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                <title>UttarPradesh - दैनिक जागरण</title>
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                <title>आगरा में सनसनी: 45 दिन तक पति को लापता बताती रही पत्नी, बाथरूम के फर्श के नीचे मिला शव</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस सत्यापन के दौरान खुला हत्या का राज, पत्नी पर नींद की दवा देकर गला घोंटने और शव को घर के बाथरूम में दफनाने का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/sensation-in-agra-wife-kept-calling-husband-missing-for-45/article-57845"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/agra-murder-case-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। सिकंदरा क्षेत्र के दहतोरा इलाके में रहने वाले 44 वर्षीय सुरेंद्र शर्मा पिछले करीब 45 दिनों से लापता बताए जा रहे थे। परिवार और पड़ोसियों को उनकी पत्नी रूबी शर्मा लगातार यही कहती रही कि वह घर छोड़कर कहीं चले गए हैं। इस बीच पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई और परिजनों ने कई जगह उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। मामला तब अचानक पलट गया जब पुलिस एक पुराने मामले के सिलसिले में नियमित सत्यापन के लिए घर पहुंची। अधिकारियों को बातचीत के दौरान पत्नी का व्यवहार संदिग्ध लगा। पूछताछ आगे बढ़ी तो शक गहराया और आखिरकार जांच उस भयावह सच तक पहुंच गई जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पुलिस ने घर के बाथरूम का फर्श तुड़वाया तो उसके नीचे से सुरेंद्र शर्मा का शव बरामद हुआ। इसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार सुरेंद्र शर्मा और रूबी शर्मा की शादी लगभग 16 वर्ष पहले हुई थी। दोनों अपनी दो बेटियों के साथ दहतोरा इलाके में रहते थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि घटना वाले दिन रूबी ने दोनों बेटियों को सुरेंद्र के बड़े भाई के घर भेज दिया था। इसके बाद उसने कथित रूप से सुरेंद्र को ऐसी खीर खिलाई जिसमें नींद की दवा मिलाई गई थी। पुलिस का आरोप है कि जब सुरेंद्र बेहोश हो गए तो उनका गला घोंटकर हत्या कर दी गई। अगले दिन घर के बाथरूम में गड्ढा खोदकर शव को उसमें दबा दिया गया और ऊपर से सीमेंट डालकर फर्श को दोबारा तैयार कर दिया गया, ताकि किसी को इस बात का संदेह न हो कि घर के भीतर ही शव दफन है। पुलिस का कहना है कि यह पूरी घटना पहली नजर में सुनियोजित प्रतीत होती है, हालांकि सभी तथ्यों की पुष्टि विस्तृत जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद करीब डेढ़ महीने तक रूबी शर्मा कथित तौर पर सभी रिश्तेदारों और पड़ोसियों से यही कहती रही कि उसका पति घर छोड़कर चला गया है। पुलिस के मुताबिक वह लोगों के सामने दुख भी जताती थी ताकि किसी को उस पर शक न हो। 26 मई को सुरेंद्र शर्मा की गुमशुदगी की रिपोर्ट सिकंदरा थाने में दर्ज कराई गई थी। जांच आगे बढ़ रही थी, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिल रहा था। इसी दौरान पुलिस एक अन्य मामले के संबंध में नियमित सत्यापन के लिए घर पहुंची। अधिकारियों ने देखा कि पूछताछ के दौरान रूबी काफी घबराई हुई थी और उसने तुरंत अपने देवर को भी घर बुला लिया। पुलिस को उसका व्यवहार असामान्य लगा। दूसरी ओर सुरेंद्र के बड़े भाई को पहले से ही अपने भाई की गुमशुदगी और रूबी के व्यवहार पर संदेह था। उन्होंने पुलिस के सामने अपनी आशंकाएं साझा कीं। इसके बाद पुलिस ने रूबी से लगातार पूछताछ की। अधिकारियों का दावा है कि पूछताछ के दौरान उसने कथित रूप से हत्या की बात स्वीकार कर ली और शव दफनाने की जगह भी बता दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बाथरूम का फर्श तुड़वाया और जमीन के नीचे से शव बाहर निकाला। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के कारण और समय की पुष्टि की जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित हत्या के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका थी। पुलिस ने घर और घटनास्थल से कई साक्ष्य भी एकत्र किए हैं, जिनकी वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आगरा के हरिपर्वत सर्किल की एसीपी अमीषा ने बताया कि सुरेंद्र शर्मा की गुमशुदगी का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस लगातार जांच कर रही थी। जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर यह मामला हत्या में बदल गया। उन्होंने कहा कि आरोपी महिला से पूछताछ जारी है और सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। पड़ोसियों के अनुसार उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति को वे लापता समझ रहे हैं, उसका शव उसी घर के बाथरूम के नीचे दफन हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:37:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>UPTET 2026 के लिए कड़ी सुरक्षा, तीन दिन में 19.94 लाख उम्मीदवार देंगे परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[60 जिलों के 955 परीक्षा केंद्रों पर तीन दिन तक होगी परीक्षा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित और 200 मीटर के दायरे में साइबर कैफे व फोटो कॉपी की दुकानें भी रहेंगी बंद।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tight-security-for-uptet-2026-1994-lakh-candidates-will-appear/article-57645"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/uptet-2026-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 गुरुवार से पूरे प्रदेश में शुरू हो गई। राज्य के 60 जिलों में बनाए गए 955 परीक्षा केंद्रों पर तीन दिनों तक यह परीक्षा आयोजित की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अनुसार इस बार करीब 19.94 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है, वहीं केंद्रों के आसपास भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। सुबह से ही कई परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी कतारें दिखाई दीं। निर्धारित समय से काफी पहले उम्मीदवार अपने प्रवेश पत्र और पहचान पत्र के साथ केंद्रों पर पहुंचने लगे। सुरक्षा जांच के बाद ही उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया। अधिकारियों के अनुसार सभी