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                <title>Paraguay - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Paraguay RSS Feed</description>
                
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                <title>एमबाप्पे पर पैराग्वे की सीनेटर का विवादित हमला: इंटरव्यू में दी गाली, फुटबॉल वर्ल्ड कप में बढ़ा नया बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[मैच के बाद हाथ न मिलाने की घटना से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा, पैराग्वे सरकार ने भी सीनेटर के बयान से बनाई दूरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/controversial-attack-by-paraguay-senator-on-mbapp%C3%A9-abuses-in-interview/article-58299"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kylian-mbappe.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान मैदान पर खिलाड़ियों के बीच हुई एक छोटी-सी घटना अब अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप ले चुकी है। फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे और पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला के बीच शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब अमारिला ने एक इंटरव्यू में एमबाप्पे के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘सन ऑफ बिच’ कहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने पहले दिए गए विवादित बयानों पर माफी मांगने से भी साफ इनकार कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी नई बहस छेड़ दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह विवाद 5 जुलाई को खेले गए फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ-16 मुकाबले के बाद शुरू हुआ था। इस मैच में फ्रांस ने पैराग्वे को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। मुकाबला खत्म होने के बाद पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे से हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़े। आरोप है कि एमबाप्पे ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया और बिना हाथ मिलाए आगे बढ़ गए। इस व्यवहार से नाराज होकर गिल ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए फुटबॉल उनकी ओर उछाल दी थी। यह दृश्य कैमरों में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के बाद पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला ने सोशल मीडिया पर एमबाप्पे की आलोचना करते हुए उन्हें घमंडी करार दिया था। इसके साथ ही उन्होंने ऐसी टिप्पणियां भी कीं, जिन्हें नस्लीय और व्यक्तिगत माना गया। उनके इन बयानों की दुनियाभर में आलोचना हुई और कई लोगों ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद यहीं नहीं रुका। स्पेन के अखबार 'मार्का' को दिए एक इंटरव्यू में अमारिला ने अपने बयान को और तीखा करते हुए कहा कि जब ऑरलैंडो गिल ने पूरी विनम्रता के साथ एक पैराग्वेयन खिलाड़ी की तरह हाथ बढ़ाया, तब एमबाप्पे ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। उन्होंने इस व्यवहार को अपमानजनक बताते हुए एमबाप्पे के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसा व्यवहार फ्रांसीसी संस्कृति का हिस्सा नहीं हो सकता। अमारिला ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उनका गुस्सा फ्रांस से नहीं बल्कि केवल एमबाप्पे के व्यवहार से है। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने बचपन से फ्रेंच स्कूल में पढ़ाई की है, फ्रेंच भाषा जानती हैं और फ्रांस से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने अपने परिवार के साथ फ्रांस में क्रिसमस मनाया था, इसलिए उनके बयान को पूरे फ्रांस के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर एमबाप्पे ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अमारिला को 'घृणित महिला' बताते हुए कहा था कि इस तरह की टिप्पणियां किसी सार्वजनिक प्रतिनिधि को शोभा नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान पर हार-जीत होती रहती है, लेकिन खिलाड़ियों के खिलाफ व्यक्तिगत और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। विवाद बढ़ने के बाद पैराग्वे सरकार को भी सामने आना पड़ा। सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर सीनेटर अमारिला की टिप्पणियों से दूरी बना ली। सरकार ने कहा कि यह बयान उन मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ हैं, जिनका पालन पैराग्वे करता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि खेल के मंच पर सम्मान और आपसी सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब फुटबॉल वर्ल्ड कप पहले से ही कई विवादों के कारण चर्चा में है। हाल के दिनों में टूर्नामेंट के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिन्होंने खेल से ज्यादा विवादों को सुर्खियों में ला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कड़ी में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़ा मामला भी काफी चर्चा में रहा। ट्रम्प ने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप के बाद अमेरिकी खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन का एक मैच का प्रतिबंध हटाया गया। इस फैसले के बाद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो पर राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने के आरोप लगे। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के एथिक्स कमीशन तक शिकायत पहुंची और खेल प्रशासन में राजनीतिक दखल को लेकर नई बहस शुरू हो गई। वर्ल्ड कप का एक और बड़ा विवाद अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेले गए मुकाबले में देखने को मिला। मिस्र फुटबॉल संघ ने रेफरी के फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) का गलत इस्तेमाल किया गया। संघ ने आरोप लगाया कि विवादित फैसलों ने मैच का परिणाम प्रभावित किया। हालांकि फीफा ने रेफरी का बचाव करते हुए कहा कि मैच अधिकारियों ने नियमों के अनुसार ही निर्णय लिए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस चौथी बार फीफा वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल में, एमबाप्पे के गोल से पैराग्वे पर जीत; मैच के बाद हाथ न मिलाने पर हुआ विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[किलियन एमबाप्पे ने पेनल्टी पर दागा निर्णायक गोल, पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने मैच के बाद नाराजगी में फुटबॉल उछाली; अब क्वार्टर फाइनल में मोरक्को से होगा मुकाबला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/france-won-the-fifa-world-cup-quarter-finals-for-the-fourth/article-57930"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/france-vs-paraguay.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार चौथी बार क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। राउंड ऑफ-16 में खेले गए मुकाबले में फ्रांस ने पैराग्वे को 1-0 से हराकर अंतिम-8 में प्रवेश किया। फिलाडेल्फिया स्टेडियम में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले का एकमात्र गोल स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे ने दूसरे हाफ में पेनल्टी के जरिए किया।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि मैच के बाद खेल भावना को लेकर एक विवाद भी सामने आया। पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल जब एमबाप्पे से हाथ मिलाने पहुंचे तो फ्रांसीसी स्टार ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। इससे नाराज गिल ने फुटबॉल एमबाप्पे की ओर उछाल दी, जो उनकी पीठ पर जाकर लगी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे मुकाबले में फ्रांस ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन पैराग्वे की मजबूत रक्षापंक्ति ने फ्रांसीसी खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। दूसरे हाफ के 70वें मिनट में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की मदद से फ्रांस को पेनल्टी मिली। रेफरी ने पैराग्वे के डिएगो गोमेज पर फाउल का फैसला सुनाया। इसके बाद किलियन एमबाप्पे ने बिना कोई गलती किए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया और फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिला दी।</p>
<p style="text-align:justify;">मुकाबला समाप्त होने के बाद पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल खेल भावना के तहत एमबाप्पे से हाथ मिलाने पहुंचे। लेकिन एमबाप्पे बिना प्रतिक्रिया दिए आगे बढ़ गए। इससे गिल नाराज हो गए और उन्होंने फुटबॉल उनकी तरफ उछाल दी।हालांकि इस घटना के बाद किसी खिलाड़ी के बीच बड़ी झड़प नहीं हुई और दोनों टीमें अपने-अपने ड्रेसिंग रूम लौट गईं। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर फुटबॉल प्रशंसकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुकाबले में किया गया गोल एमबाप्पे के वर्ल्ड कप करियर का 19वां गोल रहा। इसके साथ ही वह अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड से केवल एक गोल पीछे पहुंच गए हैं। मौजूदा टूर्नामेंट में भी एमबाप्पे शानदार फॉर्म में हैं। अब तक वह सात गोल कर चुके हैं और गोल्डन बूट की रेस में मेसी के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। उनकी लगातार बेहतरीन फॉर्म फ्रांस के लिए खिताब जीतने की उम्मीदों को और मजबूत कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही पैराग्वे मुकाबला हार गया, लेकिन टीम ने पूरे मैच में शानदार रक्षात्मक खेल दिखाया। गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने कई बेहतरीन बचाव किए और फ्रांस को कई मौकों पर दूसरा गोल करने से रोका। मैनू कोने का दमदार शॉट हो या स्टॉपेज टाइम में एमबाप्पे के लगातार दो प्रयास, गिल ने अपनी शानदार गोलकीपिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया। यदि उनका प्रदर्शन इतना प्रभावशाली नहीं होता तो फ्रांस की जीत का अंतर और बड़ा हो सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">फ्रांस का अगला मुकाबला 9 जुलाई की रात 1:30 बजे मोरक्को से होगा। मोरक्को ने राउंड ऑफ-16 में मेजबान कनाडा को 3-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। इस जीत के साथ मोरक्को वर्ल्ड कप इतिहास में एक से अधिक बार क्वार्टर फाइनल खेलने वाला पहला अफ्रीकी देश बन गया है। इससे पहले उसने 2022 विश्व कप में भी अंतिम-8 तक का सफर तय किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">कनाडा और मोरक्को के बीच पहले हाफ में कोई गोल नहीं हुआ। लेकिन दूसरे हाफ की शुरुआत से ही मोरक्को ने आक्रामक खेल दिखाया। 