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                <title>CSERC - दैनिक जागरण</title>
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                <description>CSERC RSS Feed</description>
                
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                <title>बिजली गोदाम हादसे का 66.57 करोड़ का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने वितरण कंपनी की मांग खारिज की, कहा- प्रशासनिक लापरवाही और जोखिम प्रबंधन की कमी का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जा सकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/the-burden-of-rs-6657-crore-due-to-electricity-warehouse/article-58074"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cserc.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने आगजनी से हुए 66.57 करोड़ रुपये के नुकसान को बिजली टैरिफ में शामिल कर उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति मांगी थी। आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी वितरण कंपनी को प्रशासनिक लापरवाही, जोखिम प्रबंधन की कमी या संपत्तियों का पर्याप्त बीमा नहीं होने के कारण नुकसान हुआ है, तो उसका वित्तीय भार सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। आयोग के इस फैसले को राज्य के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला वित्तीय वर्ष 2026-27 के बिजली टैरिफ निर्धारण से जुड़ा है। इस दौरान CSPDCL ने आयोग के समक्ष कुल 658.32 करोड़ रुपये को असाधारण व्यय के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया था। इस राशि में अप्रैल 2024 में रायपुर के गुढ़ियारी स्थित क्षेत्रीय बिजली गोदाम में शॉर्ट सर्किट से लगी आग के कारण ट्रांसफार्मर, केबल और अन्य विद्युत उपकरणों को हुए नुकसान का दावा भी शामिल था। इसके अलावा भिलाई, रायगढ़ और कोरबा में हुई आगजनी की घटनाओं से हुए नुकसान को भी इसी दावे में जोड़ा गया था। कंपनी चाहती थी कि इन घटनाओं से हुए कुल 66.57 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई बिजली दरों में बढ़ोतरी के माध्यम से उपभोक्ताओं से की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान आयोग ने कंपनी से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। विशेष रूप से यह जानकारी मांगी गई कि जिन उपकरणों और सामग्रियों को आग से नुकसान पहुंचा, उनका बीमा कराया गया था या नहीं। आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि कंपनी पर्याप्त और संतोषजनक बीमा संबंधी प्रमाण उपलब्ध नहीं करा सकी। इसके बाद आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वितरण कंपनी की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनका समय पर बीमा कराना उसकी अपनी जिम्मेदारी है। यदि इस स्तर पर आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई है तो उसका आर्थिक परिणाम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">आयोग ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि बिजली उपभोक्ताओं से केवल उन्हीं खर्चों की वसूली की जा सकती है जो बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक और उचित हों। लेकिन प्रबंधन संबंधी कमियों, लापरवाही या जोखिम नियंत्रण में विफलता से उत्पन्न नुकसान को टैरिफ में जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में बिजली वितरण कंपनियों को अपनी परिसंपत्तियों की सुरक्षा, रखरखाव और जोखिम प्रबंधन को लेकर अधिक जिम्मेदार बनाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से रेलवे से जुड़े 591.75 करोड़ रुपये के एक अन्य दावे को भी टैरिफ में शामिल करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि आयोग ने इस मांग को भी फिलहाल स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि यह मामला अभी आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया में लंबित है और अंतिम देयता तय नहीं हुई है। जब तक संबंधित विवाद का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इस राशि को बिजली दरों में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसलिए इस दावे पर भी तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि नियामक आयोग का यह फैसला उपभोक्ता हितों की रक्षा के सिद्धांत को मजबूत करता है। बिजली वितरण कंपनियों को अपने संचालन के दौरान होने वाले जोखिमों का उचित प्रबंधन करना होता है। यदि किसी कारणवश संपत्तियों को नुकसान होता है तो उसके लिए बीमा और अन्य सुरक्षा उपाय पहले से सुनिश्चित किए जाने चाहिए। ऐसे मामलों में यदि पर्याप्त तैयारी नहीं की जाती, तो उसका खर्च सीधे उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्य में हर वर्ष बिजली टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान वितरण कंपनियां विभिन्न खर्चों को मान्यता देने का अनुरोध करती हैं। आयोग इन सभी दावों की तकनीकी, वित्तीय और कानूनी आधार पर समीक्षा करता है। इसके बाद ही यह तय किया जाता है कि कौन-सा व्यय बिजली दरों में शामिल किया जा सकता है और कौन-सा नहीं। इस बार भी आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और नियमों का परीक्षण करने के बाद ही यह निर्णय सुनाया।</p>
