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                <title>Emergency1975 - दैनिक जागरण</title>
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                <title>रायपुर में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, CM विष्णुदेव साय बोले- नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है उनका संघर्ष और त्याग</title>
                                    <description><![CDATA['आपातकाल के योद्धा' स्मारिका का हुआ विमोचन, इंद्रेश कुमार ने कहा- संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र प्रथम की भावना से मजबूत बनेगा भारत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/honoring-democracy-fighters-in-raipur-cm-vishnudev-sai-said/article-57669"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-democracy-fighters1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राजधानी रायपुर में आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को देश की लोकतांत्रिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष और त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का ऐसा अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उस दौर में जिन लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए कठिनाइयों का सामना किया, उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका 'आपातकाल के योद्धा' का विमोचन किया। इसके साथ ही आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। समारोह में लोकतंत्र सेनानी, उनके परिजन, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों की स्वतंत्रता, अधिकारों और जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है ताकि युवा यह समझ सकें कि लोकतांत्रिक अधिकार कितने महत्वपूर्ण हैं और उनकी रक्षा के लिए कई लोगों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अपने परिवार से जुड़ी एक पुरानी स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय करीब 19 महीने तक जेल में रहे थे। उस समय परिवार को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में कई स्वयंसेवक भेष बदलकर लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों तक राशन और अन्य आवश्यक सामान पहुंचाते थे, ताकि कोई परिवार भूखा न रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिए गए त्याग की गवाही देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इतिहास के इन महत्वपूर्ण अध्यायों को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को देश के लोकतांत्रिक संघर्ष और उसके मूल्यों की जानकारी मिल सके। उन्होंने इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी में लोकतंत्र के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि भारतीय समाज के जीवन मूल्यों का आधार है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर असर पड़ा था। ऐसे समय में लोकतंत्र सेनानियों ने जेल, यातनाएं और अनेक कठिनाइयां सहते हुए लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा की। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने तथा नशामुक्त और स्वच्छ समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों से और अधिक मजबूत होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी आपातकाल के दौर को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि उस समय प्रेस सेंसरशिप लागू की गई, मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए और संविधान में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। उन्होंने कहा कि इतिहास की इन घटनाओं से सीख लेते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमेशा सजग रहने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह में आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यालय वर्ग में रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम, कोरबा के सूरज तांडिया ने द्वितीय और दुर्ग के अंश देशमुख ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं महाविद्यालय वर्ग में रायपुर की कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय और दुर्ग की खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह और प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक गोमती साय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और लोकतंत्र सेनानी मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:22:36 +0530</pubDate>
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                <title>आपातकाल दिवस पर भोपाल में बड़ा आयोजन, दो हजार मीसाबंदी परिवार होंगे सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया जाएगा याद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-event-to-be-organized-in-bhopal-on-emergency-day/article-56896"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/emergency-day-bhopal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश में लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। शहर के प्रतिष्ठित रवीन्द्र भवन में होने वाले इस आयोजन में प्रदेशभर से आए करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहेंगे, जो आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानियों के भोपाल पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक सहित कई वरिष्ठ सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहेंगी। मंच से उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। बताया जा रहा है कि समारोह में आपातकाल के दौर से जुड़े अनुभवों और उस समय की परिस्थितियों पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले मीसाबंदी परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आपातकाल दिवस को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण लेकिन विवादित अध्याय के रूप में याद किया जाता है। 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद करीब 21 महीनों तक देश में विशेष परिस्थितियां बनी रहीं। इस दौरान कई संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए और राजनीतिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा गया। विपक्षी दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को बिना नियमित न्यायिक प्रक्रिया के जेल भेजा गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में भी उस समय अनेक राजनीतिक कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से कई लोगों को मीसा यानी मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत निरुद्ध किया गया था। ऐसे लोगों को बाद में मीसाबंदी के नाम से जाना गया। आपातकाल समाप्त होने के बाद इन लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जोड़कर देखा गया। यही कारण है कि हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उस दौर को याद किया जाता है और लोकतंत्र की मजबूती पर चर्चा होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बार भोपाल में होने वाला कार्यक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में मीसाबंदी परिवारों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई है। आयोजकों का कहना है कि केवल उन लोगों का सम्मान करना उद्देश्य नहीं है जिन्होंने जेल यात्रा की थी, बल्कि उनके परिवारों के त्याग और संघर्ष को भी याद करना जरूरी है। कई परिवारों ने उस समय सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया था। ऐसे में यह कार्यक्रम लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए सामूहिक योगदान को सम्मान देने का प्रयास माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने संबोधन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और संविधान के मूल्यों पर भी विचार रख सकते हैं। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी और दस्तावेजों का प्रदर्शन भी किया जा सकता है। इसके अलावा कई लोकतंत्र सेनानी अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे नई पीढ़ी को उस दौर के बारे में जानकारी मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य स्तर पर आपातकाल को लोकतंत्र पर लगाए गए प्रतिबंध के रूप में याद करने की परंपरा को और अधिक प्रमुखता मिली है। सरकार का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को सम्मान देना समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है। रवीन्द्र भवन में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर राजधानी में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शुक्रवार को सुबह से ही विभिन्न जिलों से आए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों की मौजूदगी से कार्यक्रम स्थल पर विशेष माहौल रहने की उम्मीद है। आपातकाल दिवस के अवसर पर होने वाला यह आयोजन न केवल इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को याद करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के महत्व को भी एक बार फिर रेखांकित करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:41:46 +0530</pubDate>
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