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                <title>Padma Awards - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Padma Awards RSS Feed</description>
                
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                <title>धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा का खुलासा, हेमा मालिनी बोलीं- परिवार हमेशा साथ रहे, यही उनकी सबसे बड़ी चाहत थी</title>
                                    <description><![CDATA[दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र को याद करते हुए हेमा मालिनी ने साझा की भावुक बातें, सनी-बॉबी की तारीफ की, फर्जी निधन की खबरों पर जताई नाराजगी और पद्म विभूषण सम्मान स्वीकार करने के पल को बताया जीवन का सबसे भावुक क्षण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/dharmendras-last-wish-revealed-hema-malini-said-her-biggest/article-58085"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/diljit-dosanjh-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को दुनिया से विदा हुए कुछ महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनकी यादें आज भी परिवार और करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में जिंदा हैं। हाल ही में अभिनेत्री और उनकी पत्नी हेमा मालिनी ने एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र की आखिरी इच्छा का जिक्र करते हुए कई भावुक बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जीवन के अंतिम दिनों में धर्मेंद्र ने परिवार को एकजुट रखने की बात कही थी और यही उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी। हेमा मालिनी ने बताया कि धर्मेंद्र ने उनसे साफ शब्दों में कहा था कि परिवार के सभी सदस्य हमेशा एक-दूसरे के साथ जुड़े रहें। उन्होंने कहा था कि रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत साथ रहने में है और परिवार को हर परिस्थिति में एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए। हेमा के मुताबिक, धर्मेंद्र का मानना था कि जीवन में चाहे कितनी भी व्यस्तता क्यों न हो, परिवार के लिए समय निकालना सबसे जरूरी है। बातचीत के दौरान हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के बड़े बेटे सनी देओल और छोटे बेटे बॉबी देओल की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों बेहद अच्छे इंसान हैं और पूरे परिवार के बीच हमेशा अपनापन बना रहता है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार दिखावे या प्रचार पर भरोसा नहीं करता। परिवार के सदस्य एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं, लेकिन निजी रिश्तों को सार्वजनिक करने में विश्वास नहीं रखते। यही वजह है कि लोग भले ही उन्हें साथ कम देखते हों, लेकिन परिवार के भीतर मजबूत रिश्ता हमेशा बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हेमा मालिनी ने इस दौरान उन फर्जी खबरों पर भी नाराजगी जताई, जो धर्मेंद्र के निधन से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के बारे में इस तरह की झूठी खबर फैलाना बेहद दुखद होता है। ऐसे समय में परिवार मानसिक रूप से काफी परेशान हो जाता है। उन्होंने कहा कि जब ऐसी अफवाहें फैली थीं, तब पूरा परिवार बेहद चिंतित था। बाद में जब वास्तविक रूप से धर्मेंद्र का निधन हुआ तो वह क्षण उनके लिए जीवन का सबसे कठिन समय बन गया। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र अपने प्रशंसकों से बेहद लगाव रखते थे। यदि उन्हें पता चलता कि कोई प्रशंसक घर के बाहर उनसे मिलने आया है तो वह बिना देर किए उसे अंदर बुला लेते थे। वह लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाते, बातें करते और उन्हें सम्मान देते थे। यही सादगी और अपनापन उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाता था। हेमा मालिनी ने यह भी कहा कि धर्मेंद्र अपने बच्चों और पोते-पोतियों से बेहद प्यार करते थे। परिवार के साथ समय बिताना उन्हें सबसे ज्यादा पसंद था। उनके जाने के बाद बच्चे और पूरा परिवार उन्हें हर दिन याद करता है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र केवल एक सफल अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार पिता, दयालु पति और स्नेही दादा भी थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुछ समय पहले धर्मेंद्र को मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में हेमा मालिनी ने परिवार की ओर से यह सम्मान स्वीकार किया। इस अवसर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मंच पर जाते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे धर्मेंद्र उनके साथ मौजूद हों और उनका हाथ थामकर उन्हें सम्मान ग्रहण करने के लिए आगे बढ़ा रहे हों। उन्होंने इस पल को अपनी जिंदगी का सबसे भावुक अनुभव बताया। सम्मान ग्रहण करने के बाद हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया पर भी अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं। उन्होंने लिखा था कि धर्मेंद्र एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने हर रिश्ते को पूरी ईमानदारी से निभाया। वह प्यार करने वाले पति, स्नेही पिता, आदर्श दादा, भरोसेमंद दोस्त और नेकदिल इंसान थे। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र की यादें उनके जीवन की सबसे अनमोल पूंजी हैं और वे उन्हें हमेशा अपने दिल में संजोकर रखेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धर्मेंद्र की बेटी ईशा देओल ने भी इस अवसर पर भावुक संदेश साझा किया था। उन्होंने लिखा कि काश उनके पिता स्वयं यह सम्मान लेने के लिए मंच पर मौजूद होते। उन्होंने कहा कि पूरा परिवार इस सम्मान पर गर्व महसूस करता है, लेकिन पिता की कमी हर पल महसूस होती है। ईशा ने लिखा कि यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं बल्कि धर्मेंद्र के दशकों लंबे योगदान और उनके व्यक्तित्व का सम्मान है। धर्मेंद्र भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने अभिनय के साथ अपनी सादगी, विनम्रता और इंसानियत से लोगों का दिल जीता। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में रोमांटिक, एक्शन, पारिवारिक और सामाजिक विषयों पर आधारित अनेक फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। उनकी लोकप्रियता कई पीढ़ियों तक कायम रही और आज भी उनकी फिल्में दर्शकों के बीच उतनी ही पसंद की जाती हैं। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित जोड़ियों में गिनी जाती है। दोनों ने कई सफल फिल्मों में साथ काम किया और बाद में जीवनसाथी बने। उनके परिवार में अलग-अलग रिश्तों के बावजूद आपसी सम्मान और अपनापन हमेशा देखने को मिला। यही कारण है कि धर्मेंद्र की अंतिम इच्छा भी परिवार को एकजुट रखने की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:41:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पद्म विभूषण तीजन बाई नहीं रहीं, पंडवानी की अमर आवाज हमेशा गूंजती रहेगी</title>
                                    <description><![CDATA[70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस, महाभारत की लोकगाथाओं को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोक कलाकार के निधन से कला जगत में शोक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/padma-vibhushan-tijan-bai-is-no-more-pandwanis-immortal-voice/article-57904"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/teejan-bai-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली देश की महान लोक कलाकार, पद्म विभूषण तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। 70 वर्षीय तीजन बाई ने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रात करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और उनका इलाज जारी था। उनके निधन की खबर सामने आते ही कला, संस्कृति और साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देशभर के कलाकारों, राजनीतिक नेताओं और उनके प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। गांव और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी प्रिय लोक कलाकार को नम आंखों से विदाई दी। यहीं पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नाना से मिली महाभारत सुनाने की प्रेरणा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव लोककला और महाभारत की कथाओं की ओर था। उनके नाना उन्हें महाभारत की कहानियां सुनाया करते थे। इन्हीं कथाओं ने उनके मन में पंडवानी गायन के प्रति गहरी रुचि पैदा की। उन्होंने बचपन में ही इन कथाओं को याद करना शुरू कर दिया और बाद में अपनी विशिष्ट शैली में मंच पर प्रस्तुत करने लगीं।</p>
<p style="text-align:justify;">महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच पर पंडवानी का गायन किया। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई ने पंडवानी जैसी पारंपरिक लोककला को केवल गांवों और मेलों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने भारत सहित दुनिया के कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां देकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे केवल गाती नहीं थीं, बल्कि महाभारत के पात्रों को अपने अभिनय, भाव-भंगिमा और आवाज के उतार-चढ़ाव से जीवंत कर देती थीं। दर्शक स्वयं को महाभारत के घटनाक्रम का हिस्सा महसूस करने लगते थे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>संघर्षों से भरा रहा जीवन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज भले ही तीजन बाई को विश्वस्तरीय कलाकार के रूप में जाना जाता हो, लेकिन उनकी यात्रा आसान नहीं रही। सामाजिक परंपराओं और रूढ़ियों के कारण शुरुआती दौर में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उस समय महिलाओं का पंडवानी की 'कापालिक शैली' में मंच पर प्रस्तुति देना सामान्य नहीं माना जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने तमाम विरोधों और सामाजिक चुनौतियों का डटकर सामना किया। अपनी प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि कला की कोई सीमा नहीं होती। उनके संघर्ष ने आने वाली पीढ़ियों की महिला कलाकारों के लिए भी नए रास्ते खोले।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें समय-समय पर कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि सम्मान और अनेक सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा भी सम्मानित किया गया। उनके सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं थे, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का गौरव भी बने।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की लोककला को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। उनका निधन कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपने जीवन को लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किया। पंडवानी के माध्यम से उन्होंने राज्य का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ाया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का जीवन इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, मेहनत और प्रतिभा के बल पर कोई भी कलाकार वैश्विक पहचान हासिल कर सकता है। उन्होंने न केवल लोककला को जीवित रखा, बल्कि उसे आधुनिक मंचों तक भी पहुंचाया। आज देश-विदेश के अनेक युवा कलाकार उनकी शैली से प्रेरणा लेकर पंडवानी और लोककला के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी आवाज, अभिनय और महाभारत के पात्रों को जीवंत करने की कला हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगी। उनका