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                <title>Temple Trust - दैनिक जागरण</title>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया, बोले- SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद दूंगा हर सवाल का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीरामचरितमानस की चौपाई साझा कर तोड़ी चुप्पी, पत्र जारी कर कहा- मौन इसलिए हूं क्योंकि जांच पूरी होने का इंतजार है; ट्रस्ट और SIT की कार्रवाई जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/champat-rais-first-reaction-on-the-ram-temple-offering-controversy/article-58124"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रीरामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई साझा करते हुए संकेत दिया कि कठिन समय में धैर्य और सत्य की परीक्षा होती है। इसके साथ ही उन्होंने रामभक्तों के नाम एक हस्तलिखित पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी भी आरोप का जवाब नहीं देंगे और विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। चंपत राय ने अपने संदेश में लिखा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, लेकिन उन्होंने जांच की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए मौन रहने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद उससे जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक हो गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा और सच्चाई सभी के सामने होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1991 में उन्हें संगठन की ओर से अयोध्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और तब से लेकर अब तक का उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा संगठन और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया है। इधर, चढ़ावा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अब जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी अब राम मंदिर से जुड़े प्रमुख आयोजनों में हुए खर्च का भी परीक्षण कर रही है। विशेष रूप से 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह और नवंबर 2025 में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित बिल, भुगतान और वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। जांच एजेंसियां इन खर्चों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं ताकि वित्तीय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी प्रकार की अंतिम टिप्पणी या निष्कर्ष सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार चंपत राय का इस कथित मामले से कोई व्यक्तिगत या चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ चूक हुई होगी, जिसका फायदा कुछ लोगों ने उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्रस्ट में नए महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन दास ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। ट्रस्ट प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह जारी रहेगी और आवश्यक प्रशासनिक सुधार भी किए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड भी मिली है। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी चंपत राय को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। संगठन का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप जांच में सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसी कारण चंपत राय संगठन में अपनी वर्तमान जिम्मेदारी पर बने रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचेंगे योगी, चंपत राय को कार्यक्रम से दूर रहने का संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[चढ़ावा चोरी जांच तेज, सीएम योगी के दौरे से पहले प्रशासन की सख्ती बढ़ी, मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-champat-rai-will-reach-ayodhya-amid-ram-temple-offering/article-56342"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावा राशि की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद और जांच के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मंदिर प्रबंधन, दान राशि की सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामलला के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। हालांकि इस दौरे को लेकर जारी प्रोटोकॉल में एक ऐसा बिंदु सामने आया है जिसने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। बताया जा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को कार्यक्रम में शामिल न होने और अपने स्थान पर किसी प्रतिनिधि को नामित करने का सुझाव दिया गया है। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों में इस संबंध में जानकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को देने के लिए भी कहा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय मंदिर ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों में गिने जाते हैं। मंदिर निर्माण से लेकर प्रबंधन और वीआईपी कार्यक्रमों तक उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान उनकी अनुपस्थिति की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) चौथे दिन भी सुबह से ही राम मंदिर परिसर पहुंची और जांच प्रक्रिया जारी रखी। सूत्रों के मुताबिक टीम ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की और दान राशि की गिनती एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दान राशि की गिनती, उसके भंडारण और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई। इसी क्रम में मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र से भी पूछताछ किए जाने की खबर सामने आई है। अब तक की जांच में पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी किसी न किसी रूप में दान राशि की गिनती और उससे संबंधित कार्यों से जुड़े थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों की निशानदेही पर अब तक करीब दो करोड़ रुपये की बरामदगी भी की जा चुकी है। हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी गुरुवार को अयोध्या पहुंचे और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावा राशि से जुड़े मामले में बड़े लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी दावा किया था कि मंदिर में करोड़ों रुपये की दान राशि के गबन की आशंका है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। विवाद बढ़ने के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की जांच की मांग की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगे जाने की खबर सामने आई थी, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर हो गया। इसके बाद राज्य स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच एक और महत्वपूर्ण चर्चा राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर शुरू हुई है। बताया जा रहा है कि काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर में भी किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सीईओ बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं की निगरानी और अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पूरा मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक दलों की बयानबाजी, जांच एजेंसियों की सक्रियता और मंदिर प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सभी की नजरें इस दौरे पर टिकी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:27:15 +0530</pubDate>
