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                <title>Child Safety - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Child Safety RSS Feed</description>
                
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                <title>बाल यौन शोषण कंटेंट पर सरकार सख्त, इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को भेजा नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[7 दिन में मांगा जवाब, विवादित विज्ञापन तुरंत हटाने और ऐसे कंटेंट की पहुंच रोकने के निर्देश; सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बढ़ी सख्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-child-sexual-abuse-content-sent-notice-to/article-57915"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/instagram-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े विज्ञापनों के प्रसार को गंभीरता से लेते हुए उसकी पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है और निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित कंटेंट को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक और हटाया जाए। यह कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने 4 जुलाई को जारी नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी प्रकार का ऐसा कंटेंट या विज्ञापन बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देता है या उपयोगकर्ताओं को ऐसे अवैध कंटेंट तक पहुंचने में मदद करता है, तो उसे तत्काल हटाया जाना चाहिए। सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दिए और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>BBC की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन चल रहे थे जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया गया। रिपोर्ट के अनुसार इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ताओं को दूसरे प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से टेलीग्राम चैनलों की ओर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर अवैध सामग्री बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही थी। ऐसे विज्ञापन Meta के मॉडरेशन सिस्टम से स्वीकृति मिलने के बाद ही प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहे थे। जब इस संबंध में शिकायत की गई तो शुरुआती स्तर पर संबंधित विज्ञापन को कंपनी की कम्युनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं माना गया। बाद में मामला सार्वजनिक होने के बाद Meta ने कई विज्ञापन हटाने, संबंधित अकाउंट निलंबित करने और संदिग्ध लिंक हटाने की बात स्वीकार की।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने मांगा विस्तृत स्पष्टीकरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने Meta से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में ऐसी चूक कैसे हुई। साथ ही यह भी पूछा गया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे। सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी किया हो। इससे पहले 1 जुलाई को सरकार ने WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भी कंपनी से जवाब मांगा था। लगातार दूसरी बार नोटिस जारी होने से स्पष्ट है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर अधिक सतर्क और सख्त रुख अपना रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में क्या कहता है कानून</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कानून के अनुसार बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी प्रकार की सामग्री का निर्माण, संग्रह, डाउनलोड, खरीद, बिक्री, प्रसारण या साझा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67B के तहत ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। पहली बार दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की कैद और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। दोबारा अपराध करने पर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अन्य संबंधित कानूनों के तहत भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों पर यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे अवैध और आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर त्वरित कार्रवाई करें। इन नियमों के अनुसार कंपनियों को जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना और शिकायत मिलने पर समयबद्ध तरीके से सामग्री हटाना अनिवार्य है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>यदि ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की सलाह है कि यदि किसी उपयोगकर्ता को इस प्रकार का कोई भी संदिग्ध या अवैध कंटेंट दिखाई देता है तो उसे किसी भी स्थिति में डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इंटरनेट और सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि इन प्लेटफॉर्म पर मौजूद अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए।  केवल सरकार या सोशल मीडिया कंपनियां ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ेगी निगरानी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार की इस कार्रवाई को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन स्वीकृति प्रक्रिया और सुरक्षा तंत्र की अधिक सख्ती से निगरानी की जाएगी। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ आईटी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाना और बच्चों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 13:31:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सात दिन से लापता नाबालिग ग्वालियर में बरामद, वन स्टॉप सेंटर भेजी गई</title>
                                    <description><![CDATA[महाराजपुरा से 14 वर्षीय छात्रा हुई थी लापता, CCTV और रूट मैपिंग से पुलिस ने ट्रेस किया, पहले भी चित्रकूट से हो चुकी है बरामदगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/minor-missing-for-seven-days-recovered-in-gwalior-sent-to/article-57286"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-missing-girl-case.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">ग्वालियर में सात दिन से लापता 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर लिया है। मामला महाराजपुरा थाना क्षेत्र के शताब्दीपुरम इलाके का है, जहां से 21 जून को छात्रा अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। मामला नाबालिग बच्ची से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू किया। लगातार सात दिन तक चली तलाश के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और रूट मैपिंग की मदद से छात्रा को बरामद कर लिया। हालांकि बरामदगी के बाद छात्रा ने अपने घर लौटने से इनकार कर दिया, जिसके चलते उसे फिलहाल वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस के मुताबिक छात्रा मूल रूप से भिंड जिले की रहने वाली है, लेकिन पढ़ाई के सिलसिले में अपने परिवार के साथ ग्वालियर के महाराजपुरा क्षेत्र में रह रही थी। 