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                <title>Uddhav Thackeray - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Uddhav Thackeray RSS Feed</description>
                
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                <title>उद्धव सेना में बगावत के संकेत, संसदीय बैठक से गायब रहे 6 सांसद</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में सिर्फ तीन सांसद पहुंचे, छह सांसदों की गैरमौजूदगी से शिवसेना (यूबीटी) में नए राजनीतिक संकट के संकेत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/signs-of-rebellion-in-uddhav-sena-6-mps-missing-from/article-56326"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shiv-sena-ubt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक में नौ में से केवल तीन सांसदों के पहुंचने से पार्टी के भीतर नए संकट की चर्चा तेज हो गई है। बैठक में लोकसभा सांसद अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए, जबकि छह सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी नेतृत्व ने बैठक से पहले सभी सांसदों को व्हिप जारी कर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सांसदों के नहीं पहुंचने को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के बाद सांसद अरविंद सावंत ने स्पष्ट किया कि अनुपस्थित सांसदों को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा। उधर, राज्यसभा सांसद और पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के सांसदों पर दबाव बनाया जा रहा है। राउत ने कहा कि जो सांसद बैठक में शामिल हुए हैं, वे पार्टी के साथ खड़े हैं, जबकि जो नहीं पहुंचे, उन्हें जनता जवाब देगी। लगातार दूसरे दिन उन्होंने बागी माने जा रहे सांसदों पर तीखे शब्दों में हमला बोला।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच गृह मंत्रालय द्वारा महाराष्ट्र पुलिस को छह सांसदों की सुरक्षा बढ़ाकर Y+ श्रेणी करने के निर्देश दिए जाने की खबर ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने या अलग समूह के गठन की इच्छा जताई है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि छह सांसद एक साथ कोई निर्णय लेते हैं तो यह दल-बदल कानून के तहत महत्वपूर्ण स्थिति बन सकती है। लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार किसी भी दल में विभाजन के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। इस स्थिति में छह सांसदों का समूह कानूनी रूप से मजबूत दावा पेश कर सकता है। बीते कुछ दिनों की घटनाओं पर नजर डालें तो राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। 15 जून से ही ऐसी चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इस संभावित अभियान को राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया गया। उस समय पार्टी नेताओं ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद 16 जून को संजय राउत ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए भारी आर्थिक प्रलोभन दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को करोड़ों रुपये का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। 17 जून को घटनाक्रम और तेज हो गया जब शिंदे गुट के नेताओं ने दावा किया कि छह सांसदों ने अलग समूह बनाने से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके बाद उद्धव गुट के वरिष्ठ नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर किसी भी निर्णय से पहले उनका पक्ष सुनने की मांग की। यह घटनाक्रम केवल शिवसेना तक सीमित नहीं है। आगामी मानसून सत्र और भविष्य में संभावित संवैधानिक एवं राजनीतिक बदलावों को देखते हुए विभिन्न दलों में राजनीतिक पुनर्संरचना की कोशिशें तेज हो सकती हैं। संसद में संख्या बल बढ़ाने को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। शिवसेना के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब पार्टी बड़े विभाजन का सामना कर रही है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने बगावत कर अलग गुट बनाया था। उस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह बदल गई थी। अब सांसदों के स्तर पर संभावित टूट की खबरें उद्धव ठाकरे के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:54:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, शिवसेना (UBT) के 6 सांसद बागी; पार्टी में फिर मचा सियासी भूचाल</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा स्पीकर को विलय की चिट्ठी भेजे जाने का दावा, संजय राउत के तीखे बयान से बढ़ा राजनीतिक विवाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-blow-to-uddhav-thackeray-6-mps-from-shiv-sena/article-56232"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shiv-sena-ubt-rebellion.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के बागी होने की खबरें सामने आईं। सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की इच्छा जताई है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे बागी सांसदों की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजा गया। इस पत्र में संसदीय दल के विलय से जुड़ी मांग रखी गई है। जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं उनमें नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल भी शामिल बताए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि संजय दीना पाटिल ने कुछ घंटे पहले ही पार्टी छोड़ने की खबरों का खंडन किया था और खुद को उद्धव ठाकरे के साथ बताया था। इसके बाद अचानक उनके नाम के बागी सांसदों की सूची में शामिल होने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। दिल्ली और मुंबई के राजनीतिक गलियारों में पिछले कई दिनों से ऐसी अटकलें चल रही थीं कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं। हालांकि पार्टी की ओर से लगातार इन खबरों को खारिज किया जाता रहा। इस बीच दिल्ली में सांसदों की गतिविधियों और अलग-अलग बैठकों ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे। अब छह सांसदों के एक साथ अलग होने की खबर सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के प्रमुख नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बन गई। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। राउत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया । उनके बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया। विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, जबकि राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि मराठी भाषा और बोलचाल में इस तरह के शब्द कई बार सामान्य रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। यदि छह सांसदों का अलग होना आधिकारिक रूप से साबित होता है तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए पिछले चार वर्षों में दूसरा बड़ा झटका होगा। इससे पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के 39 विधायकों ने बगावत कर दी थी। उस बगावत ने न केवल महाराष्ट्र की तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार को गिरा दिया था, बल्कि शिवसेना की राजनीतिक दिशा भी पूरी तरह बदल दी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">2022 के घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को दे दिया था। इसके बाद उद्धव ठाकरे को नए नाम और नए चुनाव चिन्ह के साथ राजनीतिक संघर्ष शुरू करना पड़ा। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन अब सांसदों के संभावित टूटने की खबरें संगठन के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई हैं महाराष्ट्र में बदलते समीकरणों का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। यदि सांसदों का एक बड़ा वर्ग शिंदे गुट के साथ जाता है तो इससे संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन इसे अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम की एक और खास बात यह है कि हाल के महीनों में देश की राजनीति में दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संरचना की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई सांसद और विधायक नए राजनीतिक विकल्प तलाशते दिखाई दिए हैं। पिछले तीन महीनों के दौरान विपक्षी दलों के करीब 27 सांसद अलग-अलग कारणों से अपने मूल दल से दूरी बनाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के करीब पहुंचे हैं। इनमें आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों के नाम भी चर्चा में रहे हैं। हालांकि शिवसेना (UBT) की ओर से अब भी यह दावा किया जा रहा है कि पार्टी मजबूत है और संगठन में किसी तरह की कमजोरी नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि वे अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ मजबूती से खड़े हैं। दूसरी ओर शिंदे गुट के नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जो भी नेता विकास और स्थिरता की राजनीति करना चाहता है, उसका स्वागत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:41:34 +0530</pubDate>
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                <title>शिवसेना (UBT) में बगावत की आहट, दिल्ली में सांसदों की आपात बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[9 में से 6 सांसदों के पाला बदलने की अटकलों के बीच उद्धव गुट अलर्ट, संजय राउत ने लगाए ₹50-₹50 करोड़ ऑफर के गंभीर आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sound-of-rebellion-in-shiv-sena-ubt-emergency-meeting-of/article-56156"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shiv-sena-ubt-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े सियासी तनाव के दौर में पहुंच गई है। शिवसेना (UBT) के भीतर कथित टूट और बगावत की अटकलों ने माहौल गरमा दिया है। स्थिति उस वक्त और गंभीर हो गई जब पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों की दिल्ली में आपात बैठक बुला ली और स्पष्ट निर्देश जारी किया कि सभी को हर हाल में शामिल होना होगा। पार्टी की ओर से व्हिप जारी करते हुए चेतावनी दी गई है कि अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई भी की जा सकती है। राजनीतिक हलकों में इसे बेहद अहम कदम माना जा रहा है क्योंकि चर्चा है कि 9 में से 6 से 7 सांसद पार्टी लाइन से अलग रुख अपना सकते हैं। मामला सिर्फ अटकलों तक सीमित नहीं है, बल्कि हालात ने संगठन के भीतर असहजता भी बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना (UBT) के कई सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और उनके संसद में लोकसभा अध्यक्ष <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Om Birla</span></span> से मुलाकात करने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच पार्टी नेतृत्व लगातार अपने सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश में जुटा है, लेकिन कई स्तरों पर संवाद टूटता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि इसी दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Eknath Shinde</span></span> भी दिल्ली में मौजूद हैं, जिससे राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह नाम अविभाजित शिवसेना के प्रतीक बाघ से जुड़ा है, जो कभी पार्टी की ताकत का प्रतीक माना जाता था। अब इसी प्रतीक को लेकर सियासी तकरार नई दिशा लेती दिख रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती हलचल ने एक बार फिर 2022 की यादें ताजा कर दी हैं, जब बड़े पैमाने पर विधायकों ने बगावत कर दी थी और महाराष्ट्र की सत्ता बदल गई थी।</p>
<p>इसी बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Sanjay Raut</span></span> ने एक बड़ा और विवादित दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को तोड़ने और प्रभावित करने के लिए भारी धनराशि की पेशकश की जा रही है। राउत ने सोशल मीडिया पोस्ट में यहां तक कहा कि “एक सांसद की कीमत ₹50-₹50 करोड़ तक लगाई जा रही है और ₹15 करोड़ एडवांस दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं।” हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। राउत ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति बताया और तीखी प्रतिक्रिया दी।</p>
<p>वहीं विपक्षी दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर तंज कसे जा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने परोक्ष टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक खरीद-फरोख्त की बातें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़े हैरान करने वाले हैं। इस पूरे विवाद ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक बहस को और तेज कर दिया है। दूसरी तरफ, पार्टी के भीतर कुछ सांसदों ने इन सभी अटकलों को खारिज भी किया है और कहा है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ ही बने हुए हैं।</p>
<p>शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि किसी भी अलग हो रहे गुट को पार्टी का आधिकारिक प्रतिनिधि न माना जाए। उनका कहना है कि पार्टी का व्हिप और संसदीय अधिकार संगठन से जुड़े होते हैं, इसलिए टूटने वाले समूह को मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। यह कदम पार्टी की ओर से संस्थागत नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच कुछ सांसदों की दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात और अलग-अलग गतिविधियों ने भी अटकलों को हवा दी है। हालांकि एक सांसद संजय दीना पाटिल ने साफ कहा है कि वे किसी भी बागी सूची का हिस्सा नहीं हैं और पूरी तरह पार्टी के साथ हैं। बावजूद इसके, राजनीतिक माहौल में अनिश्चितता बनी हुई है और हर बयान नई चर्चा को जन्म दे रहा है।</p>
<p>उन्होंने इस मौजूदा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। 2022 में हुए बड़े विभाजन और सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि अभी भी ताजा है, और इसी कारण मौजूदा घटनाओं को उसी नजर से देखा जा रहा है। उस समय बड़े पैमाने पर विधायकों के एक गुट के अलग होने के बाद राज्य की सत्ता पूरी तरह बदल गई थी और राजनीतिक समीकरण नए सिरे से तय हुए थे। स्थिति यही है कि शिवसेना (UBT) नेतृत्व पूरी तरह सतर्क है और अपने सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा है। वहीं दूसरी ओर सियासी अटकलें और आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:24:25 +0530</pubDate>
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