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                <title>उज्जैन से उठी राम मंदिर ट्रस्ट भंग करने की मांग, पीएम को भेजा पत्र; CBI जांच की भी अपील</title>
                                    <description><![CDATA[अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर उठाए सवाल, कहा- आस्था से जुड़े मामले में पूरी पारदर्शिता जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-dissolution-of-ram-mandir-trust-raised-from-ujjain/article-56078"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-trust-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं की चर्चाओं के बीच उज्जैन से एक नई मांग उठी है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। संगठन ने पत्र में मामले की सीबीआई जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और ट्रस्ट के पुनर्गठन पर विचार करने की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है। महासंघ का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके संचालन से जुड़ा हर फैसला पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश शर्मा ने उज्जैन में मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि राम मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक परियोजना नहीं था, बल्कि यह देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और दशकों लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए लोगों ने बढ़-चढ़कर आर्थिक सहयोग किया था। कई श्रद्धालुओं ने नकद दान दिया तो कई लोगों ने सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं मंदिर को समर्पित कीं। ऐसे में यदि दान राशि के उपयोग या उसके प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार के सवाल सामने आते हैं तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि लोगों की आस्था से जुड़े मामले में हर पहलू स्पष्ट होना चाहिए ताकि किसी भी तरह की शंका की स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महेश शर्मा ने कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न माध्यमों से राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठे हैं। भले ही इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई हो, लेकिन जिस तरह की चर्चाएं सामने आई हैं, उससे श्रद्धालुओं के मन में जिज्ञासा और चिंता दोनों पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो जांच से सच्चाई सामने आएगी और यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समय-समय पर पारदर्शिता जरूरी होती है। राम मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर दान पेटियां स्थापित हैं, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करते हैं। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट को ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से भी बड़ी मात्रा में आर्थिक सहयोग प्राप्त होता है। ऐसे में दान राशि के प्रबंधन और उपयोग को लेकर लोगों की स्वाभाविक रुचि बनी रहती है। महासंघ का मानना है कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या संदेह सामने आता है तो उसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महासंघ के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने भी ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े परिवारों के प्रतिनिधियों को ट्रस्ट में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे परिवारों ने वर्षों तक आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और कई लोगों ने व्यक्तिगत स्तर पर बड़े त्याग किए। कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके सदस्य आंदोलन के दौरान विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावित हुए थे। ऐसे लोगों की भागीदारी से ट्रस्ट का स्वरूप और अधिक जनभावनाओं से जुड़ा हुआ दिखाई देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रूपेश मेहता ने कहा कि ट्रस्ट में शामिल किए जाने वाले लोगों का चयन उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर होना चाहिए। उनका कहना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत करने के लिए व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की मजबूती केवल उसके संसाधनों से नहीं बल्कि लोगों के विश्वास से तय होती है। इसलिए ट्रस्ट की संरचना और कार्यप्रणाली दोनों में पारदर्शिता दिखाई देना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में महासंघ ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को प्रमुखता से रखा है। संगठन का कहना है कि देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों में शामिल सीबीआई यदि मामले की जांच करती है तो निष्पक्षता को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं रहेगा। साथ ही जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, वे सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य होंगे। महासंघ ने यह भी कहा है कि यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो इससे ट्रस्ट की छवि और मजबूत होगी, जबकि अनियमितता मिलने की स्थिति में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे मामले को लेकर अभी तक राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच इस विषय पर चर्चा जारी है। कई लोग इसे पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का इंतजार किया जाना चाहिए। फिलहाल महासंघ की मांग के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:39:25 +0530</pubDate>
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