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                <title>G7 Summit - दैनिक जागरण</title>
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                <title>G7 शिखर सम्मेलन में मोदी को मैक्रों का हिंदी में भावुक संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के राष्ट्रपति ने वीडियो संदेश में ‘प्रिय मित्र नरेंद्र’ कहकर भारत–फ्रांस दोस्ती को बताया अमर, द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई गर्माहट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/macrons-emotional-message-in-hindi-to-modi-at-g7-summit/article-56355"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/g7-summit-modi-macron.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और फ्रांस के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक अनोखा और भावनात्मक पल देखने को मिला, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदी में संबोधित करते हुए एक विशेष वीडियो संदेश भेजा। यह संदेश न केवल राजनीतिक मंच पर चर्चा का विषय बना, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरी होती दोस्ती का प्रतीक भी माना जा रहा है। मैक्रों ने अपने संदेश की शुरुआत “प्रिय मित्र नरेंद्र” शब्दों से की और हिंदी में भारत–फ्रांस संबंधों को अमर रहने की कामना की। यह वीडियो संदेश G7 बैठक के समापन के अवसर पर रिकॉर्ड किया गया, जिसमें मैक्रों ने हल्के-फुल्के अंदाज में हिंदी बोलने की कोशिश की और बाद में मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनका उच्चारण सही रहा होगा। उनके इस प्रयास ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा और माहौल को बेहद अनौपचारिक और सौहार्दपूर्ण बना दिया। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी में आगे कहा कि पीएम मोदी की यात्रा बहुत “फलदायी” रही और दोनों देशों के बीच साझेदारी और मजबूत होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह घटना ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस दौरे पर थे और उन्होंने कई महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लिया। पेरिस के निकट विला केरीलोस में हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष साझेदारी और तकनीकी विकास जैसे अहम क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर संतोष जताया कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है और इसे सह-निर्माण, सह-विकास और उन्नत तकनीक के साझा उपयोग की दिशा में और आगे बढ़ाया जाएगा। कूटनीतिक बातचीत के दौरान अंतरिक्ष क्षेत्र को भी प्रमुख एजेंडा में रखा गया। दोनों नेताओं ने मानव अंतरिक्ष उड़ान, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर सहमति जताई। यह संकेत माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत और फ्रांस अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी नवाचार में एक साथ बड़े कदम उठा सकते हैं। यह सहयोग वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की स्थिति को और मजबूत करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी यात्रा के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने वीवा टेक 2026 कार्यक्रम में स्टार्टअप्स के साथ बातचीत की और नई तकनीकों तथा नवाचारों का अवलोकन किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित किया और डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।  मैक्रों द्वारा हिंदी में दिया गया यह संदेश केवल एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं था, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत होते संबंधों का संकेत है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इस तरह के भावनात्मक और भाषाई प्रयास बहुत कम देखने को मिलते हैं, जिससे यह घटना और भी खास बन जाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने G7 शिखर सम्मेलन में भारत–फ्रांस संबंधों को एक नया आयाम दिया है। जहां एक ओर वैश्विक मंच पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत स्तर पर दोनों नेताओं के बीच आपसी सम्मान और मित्रता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:33:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सुबह ईरान को चेतावनी, रात में शांति समझौता; एक दिन में बदला ट्रम्प का रुख</title>
                                    <description><![CDATA[G7 समिट में सख्त बयान देने वाले ट्रम्प ने कुछ घंटों बाद फ्रांस के वर्साय पैलेस में ईरान के साथ शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/warning-to-iran-in-the-morning-peace-agreement-at-night/article-56330"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच बुधवार का दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ही दिन में ऐसा रुख दिखाया जिसने दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया। सुबह तक ईरान को कड़ी चेतावनी देने वाले ट्रम्प ने रात होते-होते उसी देश के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। यह घटनाक्रम फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आया, जहां ट्रम्प के बयानों और फैसलों ने वैश्विक कूटनीति को नई दिशा दे दी। दिन की शुरुआत में ट्रम्प ने G7 समिट के दौरान आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि यदि आने वाले समय में समझौता नहीं हुआ और हालात बिगड़ते हैं, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया और माना गया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ दबाव की नीति जारी रखेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दौरान ट्रम्प की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले नेता हैं। ट्रम्प की यह टिप्पणी भी दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा नजरें ईरान को लेकर उनके अगले कदम पर टिकी हुई थीं। G7 सम्मेलन समाप्त होने के बाद ट्रम्प अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस के लिए रवाना हुए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उन्हें विशेष रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया था। बताया गया कि G7 नेताओं में ट्रम्प अकेले ऐसे नेता थे जिन्हें इस विशेष आयोजन के लिए न्योता मिला था। वर्साय पहुंचने पर मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्साय पैलेस अपने भव्य इतिहास और शानदार वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ट्रम्प ने यहां के ऐतिहासिक हिस्सों का दौरा किया और विशेष रूप से शीशमहल को काफी देर तक देखा। बताया जाता है कि 357 बड़े आइनों से सजी इस ऐतिहासिक गैलरी की भव्यता ने उन्हें प्रभावित किया। सोने की नक्काशी और शाही सजावट के प्रति रुचि रखने वाले ट्रम्प ने इस इमारत की खुलकर प्रशंसा भी की। इस दौरान माहौल पूरी तरह औपचारिक और मैत्रीपूर्ण नजर आ रहा था। हालांकि असली घटनाक्रम डिनर शुरू होने से ठीक पहले सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्साय पैलेस में मौजूद कई अधिकारियों और मेहमानों को आखिरी समय तक यह जानकारी नहीं थी कि ईरान से जुड़े समझौते पर उसी रात हस्ताक्षर हो सकते हैं। कुछ तस्वीरों में ट्रम्प और मैक्रों को एक फोन कॉल के दौरान बातचीत करते हुए देखा गया। माना जा रहा है कि इसी दौरान अंतिम स्तर की चर्चा हुई और समझौते को मंजूरी मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद ट्रम्प ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। हस्ताक्षर के समय फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उनके साथ मौजूद थे, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी वहां उपस्थित थे। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रम्प की तस्वीरें सामने आते ही पूरी दुनिया में यह खबर तेजी से फैल गई। खास बात यह रही कि जिस समझौते को आधिकारिक तौर पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में अंतिम रूप दिया जाना था, उस पर अपेक्षा से पहले फ्रांस में ही हस्ताक्षर कर दिए गए। हस्ताक्षर के बाद ट्रम्प ने मीडिया के सामने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। जब एक पत्रकार ने उनसे समझौते के बारे में पूछा तो उन्होंने जोर से जवाब दिया, “साइन किए।” इस एक वाक्य ने पूरे दिन की राजनीतिक कहानी को समेट दिया। सुबह जहां ट्रम्प ईरान के खिलाफ सख्त बयान दे रहे थे, वहीं रात तक वे समझौते के जरिए तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा चुके थे। ट्रम्प की यह रणनीति दबाव और बातचीत के मिश्रण पर आधारित रही। पहले उन्होंने कड़ा संदेश देकर अपनी स्थिति मजबूत की और बाद में बातचीत के जरिए समझौते का रास्ता चुना। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे ट्रम्प की पारंपरिक वार्ता शैली का हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें वह पहले सख्त रुख अपनाते हैं और फिर अचानक समझौते की ओर बढ़ जाते हैं। इस समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:57:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>G7 शिखर सम्मेलन में बोले प्रधानमंत्री मोदी, संतुलित और समावेशी विकास के लिए वैश्विक साझेदारी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 समिट के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ के हितों की जोरदार पैरवी की। उन्होंने IMPACT पहल, वैश्विक कौशल साझेदारी और विकासशील देशों के लिए आर्थिक सुरक्षा तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/prime-minister-modi-said-in-g7-summit-that-global-partnership/article-56292"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/narendra-modi-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने साझा, संतुलित और टिकाऊ आर्थिक विकास का विजन प्रस्तुत किया। “Reviving a Balanced, Shared and Sustainable Economic Growth for All” विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब दुनिया अनिश्चितताओं, संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है, तब विकास का अर्थ केवल GDP वृद्धि या व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए। विकास का वास्तविक उद्देश्य लोगों का कल्याण, समावेशिता और अवसरों की समान उपलब्धता होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में समावेशी विकास का जो मॉडल अपनाया है, वह “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के सिद्धांत पर आधारित है। इसी सोच के कारण भारत ने करोड़ों लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि यही दृष्टिकोण भारत की अंतरराष्ट्रीय नीतियों में भी दिखाई देता है और G20 की अध्यक्षता के दौरान “One Earth, One Family, One Future” का संदेश इसी सोच का विस्तार था।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए देशों के बीच सहयोग, विश्वास और साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना केवल एक परिवहन या व्यापार मार्ग नहीं है, बल्कि यह निवेश, रोजगार, नवाचार और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे और भी संपर्क एवं व्यापार गलियारों की आवश्यकता है, जो विभिन्न क्षेत्रों को आर्थिक रूप से जोड़ सकें। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और भू-राजनीतिक संकटों का सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ता है। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, ईंधन कीमतों और निवेश पर पड़ने वाले प्रभाव का बोझ अक्सर गरीब और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को उठाना पड़ता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह इन देशों को अकेला न छोड़े। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से अपील की कि वे ऐसे सहायता तंत्र विकसित करें जो विकासशील देशों को आर्थिक झटकों से उबरने और उनकी आर्थिक मजबूती बनाए रखने में मदद कर सकें। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था तभी टिकाऊ होगी, जब कमजोर देशों को भी समान अवसर और सुरक्षा मिलेगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने एक नई पहल “International Mobilization Partnership for Accelerating Connectivity and Trade” यानी IMPACT का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से G7 देशों की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ के देशों की भागीदारी को एक मंच पर लाया जा सकता है। इसका उद्देश्य संपर्क, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि IMEC की तर्ज पर अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीपीय देशों को जोड़ने वाली नई परियोजनाओं पर भी काम किया जाना चाहिए। इससे विकासशील क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और वैश्विक स्तर पर संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में स्थानीय स्वामित्व, पारदर्शी वित्तपोषण और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने विकसित देशों के सामने मौजूद जनसंख्या संबंधी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई विकसित देश वृद्ध होती आबादी की समस्या का सामना कर रहे हैं, जबकि भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के पास युवा प्रतिभा, कौशल और उद्यमशीलता की अपार क्षमता है। इस प्राकृतिक पूरकता का लाभ उठाने के लिए उन्होंने “Global Skills Partnership” स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के तहत देशों के बीच कौशल मानचित्रण, प्रशिक्षण और विश्वसनीय कुशल मानव संसाधन की आवाजाही को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे विकसित देशों को आवश्यक कार्यबल मिलेगा और विकासशील देशों के युवाओं को वैश्विक अवसर प्राप्त होंगे। प्रधानमंत्री ने इसे भविष्य की आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया।</p>
<p>अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक नीतियों और वैश्विक व्यापार के प्रति प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने G7 देशों सहित दुनिया के कई प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत संरक्षणवाद की बजाय साझेदारी और एकीकरण में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अपनी आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक स्थिर, भरोसेमंद और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि दुनिया सहयोग, विश्वास और साझा विकास के सिद्धांतों पर आगे बढ़ेगी तो आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत, समावेशी और टिकाऊ बन सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>G7 में पीएम मोदी का बयान, वैश्विक संकटों का बोझ अकेले न उठाए ग्लोबल साउथ</title>
                                    <description><![CDATA[ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक आपूर्ति संकट पर चिंता जताई, स्किल पार्टनरशिप और IMPACT ढांचे का दिया प्रस्ताव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-modis-statement-in-g7-global-south-should-not-bear/article-56252"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pm-modi-g7-speech-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G7 आउटरीच सत्र में वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूती से उठाते हुए कहा कि दुनिया में चल रहे संकटों का बोझ केवल विकासशील देशों पर नहीं डाला जा सकता। उन्होंने खास तौर पर पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं का जिक्र किया और कहा कि इन व्यवधानों का असर लंबे समय तक कमजोर देशों पर पड़ता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी बनती है कि वह सुनिश्चित करे कि संवेदनशील और विकासशील देश अकेले इन संकटों का भार न उठाएं। पीएम मोदी ने साझा और संतुलित विकास पर बोलते हुए कहा कि आज दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां सप्लाई चेन में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ता है, जो पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वैश्विक एकजुटता को मजबूत करना है तो सबसे कमजोर देशों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वैश्विक कौशल साझेदारी (Global Skills Partnership) का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में प्रतिभा और उद्यमिता की कोई कमी नहीं है, लेकिन उसे सही अवसर और वैश्विक मंच की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्किल मैपिंग और भरोसेमंद स्किल मोबिलिटी को बढ़ावा देने की बात कही, जिससे विकसित देशों की उम्रदराज होती आबादी और विकासशील देशों की युवा शक्ति के बीच संतुलन बनाया जा सके। पीएम मोदी ने इसके साथ ही IMPACT यानी “International Mobilisation Partnership for Accelerating Connectivity and Trade” ढांचे का भी सुझाव दिया। इस पहल का उद्देश्य व्यापार, तकनीक और ऊर्जा के नए कॉरिडोर विकसित करना है, जिसमें G7 देशों की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ की भागीदारी को जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें स्थानीय स्वामित्व, पारदर्शी वित्तपोषण और दीर्घकालिक स्थिरता पर आधारित होनी चाहिए ताकि वास्तविक विकास संभव हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को और आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप क्षेत्रों के साथ भी इसी तरह की कनेक्टिविटी योजनाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे न केवल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार, निवेश और नवाचार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत की वैश्विक आर्थिक नीति केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि भारत ने G7 में शामिल कई देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जो इस बात का संकेत है कि भारत संरक्षणवाद की बजाय साझेदारी और एकीकरण में विश्वास रखता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आज दुनिया दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है—एक तरफ विकसित देशों में उम्रदराज आबादी की समस्या है, तो दूसरी तरफ विकासशील देशों में युवा और कुशल जनशक्ति की प्रचुरता है। इस असंतुलन को अवसर में बदलने की जरूरत है। इसी के तहत उन्होंने एक ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप की परिकल्पना रखी, जिससे देशों के बीच कौशल का आदान-प्रदान और भरोसेमंद श्रम गतिशीलता को बढ़ावा दिया जा सके। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत हमेशा से वैश्विक सहयोग और साझा समृद्धि का समर्थक रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की नीति “विभाजन नहीं, एकीकरण”, “संरक्षणवाद नहीं, साझेदारी” और “अनिश्चितता नहीं, साझा समृद्धि” पर आधारित है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से भी अपील की कि वे विकासशील देशों को आर्थिक झटकों से निपटने के लिए मजबूत समर्थन तंत्र विकसित करें। G7 मंच पर पीएम मोदी का यह संदेश वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में संतुलन, सहयोग और समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत अपील के रूप में देखा जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:36:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>G7 सम्मेलन में पीएम मोदी बोले, भारतीय नाविकों की मौत चिंता का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री व्यापार सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा उठा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-modi-said-in-g7-conference-that-death-of-indian/article-56154"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pm-modi-g7-speech.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फ्रांस के इवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के सामने समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की स्थिरता और हाल की घटनाओं में भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। इस बैठक में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई प्रमुख देशों के नेता मौजूद थे। पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों का असर सिर्फ क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र किया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। पीएम ने कहा कि इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और वाणिज्यिक सामान दुनिया भर में भेजा जाता है और किसी भी तरह की बाधा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा, “इस संघर्ष में हमारे कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है।” उन्होंने आगे कहा कि समुद्री व्यापार को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि हजारों नाविक रोजाना समुद्र के रास्ते देशों को जोड़ते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि वे बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। पीएम मोदी का यह बयान हाल ही में सामने आई उन घटनाओं से जुड़ा माना जा रहा है, जिनमें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी देश या घटना का सीधा नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत उन्हीं घटनाओं की ओर माना जा रहा है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कई जहाजों पर कार्रवाई की गई थी। हाल के दिनों में अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में कुछ विदेशी झंडे वाले तेल टैंकरों पर कार्रवाई की थी। इन जहाजों पर भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद थे। इनमें से एक घटना में तीन भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि अन्य घटनाओं में कई नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और समुद्री सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि इस तरह की घटनाएं तुरंत रोकी जानी चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि समुद्री मार्गों पर काम करने वाले नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपने समुद्री समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को अत्यंत महत्व देता है। जब यह घटना हुई, तब भारत ने तुरंत अमेरिकी पक्ष के सामने अपनी गंभीर चिंता दर्ज कराई और कड़ा विरोध जताया। भारत ने अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को तलब कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है। पीएम मोदी का यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक शांति और व्यापार स्थिरता पर भी जोर देता है। भारत लंबे समय से समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात करता रहा है। G7 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह मुद्दा उठना इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर अपने नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार के मुद्दों को अधिक मजबूती से रख रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:24:11 +0530</pubDate>
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