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                <title>Municipal Corporation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Municipal Corporation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रायपुर में अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर, 3 एकड़ की अवैध प्लाटिंग भी ध्वस्त</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ने जलभराव रोकने और अवैध निर्माण पर सख्ती दिखाते हुए पंडरी, सुखराम नगर और ब्रम्हदेईपारा में अतिक्रमण हटाया, अवैध प्लाटिंग पर भी बड़ी कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/bulldozer-runs-on-illegal-encroachments-in-raipur-illegal-plotting-of/article-58486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">रायपुर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या और लगातार बढ़ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ नगर निगम ने बड़ा अभियान चलाया। निगम की टीम ने शुक्रवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए नालों पर किए गए अतिक्रमण हटाए, अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया और बिना अनुमति किए गए निर्माणों पर बुलडोजर चलाया। इस अभियान के तहत पंडरी कपड़ा बाजार के दुर्गा नगर क्षेत्र में नाले पर बने अवैध पाटे को तोड़ा गया, जबकि सुखराम नगर में करीब तीन एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को भी ध्वस्त कर दिया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि बारिश के मौसम में नालों पर कब्जों के कारण जल निकासी बाधित होती है, जिससे आसपास की बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनती है। इसी को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में बिना अनुमति किए गए कब्जों, अवैध प्लाटिंग और जल निकासी में बाधा बनने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर विभिन्न जोनों की टीमों ने जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन का कहना है कि शहर को जलभराव मुक्त बनाने और नियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।</p>
<p>कार्रवाई की शुरुआत पंडरी स्थित प्रकाश होलसेल मार्केट के सामने से की गई, जहां नाले पर करीब 100 वर्गफीट का अवैध पाटा बनाकर कब्जा किया गया था। नगर निगम के अनुसार संबंधित दुकान संचालक ने नाले के ऊपर निर्माण कर लिया था, जिससे नाले की नियमित सफाई प्रभावित हो रही थी। बारिश के दौरान यही अतिक्रमण दुर्गा नगर और आसपास की बस्तियों में जलभराव की बड़ी वजह बन रहा था। शिकायतों और निरीक्षण के बाद निगम की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की सहायता से अवैध निर्माण को हटा दिया। अधिकारियों ने बताया कि मानसून में नालों की सफाई और पानी की निर्बाध निकासी प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी कारण ऐसे सभी निर्माणों को हटाया जा रहा है, जो जल निकासी में बाधा बन रहे हैं। इसके साथ ही नगर निगम की जोन-1 नगर निवेश विभाग की टीम ने संत कबीर दास वार्ड क्रमांक-3 के सुखराम नगर में दो अलग-अलग स्थानों पर लगभग तीन एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग के खिलाफ भी कार्रवाई की। मौके पर पहुंची टीम ने प्लाटिंग के लिए बनाई गई मुरम सड़क को काट दिया, प्रवेश मार्ग बंद कर दिया और तैयार की गई नींव को भी ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध कॉलोनियों के विकास को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है, ताकि भविष्य में लोगों को किसी प्रकार की कानूनी या मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े। नगर निगम ने संबंधित भूमि के वास्तविक स्वामित्व की जानकारी प्राप्त करने के लिए रायपुर तहसीलदार को पत्र भी भेजा है। भूमि मालिक की जानकारी मिलने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>इसी अभियान के दौरान वीर शिवाजी वार्ड क्रमांक-16 के ब्रम्हदेईपारा क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। यहां नाले के किनारे बनाई गई एक अवैध झोपड़ी को हटाया गया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हो रही थी। निगम अधिकारियों के अनुसार मानसून में शहर के संवेदनशील इलाकों में जलभराव रोकने के लिए ऐसे सभी अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है। नगर निगम का कहना है कि बिना अनुमति किए गए निर्माण न केवल शहर की व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि बारिश के दौरान नागरिकों के लिए गंभीर समस्याएं भी पैदा करते हैं। इसलिए भविष्य में भी अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और जल निकासी में बाधा बनने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण या प्लाटिंग न करें और नगर नियोजन से जुड़े नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा कि शहर के सुनियोजित विकास, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षित आवासीय वातावरण के लिए अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। नगर निगम लगातार ऐसे क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है, जहां अवैध प्लाटिंग या नालों पर कब्जे की शिकायतें मिल रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:49:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जबलपुर में पेयजल संकट: नलों से निकला काला और बदबूदार पानी, लोगों में दहशत</title>
                                    <description><![CDATA[राजीव गांधी वार्ड में दूषित पेयजल से मचा हड़कंप, दर्जनों लोगों के बीमार होने का दावा; नगर निगम से तत्काल जांच और सुरक्षित जलापूर्ति की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/drinking-water-crisis-in-jabalpur-black-and-smelly-water-comes/article-58178"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jabalpur-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों की घटना के बाद अब जबलपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र के राजीव गांधी वार्ड में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब लोगों के घरों में नलों से काला, बदबूदार और गंदगी से भरा पानी आने लगा। अचानक बदले पानी के रंग और तेज दुर्गंध ने लोगों को दहशत में डाल दिया। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल जांच, पाइपलाइन की मरम्मत और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। बुधवार सुबह रोज की तरह लोगों ने घरेलू उपयोग और पीने के लिए नल खोले, लेकिन पानी की जगह काले रंग का गंदा और बदबूदार पानी निकलने लगा। कई लोगों ने शुरुआत में इसे बारिश का असर समझकर कुछ देर इंतजार किया, लेकिन 10 से 15 मिनट तक लगातार गंदा पानी आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई। इसके बाद क्षेत्र के लोगों ने आसपास की जलापूर्ति लाइन का निरीक्षण किया और आरोप लगाया कि पेयजल पाइपलाइन का एक हिस्सा नाले के भीतर से होकर गुजर रहा है। लोगों का कहना है कि पाइपलाइन में कहीं लीकेज होने के कारण नाले का दूषित पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल रहा है, जिससे घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि वे नियमित रूप से टैक्स और जलकर का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल रही है। नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों और नगर निगम अधिकारियों से स्वयं मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने और समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। क्षेत्र के निवासियों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से वार्ड में बड़ी संख्या में लोग पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार जैसी समस्याओं से परेशान हैं। पहले लोगों को बीमारी का कारण समझ में नहीं आ रहा था, लेकिन अब नलों से दूषित पानी निकलने के बाद आशंका जताई जा रही है कि जलजनित संक्रमण इसके पीछे की एक बड़ी वजह हो सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। राजीव गांधी वार्ड निवासी विजय नायडू ने बताया कि उन्होंने सुबह मोटर चलाकर घर की टंकी में पानी भर लिया था। बाद में जब पीने के लिए पानी निकाला गया तो उसमें कीचड़ और गंदगी साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि अब पूरी टंकी का पानी अनुपयोगी हो गया है और उसे खाली कर साफ कराना पड़ेगा। उनका कहना है कि इस तरह की स्थिति में परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। </p>