<p>आयोग के फैसले के बाद फिलहाल बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त 66.57 करोड़ रुपये का बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही रेलवे से जुड़े लंबित दावे को भी बिजली टैरिफ में शामिल नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से भविष्य में बिजली वितरण कंपनियां अपनी परिसंपत्तियों के बीमा, सुरक्षा व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन पर अधिक ध्यान देंगी। वहीं उपभोक्ताओं को भी यह भरोसा मिलेगा कि प्रशासनिक या प्रबंधन संबंधी कमियों का आर्थिक भार बिना उचित आधार के उन पर नहीं डाला जाएगा। फिलहाल इस फैसले को छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिजली बिल के लेट पेमेंट पर बड़ी राहत, अब जितने दिन देरी उतना ही लगेगा ब्याज</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के 66 लाख उपभोक्ताओं को फायदा, तय तारीख के बाद पूरे महीने का सरचार्ज नहीं देना होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-on-late-payment-of-electricity-bill-now-interest/article-57311"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-electricity-bill.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के करीब 66 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अब बिजली बिल की निर्धारित तारीख के बाद भुगतान करने पर पूरे महीने का लेट पेमेंट सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं से केवल उतने ही दिनों का ब्याज लिया जाएगा, जितने दिन तक उन्होंने बिल का भुगतान करने में देरी की होगी। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने इस नई व्यवस्था को उपभोक्ता हित में बड़ा फैसला बताया है और कहा है कि इससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि पहले की तुलना में राहत मिलेगी। पावर कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में इस नियम को लेकर जो जानकारी साझा की जा रही है, वह पूरी तरह सही नहीं है। कंपनी के अनुसार, 'रोजाना ब्याज' या 'दोहरा झटका' जैसी बातें भ्रामक हैं और इससे उपभोक्ताओं के बीच अनावश्यक भ्रम फैल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल लेट पेमेंट चार्ज की गणना को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाना है, ताकि जितनी देरी हो, उसी अनुपात में शुल्क लिया जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">कंपनी के मुताबिक यह बदलाव राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के नए नियमों के तहत लागू किया गया है। आयोग ने इस व्यवस्था को इसलिए मंजूरी दी है ताकि उपभोक्ताओं को छोटी अवधि की देरी पर अनावश्यक रूप से पूरे महीने का सरचार्ज न चुकाना पड़े। पहले की व्यवस्था में यदि कोई उपभोक्ता केवल एक या दो दिन भी बिल जमा करने में देर कर देता था, तब भी उससे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाता था। इससे कई उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था। नई व्यवस्था में अब लेट पेमेंट चार्ज प्रतिदिन के आधार पर लगाया जाएगा। इसके लिए 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर तय की गई है। यानी यदि कोई उपभोक्ता केवल एक दिन देर से बिजली बिल जमा करता है, तो उसे सिर्फ 0.04 प्रतिशत अतिरिक्त राशि ही देनी होगी। इसी तरह यदि भुगतान में पांच दिन की देरी होती है तो पांच दिन के हिसाब से शुल्क लगेगा। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन उपभोक्ताओं को मिलेगा जो किसी कारणवश कुछ दिनों की देरी से बिल जमा कर पाते हैं। पावर कंपनी ने उदाहरण देकर भी नई व्यवस्था को समझाया है। यदि कोई उपभोक्ता पूरे 30 दिन बाद बिजली बिल का भुगतान करता है, तब भी उसे कुल 1.2 प्रतिशत का ही अधिभार देना होगा। पहले यही उपभोक्ता पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत सरचार्ज चुकाता था। यानी अधिकतम स्थिति में भी नई व्यवस्था के तहत पहले की तुलना में कम भुगतान करना होगा। इस तरह देखा जाए तो नई व्यवस्था केवल कम दिनों की देरी वाले उपभोक्ताओं को ही नहीं बल्कि पूरे महीने की देरी करने वालों को भी राहत देती है। अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव का मकसद उपभोक्ताओं को दंडित करना नहीं बल्कि एक व्यावहारिक और पारदर्शी प्रणाली लागू करना है। अब उपभोक्ता जितने दिन की देरी करेंगे, केवल उतने दिन का ही अधिभार देना होगा। इससे बिल भुगतान प्रणाली अधिक निष्पक्ष बनेगी और लोगों में यह विश्वास भी बढ़ेगा कि उनसे केवल वास्तविक देरी के अनुसार ही शुल्क लिया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था में ब्याज दर बढ़ाई नहीं गई है। बल्कि पुराने नियम की तुलना में कुल अधिभार कम हो गया है। इसलिए इसे अतिरिक्त बोझ बताना पूरी तरह गलत है। कंपनी ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और अपुष्ट खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि अब हर दिन अलग से भारी ब्याज देना पड़ेगा, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। नई व्यवस्था में दैनिक गणना केवल शुल्क निर्धारण का तरीका है, न कि अतिरिक्त दंड लगाने की प्रक्रिया। बिजली कंपनी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस नियम को सही संदर्भ में समझें और केवल प्रमाणित जानकारी ही साझा करें। अधिकारियों का कहना है कि गलत सूचनाओं से उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और अनावश्यक चिंता बढ़ती है। इसलिए किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता देना जरूरी है। यह बदलाव उपभोक्ता हित में उठाया गया कदम है। उनके अनुसार पहले की व्यवस्था में एक दिन की देरी और पूरे महीने की देरी पर लगभग समान अधिभार लगना कई बार अनुचित माना जाता था। नई प्रणाली में देरी की अवधि के अनुसार शुल्क तय होने से बिल भुगतान व्यवस्था अधिक संतुलित और उपभोक्ता अनुकूल बनेगी। इससे समय पर भुगतान करने की आदत को भी बढ़ावा मिलेगा और जिन लोगों से मामूली देरी हो जाती है, उन्हें भी आर्थिक राहत मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:54:01 +0530</pubDate>
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                <title>छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी, 1 जुलाई से उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा भार</title>
