<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/china-universities/tag-18657" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>China Universities - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/18657/rss</link>
                <description>China Universities RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>2030 तक AI से 22% नौकरियों पर असर, डिग्री से ज्यादा स्किल्स की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[WEF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 9.2 करोड़ नौकरियां प्रभावित होने की आशंका; चीन ने 12 हजार से ज्यादा डिग्री प्रोग्राम बंद कर AI आधारित कोर्स शुरू किए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/headline-ai-to-impact-22-jobs-by-2030-demand-for/article-56050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ai-jobs-2030.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल तकनीक की दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर तेजी से रोजगार, शिक्षा और उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक दुनिया की करीब 22 प्रतिशत नौकरियां AI और ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में लगभग 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं या उनका स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि इसके साथ ही करीब 17 करोड़ नई नौकरियां भी पैदा होने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब यह है कि रोजगार के अवसर खत्म नहीं होंगे, लेकिन काम करने का तरीका और जरूरी योग्यताएं पहले से काफी अलग होंगी। सबसे ज्यादा असर प्रशासनिक कार्यों, डेटा एंट्री, बेसिक कंटेंट राइटिंग, कस्टमर सपोर्ट और अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में कई प्रक्रियाएं तेजी से ऑटोमेट हो रही हैं। दूसरी ओर डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को तलाश रही हैं जो केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि AI टूल्स के साथ काम करने की क्षमता भी रखते हों। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में नौकरी पाने और बनाए रखने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">देश में आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत दिखाई देने लगी है। जिन कामों के लिए पहले बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होती थी, उनमें अब AI टूल्स की मदद से कम समय और कम संसाधनों में काम पूरा किया जा रहा है। एचआर कंपनी टीमलीज के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत कंपनियां अब हाइब्रिड स्किल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। यानी उम्मीदवार के पास डिग्री के साथ AI आधारित तकनीकों की समझ होना भी जरूरी माना जा रहा है। वहीं नैस्कॉम की रिपोर्ट बताती है कि देश के 82 प्रतिशत बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है, जो भविष्य में उनके लिए चुनौती बन सकती है।  AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं लेगा, लेकिन जो लोग AI का प्रभावी उपयोग करना जानते हैं, वे निश्चित रूप से उन लोगों से आगे निकल जाएंगे जो नई तकनीक को अपनाने से बच रहे हैं। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को ज्यादा महत्व देंगी जो AI की मदद से अपनी उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच चीन ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए पिछले चार वर्षों में 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम बंद या निलंबित कर दिए हैं। इसके साथ ही करीब 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें AI, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। चीन सरकार का मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ऐसे युवाओं की जरूरत होगी जो नई तकनीकों के साथ काम कर सकें। यही कारण है कि कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और कुछ पारंपरिक प्रबंधन पाठ्यक्रमों में कटौती की गई है। भारत में भी इसी तरह के संकेत दिखाई देने लगे हैं। कर्नाटक सरकार ने हाल ही में सरकारी कॉलेजों में कम दाखिले वाले सैकड़ों पारंपरिक कोर्स कॉम्बिनेशन बंद कर दिए हैं और 1300 से ज्यादा कोर्सों में सीटें कम कर दी हैं। शिक्षा विशेषज्ञ इसे बदलती रोजगार जरूरतों का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपने पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव करने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/headline-ai-to-impact-22-jobs-by-2030-demand-for/article-56050</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/headline-ai-to-impact-22-jobs-by-2030-demand-for/article-56050</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:06:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/ai-jobs-2030.jpg"                         length="192168"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        