<p style="text-align:justify;">दूषित पानी की आपूर्ति का असर केवल पीने तक सीमित नहीं रहा। जिन लोगों ने सुबह पानी की टंकियां भर ली थीं, अब उन्हें पूरी टंकी की सफाई कराने की चिंता सता रही है। इसके अलावा घरों में लगे वाटर फिल्टर, आरओ सिस्टम और वाटर कूलर भी प्रभावित होने की आशंका है। कई लोगों ने एहतियात के तौर पर फिलहाल इन उपकरणों का उपयोग बंद कर दिया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि वास्तव में पेयजल पाइपलाइन नाले के भीतर या उसके संपर्क में होकर गुजर रही है तो यह लंबे समय से बनी एक गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही है। उनका कहना है कि पाइपलाइन की नियमित जांच और समय-समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। नागरिकों ने मांग की है कि पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति लाइन की तकनीकी जांच कराई जाए और जहां भी लीकेज या क्षति हो, उसे तत्काल ठीक किया जाए। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र में तुरंत स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। साथ ही पाइपलाइन की जांच, लीकेज की मरम्मत, पानी के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच और जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में जलजनित बीमारियों का बड़ा प्रकोप फैल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:20:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोचिंग संस्थानों को निगम का 48 घंटे का अल्टीमेटम, शपथ पत्र नहीं दिया तो 10 जुलाई से होगी सीलिंग</title>
                                    <description><![CDATA[फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर नगर निगम सख्त, 69 कोचिंग संस्थानों को 30 दिन में सभी सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश; लापरवाही पर कार्रवाई तय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a4dd98f78cd2/article-58148"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/coaching-institutes.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छात्रों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने शहर के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 70 से अधिक कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि तय समय सीमा के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया तो 10 जुलाई से संस्थानों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सीधे कार्रवाई होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने शहर के 69 कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अगले 48 घंटे के भीतर, यानी 9 जुलाई की शाम तक 200 रुपए के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करें। इस शपथ पत्र में यह लिखित आश्वासन देना होगा कि संबंधित संस्थान अगले 30 दिनों के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर देंगे। इसके साथ ही कोचिंग संचालकों को 15 दिन के भीतर यह भी बताना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक क्या-क्या काम किए गए हैं और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी पाई गई तो बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक के दौरान कई कोचिंग संचालकों ने यह तर्क दिया कि जिस भवन में वे संस्थान चला रहे हैं, वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है और भवन मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे फायर सेफ्टी के इंतजाम करें। इस पर नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भवन स्वामी पर नहीं छोड़ी जा सकती। निगम के अधिकारियों ने कहा कि चाहे भवन किराए का हो या स्वयं का, कोचिंग संस्थान संचालकों को ही फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने और उसका खर्च वहन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में कोचिंग संस्थानों के लिए लगभग 20 बिंदुओं वाली सुरक्षा गाइडलाइन का पालन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। इनमें सबसे प्रमुख निर्देश यह है कि किसी भी भवन में ऑटोमैटिक लॉक वाले दरवाजे नहीं लगाए जाएंगे। सभी भवनों में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होना अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्र और कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल सकें। इन निकास मार्गों के आसपास किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ, विद्युत उपकरण या अन्य अवरोधक सामग्री नहीं रखी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने बेसमेंट के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। गाइडलाइन के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा। यदि किसी भवन का बेसमेंट 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल का है तो वहां स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा भवनों में लगाए गए फायर पंपों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी वे जनरेटर की बायपास लाइन के माध्यम से लगातार काम करते रहें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जनरेटर को किसी भी स्थिति में निकास मार्ग या रिफ्यूज एरिया में नहीं रखा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने नियमित फायर ऑडिट और विद्युत ऑडिट को भी अनिवार्य किया है। प्रत्येक वर्ष भवन का फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट निगम को सौंपनी होगी। इसके साथ ही हर चार महीने में विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करना भी जरूरी होगा। संस्थान के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण देना होगा, जबकि सुरक्षा गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन की जानकारी होना आवश्यक होगा। निगम का मानना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही उपयोग भी सभी संबंधित लोगों को आना चाहिए।</p>
<p>नगर निगम का कहना है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में आग लगने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में समय रहते आवश्यक सुधार कराना जरूरी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी संस्था को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। आने वाले दिनों में निरीक्षण अभियान और तेज किया जाएगा तथा जिन संस्थानों में नियमों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:16:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भोपाल के बड़ा तालाब किनारे अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, FTL क्षेत्र से फार्म हाउस और बंगले हटाने शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[एनजीटी के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई तेज, पहले चरण में छह अवैध निर्माण हटाए जाएंगे; 21 चिन्हित अतिक्रमणों पर चलेगा अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-action-on-encroachment-on-the-banks-of-bada-talab/article-57879"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-big-lake.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बड़ा तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम ने शनिवार से व्यापक अभियान शुरू कर दिया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों और नगर निगम की कार्ययोजना के तहत फुल टैंक लेवल (FTL) क्षेत्र में बने अवैध फार्म हाउस, बंगले और अन्य निर्माणों को हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य भोज वेटलैंड और बड़ा तालाब के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखना है।</p>
