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                <title>Kanan Pendari - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मुंगेली के जंगल में तेंदुओं की खूनी जंग, एक की मौत; दूसरा गंभीर घायल</title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में हुआ जानलेवा संघर्ष, कानन पेंडारी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी पोस्टमार्टम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3270ab1daf9/article-56214"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mungeli-leopard-death.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मुंगेली वनमंडल में मंगलवार शाम एक दुर्लभ और चौंकाने वाली वन्यजीव घटना सामने आई। लोरमी वन परिक्षेत्र के चंदूपारा बीट स्थित जंगल में दो तेंदुओं के बीच हुए भीषण संघर्ष में एक तेंदुए की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू कर दी। दोनों तेंदुओं के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष हुआ, जो इतना हिंसक था कि एक तेंदुए की जान चली गई। घटना मंगलवार शाम करीब सात बजे की बताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने जंगल से तेज गर्जना और जानवरों के लड़ने जैसी आवाजें सुनी थीं। कुछ लोगों ने दूर से टॉर्च की रोशनी में दो बड़े वन्यजीवों को आपस में भिड़ते हुए देखने का दावा भी किया है। हालांकि अंधेरा बढ़ने के कारण कोई भी व्यक्ति घटनास्थल के करीब नहीं जा सका। बाद में ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जहां जंगल के भीतर एक तेंदुआ मृत अवस्था में पड़ा मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन अधिकारियों के अनुसार मृत तेंदुए के शरीर पर कई गंभीर घाव पाए गए हैं। उसके चेहरे, गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे जख्म के निशान मिले हैं। इन निशानों को देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि संघर्ष काफी देर तक चला होगा। वन अमले ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद मृत तेंदुए के आसपास के इलाके को सुरक्षित कर लिया और रातभर निगरानी के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। घटना के बाद दूसरा तेंदुआ जंगल की ओर चला गया। वन विभाग की टीम ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन देर रात तक उसका कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया। हालांकि सर्च अभियान के दौरान कुछ स्थानों से कराहने जैसी आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का मानना है कि दूसरा तेंदुआ भी गंभीर रूप से घायल हो सकता है और उसे चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी संभावना को देखते हुए जंगल के भीतर निगरानी और खोज अभियान लगातार जारी रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन विभाग का कहना है कि तेंदुए स्वभाव से एकाकी और क्षेत्रीय प्रवृत्ति वाले वन्यजीव होते हैं। विशेष रूप से वयस्क नर तेंदुए अपने क्षेत्र में दूसरे नर तेंदुओं की मौजूदगी को आसानी से स्वीकार नहीं करते। कई बार भोजन, क्षेत्र और मादा तेंदुए की उपस्थिति को लेकर उनके बीच संघर्ष की स्थिति बन जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे संघर्ष सामान्यतः छोटे स्तर पर होते हैं, लेकिन कभी-कभी यह जानलेवा रूप भी ले लेते हैं। मुंगेली की यह घटना भी उसी प्रकार के संघर्ष का परिणाम मानी जा रही है। वन अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी प्रकार के शिकार या अवैध गतिविधि की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया गया। घटनास्थल पर पहुंचने के बाद मृत तेंदुए के शरीर का विस्तृत निरीक्षण किया गया। उसके नाखून, दांत और अन्य अंग सुरक्षित पाए गए हैं। शरीर पर गोली, फंदे या किसी अन्य बाहरी हमले के संकेत नहीं मिले। इसी वजह से फिलहाल शिकार की आशंका कमजोर मानी जा रही है और आपसी संघर्ष को मौत का प्रमुख कारण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बुधवार को मृत तेंदुए के शव को कानन पेंडारी भेजने की तैयारी की गई, जहां विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम पोस्टमार्टम करेगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। वन विभाग का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा शरीर के आंतरिक अंगों की भी जांच की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मृत्यु केवल बाहरी चोटों के कारण हुई या कोई अन्य कारण भी इसमें शामिल था। ग्रामीणों से मिली जानकारी और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों के आधार पर संघर्ष की आशंका मजबूत है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। वन विभाग पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा रहा है और घायल तेंदुए की तलाश प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण और जंगलों में बढ़ते दबाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वन क्षेत्रों में आवास और संसाधनों को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि तेंदुओं के बीच क्षेत्रीय संघर्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी संघर्ष में एक तेंदुए की मौत हो जाना बेहद दुर्लभ माना जाता है। वन विभाग की टीम जंगल में लगातार गश्त कर रही है। आसपास के ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। घायल तेंदुए के मिलने पर उसका उपचार कराने और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:56:23 +0530</pubDate>
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