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                <title>Delhi High Court - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Delhi High Court RSS Feed</description>
                
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                <title>चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखी सजा</title>
                                    <description><![CDATA[सात मामलों में दोषसिद्धि कायम, तीन महीने की सजा के साथ करोड़ों रुपये मुआवजा देने का आदेश; अदालत ने समझौते की शर्तें पूरी नहीं करने पर जताई नाराजगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/shock-to-actor-rajpal-yadav-in-check-bounce-case-delhi/article-58423"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/rajpal-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सात अलग-अलग चेक बाउंस मामलों में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए अभिनेता को कुल तीन महीने की ही जेल काटनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता को करोड़ों रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत द्वारा दिए गए निर्णय और मुआवजे की गणना में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। अदालत ने माना कि पहले किए गए भुगतानों को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की राशि तय की गई है। कोर्ट ने राजपाल यादव को प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त एक अन्य राशि और राज्य को 25 हजार रुपये देने का आदेश भी दिया गया। वहीं उनकी पत्नी राधा यादव को भी प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 5.51 लाख रुपये का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सुनवाई के दौरान अभिनेता को कई अवसर दिए गए थे ताकि वह विवाद का आपसी सहमति से समाधान कर सकें। राजपाल यादव की ओर से बार-बार अदालत को भरोसा दिलाया गया कि वह बकाया राशि का भुगतान कर देंगे और समझौते का पालन करेंगे। लेकिन अदालत के अनुसार उन्हें पर्याप्त समय और अवसर मिलने के बावजूद वे अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान अभिनेता ने पहले समझौते की इच्छा जताई, लेकिन बाद में अतिरिक्त भुगतान करने से इनकार कर दिया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने यह तक कहा कि यदि भुगतान संभव नहीं है तो वह जेल जाने के लिए तैयार हैं। इसी कारण अदालत ने माना कि अब इस मामले में राहत देने का कोई आधार नहीं बचता। यह पूरा मामला वर्ष 2010 में लिए गए एक बड़े ऋण से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार राजपाल यादव ने फिल्म निर्माण और निर्देशन के उद्देश्य से एक निजी कंपनी से लगभग पांच करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। यह राशि उनकी फिल्म "अता पता लापता" के निर्माण में लगाई गई थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी, जिससे अभिनेता आर्थिक संकट में आ गए और समय पर ऋण नहीं चुका पाए। समय के साथ ब्याज, जुर्माना और भुगतान में देरी के कारण यह बकाया राशि बढ़कर लगभग नौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस बीच कर्ज चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बैंक से बाउंस हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ता कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया और अभिनेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। मामले की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने कई बार अदालत से अतिरिक्त समय मांगा। उन्होंने कुछ किस्तों में भुगतान भी किया। अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि अभिनेता पहले ही लगभग 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं और इस राशि को अंतिम मुआवजे में समायोजित किया जाएगा। बावजूद इसके बड़ी रकम अभी भी बकाया है, जिसके कारण अदालत ने सजा और मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि पूर्व में दी गई राहत केवल इस भरोसे पर आधारित थी कि अभिनेता निर्धारित समय के भीतर समझौते की शर्तों का पालन करेंगे। लेकिन बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद भुगतान पूरा नहीं किया गया। अदालत ने तकनीकी या टाइपिंग संबंधी त्रुटियों के कारण भुगतान में देरी के तर्क को भी स्वीकार नहीं किया और कहा कि ये दलीलें विश्वसनीय नहीं हैं। इस मामले में पहले भी राजपाल यादव को अदालत के निर्देश पर आत्मसमर्पण करना पड़ा था और उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया था। बाद में उन्होंने अदालत में 25 लाख रुपये का चेक प्रस्तुत कर शेष राशि का भुगतान करने का आश्वासन देते हुए राहत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि पहले आत्मसमर्पण आवश्यक है और उसके बाद ही किसी राहत पर विचार किया जा सकता है। अभिनेता ने सुनवाई के दौरान अपनी आर्थिक कठिनाइयों का भी जिक्र किया था। उन्होंने अदालत से कहा कि उनके पास भुगतान के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है और वह आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। हालांकि अदालत ने कहा कि केवल आर्थिक कठिनाई के आधार पर कानूनी दायित्वों से बचा नहीं जा सकता।