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                <title>Dhamtari News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>DMF घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, छापों में एक करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के पांच जिलों में कार्रवाई, कारोबारियों और कांग्रेस नेता से जुड़े ठिकानों की जांच; दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी मिले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/eds-big-action-in-dmf-scam-more-than-rs-1/article-56211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-dmf-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास (DMF) घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। कथित 575 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत एजेंसी ने राज्य के पांच जिलों में एक साथ छापेमारी की, जिसमें एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी ने रायपुर, धमतरी, दुर्ग, कोरबा और अंबिकापुर में कई ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है। ईडी की टीमों ने कुल नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें चार आवासीय परिसरों के साथ पांच व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल थे। जांच के दौरान सबसे अधिक नकदी कोरबा और धमतरी जिले से बरामद होने की बात कही जा रही है। हालांकि एजेंसी की ओर से अब तक जब्त राशि का आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि सभी दस्तावेजों और जब्त सामग्री के सत्यापन के बाद ईडी इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छापेमारी जिन लोगों और संस्थानों से जुड़ी बताई जा रही है, उनमें कई कारोबारी और सप्लाई से जुड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक कृषि और अन्य विभागों में आपूर्ति का काम करने वाले कुछ कारोबारियों के परिसरों की जांच की गई। इनमें कांग्रेस से जुड़े एक पूर्व जिला पदाधिकारी का नाम भी चर्चा में है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए जारी धनराशि का उपयोग किस तरह किया गया और कहीं उसमें वित्तीय अनियमितताएं तो नहीं हुईं। तलाशी के दौरान ईडी को कई महत्वपूर्ण बैंक लेनदेन रिकॉर्ड, अनुबंध संबंधी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्राप्त हुआ है। जांच अधिकारी अब इन रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों से कथित लेनदेन, भुगतान और फंड के प्रवाह से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। एजेंसी का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि किन माध्यमों से खर्च हुई और उसमें किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच एजेंसियों को संदेह है कि जिला खनिज न्यास फंड से जारी रकम का एक हिस्सा ठेकेदारों, सप्लायरों और कथित बिचौलियों के माध्यम से डायवर्ट किया गया। आरोप यह भी हैं कि विभिन्न परियोजनाओं और सरकारी कार्यों के टेंडर आवंटन में नियमों की अनदेखी की गई और कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसी आधार पर अब मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार कुछ मामलों में ठेकों और परियोजनाओं की मंजूरी के बदले कमीशन लिए जाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या सरकारी धन के उपयोग में ऐसी व्यवस्थाएं बनाई गई थीं जिनसे चुनिंदा लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कई और लोगों से पूछताछ की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहला अवसर नहीं है जब DMF घोटाला चर्चा में आया हो। इससे पहले भी इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और कथित बिचौलियों के नाम जांच में सामने आ चुके हैं। पिछले दो वर्षों में ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने इस मामले में कई दौर की कार्रवाई की है। विभिन्न स्थानों पर छापेमारी के साथ करोड़ों रुपये की संपत्तियां भी अटैच की जा चुकी हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क काफी व्यापक है, जिसकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। जिला खनिज न्यास फंड का गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए किया गया था। इस फंड का उपयोग सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ जिलों में फंड के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि कई टेंडरों में नियमों का पालन नहीं किया गया और सरकारी राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से पहले जारी की गई जानकारी में भी यह कहा गया था कि जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया और कार्य आवंटन में आर्थिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए और बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू सामने आने पर ईडी ने जांच शुरू की। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित घोटाले से जुड़े धन का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया और इसके वास्तविक लाभार्थी कौन थे। ईडी की कार्रवाई के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद आगे और कार्रवाई की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:55:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>धमतरी में ठेकेदार दीपेश गांधी के घर ED की दबिश, भारतमाला घोटाले से जुड़ रहे तार</title>
                                    <description><![CDATA[चार घंटे से ज्यादा समय तक चली जांच, परिजनों के मोबाइल जब्त; दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में जुटी प्रवर्तन निदेशालय की टीम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a31037d5e4c2/article-56088"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ed-raid-dhamtari.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने इलाके में हलचल बढ़ा दी। ईडी की टीम ने स्थानीय ठेकेदार दीपेश गांधी के आमापारा स्थित आवास पर दबिश देकर जांच शुरू की। सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई कई घंटों तक जारी रही। अधिकारियों के साथ सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके में लोगों की भीड़ जुटी रही और दिनभर इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना में सामने आए कथित जमीन अधिग्रहण घोटाले या उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के मामलों से संबंधित हो सकती है। हालांकि ईडी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी मामले की पुष्टि नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि ईडी के अधिकारी दो वाहनों में धमतरी पहुंचे थे। टीम के साथ सुरक्षा बलों के जवान भी मौजूद थे। अधिकारियों ने पहुंचते ही घर के भीतर जांच शुरू कर दी। सूत्रों के अनुसार छह से अधिक अधिकारी दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय कागजातों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद परिजनों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिए गए हैं ताकि जांच प्रभावित न हो और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सके। अधिकारियों ने कई दस्तावेजों की छानबीन की और कुछ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अपने साथ ले जाने की जानकारी सामने आ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दीपेश गांधी पेशे से ठेकेदार हैं और सरकारी व निजी परियोजनाओं में काम करने वाले बड़े ठेकेदारों के साथ जुड़े रहे हैं। धमतरी और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न निर्माण कार्यों में उनकी भागीदारी बताई जाती है। ऐसे में ईडी की इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित घोटाले की चर्चा को तेज कर दिया है। इससे पहले भी ईडी ने इसी मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। कुरूद क्षेत्र में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर भी जांच एजेंसी पहुंची थी। इसके अलावा राइस मिलर रौशन चंद्राकर के यहां भी ईडी ने कार्रवाई की थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को जांच एजेंसियों द्वारा घोटाले की परतें खोलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच में दावा किया गया कि जमीन के मूल रिकॉर्ड में बदलाव कर और उसे छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया गया। अधिकारियों के अनुसार कुछ स्थानों पर जमीन को दर्जनों हिस्सों में बांटकर नए नाम जोड़े गए और फिर उन्हीं नामों के आधार पर अधिक मुआवजे का दावा पेश किया गया। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्व विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि जिस जमीन का मुआवजा लगभग 29.5 करोड़ रुपये होना चाहिए था, उसे बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचाने की कोशिश की गई। आरोप है कि कुछ राजस्व अधिकारियों, कर्मचारियों और भू-माफिया के गठजोड़ ने बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर पूरे खेल को अंजाम दिया। अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाने की बात सामने आई थी। जांच रिपोर्ट में लगभग 80 नए नाम जोड़े जाने और कई खसरों को छोटे हिस्सों में बांटने का उल्लेख किया गया था। इस मामले में पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था। इससे पहले जगदलपुर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त निर्भय कुमार साहू के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं, जिसकी वजह से करोड़ों रुपये के भुगतान पर सवाल खड़े हुए। भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अवसंरचना योजनाओं में से एक मानी जाती है। इस परियोजना का उद्देश्य देशभर में आर्थिक कॉरिडोर विकसित कर माल परिवहन को तेज और सुगम बनाना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर भी इसी परियोजना का हिस्सा है। ऐसे में इस परियोजना से जुड़े किसी भी कथित घोटाले को गंभीरता से देखा जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:23 +0530</pubDate>
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