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                <title>Class 12 Students - दैनिक जागरण</title>
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                <title>शिक्षकों की कमी पर भड़के छात्र, विरोध के बाद तीन घंटे में समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर के माधवराव सप्रे स्कूल में 12वीं के 46 छात्रों को TC लेने की सलाह, प्रदर्शन के बाद DMF फंड से शिक्षकों की व्यवस्था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/solution-in-three-hours-after-student-protest-over-shortage-of/article-56295"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhavrao-sapre-school.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के प्रतिष्ठित माधवराव सप्रे उत्कृष्ट हिंदी मीडियम स्कूल में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत छात्रों के लिए परेशानी लेकर आई। 12वीं कक्षा में कॉमर्स और आर्ट्स विषय के छात्रों को यह कहकर झटका दिया गया कि स्कूल में संबंधित विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वे ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) लेकर किसी दूसरे स्कूल में प्रवेश ले लें। स्कूल प्रबंधन की इस सलाह से छात्र और उनके अभिभावक परेशान हो गए। मामला तेजी से बढ़ा और बुधवार को बड़ी संख्या में छात्र कलेक्ट्रेट पहुंच गए, जहां उन्होंने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। छात्रों के विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आया और कुछ ही घंटों के भीतर शिक्षकों की व्यवस्था करने का फैसला कर लिया गया। माधवराव सप्रे उत्कृष्ट हिंदी मीडियम स्कूल में पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान 12वीं कक्षा में कॉमर्स और आर्ट्स विषय के छात्रों को प्रवेश दिया गया था। उस समय जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ फंड के माध्यम से शिक्षकों की व्यवस्था की गई थी। पूरे साल पढ़ाई सामान्य रूप से चलती रही और छात्रों को उम्मीद थी कि इस बार भी उनकी कक्षाएं पहले की तरह संचालित होंगी। लेकिन 16 जून से नए सत्र की शुरुआत होते ही स्थिति बदल गई। स्कूल में संबंधित विषयों के शिक्षक मौजूद नहीं थे और पढ़ाई शुरू होने से पहले ही छात्रों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण स्कूल प्रबंधन ने छात्रों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने की सलाह दी। यह बात जैसे ही छात्रों तक पहुंची, उनमें नाराजगी फैल गई। कई छात्रों का कहना था कि उन्होंने पिछले वर्ष इसी स्कूल में पढ़ाई की है और अब अंतिम वर्ष में उन्हें दूसरे स्कूल में जाने के लिए कहना उचित नहीं है। छात्रों का यह भी कहना था कि यदि पहले से पद स्वीकृत नहीं थे या शिक्षकों की व्यवस्था नहीं थी तो फिर प्रवेश क्यों दिया गया। इसी सवाल को लेकर छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। बुधवार को छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन किया। उनके साथ एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी मौजूद थे। छात्र नेता हेमंत पाल के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की कि तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति की जाए ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा का साल होने के कारण पढ़ाई में थोड़ी भी देरी उनके भविष्य पर असर डाल सकती है। प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए और मामले की समीक्षा शुरू की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> प्रदर्शन शुरू होने के कुछ समय बाद ही जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्राचार्य से चर्चा की और पिछले सत्र में कार्यरत शिक्षकों को दोबारा नियुक्त करने के निर्देश दिए। इसके बाद स्थिति सामान्य होने लगी और छात्रों को आश्वासन दिया गया कि उनकी कक्षाएं नियमित रूप से संचालित होंगी। छात्रों ने भी प्रशासन के फैसले का स्वागत किया, हालांकि उन्होंने यह सवाल जरूर उठाया कि यदि छह महीने से समस्या की जानकारी अधिकारियों को थी तो समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि शिक्षकों की कमी कोई नई समस्या नहीं थी। प्रबंधन के अनुसार पिछले छह महीनों के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को तीन अलग-अलग पत्र भेजे गए थे। इन पत्रों में शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की गई थी ताकि नए सत्र में किसी तरह की परेशानी न आए। लेकिन समय रहते कोई निर्णय नहीं लिया गया। नतीजा यह हुआ कि सत्र शुरू होते ही समस्या सामने आ गई और छात्रों को सड़क पर उतरना पड़ा। कई अभिभावकों का भी कहना है कि यदि पहले से तैयारी की जाती तो बच्चों को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्कूल की प्रिंसिपल अनुपमा श्रीवास्तव ने बताया कि कॉमर्स विषय का पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद छात्रों की मांग को देखते हुए प्रवेश दिया गया था। पिछले वर्ष डीएमएफ फंड के जरिए शिक्षक उपलब्ध कराए गए थे और पढ़ाई जारी रही थी। इस बार भी उसी व्यवस्था को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर पूर्व में कार्यरत शिक्षक को बनाए रखने का फैसला लिया गया है और अब छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। यह पूरा घटनाक्रम शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों और योजना निर्माण की चुनौतियों को भी सामने लाता है। एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर स्कूल उपलब्ध कराने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। छात्रों के विरोध के बाद समस्या का समाधान हो गया है, लेकिन यह मामला यह भी दिखाता है कि कई बार प्रशासनिक स्तर पर लंबित मुद्दों का समाधान तब होता है जब छात्र और अभिभावक खुलकर आवाज उठाते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:05:56 +0530</pubDate>
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