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                <title>Omkareshwar - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ओंकारेश्वर मंदिर में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की संख्या बढ़ी, अब रोज 6 हजार श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[27 जून से नई व्यवस्था लागू, 4 हजार की जगह प्रतिदिन 6 हजार ऑनलाइन टिकट होंगे जारी; सामान्य कतारों का दबाव घटने और मंदिर की आय बढ़ने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-number-of-online-early-darshan-tickets-increased-in-omkareshwar/article-57118"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/omkareshwar-temple-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने ऑनलाइन शीघ्र दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रतिदिन जारी होने वाले ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की संख्या 4,000 से बढ़ाकर 6,000 कर दी गई है। नई व्यवस्था 27 जून से प्रभावी हो गई है। प्रत्येक ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकट का शुल्क पहले की तरह 300 रुपये ही रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से अधिक श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन का अवसर मिलेगा और मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। ओंकारेश्वर मंदिर देश के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और यहां पूरे वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि, अमावस्या, पूर्णिमा और अन्य धार्मिक पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की सीमित संख्या के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु टिकट बुक नहीं कर पाते थे। कई लोगों को सामान्य कतार में लंबा इंतजार करना पड़ता था। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए टिकटों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और ऑनलाइन टिकटों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। पहले प्रतिदिन 4,000 ऑनलाइन टिकट उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन अब 2,000 अतिरिक्त टिकट जारी किए जाएंगे। इससे रोजाना कुल 6,000 श्रद्धालु ऑनलाइन शीघ्र दर्शन सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु रूप से संचालित होगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य दर्शन की कतारों पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। अभी तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऑनलाइन टिकट नहीं मिलने के कारण सामान्य लाइन में शामिल हो जाते थे, जिससे कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था। अब अधिक लोगों को ऑनलाइन टिकट मिलने से सामान्य कतारों में भी भीड़ कम होगी और बिना शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं को भी पहले की तुलना में कम समय में दर्शन करने का अवसर मिल सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस फैसले से मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अब तक 4,000 ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 12 लाख रुपये की आय होती थी। टिकटों की संख्या बढ़कर 6,000 होने के बाद यह आय बढ़कर लगभग 18 लाख रुपये प्रतिदिन पहुंच जाएगी। यानी केवल ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों से ही मंदिर को प्रतिदिन लगभग 6 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। यदि पूरे वर्ष इसी व्यवस्था के अनुसार टिकटों की बुकिंग होती है तो सालाना आय में करीब 21 करोड़ रुपये तक की वृद्धि संभव मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन का यह भी अनुमान है कि ऑनलाइन व्यवस्था बेहतर होने से अन्य श्रेणियों के टिकटों की बुकिंग में भी वृद्धि होगी। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 1,000 अतिरिक्त टिकट अन्य श्रेणियों में भी बुक हो सकते हैं, जिससे लगभग 3 लाख रुपये प्रतिदिन की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, स्वच्छता, पेयजल, प्रतीक्षालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन टिकटों की संख्या बढ़ने से दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को पहले से यात्रा की बेहतर योजना बनाने में आसानी होगी। कई बार टिकट उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को सामान्य कतार में घंटों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब अधिक टिकट उपलब्ध होने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। ओंकारेश्वर के पंडित नीलेश पुरोहित ने भी जिला प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला श्रद्धालुओं के हित में है और इससे दर्शन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को समय पर दर्शन का लाभ मिलेगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए समय-समय पर ऐसी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना आवश्यक है। मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में ओंकारेश्वर का विशेष महत्व है। यहां हर दिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके चलते मंदिर प्रशासन भी डिजिटल सुविधाओं और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार कर रहा है। ऑनलाइन टिकट व्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देना और भीड़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से ही टिकट बुक करें और तय समय के अनुसार मंदिर पहुंचें। इससे अनावश्यक भीड़ से बचा जा सकेगा और सभी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन का लाभ मिल सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 13:29:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मंदिरों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम लागू करने की तैयारी, पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या विवाद के बाद मध्य प्रदेश में बनेगी एक्सपर्ट कमेटी, बड़े देवस्थानों की दान व्यवस्था की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/governments-emphasis-on-increasing-transparency-preparation-to-implement-digital-donation/article-56634"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/digital-donation-system.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदे और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सामने आए विवाद के बाद मध्य प्रदेश सरकार अब प्रदेश के प्रमुख मंदिरों की दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार बड़े देवस्थानों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम को व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है, ताकि नकद लेन-देन पर निर्भरता कम हो और दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने संकेत दिए हैं कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, खंडवा के ओंकारेश्वर मंदिर सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल दान व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से न केवल दान प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि मंदिरों की आय और खर्च का रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए राज्य सरकार एक विशेषज्ञ समिति का गठन करने जा रही है। यह समिति देश के उन प्रमुख मंदिरों का अध्ययन करेगी जहां दान और चढ़ावे के प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। समिति विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध मंदिरों का दौरा कर वहां लागू व्यवस्थाओं को समझेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश के मंदिरों में नई व्यवस्थाएं लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब मंदिरों में दान राशि और संपत्ति के प्रबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में नकद दान करते हैं, ऐसे में रिकॉर्ड रखने और निगरानी की मजबूत व्यवस्था जरूरी हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में पहले भी मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था को लेकर गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। सबसे चर्चित मामला रामराजा मंदिर से जुड़ा रहा है, जहां वर्ष 2017 में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासन को भी चौंका दिया था। उस समय मंदिर के खजाने, दान राशि, आभूषणों और विभिन्न अभिलेखों में कथित गड़बड़ियों की बात सामने आई थी। प्रारंभिक जांच में कई तरह की विसंगतियां उजागर होने के बाद प्रशासन ने मामला दर्ज कराया था। बताया जाता है कि तत्कालीन जांच में मंदिर की नकद राशि, गहनों और स्टॉक रजिस्टर से जुड़ी कई अनियमितताओं के संकेत मिले थे। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। हालांकि मामला वर्षों तक जांच के स्तर पर ही उलझा रहा। नौ साल बीत जाने के बावजूद कथित रूप से गायब हुई संपत्ति और नकदी के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आ सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लंबे समय तक जांच लंबित रहने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि अत्यधिक लंबी अवधि तक विवेचना लंबित रखना त्वरित न्याय के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता। अदालत की टिप्पणी के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण रहे हैं और इस फैसले को उच्च स्तर पर चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। मंदिरों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम लागू होने से ऐसी कई समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। डिजिटल भुगतान का हर लेन-देन रिकॉर्ड में दर्ज होता है, जिससे हिसाब-किताब की निगरानी आसान हो जाती है। साथ ही दानदाताओं को भी यह भरोसा मिलता है कि उनकी ओर से दी गई राशि का सही उपयोग किया जा रहा है। कई बड़े धार्मिक संस्थानों ने पहले ही डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन दान की सुविधा शुरू कर दी है, जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है।  सरकार की प्रस्तावित समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में डिजिटल दान व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:50 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत में सजा ओंकारेश्वर, हाई अलर्ट पर तीर्थ नगरी</title>
                                    <description><![CDATA[ज्योतिर्लिंग दर्शन-पूजन के लिए आज पहुंचेंगी राष्ट्रपति, 2600 सुरक्षाकर्मी तैनात; कई घंटों तक दर्शन और यातायात रहेगा प्रभावित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/omkareshwar-pilgrimage-city-on-high-alert-to-welcome-president-draupadi/article-56282"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/president-droupadi-murmu-omkareshwar-visit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे को लेकर पूरी तीर्थ नगरी विशेष सुरक्षा घेरे में आ गई है। राष्ट्रपति 18 और 19 जून को मध्यप्रदेश के खंडवा जिले स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। उनके आगमन को लेकर प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पिछले कई दिनों से तैयारियों में जुटी हुई हैं। ओंकारेश्वर को आकर्षक तरीके से सजाया गया है और प्रमुख मार्गों पर साफ-सफाई के साथ सुरक्षा इंतजाम भी मजबूत किए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार शाम ओंकारेश्वर पहुंचकर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन करेंगी। इस दौरान राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन ने 17 जून से 19 जून तक ओंकारेश्वर क्षेत्र को नो-ड्रोन जोन घोषित किया है। इस अवधि में ड्रोन, पैरामोटर, पैराग्लाइडर और अन्य उड़ने वाले उपकरणों के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप, प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड, अर्धसैनिक बल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त तैनाती की गई है। करीब 2600 सुरक्षाकर्मी ओंकारेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में तैनात रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति के आगमन से पहले कोठी हेलीपेड, एनएचडीसी गेस्ट हाउस और ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर तक कई बार रिहर्सल की। सेना के हेलीकॉप्टरों ने भी हेलीपेड पर लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास किया। सुरक्षा जांच के दौरान कई बार यातायात को भी अस्थायी रूप से रोका गया। बुधवार को राष्ट्रपति के प्रस्तावित मार्ग पर प्रशासन और सुरक्षा बलों ने फुल ड्रेस रिहर्सल की। निर्धारित रूट पर 25 से 30 वाहनों का काफिला निकाला गया और विभिन्न सुरक्षा बिंदुओं की समीक्षा की गई। रिहर्सल के दौरान कोठी हेलीपेड से लेकर मंदिर परिसर तक यातायात कुछ समय के लिए पूरी तरह रोक दिया गया। मोरटक्का और सनावद की ओर से आने वाले वाहनों को भी वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया। राष्ट्रपति के दौरे के चलते श्रद्धालुओं को भी कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन के अनुसार राष्ट्रपति के मंदिर पहुंचने से लगभग तीन घंटे पहले सामान्य दर्शन व्यवस्था बंद कर दी जाएगी। दोपहर से लेकर रात करीब 8 बजे तक ज्योतिर्लिंग के दर्शन प्रभावित रह सकते हैं। इसके अलावा दिनभर वीआईपी मूवमेंट के कारण कई बार ट्रैफिक रोका जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय का ध्यान रखें। सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल और मंदिर परिसर के आसपास कई वस्तुओं के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। नागरिकों को हथियार, विस्फोटक सामग्री, ज्वलनशील पदार्थ, चाकू, बड़े बैग, लेजर लाइट, ड्रोन, कैमरा युक्त उड़ने वाले उपकरण और अन्य प्रतिबंधित सामग्री लेकर आने की अनुमति नहीं होगी। सुरक्षा जांच के बाद ही लोगों को निर्धारित क्षेत्रों में प्रवेश दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति के दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण कार्यक्रम 19 जून को आयोजित होने वाला राज्य स्तरीय सिकल सेल जागरूकता कार्यक्रम है। विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम की तैयारियां कोठी के पास थापना क्षेत्र में की गई हैं। राष्ट्रपति सुबह लगभग 10 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगी और वहां लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगी। इसके बाद वे कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगी। राज्य सरकार इस आयोजन को जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रपति के दौरे को लेकर सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। जिले के वरिष्ठ अधिकारी लगातार तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, यातायात और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।ओंकारेश्वर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां वे देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी, वहीं दूसरी ओर सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी। ऐसे में पूरे क्षेत्र में उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष सतर्कता भी देखने को मिल रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:00:50 +0530</pubDate>
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