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                <title>FinanceNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>शेयर बाजार में शानदार तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला, निफ्टी 24,100 के पार</title>
                                    <description><![CDATA[घरेलू बाजार में मजबूत शुरुआत के बीच आईटी और मेटल सेक्टर में खरीदारी लौटी, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम दिखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/great-rise-in-the-stock-market-sensex-jumped-400-points/article-57613"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/today-stock-market-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार, 2 जुलाई को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 400 अंकों की तेजी के साथ 77,300 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक की बढ़त लेकर 24,100 के स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटों में आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा और प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। बाजार की तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी कंपनियों के शेयरों का रहा। देश की प्रमुख टेक कंपनियों इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयरों में करीब चार प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी का रुख बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर में सुधार की उम्मीद और आगामी तिमाही नतीजों को लेकर सकारात्मक माहौल के कारण निवेशक आईटी शेयरों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मेटल सेक्टर में भी अच्छी मांग देखने को मिली, जिससे इस क्षेत्र के अधिकांश शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। घरेलू बाजार की मजबूती के बीच एशियाई शेयर बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी दबाव में रहे, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों में अलग-अलग संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार में निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा। विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों की मजबूती और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद निवेशकों का भरोसा बनाए हुए है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान हल्की गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। हालांकि अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का भारतीय बाजार पर ज्यादा असर नहीं दिखाई दिया। बाजार जानकारों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का फोकस फिलहाल भारत की आर्थिक स्थिति, कॉर्पोरेट आय और आने वाले तिमाही नतीजों पर अधिक है, इसलिए विदेशी संकेतों का प्रभाव सीमित नजर आया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की खरीदारी बाजार को सहारा देती दिखाई दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने पिछले सात कारोबारी दिनों में करीब 3,907 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। वहीं पिछले एक महीने में उनकी कुल बिकवाली 36,000 करोड़ रुपये से अधिक रही है। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी जारी रखी है और पिछले एक महीने में 71,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट से बचा हुआ है।  घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। पिछले कुछ वर्षों में म्यूचुअल फंड निवेश, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) और खुदरा निवेशकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसका फायदा यह हुआ है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर पहले की तुलना में कम दिखाई देता है। घरेलू निवेशक बाजार में गिरावट आने पर भी खरीदारी के अवसर तलाश रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया था। एक जुलाई को सेंसेक्स 443 अंकों की बढ़त के साथ 76,922 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 140 अंक चढ़कर 24,005 के स्तर पर पहुंच गया था। लगातार दूसरे दिन बाजार में तेजी का माहौल निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि यह रुझान आगे भी जारी रहता है तो प्रमुख सूचकांक नए रिकॉर्ड स्तरों की ओर बढ़ सकते हैं। आने वाले दिनों में कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे निवेशकों की दिशा तय करेंगे। विशेष रूप से आईटी, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी और मेटल कंपनियों के परिणामों पर बाजार की नजर रहेगी। यदि अपेक्षा से बेहतर नतीजे आते हैं तो बाजार में तेजी और मजबूत हो सकती है। वहीं वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> मौजूदा तेजी के दौरान भी सोच-समझकर निवेश करें। केवल तेजी देखकर किसी शेयर में निवेश करने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और मूल्यांकन का आकलन करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियां अब भी बेहतर विकल्प मानी जा रही हैं। बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और आईटी तथा मेटल सेक्टर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं तो भारतीय शेयर बाजार आने वाले कारोबारी सत्रों में भी मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 11:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिजली बिल के लेट पेमेंट पर बड़ी राहत, अब जितने दिन देरी उतना ही लगेगा ब्याज</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के 66 लाख उपभोक्ताओं को फायदा, तय तारीख के बाद पूरे महीने का सरचार्ज नहीं देना होगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-on-late-payment-of-electricity-bill-now-interest/article-57311"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-electricity-bill.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के करीब 66 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। अब बिजली बिल की निर्धारित तारीख के बाद भुगतान करने पर पूरे महीने का लेट पेमेंट सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं से केवल उतने ही दिनों का ब्याज लिया जाएगा, जितने दिन तक उन्होंने बिल का भुगतान करने में देरी की होगी। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने इस नई व्यवस्था को उपभोक्ता हित में बड़ा फैसला बताया है और कहा है कि इससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि पहले की तुलना में राहत मिलेगी। पावर कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में इस नियम को लेकर जो जानकारी साझा की जा रही है, वह पूरी तरह सही नहीं है। कंपनी के अनुसार, 'रोजाना ब्याज' या 'दोहरा झटका' जैसी बातें भ्रामक हैं और इससे उपभोक्ताओं के बीच अनावश्यक भ्रम फैल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल लेट पेमेंट चार्ज की गणना को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाना है, ताकि जितनी देरी हो, उसी अनुपात में शुल्क लिया जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">कंपनी के मुताबिक यह बदलाव राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के नए नियमों के तहत लागू किया गया है। आयोग ने इस व्यवस्था को इसलिए मंजूरी दी है ताकि उपभोक्ताओं को छोटी अवधि की देरी पर अनावश्यक रूप से पूरे महीने का सरचार्ज न चुकाना पड़े। पहले की व्यवस्था में यदि कोई उपभोक्ता केवल एक या दो दिन भी बिल जमा करने में देर कर देता था, तब भी उससे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाता था। इससे कई उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था। नई व्यवस्था में अब लेट पेमेंट चार्ज प्रतिदिन के आधार पर लगाया जाएगा। इसके लिए 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर तय की गई है। यानी यदि कोई उपभोक्ता केवल एक दिन देर से बिजली बिल जमा करता है, तो उसे सिर्फ 0.04 प्रतिशत अतिरिक्त राशि ही देनी होगी। इसी तरह यदि भुगतान में पांच दिन की देरी होती है तो पांच दिन के हिसाब से शुल्क लगेगा। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन उपभोक्ताओं को मिलेगा जो किसी कारणवश कुछ दिनों की देरी से बिल जमा कर पाते हैं। पावर कंपनी ने उदाहरण देकर भी नई व्यवस्था को समझाया है। यदि कोई उपभोक्ता पूरे 30 दिन बाद बिजली बिल का भुगतान करता है, तब भी उसे कुल 1.2 प्रतिशत का ही अधिभार देना होगा। पहले यही उपभोक्ता पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत सरचार्ज चुकाता था। यानी अधिकतम स्थिति में भी नई व्यवस्था के तहत पहले की तुलना में कम भुगतान करना होगा। इस तरह देखा जाए तो नई व्यवस्था केवल कम दिनों की देरी वाले उपभोक्ताओं को ही नहीं बल्कि पूरे महीने की देरी करने वालों को भी राहत देती है। अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव का मकसद उपभोक्ताओं को दंडित करना नहीं बल्कि एक व्यावहारिक और पारदर्शी प्रणाली लागू करना है। अब उपभोक्ता जितने दिन की देरी करेंगे, केवल उतने दिन का ही अधिभार देना होगा। इससे बिल भुगतान प्रणाली अधिक निष्पक्ष बनेगी और लोगों में यह विश्वास भी बढ़ेगा कि उनसे केवल वास्तविक देरी के अनुसार ही शुल्क लिया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था में ब्याज दर बढ़ाई नहीं गई है। बल्कि पुराने नियम की तुलना में कुल अधिभार कम हो गया है। इसलिए इसे अतिरिक्त बोझ बताना पूरी तरह गलत है। कंपनी ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और अपुष्ट खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि अब हर दिन अलग से भारी ब्याज देना पड़ेगा, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। नई व्यवस्था में दैनिक गणना केवल शुल्क निर्धारण का तरीका है, न कि अतिरिक्त दंड लगाने की प्रक्रिया। बिजली कंपनी ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस नियम को सही संदर्भ में समझें और केवल प्रमाणित जानकारी ही साझा करें। अधिकारियों