50वें मिनट में अजेद्दीन ऊनाही ने शानदार गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद 82वें मिनट में उन्होंने अपना दूसरा गोल किया। इंजरी टाइम में सूफियान रहीमी ने तीसरा गोल दागकर मुकाबला पूरी तरह मोरक्को के नाम कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कनाडा को भी मैच में बराबरी का मौका मिला। 78वें मिनट में जोनाथन डेविड को फ्री-किक मिली, लेकिन उनका शॉट क्रॉसबार के ऊपर निकल गया। इसके बाद ताजोन बुकानन ने लंबी दूरी से शानदार शॉट लगाया, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने बेहतरीन डाइव लगाकर गेंद को रोक लिया। बूनू ने पूरे मुकाबले में तीन महत्वपूर्ण बचाव किए और टीम की जीत सुनिश्चित की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:43:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जर्मनी वर्ल्ड कप से बाहर, ब्राजील और मोरक्को ने दर्ज की यादगार जीत</title>
                                    <description><![CDATA[पैराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराया, ब्राजील ने आखिरी मिनट में जापान को मात देकर अंतिम-16 में बनाई जगह, मोरक्को ने भी नीदरलैंड को बाहर किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/germany-out-of-world-cup-brazil-and-morocco-recorded-memorable/article-57384"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/germany-vs-paraguay.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">फुटबॉल वर्ल्ड कप में मंगलवार को ऐसा दिन देखने को मिला, जिसने टूर्नामेंट की तस्वीर ही बदल दी। चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी का सफर राउंड ऑफ-32 में ही खत्म हो गया। पैराग्वे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट के दौरान 4-3 से जीत दर्ज कर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय के बाद दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं, लेकिन फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, जहां गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दो शानदार बचाव कर पैराग्वे को ऐतिहासिक जीत दिलाई। दूसरी ओर, ब्राजील ने इंजरी टाइम में गैब्रियल मार्टिनेली के गोल की बदौलत जापान को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई। वहीं, मोरक्को ने भी नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर अगले दौर का टिकट पक्का कर लिया। एक ही दिन में तीन मुकाबलों के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि इस बार वर्ल्ड कप में कोई भी टीम सुरक्षित नहीं है और छोटे माने जाने वाले देश भी बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">फॉक्सबोरो में खेले गए जर्मनी और पैराग्वे के मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। जर्मनी ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और लगातार आक्रमण किए, लेकिन पैराग्वे की रक्षापंक्ति ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। 42वें मिनट में मिगेल अल्मिरोन के शानदार मूव पर मातियास गालार्सा ने गेंद बॉक्स में पहुंचाई, जहां जूलियो एनसिसो ने हेडर लगाकर पैराग्वे को 1-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ में पीछे रहने के बाद जर्मनी ने दूसरे हाफ में दबाव बढ़ाया और 52वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज ने शानदार हेडर के जरिए स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद जर्मनी ने लगातार कई मौके बनाए, लेकिन पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल बार-बार दीवार बनकर सामने खड़े रहे। अतिरिक्त समय के 102वें मिनट में जोनाथन ताह ने कॉर्नर पर गोल भी कर दिया था, लेकिन वीडियो रिव्यू में गोलकीपर पर फाउल मिलने के बाद रेफरी ने गोल रद्द कर दिया। इसके बाद मुकाबला पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा। शुरुआती चार राउंड के बाद दोनों टीमें बराबरी पर थीं, लेकिन निर्णायक क्षण में ऑरलैंडो गिल ने दो अहम पेनल्टी रोक दीं और जोस कैनाले ने विजयी पेनल्टी को गोल में बदलकर पैराग्वे को यादगार जीत दिला दी। मैच के बाद गिल ने कहा कि टीम ने जर्मनी के हर खिलाड़ी की पेनल्टी लेने की शैली का पहले से अध्ययन किया था और उसी तैयारी का फायदा उन्हें मिला। दूसरी तरफ जर्मनी के खिलाड़ियों ने माना कि टीम कई अच्छे मौके भुनाने में नाकाम रही और यही हार की सबसे बड़ी वजह बनी।</p>
