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                <title>MaharashtraNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>पुणे मंगेतर मर्डर केस में नया खुलासा, पहाड़ी से धक्का देने का प्लान पहले से था तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी युवती ने पहले भी मंगेतर को मारने की कोशिश की थी, खाई में धक्का देने की योजना विफल होने पर सड़क हादसे का बैकअप प्लान भी बनाया गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/new-revelation-in-pune-fiancee-murder-case-plan-to-push/article-56864"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pune-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पुणे में सामने आए चर्चित मंगेतर मर्डर केस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी सिया गोयल ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या का विचार पहली बार 31 मई को लोहगढ़ किले की यात्रा के दौरान बनाया था। बताया जा रहा है कि उस दिन दोनों ट्रैकिंग के लिए किले पर गए थे। जब केतन एक खतरनाक पहाड़ी किनारे बैठा हुआ था, तभी सिया के मन में उसे धक्का देकर रास्ते से हटाने का विचार आया। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, सिया और केतन की सगाई फरवरी में हुई थी और नवंबर में उनकी शादी तय थी। परिवारों के बीच रिश्ते सामान्य दिखाई देते थे। सोशल मीडिया पर भी दोनों की कई तस्वीरें और वीडियो मौजूद थे, जिनमें वे खुश नजर आते थे। हालांकि पुलिस का दावा है कि सिया शादी को लेकर मानसिक रूप से तैयार नहीं थी और परिवार के दबाव में यह रिश्ता आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान उसका संपर्क चेतन चौधरी नाम के युवक से लगातार बना हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd">जांच में यह भी सामने आया है कि 14 जून को केतन को नुकसान पहुंचाने की पहली कोशिश की गई थी। पुलिस के मुताबिक उस दिन सिया ने दोबारा लोहगढ़ किला जाने की जिद की। वहां पहुंचने के बाद उसने पीछे से केतन को धक्का दिया, लेकिन वह एक पेड़ के सहारे बच गया। जब केतन ने सवाल किया तो सिया ने सांप दिखाई देने का बहाना बनाते हुए कहा कि उसने उसे बचाने के लिए धक्का दिया था। केतन ने इस घटना को हादसा मान लिया और घर लौटकर परिवार को बताया कि सिया ने उसकी जान बचाई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पहली कोशिश नाकाम होने के बाद सिया ने अपने कथित प्रेमी चेतन के साथ मुलाकात की। दोनों ने एक कैफे में बैठकर आगे की योजना पर चर्चा की। जांच एजेंसियों को शक है कि यहीं पर खाई में धक्का देकर हत्या करने की साजिश को अंतिम रूप दिया गया। इतना ही नहीं, यदि यह योजना भी सफल नहीं होती तो सड़क दुर्घटना के जरिए केतन की जान लेने का वैकल्पिक प्लान तैयार रखा गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">18 जून को कथित तौर पर तीसरी और अंतिम कोशिश की गई। पुलिस का दावा है कि सिया ने प्री-वेडिंग फोटोशूट का बहाना बनाकर केतन को फिर से लोहगढ़ किले चलने के लिए राजी किया। इस बार चेतन भी पीछे-पीछे पहुंचा था। जांच में सामने आया है कि एक सुनसान स्थान पर जब केतन पहाड़ियों की ओर देख रहा था, तभी दोनों आरोपियों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया। इस बार वह खुद को संभाल नहीं सका और गहरी खाई में गिर गया। घटना के बाद इसे हादसा साबित करने की कोशिश की गई, लेकिन परिवार के संदेह ने पूरे मामले की दिशा बदल दी।  केतन की बहन को सबसे पहले सिया के व्यवहार पर शक हुआ। घटना के कुछ दिन बाद जब उसने सिया से हादसे के बारे में पूछा तो उसके जवाब और हावभाव सामान्य नहीं लगे। परिवार ने पुलिस से दोबारा संपर्क किया और विस्तृत जांच की मांग की। इसके बाद पुलिस ने किले के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक युवक कई बार केतन और सिया के आसपास दिखाई दिया। गर्म मौसम के बावजूद उसने हुडी पहन रखी थी और चेहरा छिपाने की कोशिश कर रहा था। बाद में उसकी पहचान चेतन चौधरी के रूप में होने का दावा किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जांच का तीसरा बड़ा सुराग कॉल डिटेल रिकॉर्ड से मिला। पुलिस के अनुसार, जनवरी से लेकर घटना वाले दिन की सुबह तक सिया और चेतन के बीच 2000 से अधिक कॉल हुई थीं। दोनों के बीच सैकड़ों घंटे बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। कॉल रिकॉर्ड ने पुलिस के शक को और मजबूत किया। इसके बाद दोनों से पूछताछ की गई और कई अहम जानकारियां मिलीं। केतन अग्रवाल पुणे के एक प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते थे। वे रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हुए थे और परिवार की कंपनी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी शादी की तैयारियां भी बड़े स्तर पर चल रही थीं। बताया जा रहा है कि राजस्थान में करोड़ों रुपये खर्च कर विवाह समारोह की योजना बनाई गई थी और मेहमानों के लिए विशेष इंतजाम किए जा चुके थे। पुणे पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हत्या की साजिश कब और कैसे तैयार हुई तथा इसमें और कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:42:15 +0530</pubDate>