का कहना है कि गलत सूचनाओं से उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और अनावश्यक चिंता बढ़ती है। इसलिए किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता देना जरूरी है। यह बदलाव उपभोक्ता हित में उठाया गया कदम है। उनके अनुसार पहले की व्यवस्था में एक दिन की देरी और पूरे महीने की देरी पर लगभग समान अधिभार लगना कई बार अनुचित माना जाता था। नई प्रणाली में देरी की अवधि के अनुसार शुल्क तय होने से बिल भुगतान व्यवस्था अधिक संतुलित और उपभोक्ता अनुकूल बनेगी। इससे समय पर भुगतान करने की आदत को भी बढ़ावा मिलेगा और जिन लोगों से मामूली देरी हो जाती है, उन्हें भी आर्थिक राहत मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:54:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इलॉन मस्क की संपत्ति में रिकॉर्ड गिरावट, एक हफ्ते में ₹33 लाख करोड़ से ज्यादा डूबे</title>
                                    <description><![CDATA[स्पेसएक्स शेयर 16% गिरने से भारी नुकसान, AI निवेश चिंता और वैश्विक बाजार दबाव से ट्रिलियनेयर मस्क की नेटवर्थ में बड़ी कटौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/the-woman-who-reached-shahjahanpur-temple-wearing-a-burqa-said/article-56844"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/elon-musk-net-worth-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति इलॉन मस्क की संपत्ति में इस हफ्ते अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कुछ ही दिन पहले ट्रिलियनेयर बने मस्क की नेटवर्थ अब तेज गिरावट के चलते भारी नुकसान में चली गई है। मुख्य वजह उनकी रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स के शेयरों में आई लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट बताई जा रही है। इस गिरावट ने एक हफ्ते के भीतर उनकी कुल संपत्ति को करीब 350 बिलियन डॉलर यानी लगभग 33.13 लाख करोड़ रुपए तक कम कर दिया है। यह आंकड़ा खुद में इतना बड़ा है कि यह दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति की कुल संपत्ति से भी अधिक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फोर्ब्स की रियल टाइम बिलेनियर लिस्ट के अनुसार, स्पेसएक्स के शेयरों में गिरावट के बाद इलॉन मस्क की नेटवर्थ 1.45 ट्रिलियन डॉलर से घटकर लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 104.15 लाख करोड़ रुपए रह गई है। इस अचानक आई गिरावट ने वैश्विक निवेशकों और टेक सेक्टर में हलचल पैदा कर दी है। खास बात यह है कि मस्क की संपत्ति में यह गिरावट किसी सामान्य उतार-चढ़ाव से कहीं अधिक मानी जा रही है क्योंकि इसमें एक ही हफ्ते में अरबों डॉलर का नुकसान शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्पेसएक्स के शेयरों में यह गिरावट उस समय तेज हुई जब कंपनी ने अपने एआई विस्तार और भविष्य की परियोजनाओं के लिए करीब 20 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1.89 लाख करोड़ रुपए जुटाने की योजना की घोषणा की। इसके लिए कंपनी ने इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड ऑफरिंग का ऐलान किया, जिसके बाद बाजार में निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई और शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई। इसी दबाव के कारण स्पेसएक्स के स्टॉक में एक ही दिन में 16.4% तक की गिरावट दर्ज की गई। इस बिकवाली का असर केवल शेयर कीमतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कंपनी की कुल वैल्यूएशन पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, स्पेसएक्स की मार्केट वैल्यू कुछ ही दिनों में लगभग 928 बिलियन डॉलर यानी करीब 87.84 लाख करोड़ रुपए तक कम हो गई। कंपनी की कुल वैल्यूएशन अब अपने हाई लेवल 2.9 ट्रिलियन डॉलर से गिरकर लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास आ गई है। यह गिरावट टेक सेक्टर में चल रही अनिश्चितता और एआई निवेश से जुड़ी चिंताओं को भी दर्शाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इलॉन मस्क को इतनी बड़ी वित्तीय गिरावट का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले वर्ष 2022 में टेस्ला के शेयरों में भारी गिरावट के दौरान उनकी संपत्ति में लगभग 165 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था, जो उस समय किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी व्यक्तिगत संपत्ति गिरावट मानी गई थी। मस्क की संपत्ति का बड़ा हिस्सा स्पेसएक्स में उनकी करीब 38 प्रतिशत हिस्सेदारी और टेस्ला में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण इन कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव सीधे उनकी नेटवर्थ को प्रभावित करते हैं। स्पेसएक्स की ओर से जारी हालिया कदमों ने बाजार में यह चिंता भी बढ़ा दी है कि क्या बड़ी टेक कंपनियां एआई सेक्टर में बढ़ते मुकाबले के बीच लगातार भारी निवेश जारी रख पाएंगी या नहीं। कंपनी ने हालांकि यह भी दावा किया है कि उसके पास लगभग 100 बिलियन डॉलर से अधिक की नकदी मौजूद