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                <title>RamMandir - दैनिक जागरण</title>
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                <title>दिग्विजय सिंह का ऐलान: महाकाल से अयोध्या तक करेंगे 1000 किमी पदयात्रा, राम मंदिर चंदे का हिसाब मांगेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[2 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा, कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी; यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की घोषणा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48b697e584e/article-57851"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा ऐलान किया है। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या की राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य किसी दल या संगठन के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और न ही वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे। उनके अनुसार उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था और आज भी उस दान की रसीद तथा चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उनका कहना है कि जिन श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया है, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने बताया कि पदयात्रा शुरू होने से पहले वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि 5 या 6 जुलाई को वकीलों से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी है। उनका कहना है कि न्यायालय से राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों की आस्था बहुत गहरी होती है, इसलिए आर्थिक मामलों में भी स्पष्टता बनी रहनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या आम नागरिक को यदि चंदे के उपयोग में पारदर्शिता की अपेक्षा है तो वह इस यात्रा में शामिल हो सकता है। उनके अनुसार यात्रा के दौरान वह अपने साथ दान की रसीद और चेक की प्रतियां भी रखेंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने स्वयं भी इस अभियान में योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए स्वेच्छा से दान दिया था और ऐसे में यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई सवाल उठते हैं तो उनका समाधान भी पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वह अपना दिया गया चंदा वापस लेकर उसे किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र में बने एक गेस्ट हाउस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी सभी संस्थाओं और ट्रस्टों के आर्थिक लेन-देन का समय-समय पर सार्वजनिक विवरण उपलब्ध होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल एक ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक ट्रस्टों के लिए समान रूप से पारदर्शिता लागू होनी चाहिए। उन्होंने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाने की भी घोषणा की, जिस पर लिखा होगा कि "मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।" इसे उन्होंने प्रतीकात्मक संदेश बताया। दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि उनकी पूरी यात्रा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि दानदाताओं के मन में उठ रहे सवालों को उचित मंच पर रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पवन खेड़ा का RSS पर हमला, बोले- आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर पहुंचे कांग्रेस नेता ने राम मंदिर ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल, जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आज होगा समापन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/pawan-kheda-attacks-rss-says-no-contribution-in-freedom-struggle/article-57301"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pawan-khera.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा रविवार देर रात रायपुर पहुंचे। सोमवार को वे कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में शामिल होंगे। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), राम मंदिर ट्रस्ट और मौजूदा राजनीतिक माहौल को लेकर कई मुद्दों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई योगदान नहीं रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम के नाम पर किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल को समझने का भी एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में पार्टी कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों को नई चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। यही वजह है कि इस प्रशिक्षण शिविर में संगठन, संवाद, मीडिया प्रबंधन और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान पवन खेड़ा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोई भूमिका नहीं थी। उनका आरोप था कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में संघ का कोई योगदान दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि जो संगठन देश की आजादी की लड़ाई का हिस्सा नहीं रहे, वे आज इतिहास की नई व्याख्या करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि इतिहास को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार।</p>
<p class="isSelectedEnd">महात्मा गांधी को लेकर RSS के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि ऐसे बयानों पर अधिक समय खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देश इस समय महंगाई, बेरोजगारी और किसानों समेत कई अहम मुद्दों का सामना कर रहा है। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को इन विषयों पर चर्चा करनी चाहिए, न कि ऐसे विवादित बयानों के जरिए लोगों का ध्यान भटकाना चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर भी पवन खेड़ा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं और इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट का गठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच और निगरानी में हुआ है तथा इसकी गतिविधियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की भी नजर रही है। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं और उनके नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता। खेड़ा ने कहा कि अयोध्या से लेकर उज्जैन तक सामने आए कुछ मामलों ने लोगों के मन में सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना था कि अगर कहीं भी अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।रायपुर में चल रहे कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को लेकर भी उन्होंने विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि पिछले दस दिनों से पार्टी के जिला अध्यक्षों को संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, चुनावी तैयारी, जनसंपर्क अभियान और मीडिया के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। उनका कहना था कि बदलते राजनीतिक माहौल में केवल पारंपरिक तरीके पर्याप्त नहीं हैं। कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग की भी जानकारी होना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि संवाद स्थापित करना और जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को समझना भी है। जिला अध्यक्षों ने भी अपने अनुभव साझा किए और विभिन्न राज्यों में संगठन के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। इससे पार्टी नेतृत्व को भी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और सुझावों को समझने का अवसर मिला। गौरतलब है कि इस प्रशिक्षण शिविर में इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी शामिल हुए थे। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने, आम जनता के बीच सक्रिय रहने और विचारधारा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था। राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों से कहा था कि संगठन की मजबूती ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उनके संबोधन के बाद सोमवार को होने वाला समापन समारोह भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। रायपुर में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि जिला स्तर के पदाधिकारियों को नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाए, ताकि वे जनता के बीच अधिक प्रभावी तरीके से पार्टी का संदेश पहुंचा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:53:53 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी पर उठे सवाल, केजरीवाल ने मांगी स्वतंत्र जांच</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी प्रमुख ने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए, कहा- मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत जांच जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/questions-raised-on-sit-in-ram-temple-offering-case-kejriwal/article-56890"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा और दान प्रबंधन के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं हैं और जांच प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आनी चाहिए। केजरीवाल का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनके बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि किसी भी गंभीर आरोप की जांच ऐसी होनी चाहिए जिस पर किसी प्रकार का संदेह न रहे। उन्होंने दावा किया कि एसआईटी के गठन और उसकी शक्तियों को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं। उनके अनुसार, जनता यह जानना चाहती है कि जांच किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है और किन तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी मामले में जांच एजेंसियां निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करती हैं तो उससे लोगों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी आरोप की जांच पूरी गंभीरता से होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा हो रही है। उनका कहना था कि लोग यह जानना चाहते हैं कि जांच में अब तक क्या प्रगति हुई है और किन-किन पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को सामने लाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को लेकर पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है, जिसके कारण सवाल उठ रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। उधर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जांच से जुड़े अधिकारियों को पत्र और ईमेल भेजकर कुछ दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा है। उनका दावा है कि उनके पास ऐसे तथ्य हैं जिन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए। संजय सिंह ने कहा कि यदि सभी दस्तावेजों और लेनदेन की विस्तृत जांच की जाए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक संस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। संबंधित अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि उपलब्ध तथ्यों और शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है और जो भी जानकारी सामने आएगी, उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करना है और किसी भी स्तर पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां विभिन्न दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारियों की समीक्षा कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सही तस्वीर सामने लाई जा सके। अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे हमेशा संवेदनशील और चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में जब भी किसी प्रकार का आरोप सामने आता है, उस पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में तथ्यों और आरोपों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी होता है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि कई जानकार सभी पक्षों से संयम बरतने और आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। श्रीराम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान व चढ़ावा भी अर्पित करते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक मामले पर लोगों की विशेष नजर रहती है। जानकारों का कहना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी प्रक्रियाओं का पारदर्शी होना आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की शिकायत या विवाद सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच लोगों के भरोसे को मजबूत करती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:21:48 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचे योगी, बोले- अपराधी कोई भी हो बचेगा नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रामलला के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- एसआईटी जांच करेगी दूध का दूध और पानी का पानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-who-reached-ayodhya-amid-the-ram-temple-offering-controversy/article-56419"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/yogi-adityanath-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर जारी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की और उसके बाद राम जन्मभूमि परिसर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जनसभा को भी संबोधित किया और राम मंदिर से जुड़ी चल रही जांच तथा विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी भी स्तर पर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। अपराधी चाहे कोई भी हो, कानून अपना काम करेगा और जांच एजेंसियां पूरी निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करेंगी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश ने पांच सौ वर्षों तक संघर्ष किया है। ऐसे में कुछ आरोपों और अफवाहों के आधार पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने रामभक्तों से अपील करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने मर्यादा और धैर्य का संदेश दिया है। इसलिए सभी लोग संयम बनाए रखें और जांच पूरी होने का इंतजार करें। उन्होंने कहा कि पांच सौ साल तक इंतजार किया गया है तो पंद्रह दिन और इंतजार किया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अतीत में रामभक्तों पर गोली चलवाई थी, वे आज रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालतों में भी राम मंदिर निर्माण के खिलाफ तर्क दिए गए, लेकिन आज वही लोग अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। यह टीम पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और किसी भी स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास इस मामले से जुड़े प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जा सके।दरअसल राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने दावा किया कि मंदिर से करोड़ों रुपये की दान राशि गायब हुई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि चढ़ावे की रकम में पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हो सकती है। इसके बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद बढ़ने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी सफाई दी गई। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है जिससे बड़े पैमाने पर चोरी या गबन की बात साबित होती हो। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की गहन जांच की मांग की। इसी क्रम में भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रस्ट से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जांच के दौरान अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में इन लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं क्योंकि ये सभी दान राशि की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में किसी न किसी रूप में शामिल थे। जांच एजेंसियों ने अब तक करीब दो करोड़ रुपये की रकम बरामद किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से सोना मिलने की भी चर्चा रही, हालांकि उसकी मात्रा और मूल्य को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसआईटी लगातार कई दिनों से जांच में जुटी हुई है। टीम ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, आमंत्रित सदस्य गोपाल राव, बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की है। बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और दान राशि जमा करने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच टीम ने संबंधित कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ कर उनके बयानों का मिलान भी किया है ताकि किसी प्रकार की विसंगति सामने आने पर उसे दर्ज किया जा सके।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर किसी को भी राहत नहीं मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:40:20 +0530</pubDate>
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