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                <title>Government - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Government RSS Feed</description>
                
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                <title>खाद कालाबाजारी पर सरकार का बड़ा एक्शन, कृषि मंत्री ने दी सख्त चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[अंबिकापुर दौरे में कृषि मंत्री रामविचार नेताम की दोटूक चेतावनी, खाद वितरण व्यवस्था की होगी कड़ी निगरानी, किसानों को समय पर उपलब्ध होगी पर्याप्त खाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/governments-big-action-on-black-marketing-of-fertilizers-agriculture-minister/article-58387"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-agriculture-minister.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने खाद की कालाबाजारी और किसानों के हितों से जुड़े मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अंबिकापुर दौरे के दौरान स्पष्ट कहा कि खाद की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका ऐसे लोगों को संरक्षण देने में सामने आती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसानों के हितों से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। कृषि मंत्री ने कहा कि खेती का मौसम शुरू होते ही किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति या समूह खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर मुनाफाखोरी करने की कोशिश करता है तो यह सीधे तौर पर किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत को गंभीरता से ले रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि जांच में किसी की भूमिका खाद माफियाओं को संरक्षण देने या अनियमित वितरण में सहयोग करने की सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। अंबिकापुर और सरगुजा क्षेत्र में लंबे समय से खाद वितरण को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई किसान संगठनों ने खाद की कालाबाजारी, अनियमित वितरण और कृत्रिम संकट पैदा किए जाने के आरोप लगाए हैं। इसी पृष्ठभूमि में कृषि मंत्री का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को परेशानी में डालने वाले तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसी भी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में खाद की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। विशेष रूप से डीएपी खाद का पर्याप्त भंडारण किया गया है ताकि मांग के अनुसार किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक लगभग 50 प्रतिशत खाद का उठाव किसानों द्वारा किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वितरण प्रक्रिया लगातार जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मानसून की शुरुआत में बारिश में कुछ देरी होने के कारण किसानों में चिंता का माहौल था, लेकिन अब अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी वर्षा होने से खेती की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे समय में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खाद और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता में कोई बाधा न आए। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग की ओर से जिला स्तर पर खाद वितरण की नियमित समीक्षा भी की जा रही है। विभिन्न जिलों में उपलब्ध स्टॉक, मांग और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कहीं भी कृत्रिम संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। सरकार का प्रयास है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो और किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। खेती के मौसम में खाद की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है और सरकार इसे लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कृषि मंत्री ने किसानों से भी अपील की कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और यदि कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही हो, कालाबाजारी की जा रही हो या कृत्रिम कमी पैदा की जा रही हो तो इसकी जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 13:13:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>धंसी सड़क की जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी, दो इंजीनियर निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[कबीरधाम में पीएम जनमन योजना की सड़क की गुणवत्ता जांच में तकनीकी खामियां सामने आईं, भारी वाहनों के संचालन और मॉनिटरिंग में लापरवाही को माना गया नुकसान की बड़ी वजह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-flaw-revealed-in-investigation-of-sunken-road-two-engineers/article-58382"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surajpur-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाई गई सड़क के धंसने की शिकायत आखिरकार सही साबित हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान सड़क की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी खामियां सामने आईं। इसके बाद निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दलदली मेन रोड से खारिया होते हुए अगरी तक बनाई गई इस सड़क के कई हिस्सों में धंसने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा लगातार की जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का निरीक्षण किया। सड़क की गुणवत्ता का सही आकलन करने के लिए कोर कटिंग सहित विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए गए। जांच में पाया गया कि सड़क का अधिकांश निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप था, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों और क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के संचालन के कारण सड़क को नुकसान पहुंचा।