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                <title>PoliceNews - दैनिक जागरण</title>
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                <description>PoliceNews RSS Feed</description>
                
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                <title>ग्वालियर में 19 साल बताकर दर्ज कराई गुमशुदगी, दस्तावेजों में निकली नाबालिग</title>
                                    <description><![CDATA[नोएडा से बरामद किशोरी ने काउंसिलिंग में खोला बाल विवाह का राज, हाईकोर्ट ने 15 दिन में एफआईआर के दिए निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/a-missing-person-lodged-in-gwalior-as-19-years-old/article-57198"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र में एक गुमशुदगी का मामला उस समय नया मोड़ ले गया, जब पुलिस जिस युवती को बालिग मानकर तलाश रही थी, वह बरामद होने के बाद दस्तावेजों में नाबालिग निकली। मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि किशोरी का कम उम्र में ही गुपचुप तरीके से बाल विवाह करा दिया गया था। इस खुलासे के बाद मामला केवल गुमशुदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाल विवाह और पॉक्सो एक्ट से जुड़ी गंभीर कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया। हाईकोर्ट ने भी मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को 15 दिन के भीतर बाल विवाह कराने वाले सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के सागरताल फेज-2 निवासी एक व्यक्ति ने 12 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 19 वर्षीय बेटी घर से लापता हो गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी। सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने दो दिन पहले युवती को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा से बरामद कर लिया। वह बहोड़ापुर निवासी किशन खटीक के साथ मिली। पुलिस दोनों को ग्वालियर लेकर आई और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। मामले में सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब युवती को न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट की प्रक्रिया के दौरान उसकी मार्कशीट और जन्म प्रमाण पत्र की जांच की गई। दस्तावेजों में उसकी उम्र 19 वर्ष नहीं बल्कि 17 वर्ष दर्ज मिली। इसके बाद पूरा मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण गंभीर हो गया। पुलिस ने तत्काल अपनी जांच का दायरा बढ़ाया और किशोरी से काउंसिलिंग कराई गई ताकि पूरे घटनाक्रम की सही जानकारी सामने आ सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">काउंसिलिंग के दौरान किशोरी ने जो जानकारी दी, उसने जांच को पूरी तरह नई दिशा दे दी। उसने बताया कि उसके पिता ने उसकी इच्छा के विरुद्ध कम उम्र में ही शादी करा दी थी। वह अपने कथित पति और ससुराल पक्ष के साथ नहीं रहना चाहती थी। इसी कारण उसने घर छोड़ने का फैसला किया और पड़ोस में रहने वाले किशन खटीक के साथ चली गई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को भी बाल विवाह की पुष्टि से जुड़े तथ्य मिले हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बाल विवाह किस परिस्थिति में कराया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की भी अहम भूमिका रही। युवती के पिता ने पहले पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। जब युवती बरामद हुई और उसकी वास्तविक उम्र के साथ बाल विवाह का मामला सामने आया तो न्यायालय ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए। अदालत ने बहोड़ापुर थाना पुलिस को आदेश दिया कि 15 दिन के भीतर बाल विवाह कराने वाले सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। अदालत के इस आदेश के बाद पुलिस ने जांच को और तेज कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस ने किशन खटीक के खिलाफ नाबालिग को अपने साथ ले जाने के मामले में अपहरण और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं अब जांच का फोकस किशोरी के माता-पिता, कथित पति, ससुराल पक्ष और उन सभी लोगों पर है जो बाल विवाह की प्रक्रिया में शामिल रहे। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में उनकी भूमिका सामने आती है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत अलग से मामला दर्ज किया जाएगा। बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक परिहार ने बताया कि नोएडा से बरामद किशोरी की उम्र दस्तावेजों के अनुसार 17 वर्ष है। जांच के दौरान बाल विवाह की पुष्टि हुई है और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सभी दस्तावेजों और बयानों की जांच कर रही है ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का मौका न मिले। कानूनी रूप से बाल विवाह प्रतिबंधित होने के बावजूद कई स्थानों पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। बाल विवाह से न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन होता है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर भी गंभीर असर पड़ता है। ऐसे मामलों में परिवार के साथ-साथ विवाह कराने वाले लोगों की भी जिम्मेदारी तय होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एमपी में 65 डीएसपी के तबादले, बालाघाट हॉक फोर्स में 18 अफसरों की तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर के सीएसपी बदले, कई जिलों में नई जिम्मेदारियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/65-dsps-transferred-in-mp-18-officers-posted-in-balaghat/article-57197"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-dsp-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के बड़े स्तर पर तबादले करते हुए शनिवार देर रात 65 डीएसपी स्तर के अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए। गृह विभाग द्वारा जारी इस तबादला सूची में ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर जैसे प्रमुख शहरों के नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) बदले गए हैं। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के कई अधिकारियों को शहरी क्षेत्रों में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। लंबे समय बाद जारी हुई इस व्यापक तबादला सूची को पुलिस प्रशासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना तथा जरूरत के अनुसार अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करना है। इस तबादला आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात बालाघाट जिले में हॉक फोर्स को लेकर की गई बड़ी नियुक्तियां हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण बालाघाट में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डीएसपी स्तर के 18 अधिकारियों को सहायक सेनानी के रूप में हॉक फोर्स में पदस्थ किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों को देखते हुए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती जरूरी थी। इसी रणनीति के तहत बड़ी संख्या में अधिकारियों को यहां भेजा गया है ताकि नक्सल विरोधी अभियानों को और प्रभावी बनाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिन अधिकारियों को बालाघाट हॉक फोर्स में सहायक सेनानी की जिम्मेदारी दी गई है उनमें उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति, रितेश कुमार शिव, रविंद्र सिंह राठी, आयुष कुमार अलावा, सचिन पटेल, कुंदन मंडलोई, राहुल कुमार सय्याम, अक्षय चौधरी, अतुल कुमार सोनी, अमन मिश्रा, रोहित राठौर और राकेश आर्य सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों को जल्द ही अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इनकी तैनाती के बाद क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा अभियानों को नई गति मिलेगी।