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                <title>Rehabilitation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Rehabilitation RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर प्रशासन का जोर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर के नकटी गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत कई मकानों को हटाया। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास व्यवस्था को लेकर अपनी समस्याएं सामने रखीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/administrations-emphasis-on-rehabilitation-of-affected-families-action-taken-to/article-57418"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nakti-village.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जिसके बाद पूरे इलाके में दिनभर हलचल का माहौल बना रहा। सुबह करीब चार बजे से शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, नगर निगम की टीम और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। कार्रवाई के तहत कई मकानों को हटाया गया। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने खुले स्थानों पर दिन और रात बिताई। इनमें महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल थे। प्रभावित लोगों का कहना है कि अचानक शुरू हुई कार्रवाई के कारण उन्हें अपना सामान समेटने और वैकल्पिक व्यवस्था करने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए मकानों के पास ही बैठे रहे। कुछ लोग मलबे के बीच अपने घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की कोशिश करते दिखाई दिए। कई महिलाओं और बुजुर्गों ने बताया कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अब रहने की सुरक्षित जगह और बच्चों की देखभाल की है। बारिश का मौसम शुरू होने के कारण लोगों की चिंता और बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि फिलहाल उनके पास रहने के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं है और उन्हें जल्द से जल्द मूलभूत सुविधाओं के साथ पुनर्वास की आवश्यकता है। रात में कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। इस दौरान कई लोगों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना था कि पुनर्वास के लिए जो मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वे बड़े परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कुछ लोगों ने दावा किया कि 12 से 14 सदस्यों वाले परिवारों को एक ही कमरा आवंटित किया जा रहा है। साथ ही बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से इन व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्हें भरोसा दिया गया था कि बरसात के मौसम तक किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं होगी। कार्रवाई शुरू होने के बाद कई ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी भी जताई। वहीं इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और विभिन्न दलों के नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर बयान दिए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पूरे अभियान को नियमानुसार की गई कार्रवाई बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए विरोध की स्थिति भी बनी। कई ग्रामीण अपने परिवारों के साथ मौके पर ही बैठ गए और कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल ने लोगों को वहां से हटाया ताकि अभियान प्रभावित न हो। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहा और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जाती रही। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। इस बीच प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर भी जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में पात्र परिवारों को बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रभावित लोगों के सामान को भी नगर निगम की टीम की मदद से नए स्थान तक पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और पात्र परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">दिनभर चली कार्रवाई के दौरान कई भावुक दृश्य भी सामने आए। कुछ बच्चे अपने टूटे हुए घरों के सामने बैठे दिखाई दिए, जबकि कई परिवार अपने सामान के साथ खुले में इंतजार करते रहे। प्रभावित लोगों का कहना है कि सुबह से उन्हें भोजन बनाने का अवसर नहीं मिला और छोटे बच्चों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर प्रशासनिक टीम की ओर से मौके पर मौजूद लोगों और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए नाश्ते के पैकेट भी वितरित किए गए। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए बरसात के मौसम में इस तरह की कार्रवाई पर चिंता जताई। वहीं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था की मांग की। दूसरी ओर प्रशासन ने दोहराया कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आवास आवंटन की प्रक्रिया जारी है तथा सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। नकटी गांव में कार्रवाई के बाद हालात सामान्य करने के प्रयास जारी हैं। प्रशासन का ध्यान पुनर्वास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर है, जबकि प्रभावित परिवार बेहतर आवास और मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए 80 घरों पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों का हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह से तैनात रही भारी पुलिस फोर्स, महिलाओं की पुलिस से धक्का-मुक्की, प्रशासन बोला- प्रभावित परिवारों को नया रायपुर में मिलेगा आवास]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ruckus-by-villagers-over-bulldozer-on-80-houses-for-mla/article-57300"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nakti-village-demolition.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर के माना इलाके स्थित नकटी गांव में सोमवार सुबह उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने करीब 80 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे। जैसे ही जेसीबी मशीनें गांव में पहुंचीं, ग्रामीण अपने घरों के सामने जमा हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और पुलिस व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रशासन के अनुसार जिन मकानों को हटाया गया, उनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने 32 मकान भी शामिल हैं। कार्रवाई को देखते हुए रविवार देर रात से ही गांव और आसपास के इलाके में एक हजार से अधिक पुलिस जवान तैनात कर दिए गए थे। सुबह प्रशासनिक टीम ने सुरक्षा घेरे के बीच कार्रवाई शुरू की। कई लोगों ने जेसीबी मशीनों के सामने खड़े होकर विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर अभियान जारी रखा।