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान सामने आया कि जिस सड़क पर केवल 10 से 12 टन क्षमता तक के वाहनों के संचालन की अनुमति थी, वहां 60 से 70 टन तक वजन वाले रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों का लगातार आवागमन हो रहा था। सड़क की डिजाइन इतनी अधिक भार क्षमता के लिए तैयार नहीं की गई थी। भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क की सतह और अंदरूनी संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे सड़क धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। तकनीकी जांच में यह भी पाया गया कि सड़क के किनारों यानी शोल्डर का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार नहीं किया गया था। कॉम्पैक्शन परीक्षण में कई स्थानों पर शोल्डर की मजबूती तय मानकों से कम मिली। निर्धारित 100 प्रतिशत कॉम्पैक्शन के मुकाबले कुछ हिस्सों में यह केवल 95 प्रतिशत और एक स्थान पर 94.68 प्रतिशत पाया गया। इसके अलावा एक पुलिया के एप्रोच क्षेत्र में बैकफिलिंग का कार्य भी मानकों के अनुरूप नहीं मिला। बारिश के दौरान इसी हिस्से से पानी सड़क की निचली परत तक पहुंच गया, जिससे सड़क की संरचना कमजोर हो गई और कई स्थानों पर धंसाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे. रितेश नायडू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं कार्यपालन अभियंता (ईई) संतोष कुमार ठाकुर के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उनके निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क के जिन हिस्सों में नुकसान हुआ है, उन्हें पूरी तरह हटाकर दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। साथ ही पूरी सड़क के शोल्डर को भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:14:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल यौन शोषण कंटेंट पर सरकार सख्त, इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को भेजा नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[7 दिन में मांगा जवाब, विवादित विज्ञापन तुरंत हटाने और ऐसे कंटेंट की पहुंच रोकने के निर्देश; सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बढ़ी सख्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-child-sexual-abuse-content-sent-notice-to/article-57915"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/instagram-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े विज्ञापनों के प्रसार को गंभीरता से लेते हुए उसकी पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है और निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित कंटेंट को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक और हटाया जाए। यह कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने 4 जुलाई को जारी नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी प्रकार का ऐसा कंटेंट या विज्ञापन बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देता है या उपयोगकर्ताओं को ऐसे अवैध कंटेंट तक पहुंचने में मदद करता है, तो उसे तत्काल हटाया जाना चाहिए। सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दिए और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>BBC की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन चल रहे थे जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया गया। रिपोर्ट के अनुसार इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ताओं को दूसरे प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से टेलीग्राम चैनलों की ओर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर अवैध सामग्री बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही थी। ऐसे विज्ञापन Meta के मॉडरेशन सिस्टम से स्वीकृति मिलने के बाद ही प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहे थे। जब इस संबंध में शिकायत की गई तो शुरुआती स्तर पर संबंधित विज्ञापन को कंपनी की कम्युनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं माना गया। बाद में मामला सार्वजनिक होने के बाद Meta ने कई विज्ञापन हटाने, संबंधित अकाउंट निलंबित करने और संदिग्ध लिंक हटाने की बात स्वीकार की।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने मांगा विस्तृत स्पष्टीकरण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने Meta से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में ऐसी चूक कैसे हुई। साथ ही यह भी पूछा गया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से तकनीकी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे। सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उनके प्लेटफॉर्म का उपयोग किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों के लिए न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी किया हो। इससे पहले 1 जुलाई को सरकार ने WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भी कंपनी से जवाब मांगा था। लगातार दूसरी बार नोटिस जारी होने से स्पष्ट है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर अधिक सतर्क और सख्त रुख अपना रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में क्या कहता है कानून</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कानून के अनुसार बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी प्रकार की सामग्री का निर्माण, संग्रह, डाउनलोड, खरीद, बिक्री, प्रसारण या साझा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67B के तहत ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। पहली बार दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की कैद और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। दोबारा अपराध करने पर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अन्य संबंधित कानूनों के तहत भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों पर यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वे अवैध और आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर त्वरित कार्रवाई करें। इन नियमों के अनुसार कंपनियों को जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना और शिकायत मिलने पर समयबद्ध तरीके से सामग्री हटाना अनिवार्य है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>यदि ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों की सलाह है कि यदि किसी उपयोगकर्ता को इस प्रकार का कोई भी संदिग्ध या अवैध कंटेंट दिखाई देता है तो उसे किसी भी स्थिति में डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। इंटरनेट और सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि इन प्लेटफॉर्म पर मौजूद अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए।  केवल सरकार या सोशल मीडिया कंपनियां ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में जागरूक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ेगी निगरानी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार की इस कार्रवाई को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन, विज्ञापन स्वीकृति प्रक्रिया और सुरक्षा तंत्र की अधिक सख्ती से निगरानी की जाएगी। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ आईटी कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाना और बच्चों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-child-sexual-abuse-content-sent-notice-to/article-57915</link>