केवल हॉक फोर्स ही नहीं, बल्कि बालाघाट जिले में एसडीओपी स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। दीपक तोमर को एसडीओपी लांजी, चंद्रशेखर पांडे को एसडीओपी बैहर तथा अभिषेक गौतम को एसडीओपी परसवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों को भी नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती आवश्यक थी। उधर ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में भी नगर पुलिस अधीक्षकों के बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन शहरों में कानून व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों की नई तैनाती की गई है। इसके अलावा भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को शहरी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी देकर पुलिस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। हालांकि सरकार की ओर से इन तबादलों के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि समय-समय पर अधिकारियों की कार्यक्षमता, अनुभव और क्षेत्रीय जरूरतों को देखते हुए इस तरह के तबादले किए जाते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संतुलन बना रहता है, बल्कि विभिन्न जिलों में बेहतर पुलिसिंग भी सुनिश्चित होती है। खासकर संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलती है। बालाघाट जैसे सीमावर्ती और नक्सल प्रभावित जिले में अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय से अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की नई पदस्थापना को इन अभियानों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं जिन जिलों में नए सीएसपी और एसडीओपी की नियुक्ति हुई है, वहां स्थानीय पुलिस व्यवस्था में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को शीघ्र नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में नई तैनाती के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में बदलाव दिखाई दे सकता है। विशेष रूप से बालाघाट में हॉक फोर्स की मजबूती से नक्सल विरोधी अभियानों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <title>IPS बद्रीनारायण मीणा बने बस्तर रेंज के नए IG, आदेश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[2004 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की पुलिस मुख्यालय से बस्तर रेंज में नियुक्ति, कानून-व्यवस्था मजबूत करने पर रहेगा फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3cf5083093e/article-56926"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ips-badri-narayan-meena.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी बद्रीनारायण मीणा को बस्तर रेंज का नया पुलिस महानिरीक्षक (IG) नियुक्त किया है। 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी मीणा को पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर से स्थानांतरित कर यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। उनकी नियुक्ति को बस्तर जैसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जारी आदेश के अनुसार, बद्रीनारायण मीणा अब बस्तर रेंज में बतौर आईजी अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे। इससे पहले वे पुलिस मुख्यालय में आईजी के पद पर कार्यरत थे, जहां वे विभिन्न प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कार्यों का संचालन कर रहे थे। बस्तर रेंज में उनकी तैनाती को राज्य सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्था की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बस्तर रेंज छत्तीसगढ़ का वह क्षेत्र है जो भौगोलिक रूप से विशाल होने के साथ-साथ सुरक्षा चुनौतियों के लिए भी जाना जाता है। यहां वन क्षेत्रों की अधिकता और दुर्गम इलाकों के कारण पुलिसिंग एक जटिल कार्य माना जाता है। ऐसे में अनुभवी और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति से प्रशासन को उम्मीद है कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। अधिकारियों का मानना है कि नए आईजी के अनुभव का लाभ जमीनी स्तर पर कानून व्यवस्था सुधारने में मिलेगा। बद्रीनारायण मीणा लंबे समय से पुलिस सेवा में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनकी कार्यशैली को लेकर विभागीय स्तर पर उन्हें एक सख्त और अनुशासित अधिकारी के रूप में जाना जाता है। पुलिस मुख्यालय में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों और रणनीतिक योजनाओं पर कार्य किया है। अब बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में उनकी नियुक्ति को एक जिम्मेदार प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद पुलिस विभाग में इस बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि बस्तर रेंज में कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस की पहुंच बढ़ाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। ऐसे में नए आईजी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बस्तर रेंज में तैनाती के दौरान आईजी का मुख्य फोकस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ सुरक्षा अभियानों को प्रभावी बनाना होगा। इसके अलावा स्थानीय पुलिस बल की क्षमता बढ़ाने, समन्वय सुधारने और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की उपस्थिति मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। बस्तर क्षेत्र में पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य पुलिस मुख्यालय में उनकी पूर्व भूमिका को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपने अनुभव का उपयोग बस्तर रेंज में भी प्रभावी रूप से करेंगे। पुलिस विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति से निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक मजबूत होती है और जमीनी स्तर पर परिणाम बेहतर दिखाई देते हैं। बस्तर रेंज में तैनाती को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग दोनों ही सतर्क नजर आ रहे हैं। यह क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति और सामाजिक संरचना के कारण विशेष रणनीति की मांग करता है। पुलिस प्रशासन यहां न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम करता है, बल्कि विकास कार्यों में भी सुरक्षा सहयोग प्रदान करता है। ऐसे में आईजी की भूमिका बहुआयामी हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई नियुक्ति के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बद्रीनारायण मीणा किस तरह से बस्तर रेंज में अपनी कार्यशैली को लागू करते हैं। विभागीय स्तर पर उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में क्षेत्र में पुलिसिंग और अधिक प्रभावी होगी और सुरक्षा से जुड़े अभियानों को नई दिशा मिलेगी। प्रशासन ने भी संकेत दिए हैं कि बस्तर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 15:14:34 +0530</pubDate>
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