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                <title>नारायणपुर में 26 ईसाई परिवारों को गांव से बाहर निकाला, तनाव बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[धर्मांतरण विवाद में ग्रामीणों का आरोप- मूल परंपरा अपनाओ तभी लौट सकते हो, पुलिस ने गांव में तैनात किया भारी बल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/tension-increased-in-narayanpur-after-26-christian-families-were-thrown/article-56810"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भरेंडा गांव में धर्मांतरण को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। मंगलवार को गांव में उस समय तनाव फैल गया जब ईसाई धर्म मानने वाले 26 परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें गांव से बाहर निकाल दिया गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि कुछ ग्रामीण अचानक उनके घरों पर पहुंचे और उन्हें गांव छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद सभी परिवार गांव के बाहर खुले आसमान के नीचे और पेड़ों की छांव में रहने को मजबूर हो गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में माहौल तनावपूर्ण हो गया है और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के की गई और उन्हें केवल उनके धार्मिक विश्वास के कारण निशाना बनाया गया है। उनका कहना है कि वे वर्षों से इस गांव में रह रहे हैं और उनकी सामाजिक और पारिवारिक जड़ें यहीं जुड़ी हुई हैं। अचानक इस तरह गांव से बाहर निकाल दिया जाना उनके लिए बेहद कठिन स्थिति है। कुछ परिवारों ने बताया कि उन्हें सामान तक समेटने का समय नहीं दिया गया और उन्हें मजबूरी में गांव छोड़ना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रभावित लोग अस्थायी रूप से सड़क किनारे और खुले स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का पक्ष भी सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, जिससे उनकी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार यह बदलाव गांव की परंपराओं के खिलाफ है और इसी कारण विवाद लगातार बढ़ रहा था। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार समझाने के बावजूद स्थिति सामान्य नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि यदि ये परिवार अपने मूल रीति-रिवाजों को स्वीकार करते हैं तो उन्हें वापस गांव में रहने दिया जा सकता है। घटना के बाद स्थिति और बिगड़ गई जब पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों के बीच तनाव बढ़ गया। स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलवार सुबह कुछ ग्रामीण, जिनमें गयता और पटेल जैसे पदधारी भी शामिल बताए जा रहे हैं, कई घरों में पहुंचे और एक-एक कर 26 परिवारों को गांव छोड़ने की चेतावनी दी। इसके बाद कथित तौर पर कुछ स्थानों पर रास्तों को लकड़ियों से अवरुद्ध भी किया गया, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई। अचानक हुई इस घटना से गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई लोग डर के कारण अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईसाई धर्म मानने वाले परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ लंबे समय से भेदभाव किया जा रहा था, लेकिन मंगलवार की घटना ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। प्रभावित लोगों में संत राम दुग्गा, चैतू कुमेटी और मनायकु वट्टी समेत कई ग्रामीण शामिल हैं, जिन्होंने कहा कि वे किसी भी अवैध दबाव के बिना शांतिपूर्वक जीवन जीना चाहते हैं। उनका कहना है कि धार्मिक आधार पर किसी को उसके घर और गांव से बाहर करना न केवल गलत है बल्कि यह उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग की है। दूसरी ओर ग्रामीणों का दावा है कि गांव में बढ़ते धार्मिक परिवर्तन से सामाजिक संतुलन प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि आदिवासी परंपराएं और सामुदायिक व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही हैं और उनमें अचानक बदलाव से सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यही कारण है कि तनाव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार हालात इस स्तर तक पहुंच गए। हालांकि इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बीच संवाद की कमी भी साफ दिखाई दे रही है, जिससे विवाद और गहरा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने गांव में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत शुरू की है ताकि स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की हिंसा या अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में लगातार निगरानी की जा रही है। पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यह विवाद नया नहीं है। बताया जा रहा है कि दिसंबर 2025 से ही गांव में धार्मिक मतभेद को लेकर तनाव बना हुआ था। समय-समय पर छोटे-छोटे विवाद सामने आते रहे, लेकिन 9 जून 2026 को स्थिति अचानक बिगड़ गई थी जब दोनों पक्षों के बीच मारपीट की घटना हुई थी, जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए थे। उस समय प्रशासन के हस्तक्षेप से मामला शांत तो हो गया था, लेकिन विवाद की जड़ें पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं और अब फिर से यह मुद्दा उभरकर सामने आ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 14:17:12 +0530</pubDate>
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