अभ्यर्थियों की पहचान का मिलान करने के बाद ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा रही है। कई केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी की गई है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम पहले ही जारी कर दिया था। इसके अनुसार उच्च प्राथमिक स्तर के अभ्यर्थियों की परीक्षा 2 जुलाई को दोनों पालियों में और 3 जुलाई की पहली पाली में आयोजित की जा रही है। वहीं प्राथमिक स्तर के अभ्यर्थी 3 जुलाई की दूसरी पाली और 4 जुलाई की पहली पाली में परीक्षा देंगे। अलग-अलग पालियों में लाखों अभ्यर्थियों के शामिल होने को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त रखी गई है। परीक्षा केंद्रों के भीतर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। इसके अलावा परीक्षा केंद्र के 200 मीटर के दायरे में साइबर कैफे, फोटो कॉपी की दुकानें और पीसीओ अस्थायी रूप से बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि इससे नकल या पेपर लीक जैसी किसी भी आशंका को काफी हद तक रोका जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और उड़नदस्ते लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा संचालन से जुड़े सभी अधिकारियों को समय पर केंद्रों का निरीक्षण करने और व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। UPTET उत्तर प्रदेश में सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षक बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पात्रता परीक्षा मानी जाती है। प्राथमिक स्तर पर कक्षा 1 से 5 और उच्च प्राथमिक स्तर पर कक्षा 6 से 8 तक शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है। इस परीक्षा में सफल होने के बाद ही उम्मीदवार भविष्य में शिक्षक भर्ती की विभिन्न प्रक्रियाओं में आवेदन करने के पात्र होते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार भी परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में काफी उत्साह देखने को मिला। कई उम्मीदवार सुबह जल्दी ही अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए ताकि अंतिम समय की किसी परेशानी से बचा जा सके। परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावकों की भी अच्छी-खासी भीड़ नजर आई। कई जगह प्रशासन ने पेयजल, यातायात और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था भी की थी, जिससे अभ्यर्थियों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। आयोग ने अभ्यर्थियों को पहले ही सलाह दी थी कि वे परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंचें और अपने साथ केवल अनुमत दस्तावेज ही लेकर आएं। प्रवेश पत्र, वैध फोटो पहचान पत्र और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा से वंचित भी किया जा सकता है। इसी वजह से अधिकांश उम्मीदवारों ने निर्धारित निर्देशों का पालन करते हुए समय पर परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया। प्रदेश सरकार और शिक्षा सेवा चयन आयोग का कहना है कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराना उनकी प्राथमिकता है। पिछले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सामने आए मामलों के बाद इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि तीन दिनों तक चलने वाली यह परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगी और सभी अभ्यर्थियों को निष्पक्ष माहौल में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:53:12 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी पर उठे सवाल, केजरीवाल ने मांगी स्वतंत्र जांच</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी प्रमुख ने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए, कहा- मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत जांच जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/questions-raised-on-sit-in-ram-temple-offering-case-kejriwal/article-56890"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ram-mandir-donation-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा और दान प्रबंधन के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं हैं और जांच प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आनी चाहिए। केजरीवाल का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनके बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि किसी भी गंभीर आरोप की जांच ऐसी होनी चाहिए जिस पर किसी प्रकार का संदेह न रहे। उन्होंने दावा किया कि एसआईटी के गठन और उसकी शक्तियों को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं। उनके अनुसार, जनता यह जानना चाहती है कि जांच किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है और किन तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी मामले में जांच एजेंसियां निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करती हैं तो उससे लोगों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी आरोप की जांच पूरी गंभीरता से होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा हो रही है। उनका कहना था कि लोग यह जानना चाहते हैं कि जांच में अब तक क्या प्रगति हुई है और किन-किन पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों को सामने लाना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को लेकर पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है, जिसके कारण सवाल उठ रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। उधर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जांच से जुड़े अधिकारियों को पत्र और ईमेल भेजकर कुछ दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा है। उनका दावा है कि उनके पास ऐसे तथ्य हैं जिन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए। संजय सिंह ने कहा कि यदि सभी दस्तावेजों और लेनदेन की विस्तृत जांच की जाए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक संस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। संबंधित अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि उपलब्ध तथ्यों और शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है और जो भी जानकारी