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                <title>France News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>फ्रांस में भीषण हीटवेव से 1000 लोगों की मौत, यूरोप झुलसा</title>
                                    <description><![CDATA[16 देशों में रिकॉर्डतोड़ तापमान, सड़कें पिघलीं, स्कूल बंद, जंगलों में आग, बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a41fb2e9628b/article-57262"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/europe-heatwave-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">यूरोप इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी की लहर से जूझ रहा है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। फ्रांस में हाल ही में आई हीटवेव के दौरान करीब 1,000 अतिरिक्त मौतों की पुष्टि हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ गई है। फ्रांस की हेल्थ एजेंसी के अनुसार ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच दर्ज की गई हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह “अतिरिक्त मौतें” हैं, यानी सामान्य औसत से करीब 1,000 अधिक लोगों की जान गई है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग लोग रहे हैं और करीब 85 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों की उम्र अधिक पाई गई है। अधिकतर मौतें घरों के भीतर ही हुई हैं, जहां गर्मी से राहत नहीं मिल पाई। पेरिस और आसपास के इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। यहां तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है और कई घरों में कूलिंग सिस्टम न होने के कारण लोग अधिक प्रभावित हुए हैं। लोग पंखे और एयर कंडीशनर खरीदने के लिए दुकानों पर उमड़ पड़े, जिससे कई जगह स्टॉक खत्म हो गया। प्रशासन ने लोगों को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलने की सलाह दी है और अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img alt="2Q=="></img></p>
<p>फ्रांस के अलावा पूरे यूरोप में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, इटली, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड और चेक रिपब्लिक समेत कुल 16 देशों में तापमान ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कहीं सड़कें पिघलने लगी हैं तो कहीं रेल पटरियां गर्म होकर मुड़ने के कारण ट्रेनों की रफ्तार सीमित करनी पड़ी है। कई देशों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में लोग तटीय इलाकों और ठंडे क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। ब्रिटेन में स्थिति बेहद असामान्य मानी जा रही है, जहां लगातार तीन दिनों तक रेड वार्निंग जारी करनी पड़ी है। दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36 डिग्री से अधिक पहुंच गया है और अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं के मरीज तेजी से बढ़े हैं। कई शहरों में 1000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है क्योंकि कक्षाओं का तापमान असहनीय हो गया है। वहीं जर्मनी में 41.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है, जो देश के इतिहास का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। स्पेन में स्थिति और भी गंभीर है, जहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। यहां भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं और कई कस्बों को खाली कराना पड़ा है। दमकल विभाग लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटा है। इटली में 18 शहरों में रेड अलर्ट जारी है और सरकार ने लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने की चेतावनी दी है। पो नदी का जलस्तर भी तेजी से गिर रहा है, जिससे खेती और पेयजल पर संकट गहराने लगा है।</p>
<p><img alt="Z"></img></p>
<p>डेनमार्क जैसे ठंडे देश में भी तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो वहां के इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। चेक रिपब्लिक में भी तापमान 40 डिग्री के पार चला गया है और मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। स्विट्जरलैंड में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा बढ़ गया है। यूरोप की यह हीटवेव केवल असामान्य मौसम नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। वैज्ञानिकों के अनुसार यूरोप का तापमान वैश्विक औसत से तेज गति से बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं और अधिक बार देखने को मिल सकती हैं। गर्मी की यह लहर न केवल स्वास्थ्य बल्कि अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और कृषि पर भी गंभीर असर डाल रही है।पूरे यूरोप में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। सरकारें लगातार नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 11:08:10 +0530</pubDate>
