<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/congress-opposition/tag-19067" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Congress Opposition - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/19067/rss</link>
                <description>Congress Opposition RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में यूसीसी ड्राफ्ट अंतिम चरण में, लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य प्रस्ताव पर विवाद तेज</title>
                                    <description><![CDATA[विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में समान कानून लागू करने की तैयारी, लिव-इन संबंधों और बच्चों के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस गर्म]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-intensifies-over-mandatory-live-in-registration-proposal-in-ucc-draft/article-56256"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uniform-civil-code.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
<div>

<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
<div class="[--thread-content-max-width:40rem] @w-lg/main:[--thread-content-max-width:48rem] mx-auto max-w-(--thread-content-max-width) flex-1 group/turn-messages focus-visible:outline-hidden relative flex w-full min-w-0 flex-col agent-turn">
<div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
<div class="min-h-8 text-message relative flex w-full flex-col items-end gap-2 text-start break-words whitespace-normal outline-none keyboard-focused:focus-ring [.text-message+&amp;]:mt-1">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden">
<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा दिए हैं। प्रस्तावित ड्राफ्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान पारिवारिक कानून व्यवस्था लागू करना है, जिससे विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक स्पष्ट और समान कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस ड्राफ्ट पर व्यापक स्तर पर कार्य किया है। सात सदस्यीय इस समिति ने प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद स्थापित किया है। इसके साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी आम जनता से सुझाव लिए जा रहे हैं, जिसमें लोगों से सरल प्रश्नों के माध्यम से उनकी राय प्राप्त की जा रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित कानून व्यापक जनभागीदारी के आधार पर तैयार हो।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित यूसीसी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को सभी धर्मों के लिए समान बनाने की दिशा में प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ अलग-अलग हैं, जिसके कारण कई बार कानूनी प्रक्रियाओं में असमानता और जटिलता देखने को मिलती है। सरकार का मानना है कि एक समान कानून लागू होने से इन जटिलताओं में कमी आएगी और न्याय व्यवस्था अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी ड्राफ्ट में विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत ऐसे संबंधों में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण या घोषणा को आवश्यक बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे संबंधों में रहने वाले व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। यदि ऐसे संबंधों से बच्चे पैदा होते हैं, तो उन्हें संपत्ति और भरण-पोषण से जुड़े सभी कानूनी अधिकार प्रदान करने का प्रावधान प्रस्तावित है, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का यह भी कहना है कि यह कानून पूरी तरह से जेंडर समानता पर आधारित होगा। पुरुष और महिला दोनों को पारिवारिक कानूनों में समान अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाएंगी। संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार और विवाह संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही तलाक की प्रक्रिया को भी सभी धर्मों के लिए एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाने की योजना है, जिससे सभी नागरिकों को एक समान प्रक्रिया का लाभ मिल सके। प्रस्तावित यूसीसी को संविधान के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का मानना है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत समानता का अधिकार और अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता का मार्गदर्शन इस कानून का आधार है। इसी कारण इसे एक आधुनिक और सुधारात्मक कानून के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति द्वारा तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट में यह भी ध्यान रखा गया है कि समाज के विभिन्न वर्गों की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया जाए और किसी भी प्रकार की असमानता या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। इसी कारण व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों की राय शामिल की गई है। राज्य सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से नागरिकों को एक समान और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था प्राप्त होगी, जिससे पारिवारिक विवादों में कमी आने की संभावना है। साथ ही न्याय प्रणाली पर बोझ कम होगा और मामलों का निपटारा अधिक तेजी से हो सकेगा। यह पहल समाज में एकरूपता और समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ रही है और आगामी विधानसभा सत्र में इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सुधारात्मक कदम समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में एक अधिक संगठित और समान कानूनी व्यवस्था स्थापित हो सके। मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और यह प्रस्ताव राज्य में एक बड़े कानूनी और सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>

</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-intensifies-over-mandatory-live-in-registration-proposal-in-ucc-draft/article-56256</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-intensifies-over-mandatory-live-in-registration-proposal-in-ucc-draft/article-56256</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/uniform-civil-code.jpg"                         length="132029"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        