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                <title>Cyber Investigation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Cyber Investigation RSS Feed</description>
                
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                <title>छत्तीसगढ़ में ISI से जुड़े संदिग्ध की गिरफ्तारी, जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जांजगीर-चांपा में किरायेदार सत्यापन के दौरान पकड़ा गया आरोपी, विदेशी नेटवर्क से संपर्क के आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/isi-related-suspect-arrested-in-chhattisgarh-investigation-intensified/article-56642"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/isi-suspect-arrest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े होने के संदेह में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 21 जून को अकलतरा थाना क्षेत्र में किरायेदार सत्यापन अभियान के दौरान की गई, जब पुलिस टीम संदिग्ध गतिविधियों की जांच के लिए एक मकान पर पहुंची थी। शुरुआती जांच के बाद मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया और आरोपी के मोबाइल से विदेशी संपर्कों के संकेत मिलने का दावा किया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही है और कई स्तरों पर जांच जारी है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान सेवक सिंह के रूप में हुई है, जो पंजाब के तरनतारन जिले के पट्टी इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। वह पिछले कुछ समय से जांजगीर-चांपा के अकलतरा क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था। एसपी विजय कुमार पांडेय के निर्देश पर जिले में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई थी, इसी दौरान किरायेदारों के वेरिफिकेशन अभियान के तहत पुलिस को उसकी मौजूदगी की सूचना मिली। मौके पर पहुंची टीम ने जब उससे पूछताछ की तो उसके जवाबों में कई विरोधाभास सामने आए, जिसके बाद शक और गहरा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने जब उसके मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब और कुछ अन्य देशों के नंबरों से लगातार संपर्क के संकेत मिले। इसके साथ ही वॉट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संदिग्ध बातचीत के भी सबूत मिलने का दावा किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कुछ समय से विदेशी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और उससे छत्तीसगढ़ के संवेदनशील इलाकों, लोगों और वाहनों से जुड़ी जानकारियां साझा करने की आशंका है। हालांकि इन सभी बिंदुओं की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। मामले में सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब पूछताछ में यह संकेत मिले कि आरोपी का संपर्क पाकिस्तान स्थित कुछ ISI समर्थित नेटवर्क से हो सकता है। पुलिस के मुताबिक उसके मोबाइल से कई वॉट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और वीडियो कॉल के निशान मिले हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह संपर्क किस स्तर का था और इसका उद्देश्य क्या था। पुलिस का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी बात सामने आई है कि आरोपी ड्रोन के जरिए हथियार मिलने की योजना से जुड़ा हो सकता है, हालांकि पुलिस ने इसे अभी केवल आशंका बताया है। अधिकारियों के अनुसार यह दावा किया गया है कि यदि हथियार उपलब्ध कराए जाते तो उनका उपयोग किसी टारगेट किलिंग जैसी गतिविधि में किया जा सकता था, लेकिन इसकी पुष्टि फिलहाल नहीं की जा सकी है। सुरक्षा एजेंसियां इस पहलू को बेहद गंभीरता से जांच रही हैं और किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 152 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। साथ ही उसके मोबाइल और डिजिटल उपकरणों को जब्त कर साइबर विशेषज्ञों की टीम को जांच सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह मामला किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल से जुड़ा है या फिर यह केवल सीमित संपर्कों तक ही सीमित है।स्थानीय स्तर पर इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस प्रशासन ने किरायेदार सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि बाहरी राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की निगरानी और समय पर वेरिफिकेशन बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:09:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दुर्ग में साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन, 6 आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन, 30 संदिग्ध खाताधारकों की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-action-on-cyber-fraud-network-in-durg-6-accused/article-56298"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उतई पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने ऐसे छह लोगों को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेन-देन के लिए अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत सरकार के गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी स्थानीय पुलिस को मिली। इसके बाद जांच शुरू की गई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान उतई क्षेत्र में संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कुछ खातों को चिन्हित किया गया। इन खातों के लेन-देन की पड़ताल करने पर कई संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि खातों में बड़ी मात्रा में ऐसी रकम जमा की गई थी, जिसका संबंध साइबर ठगी के मामलों से था। खाते में पैसा आने के बाद उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या फिर नकद निकाल लिया जाता था। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है। पुलिस ने जांच के आधार पर इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में चिह्नित किया और उनसे जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक इन खातों में लगातार संदिग्ध ट्रांजेक्शन होती रही। बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों के विश्लेषण के बाद पुलिस को यह आशंका हुई कि यह कोई सामान्य बैंकिंग गतिविधि नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क है। अधिकारियों ने बैंकिंग दस्तावेज, खातों की केवाईसी जानकारी और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच की। इसके आधार पर छह खाताधारकों की पहचान की गई, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम कार्ड अन्य लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी इसके बदले आर्थिक लाभ प्राप्त करते थे। उन्हें खाते उपलब्ध कराने के एवज में कुछ राशि दी जाती थी। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों या शहरों में की गई ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधियों के लिए ऐसे खाते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके जरिए ठगी के पैसों का स्रोत और अंतिम गंतव्य छिपाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई को साइबर अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गिरफ्तार किए गए आरोपियों में भूपेन्द्र हिरवानी (23), नवलेश्वर पाटले (35), पवन सिंह (32), आकाश चंद्राकर (37), अर्पण शुक्ला (23) और मुकेश सिंह (23) शामिल हैं। सभी आरोपी भिलाई के सेक्टर-7 क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम कार्ड और बैंक खातों से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। जब्त सामग्री की फोरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है और मामले की जांच अभी जारी है। अब तक कुल 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल करने वाले मुख्य साइबर अपराधी कौन हैं और उनका नेटवर्क किन राज्यों तक फैला हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। साइबर अपराध लगातार बदलते स्वरूप में सामने आ रहे हैं और अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या सिम कार्ड किसी अन्य के उपयोग के लिए नहीं देना चाहिए। ऐसा करना न केवल वित्तीय जोखिम पैदा करता है बल्कि व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:06:31 +0530</pubDate>
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