<img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd"> </p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के दौरान गांव का माहौल बेहद भावुक नजर आया। कई परिवार अपने घरों का सामान बाहर निकालते दिखाई दिए। महिलाएं रोती-बिलखती रहीं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे मलबे के बीच खड़े होकर अपने टूटते घरों को देखते रहे। इस बीच एक छोटी बच्ची ने रोते हुए कहा कि उसने सुबह से कुछ नहीं खाया, क्योंकि घर में खाना बनाने का मौका ही नहीं मिला। बच्ची की यह बात सुनकर मौके पर मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि फिलहाल उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे। उनका आरोप है कि दो दिन पहले ही क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान भरोसा दिलाया था कि बारिश के मौसम में किसी का घर नहीं हटाया जाएगा। इसी आश्वासन के कारण लोगों ने तत्काल किसी वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी भी नहीं की थी। ऐसे में सोमवार सुबह अचानक हुई कार्रवाई से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। कार्रवाई के दौरान कई जगह महिलाओं ने पुलिस के सामने बैठकर विरोध करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने जेसीबी मशीनों को रोकने का भी प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की और सुरक्षा घेरे में कार्रवाई जारी रखी। हालांकि पूरे अभियान के दौरान कई बार तनावपूर्ण माहौल बना रहा और ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पहले से तय योजना के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक विधायक कॉलोनी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने दावा किया कि सभी पात्र परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवंटन की कार्रवाई भी जारी है और लोगों को नियमानुसार नए मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले मकान तोड़ना उचित नहीं था। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अब भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें नया मकान कब मिलेगा और वहां तक पहुंचने की व्यवस्था कैसे होगी। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बेघर होने से उनके सामने रहने, खाने और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नकटी गांव में कई परिवार वर्षों से रह रहे थे और उन्होंने अपने घरों को धीरे-धीरे बनाकर तैयार किया था। अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका सामान खुले में आ गया है। कई लोग अपने घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कुछ परिवार मलबे के बीच ही बैठे रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव में माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है और इलाके में पुलिस बल की तैनाती जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:28:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>10 लेन सड़क परियोजना में पुनर्वास को प्राथमिकता, कोई परिवार बेघर नहीं होगा</title>
                                    <description><![CDATA[नयापुरा सेंट्रल जेल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि देने के निर्देश, मंत्री विश्वास सारंग ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rehabilitation-will-be-given-priority-in-10-lane-road-project/article-56284"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-10-lane-road-project.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल में प्रस्तावित 10 लेन सड़क परियोजना को लेकर प्रशासन की कार्रवाई के बीच प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। नयापुरा सेंट्रल जेल के समीप सड़क निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की तैयारी के दौरान बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। कार्रवाई की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन किसी भी गरीब परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि 10 लेन सड़क परियोजना शहर के यातायात को बेहतर बनाने और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। हालांकि सड़क निर्माण की जद में आने वाले कई परिवारों के सामने विस्थापन की स्थिति बन रही थी। स्थानीय लोगों ने अपनी चिंता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी थी। इसी के बाद मंत्री विश्वास सारंग ने स्वयं मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार विकास और जनकल्याण दोनों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित परिवारों को पहले वैकल्पिक भूमि और आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। जब तक पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी परिवार को हटाने की जल्दबाजी नहीं की जाए। उनका कहना था कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार वर्षों से यहां रह रहे हैं और उन्हें अचानक असुविधा में नहीं डाला जा सकता। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक परिवार को सम्मानपूर्वक नई जगह बसाया जाए। मौके पर मौजूद अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि स्थानांतरण की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से हो और लोगों को पर्याप्त समय दिया जाए। मंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को शिफ्टिंग की तैयारी के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय मिलना चाहिए। साथ ही एनएचएआई और प्रशासन मिलकर सामान के स्थानांतरण तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए जिससे उसकी आजीविका, बच्चों की पढ़ाई या दैनिक जीवन प्रभावित हो।</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्र के लोगों ने मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। कई परिवारों ने बताया कि वे लंबे समय से इसी इलाके में रह रहे हैं और यदि उन्हें दूर बसाया गया तो रोजगार और बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। इस पर मंत्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित परिवारों को उनके वर्तमान निवास क्षेत्र के आसपास ही वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए। उनका मानना है कि पुनर्वास केवल जमीन देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सड़क परियोजना शहर की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है। इससे आने वाले वर्षों में यातायात व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। लेकिन इसके साथ ही पुनर्वास की प्रक्रिया को संवेदनशील और मानवीय तरीके से पूरा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित परिवारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है और पात्र लोगों को नियमानुसार लाभ देने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, हुजूर तहसील के अंतर्गत आने वाले कोल्हूखेड़ी और मीरपुर क्षेत्र में भी प्रशासन ने शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। एसडीएम विनोद सोनकिया के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमणों को हटाने के लिए अभियान चलाया। इस दौरान बुलडोजर की मदद से शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। शहर में चल रही इन कार्रवाइयों को लेकर प्रशासन का कहना है कि विकास परियोजनाओं और शासकीय भूमि संरक्षण दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि पुनर्वास की प्रक्रिया किस तरह लागू होती है और प्रभावित परिवारों को कब तक वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:10 +0530</pubDate>
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