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                <title>उद्धव की शिवसेना में फिर टूट की चर्चा, 7 सांसदों पर दावा</title>
                                    <description><![CDATA[शिंदे गुट के एमएलसी कृपाल तुमाने ने कहा- सात सांसद संपर्क में हैं, उद्धव ठाकरे बोले- जो जाना चाहता है उसे नहीं रोकेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a3138a1df29a/article-56120"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uddhav-thackeray.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने के एक दावे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। तुमाने ने कहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसद उनके संपर्क में हैं और मानसून सत्र से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। इस दावे के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में फिर से संभावित दल-बदल और शक्ति संतुलन को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। कृपाल तुमाने ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पिछले करीब एक महीने से 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत बातचीत चल रही है और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके अनुसार शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में वे बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या महाराष्ट्र में एक बार फिर शिवसेना के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इन अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने भी अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे रोका नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी में रहने या जाने का फैसला हर व्यक्ति का अपना है और जो जाना चाहता है, वह खुशी-खुशी जा सकता है। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की बड़ी टूट का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी उन्हें हालात की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं की थी। उद्धव ठाकरे का यह बयान एक तरह से पार्टी नेताओं को खुली छूट देने जैसा संदेश भी माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की टूट की संभावना नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता लगातार शिंदे गुट के दावों को राजनीतिक प्रचार बता रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से सांसद संजय देशमुख की केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात ने भी चर्चाओं को हवा दे दी। यह मुलाकात दिल्ली में हुई और इसके बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं। संजय देशमुख उस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाए थे, जिसे उद्धव ठाकरे ने सांसदों के साथ आयोजित किया था। हालांकि उनके करीबी सूत्रों ने पारिवारिक कारणों को इसकी वजह बताया। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को अलग नजरिए से देखा जाने लगा। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। राउत ने कहा कि चार दिन पहले हुई बैठक में सभी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व पर भरोसा जताया था। उनके मुताबिक कुछ नेताओं ने तो सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ेंगे। राउत ने यह भी कहा कि शिंदे गुट के दावे केवल भ्रम फैलाने की कोशिश हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> हाल ही में हुई बैठक में सभी सांसद मौजूद नहीं थे। कुछ सांसदों ने ऑनलाइन हिस्सा लिया जबकि कुछ अनुपस्थित रहे। इसी वजह से राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला। हालांकि अनुपस्थित रहने के पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं और पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य स्थिति बता रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना का विभाजन कोई नया विषय नहीं है। जून 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को उस समय बड़ा झटका लगा था जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे। उस समय शिवसेना के 55 में से 40 विधायक शिंदे के साथ चले गए थे। इसके बाद राज्य की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदले और अंततः उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद दोनों गुटों के बीच असली शिवसेना को लेकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष शुरू हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और फिर विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर भी सुनवाई हुई। अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को बहुमत वाला गुट मानते हुए राहत दी। इसी दौरान चुनाव आयोग ने भी शिवसेना का पारंपरिक चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को आवंटित कर दिया। अब चार साल बाद फिर से टूट और दल-बदल की चर्चा ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है। अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:39 +0530</pubDate>
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