<p style="text-align:justify;">शनिवार सुबह से ही जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीमें गौरागांव, बिशनखेड़ी और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचीं। जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से चिन्हित अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अभियान के पहले दिन छह अतिक्रमणों को हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पूरे अभियान की निगरानी नगर निगम के उपायुक्त भुवन गुप्ता कर रहे हैं, जबकि टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल राउत सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही एनजीटी में अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि बड़ा तालाब के आसपास एफटीएल क्षेत्र में चिन्हित 21 अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसी योजना के तहत अब अभियान को धरातल पर लागू किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन के अनुसार जिन निर्माणों को हटाया जा रहा है, वे फुल टैंक लेवल और उसके निर्धारित सुरक्षा दायरे के भीतर आते हैं। संबंधित भवन मालिकों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि भोज वेटलैंड के सीमांकन के बाद एफटीएल से 50 मीटर के भीतर आने वाले सभी अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद जब अवैध निर्माण नहीं हटाए गए, तब प्रशासन ने संयुक्त अभियान शुरू किया। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार सेवनिया गौंड, गौरा विशनखेड़ी और प्रेमपुरा क्षेत्र में कुल 21 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से तीन निर्माण वर्ष 2022 से पहले के बताए गए हैं, जबकि शेष 18 निर्माण वर्ष 2022 के बाद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश निर्माण बिना किसी वैध भवन अनुमति के किए गए हैं, इसलिए नियमानुसार इन्हें हटाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ा तालाब भोपाल ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की पहचान माना जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। यहां अनेक दुर्लभ पक्षियों का निवास है और यह शहर के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब के कैचमेंट और एफटीएल क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध निर्माणों से जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण समय-समय पर न्यायालयों और पर्यावरण संस्थाओं ने अतिक्रमण हटाने पर जोर दिया है। हालांकि यह पहला अवसर नहीं है जब बड़ा तालाब क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही हो। जानकारी के अनुसार इस वर्ष सीमांकन अभियान के दौरान प्रशासन ने कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए थे, लेकिन अब तक केवल 51 छोटे अतिक्रमण ही हटाए जा सके थे। इनमें टीटी नगर क्षेत्र के 39 और बैरागढ़ क्षेत्र के 12 निर्माण शामिल थे। अभी भी लगभग 296 अतिक्रमण शेष हैं, जिन पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई की जा रही है। जिन निर्माणों को हटाया जा रहा है, उनके पास वैध स्वीकृति या भवन निर्माण की अनुमति उपलब्ध नहीं है। प्रशासन का दावा है कि अभियान पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर संचालित किया जा रहा है। बड़ा तालाब के आसपास भू-माफियाओं की सक्रियता भी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। आरोप हैं कि कई क्षेत्रों में कम कीमत पर प्लॉट बेचने के नाम पर लोगों को गुमराह किया गया। इतना ही नहीं, एफटीएल सीमा को लेकर भ्रम पैदा करने के लिए कथित तौर पर अलग-अलग प्रकार की सीमांकन मुनारें भी स्थापित कर दी गईं। मौके पर पांच प्रकार की मुनारें मिलने की बात सामने आई है, जिनमें केवल कुछ पर ही नगर निगम का स्पष्ट चिन्ह अंकित है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की भी जांच की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़ा तालाब की सीमा निर्धारण को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई सर्वे किए जा चुके हैं। वर्ष 2016 में डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (DGPS) तकनीक से सर्वे कराया गया था, जिसमें तालाब का क्षेत्रफल पहले की तुलना में अधिक दर्ज किया गया। इसके बाद एनजीटी के निर्देश पर सीमांकन हुआ, जिसमें कई मुनारें गायब मिलीं। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद भी नया सर्वे कराया गया, हालांकि उसकी विस्तृत रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। राज्य सरकार भी बड़ा तालाब संरक्षण को लेकर गंभीरता जता चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले संबंधित विभागों को नए सिरे से सर्वे कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। वहीं भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी बड़ा तालाब के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि दीर्घकालिक योजना के बिना तालाब क्षेत्र को सुरक्षित रखना कठिन होगा। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सभी चिन्हित अवैध निर्माणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि भोपाल की इस ऐतिहासिक जल धरोहर को सुरक्षित और संरक्षित रखना भी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय महत्व का लाभ उठा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:19:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंदौर में बनेगी देश की सबसे बड़ी स्वामी विवेकानंद प्रतिमा, काम अंतिम चरण में</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड-85 में तेजी से चल रहा निर्माण, महापौर ने किया निरीक्षण, अगले महीने भव्य अनावरण की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/countrys-largest-swami-vivekananda-statue-will-be-built-in-indore/article-57510"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/indore-swami-vivekananda-statue.