योगदान भारतीय लोक संस्कृति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि भारतीय लोक परंपरा के एक युग का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन के कई दशक लोककला को समर्पित किए और पंडवानी को विश्व मंच पर स्थापित किया। उनके जाने से जो रिक्तता बनी है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा। हालांकि उनकी प्रस्तुतियां, उनके गीत और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी। भारतीय लोक संगीत और पंडवानी की दुनिया में उनका नाम सदैव सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जगदीशपुर किले में होगी कैबिनेट बैठक, राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी में सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संस्कृति विभाग को दिए निर्देश, कलाकारों और पद्म पुरस्कार विजेताओं के लिए नई योजनाओं पर भी जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cabinet-meeting-will-be-held-in-jagdishpur-fort-government-is/article-56106"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jagdishpur-fort.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के निकट स्थित ऐतिहासिक जगदीशपुर किले को देशभर में नई पहचान दिलाने के लिए वहां जल्द ही राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस पहल से न केवल क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को नई पहचान मिलेगी, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जगदीशपुर के ऐतिहासिक महत्व को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों को केवल स्थानीय पहचान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थापित करने के प्रयास होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जगदीशपुर किले से जुड़े इतिहास, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने के लिए विशेष योजना तैयार की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जगदीशपुर में प्रस्तावित कैबिनेट बैठक केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि इसके माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का संदेश भी दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक के आयोजन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जाएं और इस अवसर को प्रदेश की विरासत के प्रचार-प्रसार के रूप में उपयोग किया जाए। गौरतलब है कि कुछ समय पहले इस्लाम नगर का नाम बदलकर जगदीशपुर किया गया था। इसके बाद से ही राज्य सरकार इस क्षेत्र को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है। माना जा रहा है कि कैबिनेट बैठक के आयोजन से जगदीशपुर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन सकता है। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने बैठक में संस्कृति संरक्षण से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कलाकारों, साहित्यकारों, समाजसेवियों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि पद्म पुरस्कारों के लिए भेजे जाने वाले प्रस्तावों में विभाग भी सक्रिय भूमिका निभाए और योग्य प्रतिभाओं की पहचान कर अपनी अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजे। डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश प्रतिभाओं की भूमि है और यहां के अनेक कलाकारों ने राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। ऐसे कलाकारों की सूची तैयार कर उन्हें प्रदेश में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी और प्रदेश की कला एवं संस्कृति को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। बैठक में पद्म पुरस्कार विजेताओं को आर्थिक सहयोग प्रदान करने के लिए एक स्थायी योजना तैयार करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन लोगों ने अपने कार्यों के माध्यम से प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है, उनके सम्मान और सहयोग के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इससे प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मध्य प्रदेश में जन्मे या यहां से जुड़े ऐसे कलाकारों, गायकों और सांस्कृतिक हस्तियों का डाटा तैयार किया जाए जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाई है। उन्हें समय-समय पर प्रदेश में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल किया जाए ताकि स्थानीय कलाकारों को भी उनसे सीखने और प्रेरणा लेने का अवसर मिल सके। बैठक में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कई ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल हैं जिनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत की जा सकती है। यदि इन स्थलों का व्यवस्थित विकास किया जाए तो पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि संस्कृति और पर्यटन विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि प्रदेश की विरासत को व्यापक पहचान मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में मुख्य सचिव सहित संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विभाग की विभिन्न योजनाओं और प्रस्तावों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। इस दौरान जगदीशपुर में कैबिनेट बैठक आयोजित करने की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करना और उन्हें नई पहचान दिलाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि जगदीशपुर में कैबिनेट बैठक आयोजित होती है तो इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही प्रदेश सरकार की सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत संवर्धन की नीति को भी मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:29:56 +0530</pubDate>
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