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                <title>Disaster - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Disaster RSS Feed</description>
                
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                <title>हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स की पाइपलाइन में भीषण आग, 15 लोग झुलसे, रेल सेवा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के हल्दिया में नेफ्था पाइपलाइन में विस्फोट के बाद लगी आग रिहायशी इलाके तक पहुंची, कई ट्रेनें रद्द और कुछ का संचालन बदला गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/major-fire-in-haldia-petrochemicals-pipeline-15-people-burnt-rail/article-57412"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/haldia-fire.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया में सोमवार देर रात बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स की नेफ्था सप्लाई पाइपलाइन में हुए विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई, जिसकी चपेट में आसपास का रिहायशी इलाका भी आ गया। हादसे में कम से कम 15 लोग झुलस गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दूर-दूर तक धुएं का गुबार दिखाई देता रहा।  यह हादसा सोमवार देर रात करीब 2:45 बजे हुआ। आग सबसे पहले हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स की नेफ्था पाइपलाइन में दिखाई दी और कुछ ही समय में उसने आसपास के क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। पाइपलाइन के नजदीक स्थित हल्दिया नगर पालिका के वार्ड-13 के चिरंजीबपुर इलाके में कई मकानों तक आग और गर्मी का असर पहुंचा। स्थानीय लोगों ने धमाके जैसी तेज आवाज सुनने के बाद बाहर निकलकर देखा तो इलाके में आग की ऊंची लपटें उठ रही थीं। इसके बाद तुरंत पुलिस, दमकल और प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। आग में झुलसे सभी घायलों को तत्काल हल्दिया सब-डिविजनल अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें से पांच लोगों की हालत को देखते हुए उन्हें तमलुक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। चिकित्सकों के अनुसार दो घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। अन्य घायलों का भी अस्पताल में उपचार चल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><br />आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की 12 से अधिक गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद भी आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी थी। दमकल कर्मियों ने आसपास के क्षेत्रों को खाली कराकर आग को और फैलने से रोकने का प्रयास किया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील भी की। हादसे का असर रेलवे संचालन पर भी पड़ा। जिस स्थान पर पाइपलाइन में आग लगी, उसके बेहद पास से हल्दिया-दुर्गाचक रेल लाइन गुजरती है। आग की वजह से रेलवे की ओवरहेड बिजली लाइन और अन्य उपकरण प्रभावित हुए, जिसके चलते रेल सेवाओं को तत्काल रोक दिया गया। दक्षिण पूर्व रेलवे ने बताया कि सुरक्षा कारणों से हल्दिया और दुर्गाचक के बीच ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से बंद किया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार हल्दिया-हावड़ा लोकल ट्रेन को रद्द कर दिया गया, जबकि हावड़ा-हल्दिया लोकल का संचालन केवल दुर्गाचक तक किया गया। इसके अलावा हल्दिया-पांसकुड़ा लोकल ट्रेन को हल्दिया के बजाय दुर्गाचक से शुरू किया गया। रेलवे की तकनीकी टीमें क्षतिग्रस्त ओवरहेड उपकरणों की मरम्मत में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही ट्रेनों का संचालन सामान्य किया जाएगा। घटना के कारणों को लेकर फिलहाल जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि आग किस वजह से लगी, इसका अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच की जा रही है। दूसरी ओर हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स ने भी घटना पर आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने हादसे में लोगों के घायल होने पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रभावित लोगों और स्थानीय प्रशासन को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।<br /><br /><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार प्रारंभिक जानकारी से यह संकेत मिला है कि घटना पाइपलाइन के उस हिस्से के आसपास हुई, जहां पहले भी नेफ्था चोरी की गतिविधियों की आशंका जताई जाती रही है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। कंपनी ने यह भी बताया कि नेफ्था अत्यधिक ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन होता है और इसके संपर्क में जरा सी चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यही वजह है कि कंपनी समय-समय पर स्थानीय लोगों को पाइपलाइन के आसपास किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या अवैध गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी देती रही है। सुरक्षा मानकों का पालन करना ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों