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                <title>TrendingIndia - दैनिक जागरण</title>
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                <title>उद्धव गुट में और टूट के दावे तेज, शिवसेना नेता बोले- सातवें सांसद ने भी की थी शिंदे गुट में जाने की कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ी। शिवसेना नेता रामदास कदम ने दावा किया कि एक और सांसद भी आने को तैयार थे, लेकिन मंत्री पद को लेकर सहमति नहीं बन सकी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/claims-of-further-split-in-uddhav-faction-intensified-shiv-sena/article-56720"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/udhav.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद सियासी सरगर्मी और तेज हो गई है। इस बीच शिवसेना नेता रामदास कदम ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट का एक सातवां सांसद भी शिंदे खेमे में शामिल होना चाहता था। उनके अनुसार संबंधित सांसद ने पार्टी बदलने के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे, लेकिन केंद्रीय मंत्री पद की मांग पूरी नहीं होने के कारण अंतिम समय में फैसला बदल दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदास कदम ने सांसद का नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि वह सांसद उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी हैं और अक्सर उनके बगल में बैठते हैं। कदम के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सोमवार को शिवसेना (UBT) के नौ में से छह लोकसभा सांसद आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इसके साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई है, जिससे संसद में उनकी राजनीतिक ताकत और मजबूत हुई है।</p>
<h2>सांसदों की बगावत से बढ़ी चुनौती</h2>
<p class="isSelectedEnd">मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने छह सांसदों के शामिल होने को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक लड़ाई बालासाहेब ठाकरे के विचारों और मूल शिवसेना की पहचान को बनाए रखने के लिए है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा सांसदों के इस कदम से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पर दबाव बढ़ सकता है। वर्ष 2022 में पार्टी में हुई बड़ी टूट के बाद यह दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है।</p>
<h2>विधायकों को लेकर भी अटकलें</h2>
<p class="isSelectedEnd">सांसदों के बाद अब विधायकों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोमवार को विधानसभा के मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में तीन विधायक और एक विधान परिषद सदस्य शामिल नहीं हुए। इसके बाद संभावित राजनीतिक बदलावों को लेकर कयास लगाए जाने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि अनुपस्थित विधायकों में शामिल सुनील शिंदे ने सोशल मीडिया के जरिए स्पष्ट किया कि वह निजी कारणों से अपने गृह क्षेत्र में थे और बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने पार्टी छोड़ने संबंधी अटकलों को निराधार बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र की राजनीतिक तस्वीर पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलती रही है। 2022 में शिवसेना में विभाजन और उसके बाद सत्ता परिवर्तन के बाद अब लोकसभा स्तर पर हुए इस नए घटनाक्रम को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में और जनप्रतिनिधि पाला बदलते हैं तो इसका असर राज्य की विपक्षी राजनीति और महाविकास अघाड़ी की रणनीति पर भी पड़ सकता है।</p>
<p>फिलहाल सभी निगाहें शिवसेना (UBT) के अगले कदम और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में जारी इस उथल-पुथल को राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह मामला प्रमुख राजनीतिक चर्चाओं में शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:00:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>TMC ने चुनाव आयोग को भेजी नई सूची, ममता बनर्जी को फिर बताया पार्टी प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[बागी गुट द्वारा समानांतर कार्यसमिति के गठन के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची सौंपी। सूची में ममता बनर्जी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-sent-new-list-to-election-commission-and-again-declared/article-56718"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद के बीच पार्टी ने चुनाव आयोग को अपने पदाधिकारियों और राष्ट्रीय कार्यसमिति की अद्यतन सूची भेज दी है। पार्टी द्वारा आयोग को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में ममता बनर्जी को अध्यक्ष, सुभ्रत बक्शी को उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में दर्शाया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एक दिन पहले पार्टी के बागी गुट ने समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने और विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करने का दावा किया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग को भेजी गई सूची 20 जून 2026 तक की संगठनात्मक स्थिति के आधार पर तैयार की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी नेतृत्व की वैधता और संगठनात्मक संरचना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इधर, तृणमूल कांग्रेस ने बागी गुट से जुड़े आठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी का आरोप है कि ये नेता संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आधिकारिक लाइन से अलग काम कर रहे हैं। हालांकि बागी गुट का दावा है कि उसने पार्टी संविधान के तहत संगठनात्मक रिक्तता को भरने के लिए नई कार्यसमिति गठित की है।</p>
<h2>कार्यसमिति पर विवाद</h2>
<p class="isSelectedEnd">चुनाव आयोग को भेजी गई सूची के अनुसार, राष्ट्रीय कार्यसमिति में कुल 24 नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, मदन मित्रा, अमित मित्रा और चंद्रिमा भट्टाचार्य समेत कई वरिष्ठ नेताओं को कार्यसमिति में स्थान मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता में बैठक कर समानांतर राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया था। इस गुट ने अरूप रॉय को अध्यक्ष तथा फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष घोषित किया था।</p>
