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                <title>Temple Management - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Temple Management RSS Feed</description>
                
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                <title>बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की चांदी और नकदी पर उठे सवाल, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अब आगर मालवा स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की नकदी, चांदी और अभिलेखों को लेकर जांच शुरू, प्रशासन ने गठित की समिति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-silver-and-cash-offered-in-baglamukhi-temple/article-58238"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/baglamukhi-temple2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चांदी और नकदी में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने मध्य प्रदेश में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आगर मालवा जिले के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। कलेक्टर ने एक जांच समिति का गठन करते हुए सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जांच केवल चांदी और नकदी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि श्रद्धालुओं की ओर से वर्षों से चढ़ाए गए सोना, चांदी, नकदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की भी बारीकी से पड़ताल की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने मंदिर प्रबंधन व्यवस्था और चढ़ावे के रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया दी गई है। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में गड़बड़ी करने वाले लोग किसी भी तरह की रियायत के पात्र नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग राक्षस की मानसिकता वाले हैं और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालु मंदिरों में अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि उस विश्वास के साथ किसी तरह का खिलवाड़ किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कलेक्टर की ओर से जारी आदेश में जांच समिति को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति यह पता लगाएगी कि श्रद्धालुओं से प्राप्त नकदी, सोना और चांदी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है। इनकी एंट्री किस प्रकार की जाती रही है, सुरक्षित रखने की व्यवस्था कैसी है और संबंधित बैंक खातों में जमा राशि का पूरा विवरण क्या है। इसके अलावा मंदिर से जुड़े अभिलेखों की भी जांच होगी ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उपलब्ध रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में कहीं कोई अंतर तो नहीं है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन समिति या अन्य संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है तो उसका स्पष्ट उल्लेख रिपोर्ट में किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच दल को तत्काल मंदिर परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज, रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी होगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन चाहता है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो ताकि किसी भी तरह की आशंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। सात दिनों में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी समय से चर्चाएं चल रही थीं। शिकायतों के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और अब औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चढ़ावे का हिसाब-किताब निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रखा गया था या नहीं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी। किसी भी व्यक्ति को बिना प्रमाण के दोषी नहीं माना जाएगा, लेकिन यदि अनियमितता साबित होती है तो कार्रवाई निश्चित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आगर मालवा जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि यह पांडवकालीन मंदिर है और महाभारत काल में पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से यहां मां बगलामुखी की आराधना करते हुए शत्रु विजय यज्ञ किया था। इसी वजह से देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद के बाद अब बगलामुखी मंदिर का मामला भी चर्चा का विषय बन गया है। ऐसे समय में प्रशासन की यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर नई व्यवस्था बनाने की जरूरत पर भी चर्चा तेज हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:05:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सलकनपुर देवी धाम के प्रबंधन पर विक्रम मस्ताल के सवाल, दान राशि की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता और अभिनेता विक्रम मस्ताल ने मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग उठाई, दान राशि और सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vikram-mastal-questions-on-the-management-of-salkanpur-devi-dham/article-57407"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/salkanpur-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सीहोर जिले के प्रसिद्ध सलकनपुर विजयासन देवी धाम के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। बुधनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी और अभिनेता विक्रम शर्मा मस्ताल ने मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और दान राशि के उपयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर दावा किया कि मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि उनके आरोपों पर मंदिर प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। विक्रम शर्मा मस्ताल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में धार्मिक संस्थानों से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने सलकनपुर देवी धाम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यहां भी दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल लंबे समय से उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी धार्मिक संस्था में जनता की आस्था से जुड़ा धन आता है तो उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है। उन्होंने