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                <title>Mayurbhanj TribalIndia NarendraModi DroupadiMurmu AdivasiCommunity TribalHeritage OdishaNews IndigenousCulture PublicPolicy IndianPolitics CulturalIdentity IndiaNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>मयूरभंज का संदेश: कल्याण से सम्मान तक आदिवासी नीति की नई यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मयूरभंज यात्रा ने आदिवासी विरासत, प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय पहचान के केंद्र में लाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mayurbhanjs-message-new-journey-of-tribal-policy-from-welfare-to/article-56736"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mayurbhunj.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मयूरभंज यात्रा ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय योगदान को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।</p>
<p>आदिवासी समाज को लेकर भारत का दृष्टिकोण अब केवल विकास और कल्याण तक सीमित नहीं रह गया है। मयूरभंज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की संयुक्त उपस्थिति ने इस बदलाव को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया है। यह यात्रा केवल सरकारी कार्यक्रमों या विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने आदिवासी परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान प्रणालियों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश को भी सामने रखा।</p>
<p>भारत में लंबे समय तक आदिवासी समुदायों को मुख्य रूप से गरीबी, विस्थापन, बुनियादी सुविधाओं की कमी और उग्रवाद से जुड़ी चुनौतियों के संदर्भ में देखा जाता रहा। हालांकि ये मुद्दे आज भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हाल के वर्षों में नीति और सार्वजनिक विमर्श में एक व्यापक बदलाव दिखाई दिया है, जिसमें आदिवासी समाज को देश की सांस्कृतिक और सभ्यतागत धरोहर के संरक्षक के रूप में भी मान्यता मिल रही है।</p>
<h3><span><strong>कल्याण से सशक्तिकरण तक</strong></span></h3>
<p>पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। पीएम जनमन योजना, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का विस्तार, लघु वनोपज खरीद व्यवस्था को मजबूत करना तथा सड़क, रेल, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी में निवेश इसी दिशा के प्रमुख कदम माने जाते हैं।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार इन पहलों का उद्देश्य केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना भी है। नीति का फोकस अब इस बात पर है कि विकास स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के सम्मान के साथ आगे बढ़े।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास, शिक्षा और बेहतर प्रशासन की रणनीति ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। कई क्षेत्रों में उग्रवाद के प्रभाव में आई कमी को इसी व्यापक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<h3><span><strong>प्रतिनिधित्व की बढ़ती भूमिका</strong></span></h3>
<p>आदिवासी समाज के लिए प्रतिनिधित्व का सबसे बड़ा उदाहरण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना माना जाता है। मयूरभंज से राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर करोड़ों आदिवासी नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी की पहाड़पुर गांव यात्रा को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह पहला अवसर था जब किसी वर्तमान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति मुर्मू के ससुराल गांव का दौरा किया। साथ ही यह उन दुर्लभ मौकों में शामिल रहा जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान आदिवासी आस्था स्थलों की संयुक्त यात्रा की।<img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-23-at-1.05.17-am.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-23 at 1.05.17 AM" width="610" height="372"></img></p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार किसी भी समुदाय के लिए केवल योजनाएं ही पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि राष्ट्रीय संस्थाओं और सार्वजनिक जीवन में उसकी उपस्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। प्रतिनिधित्व समुदायों में अपनापन और भागीदारी की भावना को मजबूत करता है।</p>
<h3><span><strong>राष्ट्रीय कथा में आदिवासी विरासत</strong></span></h3>
<p>हाल के वर्षों में आदिवासी नायकों और आंदोलनों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी कई कदम उठाए गए हैं। भगवान <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Birsa Munda</span></span> की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय इसी प्रयास का हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित संग्रहालय और स्मारक परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं।</p>
<p>इसी क्रम में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Shibu Soren</span></span> को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित करने का निर्णय भी उल्लेखनीय माना गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम भारत के स्वतंत्रता संग्राम और लोकतांत्रिक विकास में आदिवासी योगदान को मुख्यधारा के इतिहास में उचित स्थान दिलाने में मदद करते हैं।</p>
<h3><span><strong>मयूरभंज क्यों महत्वपूर्ण है</strong></span></h3>
<p>मयूरभंज यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू संथाल ‘जाहेर’ और हो ‘जाहेरा’ पवित्र उपवनों का दौरा रहा। ये केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि ऐसे सामुदायिक केंद्र हैं जहां आस्था, प्रकृति, संस्कृति और सामूहिक स्मृति एक साथ जुड़ी हुई हैं।</p>
<p>बाहा, सोहराय और माघे परब जैसे प्रमुख त्योहार इन्हीं परंपराओं से जुड़े हैं। पीढ़ियों से संरक्षित ये पवित्र स्थल प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की उस सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे आज वैश्विक स्तर पर सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के रूप में महत्व दिया जा रहा है।</p>
<p>राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की संयुक्त उपस्थिति को संथाल और हो समुदायों की आध्यात्मिक परंपराओं को मिले उच्चतम स्तर के सरकारी सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संदेश भी गया कि आदिवासी समाज केवल विकास योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत का महत्वपूर्ण संरक्षक है।</p>
<p>मयूरभंज की यह यात्रा किसी एक कार्यक्रम या समारोह तक सीमित नहीं है। यह उस व्यापक बदलाव का प्रतीक है जिसमें आदिवासी समाज को भारत की राष्ट्रीय कहानी के हाशिये पर नहीं, बल्कि उसके केंद्र में स्थान देने की कोशिश दिखाई देती है। विकास, सम्मान, प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक पहचान को साथ लेकर चलने वाला यह दृष्टिकोण आने वाले वर्षों में आदिवासी नीति और राष्ट्रीय विमर्श दोनों को नई दिशा दे सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:28:25 +0530</pubDate>
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