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंदौर में देश की सबसे बड़ी स्वामी विवेकानंद प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। शहर के वार्ड क्रमांक-85 में निर्माणाधीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और प्रतिमा के लिए तैयार किए जा रहे विशाल पेडेस्टल का निर्माण लगभग पूरा होने की ओर है। बुधवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों के साथ मौके पर पहुंचकर पूरे कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और तय समयसीमा की विस्तार से जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। नगर निगम के अनुसार प्रतिमा का निर्माण निर्धारित योजना के अनुसार किया जा रहा है। इस समय सबसे अधिक ध्यान प्रतिमा के आधार यानी पेडेस्टल को मजबूत और सुरक्षित बनाने पर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने महापौर को बताया कि आधार निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और अब अंतिम चरण का काम तेजी से किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान महापौर ने निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए क्योंकि यह परियोजना केवल इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण बनने जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने निर्माण स्थल पर मौजूद इंजीनियरों और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने परियोजना से जुड़े हर चरण की जानकारी ली और पूछा कि किन-किन कार्यों को अभी पूरा किया जाना बाकी है। निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि सभी काम निर्धारित समय के भीतर पूरे कर लिए जाएंगे। यदि मौसम या अन्य किसी कारण से कोई बड़ी बाधा नहीं आती है तो अगले महीने प्रतिमा के भव्य अनावरण की तैयारी पूरी कर ली जाएगी। नगर निगम का कहना है कि अनावरण कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की योजना भी बनाई जा रही है। स्वामी विवेकानंद देश के उन महान व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं जिन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया। उनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। नगर निगम का मानना है कि इतनी विशाल प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं होगी, बल्कि युवाओं को स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों से जोड़ने का भी माध्यम बनेगी। शहर आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह एक प्रमुख आकर्षण बनने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के बाद महापौर ने वार्ड क्रमांक-84 में निर्माणाधीन शासकीय स्कूल का भी दौरा किया। वहां उन्होंने भवन निर्माण की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं प्राथमिकता में हैं और इन्हें समय पर पूरा करना जरूरी है। स्कूल भवन बनने के बाद आसपास के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकेंगी। महापौर ने कहा कि इंदौर लगातार विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। शहर में सड़क, शिक्षा, स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक और प्रेरणादायक परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना था कि स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा शहर की नई पहचान बनेगी और आने वाले वर्षों में यह स्थान पर्यटन और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना इंदौर की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या समय रहते दूर की जा सके। सुरक्षा मानकों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है और विशेषज्ञों की देखरेख में निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण, हरियाली और नागरिक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा ताकि यह स्थान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके। शहर के कई नागरिकों ने भी इस परियोजना का स्वागत किया है। उनका मानना है कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। ऐसे में उनकी विशाल प्रतिमा नई पीढ़ी को प्रेरित करने के साथ-साथ इंदौर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:43:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में प्रॉपर्टी टैक्स पर छूट का आज आखिरी दिन, निगम ने करदाताओं से की समय पर भुगतान की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[30 जून तक संपत्तिकर जमा करने पर मिलेगी अधिकतम 6.25 प्रतिशत की छूट, एक दिन पहले विशेष अभियान में 1070 संपत्तियों से 1.55 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/today-is-the-last-day-of-exemption-on-property-tax/article-57429"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-property-tax.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर नगर निगम क्षेत्र के प्रॉपर्टी मालिकों के लिए मंगलवार का दिन काफी अहम है। वित्त वर्ष 2025-26 के संपत्तिकर पर मिलने वाली छूट का आज आखिरी दिन है। नगर निगम ने शहर के सभी करदाताओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा कर अधिकतम 6.25 प्रतिशत की छूट का लाभ जरूर उठाएं। निगम प्रशासन का कहना है कि समय पर टैक्स जमा करने से न केवल नागरिकों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि शहर के विकास कार्यों के लिए आवश्यक राजस्व भी समय पर उपलब्ध हो सकेगा। यही वजह है कि अंतिम दिन लोगों से अधिक से अधिक संख्या में टैक्स जमा कराने के लिए सभी जोनों में विशेष व्यवस्था की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">छूट की समय सीमा समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले सोमवार को नगर निगम ने व्यापक स्तर पर राजस्व वसूली अभियान चलाया। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर सभी जोनों की राजस्व टीमों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर करदाताओं से संपर्क किया और लंबित संपत्तिकर जमा कराने की कार्रवाई की। इस अभियान का असर भी देखने को मिला। निगम के अनुसार केवल एक दिन में 1070 संपत्तियों से कुल 1 करोड़ 55 लाख 63 हजार 119 रुपये का संपत्तिकर जमा कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में करदाता टैक्स जमा करने पहुंच सकते हैं, इसलिए सभी जोनों में कर्मचारियों को सतर्क रहने और भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम का मानना है कि समय पर टैक्स वसूली से शहर में चल रहे विकास कार्यों को गति मिलती है। सड़क निर्माण, नाली व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए संपत्तिकर नगर निगम की आय का प्रमुख स्रोत माना जाता है। ऐसे में हर वर्ष शुरुआती महीनों में करदाताओं को छूट देकर समय पर टैक्स जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस बार भी 30 जून तक पूरा टैक्स जमा करने वाले लोगों को अधिकतम 6.25 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रावधान रखा गया है। निगम का कहना है कि इस सुविधा का लाभ उठाकर करदाता भविष्य में अतिरिक्त आर्थिक बोझ से भी बच सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोमवार को चलाए गए विशेष अभियान के दौरान अलग-अलग जोनों में अच्छी राजस्व वसूली दर्ज की गई। निगम के आंकड़ों के अनुसार जोन-9 में सबसे अधिक 196 संपत्तियों से करीब 20.55 लाख रुपये जमा हुए। इसके बाद जोन-4 में 90 संपत्तियों से 20.85 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। जोन-8 में 120 संपत्तियों से लगभग 18.96 लाख रुपये, जोन-5 में 119 संपत्तियों से 15.03 लाख रुपये और जोन-10 में 136 संपत्तियों से 12.06 लाख रुपये की वसूली की गई। वहीं जोन-7 में 64 संपत्तियों से 11.01 लाख रुपये और जोन-3 में 90 संपत्तियों से लगभग 10.98 लाख रुपये का टैक्स जमा कराया गया। इसके अलावा शहर के अन्य जोनों में भी राजस्व वसूली अभियान लगातार जारी रहा। अधिकारियों के अनुसार यह आंकड़े बताते हैं कि नागरिकों ने समय सीमा समाप्त होने से पहले टैक्स जमा कराने में रुचि दिखाई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने केवल टैक्स वसूली तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे हैं। निगम प्रशासन ने सभी जोन अधिकारियों को व्यावसायिक संपत्तियों की जांच करने के भी निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि जहां टैक्स निर्धारण वास्तविक उपयोग के अनुरूप नहीं है या किसी प्रकार की विसंगति सामने आती है, वहां नियमानुसार संशोधन की कार्रवाई की जाए। निगम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से सही दर पर संपत्तिकर प्राप्त हो और राजस्व संग्रह में किसी तरह की कमी न रहे। आने वाले दिनों में इस संबंध में विशेष सर्वे और जांच अभियान भी चलाए जाने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कई बार लोग अंतिम तारीख निकल जाने के बाद टैक्स जमा कराने पहुंचते हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली छूट का लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए नागरिकों से बार-बार अपील की जा रही है कि वे अंतिम दिन का इंतजार किए बिना समय रहते टैक्स जमा करें। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद सामान्य नियम लागू होंगे और छूट का लाभ उपलब्ध नहीं रहेगा। ऐसे में जिन लोगों का संपत्तिकर अभी तक जमा नहीं हुआ है, उनके लिए आज का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>रायपुर नगर निगम का मानना है कि नागरिकों की भागीदारी से ही शहर के विकास कार्यों को लगातार आगे बढ़ाया जा सकता है। संपत्तिकर से प्राप्त राशि का उपयोग शहर में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने, स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने, नई परियोजनाओं को गति देने और सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार में किया जाता है। इसलिए समय पर टैक्स जमा करना केवल कानूनी जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि शहर के विकास में नागरिकों का प्रत्यक्ष योगदान भी माना जाता है। निगम प्रशासन को उम्मीद है कि अंतिम दिन बड़ी संख्या में करदाता आगे आएंगे और उपलब्ध छूट का लाभ उठाते हुए अपना संपत्तिकर जमा करेंगे। इससे नगर निगम के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और विकास योजनाओं को समय पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रायपुर में टैक्स नहीं चुकाने वालों पर निगम सख्त, 4 परिसर सील; एक दिन में 1.33 करोड़ की वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[634 संपत्तियों से संपत्तिकर वसूला गया, 30 जून तक एकमुश्त टैक्स जमा करने पर 6.25 प्रतिशत की छूट; बकायादारों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/corporation-strict-on-non-payment-of-tax-in-raipur-4-premises/article-57166"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-municipal-corporation-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर नगर निगम ने बकाया संपत्तिकर वसूली अभियान को और तेज करते हुए एक ही दिन में बड़ी कार्रवाई की है। निगम ने 634 संपत्तियों से कुल 1 करोड़ 33 लाख 20 हजार 157 रुपये का संपत्तिकर वसूल किया। वहीं लंबे समय से टैक्स जमा नहीं करने वाले संपत्तिधारकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए चार आवासीय-सह-व्यावसायिक परिसरों को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान एक संपत्ति मालिक ने मौके पर ही बकाया राशि का भुगतान कर दिया, जिसके बाद निगम अधिकारियों ने आगे की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की। नगर निगम ने साफ संकेत दिए हैं कि जो लोग समय पर टैक्स जमा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ आने वाले दिनों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। नगर निगम का यह अभियान शहर में राजस्व संग्रह बढ़ाने और बकाया कर की वसूली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संपत्तिकर जमा कराने को लेकर लगातार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। निगम का कहना है कि समय पर कर संग्रह होने से शहर में सड़क, नाली, सफाई, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास कार्यों को गति मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विशेष अभियान में सभी जोनों की राजस्व टीमों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बकायादारों से संपर्क किया। इस दौरान कई लोगों ने स्वेच्छा से बकाया कर जमा किया, जबकि कुछ स्थानों पर निगम की सख्ती भी देखने को मिली। आंकड़ों के अनुसार कुल 634 संपत्तियों से 1.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली गई। जोनवार प्रदर्शन में जोन-10 सबसे आगे रहा, जहां 103 संपत्तियों से 22.11 लाख रुपये का कर संग्रह किया गया। इसके अलावा जोन-7 से 16.12 लाख रुपये, जोन-8 से 13.51 लाख रुपये और जोन-2 से 13.36 लाख रुपये की वसूली दर्ज की गई। सबसे सख्त कार्रवाई जोन-6 में देखने को मिली। यहां वार्ड-61 के चार ऐसे आवासीय-सह-व्यावसायिक परिसरों को सील कर दिया गया, जिनके मालिक लंबे समय से संपत्तिकर का भुगतान नहीं कर रहे थे। निगम अधिकारियों ने बताया कि कई बार नोटिस देने और समय देने के बावजूद कर जमा नहीं किया गया था। इसके बाद नियमानुसार सीलबंदी की कार्रवाई की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीलबंदी के दौरान एक दिलचस्प स्थिति भी सामने आई। जैसे ही निगम की टीम ने कार्रवाई शुरू की, एक संपत्तिधारक ने तुरंत बकाया राशि का आंशिक भुगतान कर दिया। मौके पर ही 33,175 रुपये जमा किए गए। अधिकारियों का कहना है कि कई बार सख्त कार्रवाई के बाद ही लोग बकाया कर जमा करने के लिए आगे आते हैं। हालांकि जिन लोगों ने अब तक कर जमा नहीं किया है, उनके खिलाफ आगे भी सीलबंदी, कुर्की और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने शहर के नागरिकों से अपील की है कि वे 30 जून से पहले अपना संपत्तिकर जमा कर विशेष छूट का लाभ उठाएं। निगम के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 का संपत्तिकर एकमुश्त जमा करने वाले करदाताओं को 6.25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह सुविधा नागरिकों को समय पर कर भुगतान के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दी गई है। निगम ने कर भुगतान की प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में आसान बनाया है। अब नागरिक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपना संपत्तिकर जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मिलने से लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं, जबकि ऑफलाइन भुगतान के लिए भी सभी जोन कार्यालयों में आवश्यक व्यवस्था की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम का मानना है कि समय पर टैक्स जमा होने से शहर के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे। निगम अधिकारियों के अनुसार, संपत्तिकर शहर के विकास का प्रमुख राजस्व स्रोत है। इसी राशि से सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, पेयजल व्यवस्था, सफाई, सीवरेज और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े कार्य किए जाते हैं। इसलिए सभी नागरिकों का समय पर कर भुगतान करना शहर के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। गौरतलब है कि यह पहला बड़ा अभियान नहीं है। इससे पहले 19 जून को भी नगर निगम ने 525 संपत्तियों से 1 करोड़ 3 लाख 12 हजार 440 रुपये की वसूली की थी। लगातार दूसरे सफल अभियान के बाद निगम प्रशासन का उत्साह बढ़ा है और अब अंतिम तिथि से पहले अधिक से अधिक करदाताओं से बकाया राशि वसूलने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि आगामी दिनों में उन संपत्तियों की सूची तैयार की जा रही है, जिन पर लंबे समय से कर बकाया है। ऐसे मामलों में पहले नोटिस जारी किए जाएंगे और उसके बाद भी भुगतान नहीं होने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचने का सबसे आसान तरीका समय पर कर जमा करना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 17:36:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में अवैध नल कनेक्शन नियमित कराने का शुल्क बढ़ा, कांग्रेस ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की नई योजना के तहत घरेलू कनेक्शन वैध कराने के लिए 20,882 रुपये जमा करने होंगे, विपक्ष ने आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/congress-raised-questions-on-increase-in-fee-for-regularizing-illegal/article-57127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-water-connection.