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                <title>property scam - दैनिक जागरण</title>
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                <title>रायपुर में महिला डॉक्टर से 51 लाख की ठगी, अधूरा मकान छोड़ फरार हुआ बिल्डर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में महिला डॉक्टर से 51 लाख लेने के बाद बिल्डर अधूरा मकान छोड़ फरार हुआ, पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3e48496e113/article-57038"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-builder-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में मकान बनाने का सपना एक महिला डॉक्टर के लिए बड़ी आर्थिक और मानसिक परेशानी में बदल गया। राजधानी के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में आरोप है कि एक बिल्डर ने मकान निर्माण के नाम पर 51 लाख रुपए से ज्यादा की रकम लेने के बाद काम अधूरा छोड़ दिया और अपना दफ्तर बंद कर फरार हो गया। पीड़ित महिला डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने बिल्डर और उसके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दोनों आरोपियों की तलाश जारी है। शिकायत के मुताबिक पीड़िता डॉ. स्नेहलता दास भाठागांव स्थित साईं विला कॉलोनी में रहती हैं और पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में सड्डू स्थित अविनाश कैपिटल्स होम्स-2 में करीब 1489 वर्गफीट का प्लॉट खरीदा था। अपना घर बनाने के उद्देश्य से उन्होंने 16 मार्च 2023 को यूके कॉन्सेप्ट डिजाइनर के संचालक मोहित सोलंकी के साथ निर्माण अनुबंध किया। समझौते के अनुसार 22 मई 2024 तक मकान पूरी तरह तैयार कर उन्हें सौंपा जाना था। शुरुआत में निर्माण कार्य चलता रहा, लेकिन कुछ समय बाद इसकी रफ्तार धीमी हो गई और आखिरकार काम पूरी तरह बंद हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला डॉक्टर का कहना है कि मकान निर्माण की कुल लागत 51,00,916 रुपए तय की गई थी। इसके लिए उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक से 45 लाख रुपए का होम लोन लिया। इसके अलावा अपनी वर्षों की बचत और रिश्तेदारों से उधार लेकर कुल 51,31,887 रुपए बैंकिंग माध्यम से बिल्डर के खाते में जमा करा दिए। उन्हें उम्मीद थी कि तय समय पर उनका घर बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बावजूद बिल्डर ने केवल मकान का ढांचा तैयार किया और प्लास्टर, ईंट का काम, फर्श, बिजली, पाइपलाइन, पेंटिंग तथा अन्य जरूरी निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए। पीड़िता के अनुसार जब उन्होंने बार-बार निर्माण कार्य पूरा करने के लिए बिल्डर से संपर्क करने की कोशिश की तो पहले अलग-अलग बहाने बनाए गए। बाद में उसका मोबाइल फोन बंद आने लगा। कुछ दिनों बाद जब वह उसके कार्यालय पहुंचीं तो वहां ताला लगा मिला। आसपास के लोगों से जानकारी लेने पर पता चला कि कार्यालय बंद कर दिया गया है। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत करने का फैसला किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला डॉक्टर का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल आर्थिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी उन पर पड़ा है। जिस मकान के लिए उन्होंने बैंक से बड़ा लोन लिया, उसकी हर महीने ईएमआई चुकानी पड़ रही है। इसके साथ ही ब्याज, बिजली बिल, टैक्स और अन्य खर्च भी लगातार जारी हैं। अधूरे मकान को रहने लायक बनाने के लिए अब उन्हें करीब 30 से 35 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। उनका कहना है कि जीवनभर की जमा पूंजी और उधार लेकर घर बनाने का सपना देखा था, लेकिन अब वही सपना सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। शिकायत मिलने के बाद तेलीबांधा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बिल्डर मोहित सोलंकी और उसके पिता गुलाब सिंह सोलंकी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश की धाराओं में अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार बैंक ट्रांजेक्शन, निर्माण अनुबंध, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। साथ ही दोनों आरोपियों की तलाश भी की जा रही है ताकि उनसे पूछताछ कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इसी तरह अन्य लोगों के साथ भी धोखाधड़ी तो नहीं की गई। यदि जांच में ऐसे और मामले सामने आते हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में दिए गए सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रायपुर में सामने आया यह मामला उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी माना जा रहा है जो मकान निर्माण के लिए निजी बिल्डरों या ठेकेदारों के साथ अनुबंध करते हैं। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कंपनी की विश्वसनीयता, पुराने प्रोजेक्ट, कानूनी दस्तावेज और भुगतान की शर्तों की पूरी जांच करना जरूरी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:18:27 +0530</pubDate>