राजपाल यादव के समर्थन में फिल्म उद्योग के कुछ कलाकार भी सामने आए। अभिनेता सोनू सूद ने सार्वजनिक रूप से कहा कि राजपाल यादव बेहद प्रतिभाशाली कलाकार हैं और कठिन समय में फिल्म उद्योग को उनके साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी फिल्म में काम देकर अग्रिम राशि दी जाएगी, जिसे भविष्य के काम के बदले समायोजित किया जाएगा। सोनू सूद ने इसे दान नहीं बल्कि सम्मान और गरिमा बनाए रखने का प्रयास बताया। अभिनेता गुरमीत चौधरी ने भी राजपाल यादव के समर्थन में आवाज उठाई और फिल्म जगत से सहयोग की अपील की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>टेलीग्राम बैन के बीच NEET का फर्जी पेपर बेचने वाला गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के भीलवाड़ा से छात्र हिरासत में, अमेरिकी VPN के जरिए चला रहा था चैनल; दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम पर रोक जारी रखने को सही ठहराया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/amidst-telegram-ban-seller-of-fake-neet-paper-arrested/article-56409"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-re-exam-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">NEET री-एग्जाम से पहले पेपर लीक और फर्जी प्रश्नपत्र बेचने की कोशिशों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसी बीच राजस्थान के भीलवाड़ा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने परीक्षा सुरक्षा को लेकर चल रही चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है। टेलीग्राम पर प्रतिबंध के बावजूद एक छात्र कथित तौर पर NEET का फर्जी पेपर बेचने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि आरोपी अमेरिकी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी VPN का इस्तेमाल कर टेलीग्राम चला रहा था और उसके चैनल का नाम "पेपर माफिया" रखा गया था।पुलिस के अनुसार गिरफ्तार छात्र की पहचान आकाश चौधरी के रूप में हुई है। वह भीलवाड़ा के पटेल नगर क्षेत्र का रहने वाला है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम के जरिए छात्रों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा कर रहा था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके पास कोई वास्तविक पेपर था या वह केवल छात्रों से पैसे ऐंठने के लिए फर्जीवाड़ा कर रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी टेलीग्राम को बड़ा झटका दिया है। केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाई गई अस्थायी रोक के खिलाफ दाखिल याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि सरकार के पास सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत ऐसे कदम उठाने का अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा के दौरान यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग की आशंका हो तो सरकार आवश्यक कदम उठा सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि मामले की समीक्षा संबंधित समिति द्वारा की गई थी और सरकार का फैसला बिना विचार के नहीं लिया गया। हालांकि सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि कुछ लोगों की गतिविधियों की वजह से करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव डालना कितना उचित है। इसके बावजूद अदालत ने फिलहाल सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। री-NEET परीक्षा को लेकर देशभर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सख्त कर दी गई है। पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए इस बार कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। भारतीय वायुसेना भी इस अभियान का हिस्सा बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार पिछले चार दिनों में 200 से अधिक उड़ानों के माध्यम से प्रश्नपत्रों को देश के 20 से ज्यादा स्थानों तक पहुंचाया गया है। प्रश्नपत्रों को हाई-टेक डिजिटल लॉक और रियल टाइम जीपीएस ट्रैकिंग वाले विशेष कंटेनरों में रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इन बॉक्सों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर तुरंत कंट्रोल रूम में अलर्ट पहुंच जाएगा। इसके लिए चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है। परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना समाप्त की जा सके।परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न राज्यों ने भी विशेष इंतजाम किए हैं। दिल्ली में छात्रों को डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावकों के लिए कूलिंग जोन बनाए जा रहे हैं जहां पेयजल, ओआरएस और अन्य सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। मध्यप्रदेश में रेलवे द्वारा विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा ताकि छात्र समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेलंगाना सरकार ने भी परीक्षार्थियों के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा की है। वहीं मुंबई में लोकल ट्रेनों का पूरा शेड्यूल जारी रहेगा और परीक्षा के दिन किसी भी प्रमुख रूट पर मेगा ब्लॉक नहीं लगाया जाएगा। रेलवे और परिवहन विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के दिन छात्रों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ परीक्षा सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। VPN जैसी तकनीकों के जरिए लोग कई बार प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म तक पहुंच बना लेते हैं। हालांकि VPN का उपयोग अपने आप में गैरकानूनी नहीं है, लेकिन यदि इसका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए किया जाए तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इसी परीक्षा के आधार पर देशभर के मेडिकल, डेंटल, आयुष और नर्सिंग संस्थानों में प्रवेश दिया जाता है। हर वर्ष लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और उनके भविष्य का फैसला इसी परीक्षा के परिणामों पर निर्भर करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:54:29 +0530</pubDate>
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                <title>NEET UG परीक्षा तक टेलीग्राम पर रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची कंपनी</title>