21 जून को वह अचानक घर से बिना किसी को बताए निकल गई। जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटी तो परिवार के लोगों ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। कई घंटों तक खोजबीन के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने महाराजपुरा थाने पहुंचकर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएसपी महाराजपुरा नागेंद्र सिंह सिकरवार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक यशवंत गोयल ने एक विशेष टीम गठित की। टीम ने सबसे पहले छात्रा के घर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि छात्रा किस दिशा में गई थी और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं था। इसके अलावा पुलिस ने आसपास के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों के कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखी। रूट मैपिंग के जरिए छात्रा की संभावित लोकेशन का अनुमान लगाया गया और उसी आधार पर पुलिस की अलग-अलग टीमें सक्रिय कर दी गईं।जांच के दौरान पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया। कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई और संभावित स्थानों पर लगातार निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच और लगातार फील्ड वर्क का ही परिणाम था कि रविवार शाम छात्रा का पता चल गया। पुलिस टीम ने उसे शहर के पास से सुरक्षित बरामद कर लिया और थाने लेकर पहुंची। यहां उसकी प्रारंभिक पूछताछ की गई, लेकिन उसने घर वापस जाने से साफ इनकार कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">छात्रा के इनकार के बाद पुलिस ने बाल संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन करते हुए उसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया। अधिकारियों के मुताबिक वहां विशेषज्ञ उसकी काउंसलिंग कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि आखिर वह बार-बार घर क्यों छोड़ रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी नाबालिग के मामले में केवल बरामदगी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति, पारिवारिक माहौल और सामाजिक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी होता है। इसी वजह से काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जांच के दौरान एक और अहम तथ्य सामने आया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब यह छात्रा घर से लापता हुई हो। इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को भी वह बिना बताए घर से चली गई थी। उस समय भी महाराजपुरा थाना पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद उसे उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से सुरक्षित बरामद किया था। तब काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। लेकिन करीब दो महीने बाद फिर उसी तरह घर से चले जाने की घटना ने पुलिस और परिवार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बार-बार घर छोड़ने के पीछे की वजह जानना बेहद जरूरी है। इसलिए इस मामले में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परिवार के सदस्यों से भी विस्तृत बातचीत की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि कहीं किसी तरह का घरेलू तनाव, मानसिक दबाव या अन्य कारण तो नहीं है, जिसकी वजह से बच्ची बार-बार घर छोड़ने का फैसला कर रही है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किशोरों और बच्चों की मानसिक स्थिति पर समय रहते ध्यान देना कितना जरूरी है।</p>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:26:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में 11 वर्षीय बच्ची की हत्या मामले में जांच तेज, आरोपी से पूछताछ जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, घटनाक्रम और सबूतों के आधार पर मामले की कई पहलुओं से जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/investigation-intensified-in-the-murder-case-of-11-year-old/article-56863"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/delhi-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में 11 वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। घटना सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश है और लोग दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बच्ची अपने परिवार के साथ सड़क किनारे सो रही थी। परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला बताया जा रहा है और आर्थिक तंगी के कारण फुटपाथ पर रहने को मजबूर था। पुलिस के अनुसार घटना देर रात की है। बच्ची अपने माता-पिता और अन्य परिजनों के साथ सो रही थी, तभी वह अचानक लापता हो गई। परिजनों ने जब बच्ची को आसपास नहीं पाया तो उसकी तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें सक्रिय हो गईं। शुरुआती जांच में आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ फुटेज में एक संदिग्ध वाहन दिखाई दिया, जिसके बाद जांच उसी दिशा में आगे बढ़ाई गई। वाहन की पहचान होने के बाद पुलिस ने उसके रूट और मूवमेंट की जानकारी जुटाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिले। तकनीकी निगरानी और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के आधार पर संदिग्ध चालक की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों को वैज्ञानिक तरीके से परखा जा रहा है ताकि अदालत में मजबूत केस पेश किया जा सके। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि पीड़ित परिवार बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति में जीवन बिता रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार परिवार पहले किराए के मकान में रहता था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसे वह मकान छोड़ना पड़ा। इसके बाद परिवार फुटपाथ पर रहने लगा। घटना के बाद आसपास के लोगों ने भी गहरा दुख जताया है। कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे परिवारों के लिए सुरक्षित आश्रय और बेहतर सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर इस तरह के जोखिम कम किए जा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में फोरेंसिक जांच को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों और अन्य साक्ष्यों को विशेषज्ञों के पास भेजा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पुलिस आरोपी की गतिविधियों, उसके संपर्कों और उसके पिछले रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी पहले भी विभिन्न मामलों में कानून के दायरे में आ चुका है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पुराने मामलों से जुड़ी सभी जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी पेशे से कैब चालक था। इसी कारण पुलिस उन कंपनियों से भी जानकारी जुटा रही है जिनसे वह जुड़ा हुआ था। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि भर्ती और सत्यापन की प्रक्रिया में किन मानकों का पालन किया गया था। इस पहलू की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सार्वजनिक परिवहन और कैब सेवाओं का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं। सुरक्षा से जुड़ी किसी भी कमी की पहचान भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रभावी उपाय लागू करने की मांग की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे हालात बनने से पहले रोकथाम के उपाय भी उतने ही जरूरी हैं। विशेष रूप से उन बच्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और जिनकी सुरक्षा के संसाधन सीमित होते हैं। पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपुष्ट खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने की अपील की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस केवल पुष्टि किए गए तथ्यों को ही सार्वजनिक कर रही है। राजधानी में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, सामाजिक असमानता और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:19:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सक्ती में 4 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म की कोशिश, नाबालिग आरोपी पकड़ा गया</title>
                                    <description><![CDATA[परिजनों की शिकायत पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 14 वर्षीय आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/minor-accused-caught-trying-to-rape-4-year-old-girl/article-56213"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sakti-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में एक चार वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आने के बाद इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल है। घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए एक 14 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया। बाद में उसे किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे कोरबा स्थित बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। पीड़ित बच्ची और आरोपी नाबालिग के परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे। दोनों परिवारों के बीच सामाजिक परिचय होने के कारण आरोपी का पीड़ित परिवार के घर आना-जाना था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इसी परिचय का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर वारदात को अंजाम देने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की। चूंकि आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम है, इसलिए उसके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवारों को पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताई है और बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार, समाज और संस्थानों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा, जहां बच्चे सुरक्षित महसूस कर सकें और किसी भी तरह की असहज स्थिति की जानकारी बिना डर के अपने अभिभावकों को दे सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों से जुड़े अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान और निजी जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करती हैं कि बच्चा और उसका परिवार किसी अतिरिक्त मानसिक दबाव का सामना न करे। इसी कारण मामले से जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जातीं। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है। अभिभावकों को भी बच्चों के व्यवहार, दिनचर्या और उनके संपर्क में आने वाले लोगों पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षा संबंधी जानकारी देना और उन्हें ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में समझाना भी जरूरी माना जाता है। कई बार बच्चे डर या झिझक के कारण अपने साथ हुई असहज घटनाओं के बारे में तुरंत नहीं बता पाते, इसलिए परिवार का सहयोगात्मक रवैया बेहद महत्वपूर्ण होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटना के बाद सक्ती जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन को मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए, ताकि बच्चों और अभिभावकों दोनों को सुरक्षा संबंधी जानकारी मिल सके। कई लोगों ने यह भी कहा कि समाज में ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और पीड़ित परिवारों का समर्थन करने की जरूरत है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि मामले को लेकर किसी तरह की अफवाह न फैलाएं और पीड़ित परिवार की निजता का सम्मान करें। बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर कानून में कड़े प्रावधान हैं और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल आरोपी नाबालिग को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है और मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:56:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रेवाड़ी में पिता पर 10 वर्षीय बेटी से छेड़छाड़ का आरोप, जांच जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश से काम की तलाश में आए परिवार में दर्दनाक घटना, बच्ची ने मां को बताई आपबीती; पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/investigation-continues-on-father-accused-of-molesting-10-year-old/article-56152"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewari-news.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p style="text-align:justify;">रेवाड़ी जिले के खोल थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक प्रवासी परिवार के भीतर ही 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ का आरोप उसके ही पिता पर लगा है। मध्यप्रदेश से काम की तलाश में आए इस परिवार में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश जारी है। फिलहाल बच्ची को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। यह परिवार करीब एक हफ्ते पहले मध्यप्रदेश से हरियाणा के रेवाड़ी जिले में आया था। रोजगार की तलाश में आए इस परिवार ने खोल थाना क्षेत्र के एक गांव में अस्थायी रूप से डेरा डाला हुआ था। रोजमर्रा की तरह मंगलवार का दिन भी सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन इसी दिन घर के भीतर ही यह दर्दनाक घटना होने का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि उस दिन बच्ची की मां काम के लिए बाहर गई हुई थी और घर पर बच्ची अकेली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान बच्ची के पिता घर पहुंचे और उन्होंने कथित तौर पर अपनी