में बेहद आवश्यक माना जाता है। नेफ्था कच्चे तेल के शोधन के दौरान प्राप्त होने वाला हल्का तरल हाइड्रोकार्बन मिश्रण है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से पेट्रोकेमिकल उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। यह अत्यधिक ज्वलनशील होता है और पेट्रोल जैसी तेज गंध रखता है। इसी कारण इसके भंडारण और परिवहन के दौरान विशेष सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वेनेजुएला में फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप, मौतों का आंकड़ा 1430 पहुंचा, हजारों अब भी लापता</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार आ रहे झटकों से बढ़ी तबाही, राहत और बचाव अभियान जारी; भारत समेत कई देशों ने भेजी मदद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a40c99786e64/article-57184"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वेनेजुएला में भूकंप का संकट लगातार गहराता जा रहा है। रविवार को एक बार फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे पहले से तबाह इलाकों में दहशत और बढ़ गई। यूरो-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक, इस बार भूकंप का केंद्र अरागुआ तट के पास समुद्र में लगभग 30 किलोमीटर की गहराई में था। इससे पहले 24 जून को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए थे, जबकि शनिवार को भी 4.9 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था। लगातार आ रहे झटकों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कई इमारतें, जो पहले से कमजोर हो चुकी थीं, अब पूरी तरह ढह गई हैं। अब तक इस आपदा में 1430 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप आने के 72 घंटे बाद भी करीब 68,900 लोग लापता हैं। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीदें कम होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े भूकंप के बाद शुरुआती 48 से 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान जीवित लोगों को सुरक्षित निकालने की संभावना सबसे अधिक रहती है। कई प्रभावित इलाकों में हालात बेहद कठिन बने हुए हैं। राहत टीमों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय लोग अपने परिजनों की तलाश खुद कर रहे हैं। कई जगहों पर परिवार हथौड़े, फावड़े और दूसरे साधारण औजारों की मदद से मलबा हटाते दिखाई दे रहे हैं। कहीं कोई अपने बेटे को ढूंढ रहा है तो कहीं कोई अपने माता-पिता के जिंदा मिलने की उम्मीद में लगातार मलबा हटाने में जुटा है। हालात ऐसे हैं कि लोग बिना थके घंटों तक राहत कार्य में लगे हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी कराकस सहित कई शहरों में सैकड़ों इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जबकि कई इमारतें रहने लायक नहीं बची हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़कर सड़कों, पार्कों और खुले मैदानों में अस्थायी टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं। बिजली और पानी जैसी बुनियादी सेवाएं भी कई इलाकों में प्रभावित हैं। सरकारी बिजली कंपनी के कर्मचारी क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों की मरम्मत में जुटे हुए हैं, लेकिन लगातार आफ्टरशॉक आने से काम में दिक्कतें आ रही हैं। वेनेजुएला सरकार का कहना है कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अमेरिका, मेक्सिको, कोलंबिया, अल सल्वाडोर, स्विट्जरलैंड समेत कई देशों से बचावकर्मी मौके पर पहुंचे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 861 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बचावकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी 25 अंतरराष्ट्रीय सर्च एंड रेस्क्यू टीमों के करीब 1000 आपातकालीन कर्मियों को भेजने की घोषणा की है। भारी मशीनें, दमकल विभाग की टीमें और मेडिकल स्टाफ लगातार प्रभावित इलाकों तक पहुंचाए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत ने भी वेनेजुएला की मदद के लिए 'ऑपरेशन अमिस्ताद' शुरू किया है। स्पेनिश भाषा में 'अमिस्ताद' का अर्थ दोस्ती होता है। इस अभियान के तहत भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमानों से लगभग 35 टन राहत सामग्री भेजी गई है। इनमें आवश्यक दवाइयां, मेडिकल उपकरण और राहत सामग्री शामिल हैं। इसके साथ ही 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल यूनिट की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम भी वेनेजुएला पहुंची है। डॉक्टरों और नर्सों की यह टीम घायलों का इलाज करेगी और जरूरत पड़ने पर अस्थायी अस्पताल भी स्थापित करेगी। राहत कार्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के मुख्य एयरपोर्ट का क्षतिग्रस्त होना है। इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (IRC) की चीफ एलिनोर रेक्स ने बताया कि एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचने के कारण बड़ी मात्रा में राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश कोलंबिया में पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध है, लेकिन उसे वेनेजुएला तक पहुंचाने में