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                <title>भोपाल में 15 साल से प्लॉट का इंतजार, 300 परिवार परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[रोहित हाउसिंग सोसायटी में जमीन आवंटन और रजिस्ट्री न मिलने से सदस्य भटक रहे, लाखों रुपये जमा करने के बावजूद नहीं मिला न्याय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/in-bhopal-300-families-are-worried-waiting-for-a-plot/article-56165"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-housing-society-issue.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल में हाउसिंग सोसायटी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां रोहित हाउसिंग सोसायटी के करीब 300 सदस्य पिछले लगभग 15 वर्षों से अपने प्लॉट और जमीन की रजिस्ट्री के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यह मामला अब प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर जनसुनवाई तक पहुंच चुका है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इस उम्मीद में जमा कर दी कि उन्हें एक दिन अपना घर मिलेगा, लेकिन आज भी वे खाली हाथ हैं। सदस्यों के अनुसार सोसायटी ने शुरुआत में सदस्यता शुल्क और बाद में विकास शुल्क के नाम पर लाखों रुपये जमा कराए थे। रकम जमा करने के बाद उन्हें भरोसा दिया गया था कि विकास कार्य पूरे होने पर सभी को प्लॉट और रजिस्ट्री दी जाएगी। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी न तो प्लॉट का आवंटन हुआ और न ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हुई। कई सदस्य अब भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित मंजू पाठक ने बताया कि सोसायटी ने बाद में कई जमीनें नए लोगों को बेच दीं, जबकि पुराने सदस्यों को उनका हक नहीं मिला। उनका कहना है कि यह साफ तौर पर नियमों की अनदेखी है और पुराने सदस्यों के साथ अन्याय किया गया है। मंगलवार को यह मामला एक बार फिर जनसुनवाई में उठाया गया, जहां पीड़ितों ने कलेक्टर को आवेदन देकर पूरी जमीन की जांच और सत्यापन की मांग की। पीड़ित सदस्य अजय सक्सेना ने बताया कि वर्ष 2012 में कलेक्ट्रेट स्तर पर हुई बैठक के बाद सदस्यों से अतिरिक्त राशि जमा कराई गई थी। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि सभी विकास कार्य पूरे होने के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी जाएगी। लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति और खराब होती गई। बाद में मामला सहकारिता विभाग के अधीन चला गया और 2016 में प्रशासक भी नियुक्त किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।</p>
<p style="text-align:justify;">सदस्यों का आरोप है कि विकास शुल्क के नाम पर उनसे लगभग 3.45 लाख रुपये से लेकर 4.5 लाख रुपये तक वसूले गए। कई लोगों ने पहले भी राशि जमा की थी और बाद में अतिरिक्त भुगतान भी किया, लेकिन आज तक जमीन नहीं मिली। कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी बचत इस योजना में लगा दी, लेकिन अब वे सिर्फ आश्वासन के भरोसे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह भी है कि जिन प्लॉटों का पहले पुराने सदस्यों को आवंटन किया गया था, उनमें से कुछ बाद में दूसरे लोगों के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई। इससे पुराने सदस्य अपने अधिकार से वंचित हो गए। पीड़ितों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और वरिष्ठता के नियमों का पालन नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">दस्तावेजों के अनुसार सदस्य 2010 से लगातार इस मामले को लेकर जनसुनवाई, कलेक्टर कार्यालय, सहकारिता विभाग और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करा रहे हैं। कई बार सुनवाई हुई, लेकिन हर बार मामला आगे बढ़ने के बजाय अटका रह गया। कुछ लोग दर्जनों बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला। स्थिति यह है कि कई सदस्य अब बुजुर्ग हो चुके हैं और रोज-रोज दफ्तरों के चक्कर लगाने में असमर्थ हैं। कुछ सदस्यों की इस इंतजार में मौत भी हो चुकी है, लेकिन उनके परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पीड़ितों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं बल्कि जीवनभर की कमाई और भरोसे का सवाल है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह भी सामने आया है कि भोपाल में हाउसिंग सोसायटी से जुड़े करीब 900 से अधिक लोग विभिन्न समस्याओं से प्रभावित हैं। इनमें से कई मामले लंबे समय से लंबित हैं। सहकारिता विभाग से जुड़ी बड़ी संख्या में शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में भी अटकी हुई हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ितों की मांग है कि पूरी जमीन की स्थिति, पहले हुए आवंटन और जमा की गई राशि की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर गलती कहां हुई और जिम्मेदारी किसकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:36:16 +0530</pubDate>
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