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                <title>West Bengal Budget - दैनिक जागरण</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल का पहला BJP बजट पेश, DA बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[नई सरकार ने 38% DA वृद्धि, 36,000 करोड़ की महिला योजना और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर ऐलान के साथ विकास और रोजगार पर जोर दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/first-bjp-budget-of-west-bengal-presented-da-increased/article-56667"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/west-bengal-budget.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने अपना पूर्ण बजट पेश किया, जिसे राज्य की राजनीति और आर्थिक दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए साफ संदेश दिया कि नई सरकार का फोकस अब रोजगार, उद्योग, बुनियादी ढांचा और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाने पर रहेगा। यह बजट ऐसे समय आया है जब राज्य पर कर्ज का दबाव, धीमी औद्योगिक वृद्धि और रोजगार संकट जैसी चुनौतियां पहले से मौजूद हैं।  यह बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि नई सरकार की दिशा तय करने वाला बयान भी है। बजट में सबसे ज्यादा चर्चा सरकारी कर्मचारियों के लिए की गई घोषणा को लेकर रही, जहां महंगाई भत्ते (DA) में 38% तक की बढ़ोतरी की गई। इससे लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से डीए को लेकर राज्य में असंतोष देखा जा रहा था, जिसे इस फैसले से कम करने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही सरकार ने विधायक फंड में 30 लाख रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा भी की है, जिससे स्थानीय विकास कार्यों को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। वित्त मंत्री ने बजट के बाद कहा कि राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिना कर बढ़ाए राजस्व बढ़ाना है, और इसी दिशा में सरकार काम कर रही है। महिला कल्याण को लेकर भी इस बजट में बड़ा कदम उठाया गया है। ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसे सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना बताया जा रहा है। इस फैसले के जरिए सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह कल्याणकारी योजनाओं से पीछे नहीं हटेगी, भले ही उसका जोर आर्थिक विकास और निवेश पर क्यों न हो। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिला वोटर हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं, और इसी को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा आवंटन किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रोजगार और उद्योग के क्षेत्र को बजट का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार ने करीब 40,000 करोड़ रुपये के विकास पैकेज की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। इसके साथ ही एक नई औद्योगिक नीति लाने की बात भी कही गई है, जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुधारने और निवेशकों को आकर्षित करने पर केंद्रित होगी। लंबे समय से राज्य में औद्योगिक निवेश की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में नई सरकार इस छवि को बदलने की कोशिश कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी बजट में बड़े ऐलान किए गए हैं। कोलकाता क्षेत्र के लिए एक नए एयरपोर्ट की योजना पेश की गई है, जो लगभग 1000 एकड़ जमीन पर कालीनी के पास विकसित किया जाएगा। इसके अलावा राज्य में तीन नए एयरफील्ड बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम राज्य को लॉजिस्टिक्स और एविएशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि बजट के साथ कुछ राजनीतिक विवाद भी जुड़े। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा के बजट में बड़ी कटौती की गई है, जिसे लेकर विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। सरकार ने मदरसा शिक्षा फंड को 5,713 करोड़ रुपये से घटाकर 2,165 करोड़ रुपये कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि यह फैसला सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जबकि सरकार का कहना है कि संसाधनों का बेहतर उपयोग प्राथमिकता है। यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी है। एक तरफ जहां कर्मचारियों और महिलाओं को राहत देकर सरकार ने सामाजिक आधार मजबूत करने की कोशिश की है, वहीं उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देकर विकास की नई कहानी लिखने का प्रयास किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये घोषणाएं जमीन पर उतर पाएंगी या केवल कागजों तक सीमित रहेंगी। राज्य में बजट को लेकर चर्चा तेज है और हर वर्ग अपने हिसाब से इसे देख रहा है। कर्मचारी वर्ग राहत से खुश है, विपक्ष सवाल उठा रहा है और उद्योग जगत उम्मीदों के साथ आगे की नीतियों का इंतजार कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:00:08 +0530</pubDate>
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