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर नगर निगम ने शहर में वर्षों से चल रहे अवैध नल कनेक्शनों को नियमित करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। निगम का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य जलकर राजस्व बढ़ाना और सभी जल उपभोक्ताओं को आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल करना है। हालांकि योजना की घोषणा के साथ ही इसे लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। घरेलू अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए 20 हजार रुपये से अधिक की राशि तय किए जाने पर कांग्रेस ने निगम प्रशासन और राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि पहले इसी प्रक्रिया के लिए केवल 600 रुपये शुल्क लिया जाता था, जबकि अब आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार रायपुर शहर में लगभग 3.50 लाख संपत्तियां हैं, लेकिन इनमें से केवल 2.21 लाख संपत्तियों के नल कनेक्शन ही निगम के रिकॉर्ड में वैध रूप से दर्ज हैं। इसका मतलब यह है कि करीब 90 हजार संपत्तियों में ऐसे जल कनेक्शन हैं जो वर्षों से पानी की आपूर्ति ले रहे हैं, लेकिन उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। निगम प्रशासन का मानना है कि ऐसे कनेक्शनों की वजह से जलकर के रूप में मिलने वाला राजस्व प्रभावित हो रहा है और इससे नगर निगम को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी जोन कार्यालय अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध जल कनेक्शनों की पहचान करें और उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया तेज करें। इसी उद्देश्य से 'एकमुश्त जलकर निपटान योजना' लागू की गई है। इस योजना के तहत 15 जुलाई से 15 अक्टूबर 2026 तक नागरिकों को अपने अवैध नल कनेक्शन नियमित कराने का अवसर मिलेगा। निगम ने इसे अंतिम मौका बताया है और स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योजना के अनुसार आधा इंच के घरेलू नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए 5 हजार रुपये नियमितीकरण शुल्क और 15,882 रुपये वैध कनेक्शन शुल्क देना होगा। इस तरह कुल 20,882 रुपये एकमुश्त जमा करने होंगे। वहीं व्यावसायिक उपयोग के लिए आधा इंच के कनेक्शन पर 15 हजार रुपये नियमितीकरण शुल्क और 15,882 रुपये कनेक्शन शुल्क मिलाकर कुल 30,882 रुपये का भुगतान करना होगा। निगम ने यह भी साफ किया है कि पूरी राशि एक बार में जमा करनी होगी। इसके अलावा संबंधित संपत्ति की यूनिक आईडी से कनेक्शन को लिंक करना और निर्धारित प्रारूप में अनुबंध करना भी अनिवार्य रहेगा। नगर निगम का कहना है कि इस अभियान के पूरा होने के बाद अवैध कनेक्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन नहीं करता है तो उसका जल कनेक्शन काटा जा सकता है। इसके साथ ही नियमितीकरण शुल्क की तीन गुना तक जुर्माना राशि भी वसूली जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य सभी उपभोक्ताओं को नियमों के दायरे में लाना और जल वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर कांग्रेस ने इस योजना को आम लोगों के हितों के खिलाफ बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए केवल 600 रुपये का शुल्क लिया जाता था। अब उसी प्रक्रिया के लिए 20 हजार रुपये से अधिक की राशि तय कर दी गई है, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार जो वर्षों से पानी का उपयोग कर रहे हैं, उनके लिए इतनी बड़ी राशि एक साथ जमा करना आसान नहीं होगा। नगर निगम का पक्ष है कि जल वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए यह अभियान जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि वैध कनेक्शन होने से भविष्य में उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही जल आपूर्ति से जुड़ी योजनाओं का लाभ भी केवल पंजीकृत उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रायपुर के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा खामियां उजागर, सुधार के निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[निगम की संयुक्त टीम की जांच में फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और लिफ्ट सुरक्षा में मिली कई कमियां, एक सप्ताह में सुधार के आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-56796"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-coaching-center-inspection.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में शहर के कई प्रमुख कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी गंभीर कमियां पाई गई हैं। यह जांच अभियान जिला प्रशासन के निर्देश पर चलाया गया, जिसमें फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और लिफ्ट सुरक्षा मानकों की विस्तृत समीक्षा की गई। निरीक्षण के बाद प्रशासन ने सभी संबंधित संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर कमियां दूर करने के सख्त निर्देश दिए हैं।  निगम की टीम ने शहर के प्रमुख कोचिंग संस्थानों एलन, अनअकादमी, विद्यापीठ, आरसीसी और अकादजा का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर छात्रों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक पाई गई, जिससे कक्षाओं में भीड़भाड़ की स्थिति बनी हुई थी। एलन, अनअकादमी और विद्यापीठ के कुछ क्लासरूम में छात्रों की संख्या तय मानक से अधिक मिली, जिस पर अधिकारियों ने आपत्ति जताई। इसके अलावा कई संस्थानों में वेंटिलेशन की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं पाई गई, जिससे छात्रों के लिए असुविधा की स्थिति बन रही थी। जांच के दौरान आरसीसी और अकादजा कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की स्थिति और भी गंभीर पाई गई। यहां फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी, आपातकालीन निकासी मार्गों की अनुपयुक्त व्यवस्था और वेंटिलेशन सिस्टम की खराब स्थिति सामने आई। अधिकारियों ने मौके पर ही संबंधित प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी तरह की लापरवाही छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम की टीम ने यह भी पाया कि कई संस्थानों में लिफ्ट सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। कुछ जगहों पर फायर एक्सटिंग्विशर की नियमित जांच नहीं हुई थी, जबकि आपात स्थिति में निकासी के लिए पर्याप्त संकेतक भी नहीं लगे थे। अधिकारियों ने इन सभी खामियों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निगम ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में सुधार नहीं किया गया तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण अभियान के दौरान प्रशासनिक टीम ने कोचिंग सेंटरों के प्रबंधन को सुरक्षा नियमों के महत्व के बारे में भी अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन करते हैं, ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। किसी भी आपात स्थिति में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सभी संस्थानों को निर्धारित गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर और नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में यह विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था। निरीक्षण टीम में नगर निगम के अभियंता, अग्निशमन विभाग के अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारी शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए सभी संस्थानों को नियमित रूप से नियमों का पालन करना होगा। इस कार्रवाई के बाद शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों में भी हलचल देखी जा रही है। कई संस्थानों ने अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू कर दी है और सुधार कार्यों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी ताकि छात्रों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। रायपुर के कोचिंग सेंटरों में सामने आई यह स्थिति एक गंभीर संकेत है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लेकर और अधिक सतर्कता की आवश्यकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:30:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गुना की पाइप फैक्ट्री में भीषण आग, पांच घंटे बाद पाया काबू</title>
