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                <title>EknathShinde - दैनिक जागरण</title>
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                <title>शिवसेना (UBT) को संसद कार्यालय खाली करना पड़ सकता है, सांसद संख्या 5 से नीचे पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने के बाद UBT खेमे में संकट, स्पीकर से मुलाकात करेंगे दो सांसद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a3bc3c5e6539/article-56845"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/_shiv-sena-ubt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के लिए संसद भवन में स्थिति लगातार मुश्किल होती जा रही है। पार्टी में हालिया टूट के बाद अब उसके लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की संख्या घटकर 5 से नीचे पहुंच गई है। संसद भवन के नियमों के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल को संसद परिसर में ऑफिस आवंटित करने के लिए कम से कम 5 सांसदों का होना जरूरी होता है। ऐसे में अब यह संभावना जताई जा रही है कि शिवसेना (UBT) को अपना मौजूदा संसद कार्यालय खाली करना पड़ सकता है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा यदि 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय को औपचारिक मान्यता दी जाती है, तो उद्धव ठाकरे गुट के पास केवल 4 सांसद रह जाएंगे। इनमें 3 लोकसभा और 1 राज्यसभा सांसद शामिल हैं। ऐसी स्थिति में संसद भवन में पार्टी को आवंटित ऑफिस (128A) पर भी संकट खड़ा हो सकता है। यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच पार्टी के दो लोकसभा सांसद अनिल देसाई और अरविंद सावंत बुधवार शाम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में पार्टी की मौजूदा स्थिति, सांसदों की संख्या और संसद कार्यालय के आवंटन को लेकर चर्चा हो सकती है। यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे आगे की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम 22 जून को शुरू हुए राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है, जब शिवसेना (UBT) के भीतर बड़ी बगावत सामने आई थी। लोकसभा के कुल 9 सांसदों में से 6 सांसदों ने पार्टी छोड़कर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का फैसला किया था। इसके बाद से ही पार्टी के भीतर अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। शिंदे गुट ने इस घटनाक्रम को लेकर दावा किया कि यह कदम बालासाहेब ठाकरे के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है। मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिंदे ने कहा था कि पहले 2022 में 40 विधायकों के साथ बदलाव हुआ था और अब 6 सांसदों के शामिल होने से उनकी स्थिति और मजबूत हुई है। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट इस टूट को संगठनात्मक संकट के रूप में देख रहा है। पिछले कुछ दिनों में पार्टी बैठकों में कई सांसदों की अनुपस्थिति ने भी अटकलों को और हवा दी थी। 14 जून को हुई संसदीय दल की बैठक में 4 सांसदों के न पहुंचने के बाद से ही अंदरूनी असंतोष की चर्चा तेज हो गई थी। पिछले कुछ महीनों में विपक्षी खेमे में भी इस तरह की राजनीतिक हलचल देखी गई है। लगभग 27 सांसदों ने विभिन्न दलों से बगावत कर या तो समर्थन बदला या NDA खेमे के साथ चले गए हैं। इनमें AAP और TMC के सांसदों की संख्या भी शामिल बताई जा रही है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल देखी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच अन्य राजनीतिक दलों की ओर से भी बयानबाजी शुरू हो गई है। कुछ नेताओं का दावा है कि आने वाले समय में अन्य विपक्षी दलों में भी टूट देखने को मिल सकती है। हालांकि कई नेता इन दावों को खारिज कर रहे हैं और अपनी पार्टियों की एकजुटता का दावा कर रहे हैं। शिवसेना (UBT) के लिए मौजूदा स्थिति केवल संसद कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी की राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक शक्ति पर भी असर डाल रही है। सांसद संख्या में गिरावट के बाद अब पार्टी को संसदीय स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:47:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>उद्धव गुट में और टूट के दावे तेज, शिवसेना नेता बोले- सातवें सांसद ने भी की थी शिंदे गुट में जाने की कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ी। शिवसेना नेता रामदास कदम ने दावा किया कि एक और सांसद भी आने को तैयार थे, लेकिन मंत्री पद को लेकर सहमति नहीं बन सकी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/claims-of-further-split-in-uddhav-faction-intensified-shiv-sena/article-56720"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/udhav.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद सियासी सरगर्मी और तेज हो गई है। इस बीच शिवसेना नेता रामदास कदम ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट का एक सातवां सांसद भी शिंदे खेमे में शामिल होना चाहता था। उनके अनुसार संबंधित सांसद ने पार्टी बदलने के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे, लेकिन केंद्रीय मंत्री पद की मांग पूरी नहीं होने के कारण अंतिम समय में फैसला बदल दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदास कदम ने सांसद का नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि वह सांसद उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी हैं और अक्सर उनके बगल में बैठते हैं। कदम के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सोमवार को शिवसेना (UBT) के नौ में से छह लोकसभा सांसद आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इसके साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई है, जिससे संसद में उनकी राजनीतिक ताकत और मजबूत हुई है।</p>
<h2>सांसदों की बगावत से बढ़ी चुनौती</h2>
<p class="isSelectedEnd">मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने छह सांसदों के शामिल होने को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक लड़ाई बालासाहेब ठाकरे के विचारों और मूल शिवसेना की पहचान को बनाए रखने के लिए है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा सांसदों के इस कदम से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पर दबाव बढ़ सकता है। वर्ष 2022 में पार्टी में हुई बड़ी टूट के बाद यह दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है।</p>
