भी वादा किया है। इसमें तेल निर्यात, बैंकिंग, बीमा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े कई प्रतिबंध शामिल हैं। इसके हटने से ईरान को वैश्विक बाजार में दोबारा प्रवेश मिलने की संभावना है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था में सुधार हो सकता है। लंबे समय से प्रतिबंधों के कारण ईरान की आर्थिक स्थिति दबाव में रही है और यह समझौता उसके लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते का एक और अहम पहलू अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटाना है। इसके बाद ईरान के बंदरगाहों से व्यापारिक गतिविधियां दोबारा शुरू हो सकेंगी। तेल और अन्य निर्यात वस्तुओं के लिए रास्ता खुलने से ईरान को विदेशी मुद्रा प्राप्त होने लगेगी, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि इस कदम से अमेरिका का क्षेत्रीय दबाव बनाए रखने का एक बड़ा साधन खत्म हो जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। समझौते के अनुसार ईरान ने अगले 60 दिनों तक इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने का वादा किया है। इस अवधि में वैश्विक व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। लेकिन 60 दिन के बाद स्थिति बदल सकती है और ईरान शुल्क लगाने का निर्णय ले सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की लागत प्रभावित हो सकती है। डील में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर भी कड़ा लेकिन संतुलित रुख अपनाया गया है। समझौते के अनुसार ईरान अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित यूरेनियम को कम घनत्व में बदलेगा, ताकि उसका उपयोग हथियार निर्माण में न हो सके। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में होगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजेगा या देश के भीतर ही उसका रूपांतरण करेगा, जिससे कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते में यह भी तय किया गया है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और सीमाओं का सम्मान करेंगे। यह बिंदु अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भविष्य में राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना कम हो सकती है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे रणनीतिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं, जिससे अमेरिका का क्षेत्रीय प्रभाव सीमित हो सकता है। इसके अलावा दोनों देशों ने एक संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने पर सहमति जताई है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि समझौते की सभी शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं। यह प्रणाली पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाई जाएगी। साथ ही अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी दिलाने का भी प्रावधान है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता मिल सके। अंततः यह 14 सूत्रीय समझौता केवल युद्ध समाप्ति का दस्तावेज नहीं बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>

</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-iran-14-point-deal-revealed-hormuz-and-nuclear-issues-important/article-56251</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-iran-14-point-deal-revealed-hormuz-and-nuclear-issues-important/article-56251</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:35:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/hormuz-strait-agreement-2026.jpg"                         length="117743"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूएस-ईरान न्यूक्लियर डील पर ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप बोले—ईरान को 300 अरब डॉलर देने की खबर फर्जी, वेंस ने समझौते को बताया ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-on-us-iran-nuclear-deal-iran-agreed-not/article-56041"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-nuclear-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और संघर्ष के बीच अब परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा राजनीतिक दावा सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार कभी न बनाने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जो यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर दे रहा है, वह पूरी तरह “फर्जी खबर” है। ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दिया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने स्पष्ट रूप से परमाणु हथियार न रखने पर सहमति दी है और 300 मिलियन या अरब डॉलर देने की बात गलत तरीके से फैलायी जा रही है। ट्रंप ने इस तरह की खबरों को राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया और कहा कि यह जानकारी अमेरिकी जनता को भ्रमित करने के लिए फैलाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरें सामने आई हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे युद्ध जैसे हालात को समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक स्थायी ढांचा तैयार करना बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस डील के सभी विस्तृत बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे कई सवाल बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी ट्रंप के बयान का समर्थन करते हुए इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। वेंस ने कहा कि पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यही था कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समझौता अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच ईरान की तरफ से भी सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अभी अंतिम शांति समझौता तैयार होना बाकी है। ईरानी पक्ष का कहना है कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए विस्तृत बातचीत और ठोस शर्तों पर सहमति जरूरी है। सबसे बड़ा विवाद उस 300 अरब डॉलर के कथित पैकेज को लेकर है, जिस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ट्रंप ने जहां इसे पूरी तरह झूठ बताया है, वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह रकम किसी प्रत्यक्ष भुगतान के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक पुनर्निर्माण और निवेश कार्यक्रम से जुड़ी हो सकती है। ईरानी मीडिया का दावा है कि यह राशि युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और प्रतिबंधों में राहत के तौर पर मांगी गई संभावित आर्थिक पैकेज का हिस्सा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान ने 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों की रिहाई की मांग की है और साथ ही तेल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में ढील की भी बात शामिल है। ईरानी पक्ष का तर्क है कि देश को हुए नुकसान का आकलन कई सौ अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, इसलिए आर्थिक राहत किसी भी समझौते का अहम हिस्सा होना चाहिए। दूसरी ओर पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स में इस आंकड़े को अलग नजरिए से देखा जा रहा है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार यह 300 अरब डॉलर का पैकेज सीधे भुगतान नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश और पुनर्निर्माण सहयोग से जुड़ा एक प्रस्ताव हो सकता है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल हो सकती है। इस अंतर ने पूरे समझौते को और अधिक विवादित बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">समझौते के प्रारंभिक ढांचे को लेकर उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि यह दस्तावेज अभी केवल डेढ़ पेज का है और बहुत सामान्य प्रकृति का है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में इसके और विवरण सामने आएंगे। वेंस के अनुसार समझौते में परमाणु निरीक्षकों की वापसी, यूरेनियम स्टॉकपाइल के प्रबंधन और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को ईरान में दोबारा प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है, ताकि परमाणु गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा यह भी प्रस्ताव है कि ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम भंडार को लेकर एक साझा समाधान निकाला जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते से पहले ईरान को कई अहम शर्तों को पूरा करना होगा, जिनमें परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों से दूरी बनाना शामिल है। हालांकि ईरान की ओर से इन शर्तों पर औपचारिक प्रतिक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-on-us-iran-nuclear-deal-iran-agreed-not/article-56041</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-on-us-iran-nuclear-deal-iran-agreed-not/article-56041</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:19:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/us-iran-nuclear-deal.jpg"                         length="127711"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        