मंदिर में पहले हुई चोरी की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि मंदिर जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर बड़ी चोरी होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में आखिर कहां चूक हुई और चोरी के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चोरी में कितनी राशि या सामग्री का नुकसान हुआ और इस संबंध में जनता को अब तक स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। विक्रम मस्ताल ने कहा कि सलकनपुर देवी धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में नकद दान, आभूषण और अन्य भेंट अर्पित करते हैं। उनका कहना है कि यह धन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। इसलिए मंदिर की वार्षिक आय, व्यय और विकास कार्यों पर खर्च की जाने वाली राशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने मंदिर प्रबंधन समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि लंबे समय से मंदिर के संचालन और प्रबंधन में सीमित लोगों का प्रभाव बना हुआ है और इसमें व्यापक पारदर्शिता दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों का संचालन नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की शंका की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिए जाएं तो विवाद अपने आप समाप्त हो सकते हैं। अपने बयान में विक्रम मस्ताल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने मांग की कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, दान राशि के उपयोग और प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से अनुरोध किया कि मंदिर की वार्षिक आय और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। सलकनपुर देवी धाम प्रदेश का प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंधन को लेकर उठने वाले किसी भी सवाल का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से आरोप लगाए जाते हैं तो उनकी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। विक्रम मस्ताल ने जिन बिंदुओं को उठाया है, उनकी पुष्टि किसी जांच एजेंसी या सक्षम प्राधिकरण द्वारा नहीं की गई है। दूसरी ओर, मंदिर प्रबंधन की ओर से भी अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vikram-mastal-questions-on-the-management-of-salkanpur-devi-dham/article-57407</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:16:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ओंकारेश्वर मंदिर में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की संख्या बढ़ी, अब रोज 6 हजार श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[27 जून से नई व्यवस्था लागू, 4 हजार की जगह प्रतिदिन 6 हजार ऑनलाइन टिकट होंगे जारी; सामान्य कतारों का दबाव घटने और मंदिर की आय बढ़ने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-number-of-online-early-darshan-tickets-increased-in-omkareshwar/article-57118"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/omkareshwar-temple-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने ऑनलाइन शीघ्र दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब प्रतिदिन जारी होने वाले ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की संख्या 4,000 से बढ़ाकर 6,000 कर दी गई है। नई व्यवस्था 27 जून से प्रभावी हो गई है। प्रत्येक ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकट का शुल्क पहले की तरह 300 रुपये ही रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से अधिक श्रद्धालुओं को कम समय में दर्शन का अवसर मिलेगा और मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। ओंकारेश्वर मंदिर देश के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और यहां पूरे वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि, अमावस्या, पूर्णिमा और अन्य धार्मिक पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों की सीमित संख्या के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु टिकट बुक नहीं कर पाते थे। कई लोगों को सामान्य कतार में लंबा इंतजार करना पड़ता था। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए टिकटों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और ऑनलाइन टिकटों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। पहले प्रतिदिन 4,000 ऑनलाइन टिकट उपलब्ध कराए जाते थे, लेकिन अब 2,000 अतिरिक्त टिकट जारी किए जाएंगे। इससे रोजाना कुल 6,000 श्रद्धालु ऑनलाइन शीघ्र दर्शन सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी और दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु रूप से संचालित होगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य दर्शन की कतारों पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। अभी तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऑनलाइन टिकट नहीं मिलने के कारण सामान्य लाइन में शामिल हो जाते थे, जिससे कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता था। अब अधिक लोगों को ऑनलाइन टिकट मिलने से सामान्य कतारों में भी भीड़ कम होगी और बिना शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं को भी पहले की तुलना में कम समय में दर्शन करने का अवसर मिल सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस फैसले से मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अब तक 4,000 ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों से प्रतिदिन लगभग 12 लाख रुपये की आय होती थी। टिकटों की संख्या बढ़कर 6,000 होने के बाद यह आय बढ़कर लगभग 18 लाख रुपये प्रतिदिन पहुंच जाएगी। यानी केवल ऑनलाइन शीघ्र दर्शन टिकटों से ही मंदिर को प्रतिदिन लगभग 6 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। यदि पूरे वर्ष इसी व्यवस्था के अनुसार टिकटों की बुकिंग होती है तो सालाना आय में करीब 21 करोड़ रुपये तक की वृद्धि संभव मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन का यह भी अनुमान है कि ऑनलाइन व्यवस्था बेहतर होने से अन्य श्रेणियों के टिकटों की बुकिंग में भी वृद्धि होगी। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 1,000 अतिरिक्त टिकट अन्य श्रेणियों में भी बुक हो सकते हैं, जिससे लगभग 3 लाख रुपये प्रतिदिन की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, स्वच्छता, पेयजल, प्रतीक्षालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन टिकटों की संख्या बढ़ने से दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को पहले से यात्रा की बेहतर योजना बनाने में आसानी होगी। कई बार टिकट उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों को सामान्य कतार में घंटों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब अधिक टिकट उपलब्ध होने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। ओंकारेश्वर के पंडित नीलेश पुरोहित ने भी जिला प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला श्रद्धालुओं के हित में है और इससे दर्शन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को समय पर दर्शन का लाभ मिलेगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए समय-समय पर ऐसी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना आवश्यक है। मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में ओंकारेश्वर का विशेष महत्व है। यहां हर दिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके चलते मंदिर प्रशासन भी डिजिटल सुविधाओं और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार कर रहा है। ऑनलाइन टिकट व्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देना और भीड़ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से ही टिकट बुक करें और तय समय के अनुसार मंदिर पहुंचें। इससे अनावश्यक भीड़ से बचा जा सकेगा और सभी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन का लाभ मिल सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 13:29:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मंदिरों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम लागू करने की तैयारी, पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या विवाद के बाद मध्य प्रदेश में बनेगी एक्सपर्ट कमेटी, बड़े देवस्थानों की दान व्यवस्था की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/governments-emphasis-on-increasing-transparency-preparation-to-implement-digital-donation/article-56634"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/digital-donation-system.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदे और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सामने आए विवाद के बाद मध्य प्रदेश सरकार अब प्रदेश के प्रमुख मंदिरों की दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार बड़े देवस्थानों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम को व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है, ताकि नकद लेन-देन पर निर्भरता कम हो और दान राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने संकेत दिए हैं कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, खंडवा के ओंकारेश्वर मंदिर सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल दान व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से न केवल दान प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि मंदिरों की आय और खर्च का रिकॉर्ड भी अधिक व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए राज्य सरकार एक विशेषज्ञ समिति का गठन करने जा रही है। यह समिति देश के उन प्रमुख मंदिरों का अध्ययन करेगी जहां दान और चढ़ावे के प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। समिति विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध मंदिरों का दौरा कर वहां लागू व्यवस्थाओं को समझेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश के मंदिरों में नई व्यवस्थाएं लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा। सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब मंदिरों में दान राशि और संपत्ति के प्रबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में नकद दान करते हैं, ऐसे में रिकॉर्ड रखने और निगरानी की मजबूत व्यवस्था जरूरी हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में पहले भी मंदिरों की वित्तीय व्यवस्था को लेकर गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। सबसे चर्चित मामला रामराजा मंदिर से जुड़ा रहा है, जहां वर्ष 2017 में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासन को भी चौंका दिया था। उस समय मंदिर के खजाने, दान राशि, आभूषणों और विभिन्न अभिलेखों में कथित गड़बड़ियों की बात सामने आई थी। प्रारंभिक जांच में कई तरह की विसंगतियां उजागर होने के बाद प्रशासन ने मामला दर्ज कराया था। बताया जाता है कि तत्कालीन जांच में मंदिर की नकद राशि, गहनों और स्टॉक रजिस्टर से जुड़ी कई अनियमितताओं के संकेत मिले थे। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। हालांकि मामला वर्षों तक जांच के स्तर पर ही उलझा रहा। नौ साल बीत जाने के बावजूद कथित रूप से गायब हुई संपत्ति और नकदी के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आ सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लंबे समय तक जांच लंबित रहने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकल पीठ ने मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि अत्यधिक लंबी अवधि तक विवेचना लंबित रखना त्वरित न्याय के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता। अदालत की टिप्पणी के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण रहे हैं और इस फैसले को उच्च स्तर पर चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। मंदिरों में डिजिटल डोनेशन सिस्टम लागू होने से ऐसी कई समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। डिजिटल भुगतान का हर लेन-देन रिकॉर्ड में दर्ज होता है, जिससे हिसाब-किताब की निगरानी आसान हो जाती है। साथ ही दानदाताओं को भी यह भरोसा मिलता है कि उनकी ओर से दी गई राशि का सही उपयोग किया जा रहा है। कई बड़े धार्मिक संस्थानों ने पहले ही डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन दान की सुविधा शुरू कर दी है, जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है।  सरकार की प्रस्तावित समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में डिजिटल दान व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:50 +0530</pubDate>
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