<h2>नेतृत्व पर सियासी संदेश</h2>
<p class="isSelectedEnd">बागी नेताओं का कहना है कि फरवरी 2022 में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी 2026 में समाप्त हो गया था और नई समिति का गठन नहीं होने के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस दावे को खारिज कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागी गुट को तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कोई समानांतर संगठन चलाने का अधिकार नहीं है। सांसद सौगत रॉय ने भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी पार्टी की संस्थापक और सर्वोच्च नेता हैं तथा संगठन की पहचान उनके नेतृत्व से ही जुड़ी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय नेता के खिलाफ प्रदर्शन की घटना भी चर्चा में रही। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इसे स्थानीय स्तर का मामला बताया है और संगठनात्मक विवाद से जोड़ने से इनकार किया है।</p>
<p>राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव आयोग को भेजी गई नई सूची तृणमूल कांग्रेस की ओर से संगठनात्मक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागी गुट की गतिविधियों पर पार्टी क्या अनुशासनात्मक कदम उठाती है और चुनाव आयोग के समक्ष संगठनात्मक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार, भारत समाचार अपडेट तथा ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:54:42 +0530</pubDate>
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                <title>भोपाल एयरपोर्ट टैक्सी हड़ताल टली, VVIP मूवमेंट के चलते अनुमति नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राजा भोज एयरपोर्ट पर 23 से 25 जून तक प्रस्तावित ऑनलाइन कैब चालकों की हड़ताल प्रशासनिक अनुमति न मिलने के कारण स्थगित कर दी गई। यूनियन ने भविष्य में बड़ा आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-airport-taxi-strike-postponed-no-permission-due-to-vvip/article-56704"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-airport.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर ऐप आधारित टैक्सी चालकों द्वारा प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल फिलहाल टल गई है। 23 से 25 जून के बीच होने वाली इस हड़ताल को प्रशासन और पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने निर्णय के पीछे शहर में प्रस्तावित VVIP मूवमेंट और सुरक्षा व्यवस्थाओं का हवाला दिया है। इस फैसले से राजधानी आने-जाने वाले हजारों हवाई यात्रियों को तत्काल राहत मिली है, क्योंकि हड़ताल होने की स्थिति में एयरपोर्ट से शहर तक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध भोपाल टैक्सी ड्राइवर यूनियन ने एयरपोर्ट क्षेत्र के पास धरना-प्रदर्शन की योजना बनाई थी। यूनियन का आरोप है कि ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर कंपनियां सरकार द्वारा तय न्यूनतम किराया दरों का पालन नहीं कर रही हैं, जिससे ड्राइवरों की आय प्रभावित हो रही है। हालांकि प्रशासनिक अनुमति रद्द होने के बाद यूनियन ने फिलहाल आंदोलन को टालने का फैसला लिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजधानी भोपाल में हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में राजा भोज एयरपोर्ट से 1.38 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की। औसतन प्रतिदिन 4,500 से ज्यादा यात्री एयरपोर्ट का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में यदि हड़ताल होती तो एयरपोर्ट से शहर और शहर से एयरपोर्ट तक पहुंचने वाले यात्रियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता था।</p>
<h2>किराया विवाद बना वजह</h2>
<p class="isSelectedEnd">यूनियन का मुख्य आरोप है कि ऑनलाइन टैक्सी प्लेटफॉर्म चालक साझेदारों को राज्य परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित आधारभूत किराए के अनुरूप भुगतान नहीं कर रहे हैं। चालक संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और वाहन रखरखाव के खर्चों के बीच वर्तमान आय उनके लिए पर्याप्त नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यूनियन नेताओं के अनुसार, सरकार द्वारा तय न्यूनतम किराया लागू करना ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। उनका दावा है कि कई चालक आर्थिक दबाव में काम कर रहे हैं और उन्हें अपनी आजीविका बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<h2>आंदोलन की चेतावनी</h2>
<p class="isSelectedEnd">भोपाल टैक्सी ड्राइवर यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि संगठन ने हमेशा कानूनी दायरे में रहकर अपनी मांगें उठाई हैं और प्रदर्शन भी शांतिपूर्ण तरीके से करने की योजना थी। इसके बावजूद अनुमति नहीं मिलने से चालक समुदाय में असंतोष है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यूनियन के अनुसार, वह जल्द ही दोबारा अनुमति के लिए आवेदन करेगी। यदि मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। संगठन ने संकेत दिया है कि भविष्य में टैक्सी सेवाओं के साथ ऑटो-रिक्शा चालकों को भी आंदोलन में शामिल किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इससे पहले भी फरवरी और जून में टैक्सी चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किए थे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे थे। हाल ही में कुछ चालकों ने फटे कपड़े पहनकर और कटोरे लेकर विरोध दर्ज कराया था, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियों को उजागर किया जा सके।</p>
<p>फिलहाल हड़ताल टलने से यात्रियों को राहत मिली है, लेकिन टैक्सी किराया विवाद का समाधान नहीं होने पर आने वाले दिनों में राजधानी में परिवहन सेवाओं को लेकर स्थिति फिर से गरमा सकती है। भारत समाचार अपडेट, आज की ताज़ा ख़बरें और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह मुद्दा शहरी परिवहन और श्रमिक अधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में उभर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:18:37 +0530</pubDate>
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