सामने आएगी, उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करना है और किसी भी स्तर पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां विभिन्न दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध जानकारियों की समीक्षा कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सही तस्वीर सामने लाई जा सके। अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे हमेशा संवेदनशील और चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में जब भी किसी प्रकार का आरोप सामने आता है, उस पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में तथ्यों और आरोपों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी होता है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि कई जानकार सभी पक्षों से संयम बरतने और आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। श्रीराम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान व चढ़ावा भी अर्पित करते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक मामले पर लोगों की विशेष नजर रहती है। जानकारों का कहना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी प्रक्रियाओं का पारदर्शी होना आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की शिकायत या विवाद सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच लोगों के भरोसे को मजबूत करती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:21:48 +0530</pubDate>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अयोध्या पहुंचे योगी, बोले- अपराधी कोई भी हो बचेगा नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[रामलला के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर साधा निशाना, कहा- एसआईटी जांच करेगी दूध का दूध और पानी का पानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-who-reached-ayodhya-amid-the-ram-temple-offering-controversy/article-56419"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/yogi-adityanath-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर जारी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की और उसके बाद राम जन्मभूमि परिसर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने जनसभा को भी संबोधित किया और राम मंदिर से जुड़ी चल रही जांच तथा विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर किसी भी स्तर पर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। अपराधी चाहे कोई भी हो, कानून अपना काम करेगा और जांच एजेंसियां पूरी निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करेंगी। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश ने पांच सौ वर्षों तक संघर्ष किया है। ऐसे में कुछ आरोपों और अफवाहों के आधार पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने रामभक्तों से अपील करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने मर्यादा और धैर्य का संदेश दिया है। इसलिए सभी लोग संयम बनाए रखें और जांच पूरी होने का इंतजार करें। उन्होंने कहा कि पांच सौ साल तक इंतजार किया गया है तो पंद्रह दिन और इंतजार किया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अतीत में रामभक्तों पर गोली चलवाई थी, वे आज रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालतों में भी राम मंदिर निर्माण के खिलाफ तर्क दिए गए, लेकिन आज वही लोग अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। यह टीम पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और किसी भी स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास इस मामले से जुड़े प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसी को सौंपना चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जा सके।दरअसल राम मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर विवाद उस समय शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने दावा किया कि मंदिर से करोड़ों रुपये की दान राशि गायब हुई है। उन्होंने आरोप लगाया था कि चढ़ावे की रकम में पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हो सकती है। इसके बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद बढ़ने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी सफाई दी गई। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है जिससे बड़े पैमाने पर चोरी या गबन की बात साबित होती हो। हालांकि बढ़ते विवाद के बीच भाजपा के कुछ नेताओं ने भी मामले की गहन जांच की मांग की। इसी क्रम में भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की थी। बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रस्ट से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जांच के दौरान अब तक पांच लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में इन लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं क्योंकि ये सभी दान राशि की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में किसी न किसी रूप में शामिल थे। जांच एजेंसियों ने अब तक करीब दो करोड़ रुपये की रकम बरामद किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से सोना मिलने की भी चर्चा रही, हालांकि उसकी मात्रा और मूल्य को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एसआईटी लगातार कई दिनों से जांच में जुटी हुई है। टीम ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, आमंत्रित सदस्य गोपाल राव, बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती करने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की है। बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और दान राशि जमा करने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। जांच टीम ने संबंधित कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ कर उनके बयानों का मिलान भी किया है ताकि किसी प्रकार की विसंगति सामने आने पर उसे दर्ज किया जा सके।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर किसी को भी राहत नहीं मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:40:20 +0530</pubDate>
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