है, जो उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाती है। इसके बावजूद निवेशकों के बीच अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों में भी इसका असर देखने को मिला है। अमेरिकी नैस्डैक इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई, जबकि एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया। साउथ कोरिया, जापान और हॉन्गकॉन्ग जैसे बाजारों में तकनीकी शेयरों में बिकवाली तेज रही। भारत के शेयर बाजार पर भी इसका असर पड़ा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। इससे यह साफ है कि एआई और टेक सेक्टर से जुड़ी अनिश्चितता अब वैश्विक स्तर पर असर डाल रही है। इन्वेस्टमेंट-ग्रेड बॉन्ड जैसी वित्तीय रणनीतियां कंपनियों के लिए विस्तार का जरिया तो होती हैं, लेकिन यदि बाजार में विश्वास कमजोर हो जाए तो इसका सीधा असर शेयरों पर पड़ता है। स्पेसएक्स के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली है। निवेशकों ने कंपनी के भारी एआई निवेश योजनाओं को लेकर सतर्कता दिखाई, जिसके कारण शेयरों में तेज गिरावट आई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 17:47:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा, मेटल और आईटी शेयरों में बिकवाली से बाजार दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[वेदांता के शेयर में 6% गिरावट और मेटल-आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली के बीच सेंसेक्स 76,550 और निफ्टी 23,900 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-falls-by-more-than-500-points-market-under-pressure/article-56726"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex2.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान कमजोरी का माहौल देखने को मिला। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली के दबाव के चलते बीएसई सेंसेक्स 500 अंक से अधिक टूटकर 76,550 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी भी करीब 180 अंक फिसलकर 23,900 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में सबसे अधिक दबाव मेटल और आईटी शेयरों पर रहा, जबकि वेदांता के शेयर में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">कारोबार के शुरुआती घंटों से ही निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ कई दिग्गज कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में आई तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी गिरावट का एक प्रमुख कारण रही। विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।</p>
<h2>वेदांता में तेज गिरावट</h2>
<p class="isSelectedEnd">कारोबार के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा वेदांता के शेयरों की रही। ब्लॉक डील के जरिए प्रमोटर समूह द्वारा लगभग ₹2,149 करोड़ मूल्य की हिस्सेदारी बेचे जाने की खबर के बाद कंपनी का शेयर करीब 6 प्रतिशत तक टूट गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">विश्लेषकों का कहना है कि बड़ी हिस्सेदारी की बिक्री से बाजार में सप्लाई बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे अल्पकालिक दबाव बन सकता है। इसका असर मेटल सेक्टर के अन्य शेयरों पर भी देखा गया।</p>
<h2>एशियाई बाजारों का असर</h2>
<p class="isSelectedEnd">एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी मंगलवार को कमजोरी दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया, जापान और हांगकांग के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक निवेशकों के सतर्क रुख और आर्थिक चिंताओं का असर क्षेत्रीय बाजारों पर पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर, अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिला-जुला रुख देखने को मिला था। डाउ जोंस बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में गिरावट दर्ज की गई। इसका प्रभाव भी भारतीय निवेशकों की धारणा पर पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बीच प्राथमिक बाजार में गतिविधियां जारी हैं। कॉर्डेलिया क्रूज ब्रांड संचालित करने वाली कंपनी वाटरवेज लीजर टूरिज्म का आईपीओ मंगलवार से निवेशकों के लिए खुल गया। कंपनी इस सार्वजनिक निर्गम के जरिए ₹585 करोड़ जुटाने का लक्ष्य लेकर आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की हालिया खरीदारी ने बाजार को कुछ समर्थन जरूर दिया है, लेकिन वैश्विक संकेतों और सेक्टर आधारित बिकवाली के कारण दबाव बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में निवेशकों की निगाहें वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कॉर्पोरेट अपडेट्स और विदेशी निवेश प्रवाह पर बनी रहेंगी।</p>
<p>फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और निवेशक सतर्क रणनीति के साथ कारोबार कर रहे हैं। भारत समाचार अपडेट, बिजनेस न्यूज और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में शेयर बाजार की यह गिरावट निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:09:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>23 जून को साय कैबिनेट की अहम बैठक, कई बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर</title>