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                <title>सुबह ईरान को चेतावनी, रात में शांति समझौता; एक दिन में बदला ट्रम्प का रुख</title>
                                    <description><![CDATA[G7 समिट में सख्त बयान देने वाले ट्रम्प ने कुछ घंटों बाद फ्रांस के वर्साय पैलेस में ईरान के साथ शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/warning-to-iran-in-the-morning-peace-agreement-at-night/article-56330"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच बुधवार का दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ही दिन में ऐसा रुख दिखाया जिसने दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया। सुबह तक ईरान को कड़ी चेतावनी देने वाले ट्रम्प ने रात होते-होते उसी देश के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। यह घटनाक्रम फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आया, जहां ट्रम्प के बयानों और फैसलों ने वैश्विक कूटनीति को नई दिशा दे दी। दिन की शुरुआत में ट्रम्प ने G7 समिट के दौरान आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि यदि आने वाले समय में समझौता नहीं हुआ और हालात बिगड़ते हैं, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया और माना गया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ दबाव की नीति जारी रखेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दौरान ट्रम्प की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले नेता हैं। ट्रम्प की यह टिप्पणी भी दिनभर चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा नजरें ईरान को लेकर उनके अगले कदम पर टिकी हुई थीं। G7 सम्मेलन समाप्त होने के बाद ट्रम्प अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस के लिए रवाना हुए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उन्हें विशेष रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया था। बताया गया कि G7 नेताओं में ट्रम्प अकेले ऐसे नेता थे जिन्हें इस विशेष आयोजन के लिए न्योता मिला था। वर्साय पहुंचने पर मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्साय पैलेस अपने भव्य इतिहास और शानदार वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ट्रम्प ने यहां के ऐतिहासिक हिस्सों का दौरा किया और विशेष रूप से शीशमहल को काफी देर तक देखा। बताया जाता है कि 357 बड़े आइनों से सजी इस ऐतिहासिक गैलरी की भव्यता ने उन्हें प्रभावित किया। सोने की नक्काशी और शाही सजावट के प्रति रुचि रखने वाले ट्रम्प ने इस इमारत की खुलकर प्रशंसा भी की। इस दौरान माहौल पूरी तरह औपचारिक और मैत्रीपूर्ण नजर आ रहा था। हालांकि असली घटनाक्रम डिनर शुरू होने से ठीक पहले सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्साय पैलेस में मौजूद कई अधिकारियों और मेहमानों को आखिरी समय तक यह जानकारी नहीं थी कि ईरान से जुड़े समझौते पर उसी रात हस्ताक्षर हो सकते हैं। कुछ तस्वीरों में ट्रम्प और मैक्रों को एक फोन कॉल के दौरान बातचीत करते हुए देखा गया। माना जा रहा है कि इसी दौरान अंतिम स्तर की चर्चा हुई और समझौते को मंजूरी मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद ट्रम्प ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। हस्ताक्षर के समय फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उनके साथ मौजूद थे, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी वहां उपस्थित थे। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रम्प की तस्वीरें सामने आते ही पूरी दुनिया में यह खबर तेजी से फैल गई। खास बात यह रही कि जिस समझौते को आधिकारिक तौर पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में अंतिम रूप दिया जाना था, उस पर अपेक्षा से पहले फ्रांस में ही हस्ताक्षर कर दिए गए। हस्ताक्षर के बाद ट्रम्प ने मीडिया के सामने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। जब एक पत्रकार ने उनसे समझौते के बारे में पूछा तो उन्होंने जोर से जवाब दिया, “साइन किए।” इस एक वाक्य ने पूरे दिन की राजनीतिक कहानी को समेट दिया। सुबह जहां ट्रम्प ईरान के खिलाफ सख्त बयान दे रहे थे, वहीं रात तक वे समझौते के जरिए तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा चुके थे। ट्रम्प की यह रणनीति दबाव और बातचीत के मिश्रण पर आधारित रही। पहले उन्होंने कड़ा संदेश देकर अपनी स्थिति मजबूत की और बाद में बातचीत के जरिए समझौते का रास्ता चुना। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे ट्रम्प की पारंपरिक वार्ता शैली का हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें वह पहले सख्त रुख अपनाते हैं और फिर अचानक समझौते की ओर बढ़ जाते हैं। इस समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:57:06 +0530</pubDate>
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