                                    <description><![CDATA[22 जून तक लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती, टेलीग्राम का दावा- कुछ लोगों की गलती की सजा 15 करोड़ से ज्यादा भारतीय यूजर्स को मिली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/company-reaches-delhi-high-court-against-ban-on-telegram-till/article-56196"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/telegram-ban-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">टेलीग्राम पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। NEET UG 2026 की दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा से पहले सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर 22 जून तक रोक लगाने का फैसला किया था। इस फैसले के खिलाफ कंपनी की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में तत्काल सुनवाई की तैयारी की गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब परीक्षा सुरक्षा, पेपर लीक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर देशभर में बहस जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि यह कदम छात्रों और परीक्षा प्रणाली के हित में उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ समय से परीक्षा से जुड़े फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक दावे और कथित लीक सामग्री टेलीग्राम के विभिन्न चैनलों और ग्रुपों के माध्यम से साझा किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा से पहले एहतियातन यह फैसला लिया गया, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या गलत जानकारी के प्रसार को रोका जा सके। NEET UG की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। इस परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA पहले से ही अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। एजेंसी का मानना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी पेपर लीक की खबरें फैलाकर छात्रों को भ्रमित किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक परीक्षा से पहले इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए अस्थायी प्रतिबंध जरूरी माना गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखना एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार कुछ असामाजिक तत्व डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर छात्रों से ठगी करने और फर्जी सामग्री फैलाने का प्रयास करते रहे हैं। ऐसे में किसी भी संभावित जोखिम को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। दूसरी ओर टेलीग्राम ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। कंपनी का कहना है कि कुछ गलत गतिविधियों के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है। टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने कहा कि भारत में करोड़ों लोग इस प्लेटफॉर्म का उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक संचार के लिए करते हैं। उनके अनुसार कुछ चैनलों या यूजर्स की गतिविधियों के कारण पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से 15 करोड़ से अधिक भारतीय उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डुरोव ने यह भी कहा कि कंपनी पहले से ही संदिग्ध चैनलों और फर्जी सामग्री के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी। उनके मुताबिक हाल के सप्ताहों में ऐसे सैकड़ों चैनलों को हटाया गया, जिन पर कथित रूप से परीक्षा से जुड़ी भ्रामक सामग्री साझा की जा रही थी। कंपनी का दावा है कि वह सरकार और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना एक कठोर कदम है। इस बीच तकनीकी स्तर पर भी कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। टेलीग्राम ने संकेत दिए हैं कि वह अपने मैसेज एडिटिंग सिस्टम को और पारदर्शी बनाने पर काम कर रहा है। कंपनी का कहना है कि भविष्य में एडिट किए गए संदेशों को अधिक स्पष्ट तरीके से चिह्नित किया जाएगा, ताकि पुराने संदेशों में बदलाव कर उन्हें नए कंटेंट की तरह पेश करने जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिबंध लागू होने के बाद गूगल और एप्पल ने भी सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए अपने-अपने ऐप स्टोर से टेलीग्राम को अस्थायी रूप से हटा दिया। इससे नए यूजर्स के लिए एप्लिकेशन डाउनलोड करना मुश्किल हो गया है। हालांकि पहले से ऐप का इस्तेमाल कर रहे कई उपयोगकर्ताओं पर इसका प्रभाव अलग-अलग स्तर पर देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला केवल एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल अधिकारों और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत को यह तय करना होगा कि परीक्षा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया कदम कितना उचित और अनुपातिक था। वहीं दूसरी तरफ यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाए जा सकते थे। दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब छात्रों, अभिभावकों, तकनीकी विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकारों से जुड़े संगठनों की नजर बनी हुई है। अदालत का फैसला न केवल टेलीग्राम के भविष्य के संचालन को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी नियंत्रण और नियमन से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। 22 जून तक टेलीग्राम पर प्रतिबंध जारी है। साथ ही जानकारी के अनुसार प्लेटफॉर्म पर मैसेज एडिटिंग फीचर भी 30 जून तक सीमित रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:51 +0530</pubDate>
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