<h2>विधायकों को लेकर भी अटकलें</h2>
<p class="isSelectedEnd">सांसदों के बाद अब विधायकों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोमवार को विधानसभा के मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में तीन विधायक और एक विधान परिषद सदस्य शामिल नहीं हुए। इसके बाद संभावित राजनीतिक बदलावों को लेकर कयास लगाए जाने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि अनुपस्थित विधायकों में शामिल सुनील शिंदे ने सोशल मीडिया के जरिए स्पष्ट किया कि वह निजी कारणों से अपने गृह क्षेत्र में थे और बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने पार्टी छोड़ने संबंधी अटकलों को निराधार बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलती रही है। 2022 में शिवसेना में विभाजन और उसके बाद सत्ता परिवर्तन के बाद अब लोकसभा स्तर पर हुए इस नए घटनाक्रम को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में और जनप्रतिनिधि पाला बदलते हैं तो इसका असर राज्य की विपक्षी राजनीति और महाविकास अघाड़ी की रणनीति पर भी पड़ सकता है।</p>
<p>फिलहाल सभी निगाहें शिवसेना (UBT) के अगले कदम और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में जारी इस उथल-पुथल को राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह मामला प्रमुख राजनीतिक चर्चाओं में शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:00:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उद्धव की शिवसेना में फिर टूट की चर्चा, 7 सांसदों पर दावा</title>
                                    <description><![CDATA[शिंदे गुट के एमएलसी कृपाल तुमाने ने कहा- सात सांसद संपर्क में हैं, उद्धव ठाकरे बोले- जो जाना चाहता है उसे नहीं रोकेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a3138a1df29a/article-56120"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uddhav-thackeray.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने के एक दावे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। तुमाने ने कहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसद उनके संपर्क में हैं और मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। इस दावे के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में फिर से संभावित दल-बदल और शक्ति संतुलन को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। कृपाल तुमाने ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पिछले करीब एक महीने से 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत बातचीत चल रही है और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में वे बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर शिवसेना के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इन अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने भी अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे रोका नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी में रहने या जाने का फैसला हर व्यक्ति का अपना है और जो जाना चाहता है, वह खुशी-खुशी जा सकता है। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी टूट का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी उन्हें हालात की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं की थी। उद्धव ठाकरे का यह बयान एक तरह से पार्टी नेताओं को खुली छूट देने जैसा संदेश भी माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की टूट की संभावना नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता लगातार शिंदे गुट के दावों को राजनीतिक प्रचार बता रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से सांसद संजय देशमुख की केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात ने भी चर्चाओं को हवा दे दी। यह मुलाकात दिल्ली में हुई और इसके बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं। संजय देशमुख उस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाए थे, जिसे उद्धव ठाकरे ने सांसदों के साथ आयोजित किया था। हालांकि उनके करीबी सूत्रों ने पारिवारिक कारणों को इसकी वजह बताया। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को अलग नजरिए से देखा जाने लगा। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। राउत ने कहा कि चार दिन पहले हुई बैठक में सभी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व पर भरोसा जताया था। उनके मुताबिक कुछ नेताओं ने तो सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। राउत ने यह भी कहा कि शिंदे गुट के दावे केवल भ्रम फैलाने की कोशिश हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> हाल ही में हुई बैठक में सभी सांसद मौजूद नहीं थे। कुछ सांसदों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया जबकि कुछ अनुपस्थित रहे। इसी वजह से राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला। हालांकि अनुपस्थित रहने के पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं और पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य स्थिति बता रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना का विभाजन कोई नया विषय नहीं है। जून 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को उस समय बड़ा झटका लगा था जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे। उस समय शिवसेना के 55 में से 40 विधायक शिंदे के साथ चले गए थे। इसके बाद राज्य की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदले और अंततः उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद दोनों गुटों के बीच असली शिवसेना को लेकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष शुरू हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और फिर विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर भी सुनवाई हुई। अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को बहुमत वाला गुट मानते हुए राहत दी। इसी दौरान चुनाव आयोग ने भी शिवसेना का पारंपरिक चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को आवंटित कर दिया। अब चार साल बाद फिर से टूट और दल-बदल की चर्चा ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है। अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:39 +0530</pubDate>
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