परिवहन सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। आने वाले दिनों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के अनुसार, इस भीषण भूकंप से करीब 67.6 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें लगभग 20 लाख लोग राजधानी कराकस में रहते हैं। हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं और अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। स्कूल, अस्पताल और कई सरकारी इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 14:10:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वेनेजुएला भूकंप में 235 से ज्यादा मौतें, मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दोहरे भूकंप से सैकड़ों मौतें, हजारों घायल; राहत और बचाव अभियान में जुटी दुनिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/more-than-235-dead-in-venezuela-earthquake-search-continues-for/article-56978"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">वेनेजुएला में आए भीषण दोहरे भूकंप ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इन भूकंपों में कम से कम 235 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई लोग अब भी लापता हैं और आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। राहत और बचाव दल लगातार रात भर अभियान चला रहे हैं, लेकिन समय तेजी से निकलता जा रहा है और जीवित लोगों को तलाशने की उम्मीद धीरे-धीरे कम होती जा रही है। सबसे ज्यादा तबाही तटीय शहर ला ग्वाइरा, राजधानी कराकास और आसपास के इलाकों में देखने को मिली है। कई इमारतें पूरी तरह ढह गईं, सड़कें टूट गईं और हजारों परिवार बेघर हो गए। जिन लोगों के घर बच भी गए हैं, वे आफ्टरशॉक्स के डर से खुले मैदानों में रात गुजारने को मजबूर हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार यह वेनेजुएला में एक सदी से भी अधिक समय में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक माना जा रहा है।</p>
<p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">कराकास की रहने वाली ओरिआना वेलास्केज़ अपने पिता की तलाश में तटीय शहर काराबालेडा पहुंचीं। उन्होंने वहां के हालात को देखकर कहा कि पूरा इलाका किसी युद्ध क्षेत्र जैसा लग रहा था। उनके अनुसार उन्होंने रास्ते में कई शव देखे और जिस इमारत में उनके पिता रहते थे, वह पूरी तरह ढह चुकी थी। स्वयंसेवी बचावकर्मी मलबे में लोगों की तलाश करते दिखाई दिए। वेलास्केज़ ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनके जीवन में ऐसा दिन आएगा। देर रात तक उन्हें अपने पिता का कोई पता नहीं चल पाया और उन्होंने अगले दिन भी खोज जारी रखने की बात कही। भूकंप के बाद अस्पतालों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। कई जगह डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी की खबरें भी सामने आ रही हैं। घायल लोगों का इलाज अस्थायी शिविरों और खुले मैदानों में किया जा रहा है। बिजली और संचार सेवाएं भी कई इलाकों में प्रभावित हुई हैं, जिससे राहत कार्यों में मुश्किलें बढ़ गई हैं।</p>
<p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">यह आपदा ऐसे समय में आई है जब वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। लंबे समय से जारी आर्थिक कठिनाइयों के कारण देश की बुनियादी सेवाएं दबाव में थीं और अब इस प्राकृतिक आपदा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। दुनिया भर से मदद पहुंचनी शुरू हो गई है। कई देशों ने राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और बचाव दल भेजने की घोषणा की है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने भी प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचाने की तैयारी तेज कर दी है। विदेशी सहायता के लिए वित्तीय मदद की घोषणाएं लगातार हो रही हैं, हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि शुरुआती 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और इसी अवधि में अधिकतम लोगों को जीवित बचाया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में अब भी भारी मशीनरी की जरूरत है क्योंकि हाथों से मलबा हटाने में बहुत समय लग रहा है। कई परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों, राहत शिविरों और ढही हुई इमारतों के आसपास भटकते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग तस्वीरें लेकर घूम रहे हैं ताकि किसी तरह अपने रिश्तेदारों का पता चल सके। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन व्यवस्थाएं लागू कर दी हैं और सेना को भी राहत कार्यों में लगाया गया है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही उन इलाकों से दूर रहने को कहा गया है जहां इमारतों के गिरने का खतरा बना हुआ है। भूकंप ने सिर्फ इमारतें नहीं गिराईं, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी भी बदल दी है। जिन लोगों ने अपने घर, कारोबार या प्रियजन खो दिए हैं, उनके लिए आने वाले दिन बेहद कठिन होंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:33:58 +0530</pubDate>
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