                                    <description><![CDATA[इंडस्ट्रियल एरिया स्थित प्लास्टिक पाइप यूनिट में देर रात भड़की आग, चार फायर ब्रिगेड की मदद से बुझी लपटें; 80 लाख रुपए तक नुकसान की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/massive-fire-in-gunas-pipe-factory-brought-under-control-after/article-56208"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-factory-fire.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुना के इंडस्ट्रियल एरिया में मंगलवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक प्लास्टिक पाइप निर्माण फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और फैक्ट्री परिसर में रखा प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य सामग्री इसकी चपेट में आ गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दूर स्थित कॉलोनियों से भी धुएं का गुबार और आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। सूचना मिलने के बाद नगरपालिका की फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। यह घटना शहर के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक प्लास्टिक पाइप निर्माण इकाई में हुई। फैक्ट्री का संचालन हरीश रत्रा द्वारा किया जाता है। यहां कृषि और सिंचाई कार्यों में उपयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक पाइप तैयार किए जाते हैं। फैक्ट्री के एक हिस्से में उत्पादन कार्य होता है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक के दाने, रॉ मटेरियल और तैयार उत्पादों का भंडारण किया जाता है। यही कारण रहा कि आग लगने के बाद स्थिति तेजी से गंभीर हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फैक्ट्री संचालक के अनुसार मंगलवार शाम रोजाना की तरह उत्पादन कार्य पूरा होने के बाद करीब साढ़े आठ बजे फैक्ट्री बंद कर दी गई थी। सभी कर्मचारी अपने घर लौट गए थे और परिसर पूरी तरह बंद था। उस समय किसी प्रकार की असामान्य स्थिति नहीं थी। रात करीब 11 बजे के आसपास इंडस्ट्रियल एरिया से सटी विंध्याचल कॉलोनी के लोगों ने फैक्ट्री की दिशा से धुआं उठता देखा। कुछ ही मिनटों में आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत नगरपालिका और प्रशासन को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही नगरपालिका का अमला सक्रिय हो गया। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। आग की भयावहता को देखते हुए एक के बाद एक चार दमकल वाहनों को राहत कार्य में लगाया गया। आग बुझाने का काम शुरू तो हो गया, लेकिन प्लास्टिक सामग्री की अधिकता के कारण आग बार-बार भड़क रही थी। इससे दमकल कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहत कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री की मजबूत पक्की दीवारें बनीं। आग फैक्ट्री के अंदर गहराई तक फैल चुकी थी और बाहर से पानी की बौछार सीधे प्रभावित हिस्सों तक नहीं पहुंच पा रही थी। ऐसी स्थिति में फायर टीम को अलग रणनीति अपनानी पड़ी। सबसे पहले फैक्ट्री के गेट का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, लेकिन इससे भी आग तक पूरी तरह पहुंचना आसान नहीं था। इसके बाद दमकल कर्मियों ने फैक्ट्री की दीवारों में कई स्थानों पर छेद किए। इन छेदों के माध्यम से अंदर तक पानी पहुंचाया गया। लगातार पानी डालने और धुएं को नियंत्रित करने के प्रयासों के बाद आग की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगी। आग बुझाने के लिए लगातार पानी की आवश्यकता पड़ रही थी, इसलिए टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई भी जारी रखी गई। पूरी रात राहत कार्य चलता रहा और दमकलकर्मी आग को नियंत्रित करने में जुटे रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद तड़के आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय फैक्ट्री में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आर्थिक नुकसान काफी बड़ा माना जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आगजनी की इस घटना में 70 से 80 लाख रुपए तक का नुकसान हुआ है। बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य उपकरण जलकर राख हो गए। घटना के दौरान नगरपालिका अध्यक्ष पति अरविंद गुप्ता सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने राहत कार्यों की निगरानी की और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता था तथा आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों तक भी आग फैलने का खतरा था। आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस और संबंधित विभागों की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण कर तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि आग लगने की वजह का पता लगाया जा सके। जिन इकाइयों में ज्वलनशील सामग्री बड़ी मात्रा में मौजूद रहती है, वहां फायर सेफ्टी सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। नियमित निरीक्षण, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था ऐसी घटनाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकती है। गुना की इस फैक्ट्री में लगी आग भले ही किसी बड़ी जनहानि का कारण नहीं बनी, लेकिन इससे हुए आर्थिक नुकसान ने फैक्ट्री प्रबंधन को बड़ा झटका दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायपुर महापौर का सख्त संदेश, ठेकेदारों के साथ लापरवाह अफसरों पर भी होगी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[छह घंटे चली समीक्षा बैठक में विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी, करबला तालाब परियोजना की खामियों को लेकर अधिकारियों को लगाई फटकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/raipur-mayors-strict-message-action-will-be-taken-against-negligent/article-56092"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-mayor-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने शहर में चल रहे विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और परियोजनाओं में सामने आ रही खामियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम मुख्यालय में सोमवार को करीब छह घंटे तक चली समीक्षा बैठक में महापौर ने अधिकारियों और अभियंताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्माण कार्य में गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है तो उसकी निगरानी करने वाले अधिकारी और इंजीनियर भी जवाबदेही से बच नहीं सकते। बैठक के दौरान महापौर ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जहां कार्यों में देरी, दस्तावेजी खामियां और निगरानी में लापरवाही की बात सामने आई। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अपर आयुक्त को निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों की निगरानी में लापरवाही सामने आई है, उनकी जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा करबला तालाब विकास योजना को लेकर हुई। समीक्षा के दौरान इस परियोजना से जुड़े कई दस्तावेजों और कार्यों में अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। बताया गया कि मेजरमेंट बुक (एमबी) में कुछ त्रुटियां पाई गई हैं, जिसके बाद महापौर ने संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना में रिकॉर्ड और दस्तावेजों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कागजी कार्यवाही में ही गड़बड़ी होगी तो परियोजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों प्रभावित होंगी। महापौर ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों में त्रुटियां और निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में केवल ठेकेदारों पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जा सकती, बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कई विकास कार्यों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीन पर उनका काम शुरू नहीं हो पाया है। इस पर महापौर ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बाद उनका समय पर क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि काम शुरू होने में अनावश्यक देरी हो रही है तो इसके कारणों की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज की जानी चाहिए। महापौर ने कहा कि रायपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और यहां की बढ़ती आबादी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है। ऐसे में विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित परियोजनाओं की सूची तैयार की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं की अलग से समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों में लापरवाही या अनावश्यक देरी पाई जाएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। महापौर ने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि जनता परिणाम देखना चाहती है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, 15वें वित्त आयोग की योजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद निधि, विधायक निधि, महापौर निधि, पार्षद निधि और सामान्य निधि से संचालित विभिन्न विकास कार्यों की भी जोनवार समीक्षा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर महापौर ने कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक जोन में चल रहे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन हो। महापौर ने कहा कि कई बार परियोजनाएं समय पर पूरी तो हो जाती हैं, लेकिन गुणवत्ता में कमी के कारण कुछ ही समय बाद समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसलिए गुणवत्ता और समयसीमा दोनों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। करीब छह घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक में अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू, विनोद पाण्डेय, कृष्णा खटीक, मुख्य अभियंता संजय बागड़े, अधीक्षण अभियंता राजेश राठौर, इमरान खान, सभी जोन कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदार मौजूद रहे। बैठक के अंत में महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले समय में विकास कार्यों की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:27:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में होटल अमृतसरी सील, बाथरूम के पास बन रही थी बिरयानी</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की कार्रवाई में भारी गंदगी का खुलासा, 1 लाख रुपए का जुर्माना; वर्षों से बकाया राशि नहीं चुकाने का भी आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/biryani-was-being-made-near-the-bathroom-of-hotel-amritsari/article-56089"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/hotel-amritsari.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र घड़ी चौक स्थित होटल अमृतसरी के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए होटल को सील कर दिया है। निगम की संयुक्त टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में होटल के भीतर गंभीर स्वच्छता अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान ऐसी तस्वीरें और हालात देखने को मिले, जिन्होंने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। होटल संचालक पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित बकाया राशि का भुगतान नहीं करने की वजह से भी की गई है। सोमवार को नगर निगम की टीम जब होटल अमृतसरी पहुंची तो वहां कई तरह की खामियां सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक होटल परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब थी। कई जगह कचरा जमा मिला और भोजन तैयार करने वाले क्षेत्र में भी स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि बिरयानी और अन्य खाद्य सामग्री बाथरूम से सटे स्थान पर रखी गई थी। इसके अलावा सड़क किनारे अस्थायी तरीके से किचन संचालित किए जाने के भी प्रमाण मिले। अधिकारियों ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि होटल प्रबंधन को पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें साफ-सफाई सुधारने, बकाया राशि जमा करने और नियमों के अनुरूप संचालन करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन बार-बार चेतावनी के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। ऐसे में निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए होटल को सील करने का फैसला लिया। अधिकारियों के अनुसार यदि भविष्य में होटल दोबारा शुरू करना है तो उसे सभी नियमों का पालन करते हुए आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी। जांच में यह भी सामने आया कि होटल अमृतसरी पर नगर निगम का कई वर्षों से बकाया चल रहा था। निगम की ओर से कई बार भुगतान के लिए नोटिस भेजे गए, लेकिन प्रबंधन ने राशि जमा नहीं की। इसके बाद राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, बाजार शाखा और नगर निवेश विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। इसी क्रम में होटल को सील किया गया और जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों का कहना है कि निगम राजस्व की वसूली और नियमों के पालन को लेकर अब और सख्ती बरतेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">होटल पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने शहर के अन्य बाजार क्षेत्रों में भी व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया। गोलबाजार, मालवीय रोड और आसपास के प्रमुख कारोबारी इलाकों में दुकानों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 17 दुकानों में गंदगी, कचरा प्रबंधन में लापरवाही और स्वच्छता नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए। इन दुकानदारों पर कुल 18 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण जारी रहेंगे। इसी अभियान के तहत नगर निवेश विभाग ने सड़क पर अतिक्रमण कर व्यवसाय चलाने वाले दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की। करीब 25 दुकानदारों से सड़क बाधा शुल्क के रूप में लगभग 50 हजार रुपए वसूले गए। कई स्थानों पर सड़क पर रखा सामान हटाया गया और कुछ मामलों में सामान जब्त भी किया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहे। कार्रवाई के दौरान राजस्व, स्वास्थ्य, बाजार और नगर निवेश विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि शहर में खाद्य प्रतिष्ठानों, होटल, रेस्टोरेंट और बाजार क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाएगी ताकि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर समय-समय पर सख्त जांच जरूरी है। खासकर ऐसे प्रतिष्ठानों में जहां बड़ी संख्या में लोग भोजन करने पहुंचते हैं। वहीं निगम अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अन्य होटल और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी नियमों का पालन करने का संदेश जाएगा। होटल अमृतसरी को सील कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:27:24 +0530</pubDate>
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