ही बेटी के साथ गलत हरकत करने की कोशिश की। बच्ची ने जब इसका विरोध किया तो उसे धमकाने की भी बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बच्ची को डराने के लिए जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद वह और ज्यादा सहम गई और किसी को तुरंत कुछ नहीं बता पाई। हालांकि, इस पूरे मामले की पुष्टि पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी। शाम के समय जब बच्ची की मां काम से घर लौटी तो उसने देखा कि उसकी बेटी काफी डरी-सहमी और गुमसुम हालत में बैठी हुई थी। पहले तो बच्ची ने कुछ भी बताने से इनकार किया, लेकिन मां के लगातार पूछने पर वह टूट गई और रोते हुए पूरी घटना का खुलासा किया। बच्ची की बात सुनकर मां पूरी तरह से स्तब्ध रह गई और तुरंत उसे लेकर पुलिस के पास पहुंची। कुंड पुलिस चौकी में पहुंचकर महिला ने पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामला POCSO एक्ट के तहत दर्ज किया गया है, जो नाबालिगों से जुड़े अपराधों के लिए बेहद सख्त कानून है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शुरुआती जांच शुरू की और बच्ची को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची के साथ किस तरह की घटना हुई है। इधर, आरोपी पिता घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया है और आसपास के इलाकों में भी छानबीन की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं इस घटना के बाद गांव में भी दहशत और नाराजगी का माहौल है। स्थानीय लोग इस तरह की घटना को बेहद शर्मनाक बता रहे हैं और आरोपी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा है कि बच्ची की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उसे फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और काउंसलिंग भी कराई जा रही है ताकि वह मानसिक रूप से संभल सके। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी सबूतों और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।</p>
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</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:23:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ब्रिटेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का बड़ा ऐलान, TikTok से Instagram तक कई प्लेटफॉर्म होंगे प्रतिबंधित; बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को बताया प्राथमिकता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/social-media-ban-on-children-under-16-years-of-age/article-56071"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uk-social-media-ban.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ब्रिटेन ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि देश में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को ऑनलाइन खतरों, साइबर बुलिंग, हानिकारक कंटेंट और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उठाया जा रहा है। इस घोषणा के बाद ब्रिटेन उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जो बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानून बना रहे हैं। डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री स्टार्मर ने साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी व्यावसायिक हित से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का विरोध करती हैं तो सरकार पीछे हटने वाली नहीं है। उनके मुताबिक डिजिटल दुनिया ने बच्चों को नई संभावनाएं जरूर दी हैं, लेकिन इसके साथ कई गंभीर जोखिम भी सामने आए हैं। सरकार का मानना है कि लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन उत्पीड़न और एल्गोरिदम आधारित कंटेंट बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है। नई व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की न्यूनतम आयु 13 साल से बढ़ाकर 16 साल की जाएगी। इसका असर TikTok, Instagram, Facebook, Snapchat, X, YouTube, Reddit, Threads, Twitch और Kick जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चे अकाउंट न बना सकें। हालांकि WhatsApp और Signal जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को फिलहाल इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है क्योंकि इन्हें मुख्य रूप से निजी संचार का माध्यम माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार केवल आयु सीमा बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। अधिकारियों के अनुसार नए कानून को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। बच्चों द्वारा गलत उम्र बताकर अकाउंट बनाने की समस्या को देखते हुए एज-वेरीफिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके लिए फेस स्कैनिंग तकनीक, डिजिटल आईडी और अन्य सत्यापन उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इससे उम्र छिपाकर अकाउंट बनाने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। ब्रिटिश सरकार कुछ और सख्त कदमों पर भी विचार कर रही है। इनमें 16 और 17 साल के किशोरों के लिए रात के समय सोशल मीडिया उपयोग पर सीमाएं लगाने और कुछ एआई चैटबॉट्स तक पहुंच नियंत्रित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों की नींद, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है। इसी वजह से डिजिटल कर्फ्यू जैसे विकल्पों पर चर्चा हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों और किशोरों के बीच सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही अवसाद, चिंता, आत्मविश्वास की कमी और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी समस्याओं के मामले भी सामने आए हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि लंबे समय तक सोशल मीडिया पर रहने वाले बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अधिक देखी गई हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देश इस दिशा में नए कानून बना रहे हैं। ब्रिटेन का यह फैसला ऑस्ट्रेलिया के मॉडल से प्रेरित माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2024 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू कर दुनिया का पहला ऐसा देश बनने का दावा किया था। अब ब्रिटेन ने न केवल उसी दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि कुछ मामलों में उससे भी अधिक सख्त नियम लागू करने की तैयारी दिखाई है। कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नए नियमों पर काम चल रहा है। हालांकि इस फैसले को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन प्रतिबंध के साथ डिजिटल शिक्षा और जागरूकता पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि केवल प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की जानकारी देना भी जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:06 +0530</pubDate>
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