                                    <description><![CDATA[नवा रायपुर मंत्रालय में होगी मंत्रिपरिषद की बैठक, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रस्तावों पर होगी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/important-cabinet-meeting-on-june-23-many-major-decisions-may/article-56390"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-cabinet-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार की अगली कैबिनेट बैठक 23 जून को होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली यह बैठक नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में सुबह 11:30 बजे शुरू होगी। राज्य सरकार की इस बैठक को प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई ऐसे प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है जिनका सीधा असर प्रदेश के विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर पड़ सकता है। बैठक को लेकर विभिन्न विभागों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और प्रस्तावों को अंतिम रूप देने का काम लगभग पूरा हो चुका है। मंत्रिपरिषद की इस बैठक में वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय एजेंडे में शामिल किए जा सकते हैं। प्रदेश में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ नए प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता उन योजनाओं पर अधिक रहने की संभावना है जिनका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, युवाओं और जरूरतमंद वर्गों को मिलता है। ऐसे में बैठक से कई महत्वपूर्ण घोषणाओं और निर्णयों की उम्मीद की जा रही है। बताया जा रहा है कि वित्तीय मामलों से जुड़े कुछ प्रस्तावों पर भी मंत्रिपरिषद की मंजूरी ली जा सकती है। विभिन्न विभागों द्वारा अतिरिक्त बजट और संसाधनों की मांग को लेकर तैयारियां की गई हैं। राज्य सरकार आगामी महीनों के विकास कार्यों और योजनाओं की गति को बनाए रखने के लिए वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी रणनीति तैयार कर सकती है। यही वजह है कि वित्त विभाग से जुड़े प्रस्तावों पर विशेष नजर बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वास्थ्य क्षेत्र भी इस बैठक का प्रमुख विषय माना जा रहा है। प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत बनाने, अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हाल के महीनों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर सरकार लगातार सक्रिय रही है और माना जा रहा है कि कुछ नई पहल या संशोधित योजनाओं को भी मंजूरी मिल सकती है। कृषि क्षेत्र से जुड़े विषय भी बैठक के एजेंडे में अहम स्थान रख सकते हैं। प्रदेश की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है, इसलिए किसानों के हित से जुड़े फैसलों पर सरकार का विशेष फोकस रहने की उम्मीद है। कृषि उत्पादन बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल प्रोत्साहन और कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा किसानों को मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं और योजनाओं की समीक्षा भी की जा सकती है। बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर भी सरकार कई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। सड़क, पुल, शहरी विकास और अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार होने की संभावना है। राज्य सरकार लगातार अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देती रही है और आगामी वर्षों की विकास रणनीति में भी इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में कैबिनेट बैठक में कुछ नई परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासनिक सुधारों से जुड़े प्रस्ताव भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। विभिन्न विभागों में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाती रही है। माना जा रहा है कि इस दिशा में भी कुछ अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा कर आवश्यक बदलावों पर विचार किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सरकार की आगामी प्राथमिकताओं और कार्ययोजना की दिशा तय करने वाली बैठकों में से एक है। कई विभागों की ओर से लंबे समय से लंबित प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं कुछ नई योजनाओं की घोषणा या पहले से चल रही योजनाओं में संशोधन जैसे फैसले भी सामने आ सकते हैं। अब सभी की नजर 23 जून को होने वाली इस बैठक पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली यह कैबिनेट बैठक प्रदेश के विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों का आधार बन सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:40:06 +0530</pubDate>
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