<p class="isSelectedEnd">ह्यूस्टन में ब्राजील और जापान के बीच मुकाबला भी आखिरी सेकेंड तक रोमांच से भरपूर रहा। जापान ने 29वें मिनट में काइशू सानो के शानदार लंबी दूरी के गोल से बढ़त हासिल कर ली। ब्राजील ने पहले हाफ में कई मौके बनाए लेकिन बराबरी नहीं कर सका। दूसरे हाफ की शुरुआत के बाद टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और 56वें मिनट में कैसेमीरो ने हेडर के जरिए स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद विनीसियस जूनियर और रोड्रिगो को भी गोल करने के अवसर मिले, लेकिन जापानी गोलकीपर जियोन सुजुकी लगातार बेहतरीन बचाव करते रहे। मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था, तभी दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे गैब्रियल मार्टिनेली ने इंजरी टाइम के छठे मिनट में शानदार गोल दागकर ब्राजील को 2-1 की जीत दिला दी। यह जीत ब्राजील के लिए कई मायनों में खास रही। टीम लगातार 20वीं बार वर्ल्ड कप के अंतिम-16 में पहुंची और यह जीत उसी दिन मिली, जिस दिन ब्राजील ने 1958 में अपना पहला विश्व कप खिताब जीता था। मैच के बाद कोच कार्लो एंसेलोटी ने कहा कि उनकी टीम ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और आखिरी मिनट तक जीत के लिए संघर्ष किया। उन्होंने मार्टिनेली की तारीफ करते हुए कहा कि वह हमेशा टीम में नई ऊर्जा लेकर आते हैं। वहीं, स्टार खिलाड़ी नेमार इस मुकाबले में मैदान पर नहीं उतरे। कोच ने बताया कि उन्हें खेलने पर विचार किया गया था, लेकिन टीम को उसकी जरूरत महसूस नहीं हुई।</p>
<p>तीसरे मुकाबले में मोरक्को और नीदरलैंड के बीच भी जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। निर्धारित समय में दोनों टीमों ने एक-एक गोल किए। नीदरलैंड ने 72वें मिनट में कोडी गाक्पो के गोल से बढ़त बनाई थी और जीत के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन इंजरी टाइम के 91वें मिनट में इस्सा डियोप ने हेडर लगाकर मोरक्को को बराबरी दिला दी। अतिरिक्त समय में दोनों टीमों ने कई मौके बनाए, लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। इसके बाद फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। मोरक्को के अनुभवी गोलकीपर यासीन बूनू ने क्रिसेंसियो समरविल की पेनल्टी रोककर मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद इस्माइल सैबारी ने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलते हुए मोरक्को को 3-2 से जीत दिला दी। इस जीत के साथ मोरक्को ने 1994 विश्व कप में नीदरलैंड से मिली हार का हिसाब भी बराबर कर लिया। अब अगले दौर में ब्राजील का सामना आइवरी कोस्ट या नॉर्वे से होगा, जबकि पैराग्वे फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से भिड़ेगा। मोरक्को की टीम 4 जुलाई को कनाडा के खिलाफ मैदान पर उतरेगी। मंगलवार के इन नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सिर्फ इतिहास या रैंकिंग नहीं, बल्कि उस दिन का प्रदर्शन ही जीत और हार तय करता है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:45:47 +0530</pubDate>
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                <title>62 शॉट, फिर भी नहीं हुआ एक गोल; तुर्किये वर्ल्ड कप से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और पैराग्वे के खिलाफ कुल 62 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी टीम; कोच मोंटेला भी रहे हैरान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/62-shots-still-no-goal-scored-turkey-out-of-world/article-56503"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/turkey-world-cup-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई। पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है। शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वर्ल्ड कप 2026 में तुर्किये का सफर उम्मीदों और सपनों के बिल्कुल उलट साबित हुआ। जिस टीम को टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ग्रुप-डी की सबसे मजबूत टीमों में गिना जा रहा था और जिसे अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा था, वह दो मुकाबलों के भीतर ही प्रतियोगिता से बाहर हो गई। शुक्रवार को पैराग्वे के खिलाफ मिली 1-0 की हार ने तुर्किये के अभियान पर पूरी तरह विराम लगा दिया। हार के बाद मैदान पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। कई खिलाड़ी सिर झुकाकर घास पर बैठ गए, कुछ की आंखों से आंसू निकल आए और स्टेडियम में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर भी गहरी निराशा साफ दिखाई दी। सबसे हैरानी की बात यह रही कि तुर्किये जैसी आक्रामक टीम पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। 24 साल बाद वर्ल्ड कप में वापसी करने वाली तुर्किये की टीम से इस बार काफी उम्मीदें थीं। टीम में कई युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद थे। अर्दा गुलर जैसे स्टार खिलाड़ियों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना था कि तुर्किये इस बार नॉकआउट दौर तक आसानी से पहुंच सकता है। टीम ने हाल के वर्षों में अपने प्रदर्शन से भी काफी प्रभावित किया था। यही वजह थी कि समर्थक बड़े सपने लेकर वर्ल्ड कप का इंतजार कर रहे थे। लेकिन मैदान पर जो कुछ हुआ, उसने सभी उम्मीदों को झटका दे दिया। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में तुर्किये का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ था। उस मैच में भी तुर्किये ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए। आंकड़ों के अनुसार टीम ने पूरे मैच में 30 शॉट लगाए। कई बार ऐसा लगा कि गेंद गोललाइन पार कर जाएगी, लेकिन हर बार या तो फिनिशिंग में कमी रह गई या ऑस्ट्रेलिया की रक्षापंक्ति दीवार बनकर खड़ी हो गई। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया ने अपने सीमित मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया और मुकाबला 2-0 से जीत लिया। उस हार के बाद भी तुर्किये के पास वापसी का अवसर था, लेकिन पैराग्वे के खिलाफ मैच में भी कहानी लगभग वैसी ही दोहराई गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पैराग्वे ने मुकाबले की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की। मैच शुरू होने के केवल 64 सेकंड बाद माटियास गलार्जा ने लगभग 25 मीटर की दूरी से शानदार शॉट लगाकर गेंद को सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। यह गोल इतना तेज और सटीक था कि तुर्किये का गोलकीपर उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर सका। इस गोल ने न केवल पैराग्वे को बढ़त दिलाई बल्कि तुर्किये को भी मानसिक रूप से झटका पहुंचाया। टूर्नामेंट का यह अब तक का सबसे तेज गोल माना जा रहा है।  शुरुआती झटके के बाद तुर्किये ने लगातार जवाबी हमले किए। टीम ने गेंद पर अपना नियंत्रण मजबूत रखा और पैराग्वे के हाफ में लगातार दबाव बनाया। पहले हाफ में मर्ट मुल्दुर को बराबरी का शानदार मौका मिला। फ्री-किक पर आए क्रॉस को उन्होंने हेडर से गोल की दिशा में भेजा, लेकिन गेंद पहले क्रॉसबार से टकराई और फिर पोस्ट से लगकर बाहर निकल गई। यह क्षण मैच का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यदि उस समय गोल हो जाता तो मुकाबले की दिशा बदल सकती थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में तुर्किये को एक और बड़ा मौका मिला जब पैराग्वे का एक खिलाड़ी रेड कार्ड मिलने के कारण मैदान से बाहर चला गया। इसके बाद लगभग आधे मैच तक तुर्किये को 10 खिलाड़ियों वाली टीम के खिलाफ खेलने का अवसर मिला। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति किसी भी टीम के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन तुर्किये इसका लाभ नहीं उठा सका। बारिस यिलमाज, कैन उजुन और मेरिह डेमिराल जैसे खिलाड़ियों को अच्छे मौके मिले, मगर अंतिम क्षणों में निशाना चूकता रहा। कभी गेंद गोलपोस्ट के बाहर चली गई तो कभी गोलकीपर ने शानदार बचाव कर लिया। मुकाबले के अंत तक तुर्किये ने कुल 32 शॉट लगाए, लेकिन स्कोरबोर्ड पर उसका खाता नहीं खुला। पहले मैच के 30 प्रयासों को जोड़ दिया जाए तो टीम ने दो मुकाबलों में 62 शॉट लगाए और एक भी गोल नहीं कर पाई। फुटबॉल आंकड़ों के अनुसार 1966 से उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहला मौका है जब किसी टीम ने वर्ल्ड कप के लगातार दो मैचों में इतने प्रयास किए हों और फिर भी गोल करने में पूरी तरह विफल रही हो। यही आंकड़ा तुर्किये की सबसे बड़ी निराशा बन गया। हार के बाद युवा स्टार अर्दा गुलर बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि टीम ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। उन्होंने माना कि कई मौके ऐसे थे जिन्हें गोल में बदला जा सकता था। अर्दा ने कहा कि खिलाड़ी दुखी हैं, समर्थक दुखी हैं और पूरा देश इस नतीजे से निराश है। उन्होंने तुर्किये के लोगों से माफी भी मांगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्य कोच विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। यही कमी अंततः तुर्किये के वर्ल्ड कप अभियान का अंत बन गई। विन्सेन्जो मोंटेला ने भी हार पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि टीम ने मौके बनाए, लेकिन गेंद किसी तरह गोल में नहीं जा सकी। उनके मुताबिक खिलाड़ियों ने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ खेला, इसलिए वह किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते। मोंटेला ने कहा कि फुटबॉल हमेशा तर्क के अनुसार नहीं चलता और यही इसकी खूबसूरती भी है। हालांकि उन्होंने माना कि केवल दो मैचों में वर्ल्ड कप से बाहर होना उनके लिए बेहद चौंकाने वाला अनुभव है। तुर्किये के लिए यह हार केवल एक मैच की हार नहीं बल्कि टूटे हुए सपनों की कहानी बन गई है। बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ टूर्नामेंट में उतरी टीम अब बिना एक भी गोल किए घर लौटने की स्थिति में है। समर्थकों को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उनकी टीम ने मौके तो बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 17:08:39 +0530</pubDate>
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