                                    <description><![CDATA[घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट बढ़ी दरें, कांग्रेस ने विरोध में प्रदेशभर में बिजली दफ्तरों के घेराव का ऐलान किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/increase-in-electricity-rates-in-chhattisgarh-burden-on-consumers-will/article-56099"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-electricity-tariff.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं को आगामी महीने से बढ़े हुए बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है। आयोग की ओर से जारी नए टैरिफ के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी होगी, जबकि व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में लागू होंगी। बिजली दरों में हुई इस बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमाने लगा है और कांग्रेस ने इसके विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। आयोग के फैसले के अनुसार कृषि पंपों की बिजली दरों में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शनों को ऊर्जा प्रभार में मिलने वाली छूट 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। आयोग का कहना है कि इससे किसानों पर बढ़ी हुई दरों का प्रभाव कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। वहीं बिजली वितरण कंपनी की ओर से प्रस्तावित 24 प्रतिशत दर वृद्धि को आयोग ने अस्वीकार कर दिया और औसतन 6.23 प्रतिशत वृद्धि को ही मंजूरी दी है। अधिकारियों के मुताबिक बिजली वितरण लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण टैरिफ संशोधन आवश्यक हो गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बिजली कंपनी को एक यूनिट बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में औसतन 7.13 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि वर्तमान दरों के अनुसार उसे प्रति यूनिट केवल 6.71 रुपए की आय हो रही है। इसी अंतर को कम करने के लिए टैरिफ में संशोधन किया गया है। साथ ही हाई वोल्टेज ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए नया टैरिफ 6.42 रुपए प्रति kVAh निर्धारित किया गया है। माना जा रहा है कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सचिव सूर्य प्रकाश शुक्ला ने कहा कि औसतन 40 से 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन सभी श्रेणियों में समान बढ़ोतरी नहीं हुई है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निचले स्लैब में 30 पैसे और ऊपरी स्लैब में 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रहेगा क्योंकि बड़ी संख्या में लोग बिजली बिल हाफ योजना का लाभ उठा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार जिन उपभोक्ताओं की मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट तक बिजली बिल में छूट मिलती रहेगी। राज्य के लगभग 70 से 75 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता इसी श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उनके बिजली बिल पर बढ़ी हुई दरों का प्रभाव बहुत अधिक नहीं पड़ेगा। सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना भी इस वर्ग के उपभोक्ताओं को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी कारण निम्न और मध्यम आय वर्ग पर अतिरिक्त बोझ सीमित रहने की बात कही जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सौर ऊर्जा का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को भी बढ़ी हुई दरों से काफी हद तक राहत मिल सकती है। अधिकारियों ने बताया कि 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले कई उपभोक्ताओं ने अपने घरों में रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए हैं। इससे उनकी ग्रिड आधारित बिजली खपत कम हो जाती है और वे विभिन्न रियायतों का लाभ लेने के पात्र बने रहते हैं। पीएम सूर्यघर योजना के तहत सौर ऊर्जा अपनाने वालों पर नई दरों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है। नई व्यवस्था में आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी विशेष राहत दी गई है। बस्तर और सरगुजा संभाग के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को अब कमर्शियल श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में रखा जाएगा। इससे इन संस्थानों के बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इसके अलावा लेट पेमेंट सरचार्ज को लेकर भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब यह शुल्क पूरे महीने के बजाय वास्तविक देरी के दिनों के आधार पर लगाया जाएगा। साथ ही 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले घरेलू और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक अवधि में बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त छूट मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बिजली दरों में वृद्धि को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि 17 जून को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में बिजली कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। इसके बाद 18 जून को पार्टी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार के खिलाफ अपना पक्ष रखेगी। कांग्रेस का आरोप है कि महंगाई के दौर में बिजली दरें बढ़ाने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। वहीं सरकार और आयोग का कहना है कि अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए राहत योजनाएं जारी रहेंगी और बढ़ोतरी का असर सीमित रहेगा। अब 1 जुलाई से नई दरें लागू होने के बाद यह साफ हो सकेगा कि आम उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर इसका वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:56:15 +0530</pubDate>
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