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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 13:31:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>LNG सप्लाई फिर हुई सामान्य, सरकार ने हटाए सभी आपातकालीन प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट बहाल होने के बाद केंद्र का बड़ा फैसला, उद्योगों को मिलेगी राहत और गैस आपूर्ति होगी सुचारु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lng-supply-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि एलएनजी का सबसे अधिक उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस एवं तेल के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति स्थिर है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से भारत के लिए एलएनजी कार्गो फिर से नियमित रूप से पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के चलते फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने वाले एलएनजी कार्गो को रोक दिया था या उन्हें अन्य देशों की ओर मोड़ दिया था। इस संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ लागू किया था। इसका उद्देश्य सीमित उपलब्ध गैस का प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखना था।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी सप्लाई से जुड़े प्रतिबंध हटाना सरकार का तीसरा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद दो अन्य आपातकालीन फैसले भी वापस ले चुकी है। पहले फैसले के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया था कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन अधिक करें ताकि घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें। अब इस निर्देश को समाप्त कर दिया गया है। दूसरे फैसले में बल्क उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अब ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और किसी प्रकार की अतिरिक्त पाबंदी की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। देश में कई उद्योग प्राकृतिक गैस पर आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग करते हैं। गैस की कमी के दौरान कई कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और उत्पादन घटाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब नियमित आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और कई उद्योगों का संचालन पहले की तरह सुचारु रूप से हो सकेगा। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, स्टील, सिरेमिक, कांच, टेक्सटाइल और अन्य गैस आधारित उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। इनमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया के देशों से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। विशेष रूप से कतर से आने वाली एलएनजी का अधिकांश परिवहन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक कदम उठाए थे। विभिन्न देशों से ईंधन आयात के विकल्प तलाशे गए, घरेलू भंडार का उपयोग किया गया और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया गया। एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है। उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्यप्रदेश में मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक आना मुश्किल, समिति का कार्यकाल 26 जुलाई तक बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा का मानसून सत्र 24 जुलाई को होगा समाप्त, सरकार ने समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति को दिया अतिरिक्त समय, गुजरात मॉडल पर तैयार हो रहा ड्राफ्ट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/difficult-to-pass-ucc-bill-in-monsoon-session-in-madhya/article-57880"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-ucc-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर चल रही तैयारियों के बीच अब यह संभावना कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है कि प्रस्तावित कानून आगामी विधानसभा मानसून सत्र में पेश हो सकेगा। राज्य सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है, जबकि विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में समय-सीमा को देखते हुए इस सत्र में यूसीसी विधेयक पेश होने की संभावना काफी कम मानी जा रही है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है और अधिकारी यह भी मान रहे हैं कि यदि मसौदे को समय रहते अंतिम रूप मिल जाता है तो सरकार विशेष परिस्थितियों में आगे की रणनीति तय कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधि एवं विधायी कार्य विभाग की ओर से 30 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार समिति के सदस्य सचिव के अनुरोध और मसौदा तैयार करने की प्रगति को ध्यान में रखते हुए उसका कार्यकाल बढ़ाया गया है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि समिति के गठन से जुड़े अन्य सभी प्रावधान पहले की तरह प्रभावी रहेंगे। सरकार का कहना है कि यूसीसी जैसा महत्वपूर्ण कानून तैयार करने में कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तार से अध्ययन आवश्यक है। इसी कारण समिति को अतिरिक्त समय दिया गया है ताकि अंतिम मसौदा सभी आवश्यक बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक तैयार किए गए प्रारूप का बड़ा हिस्सा गुजरात में लागू समान नागरिक संहिता के मॉडल से प्रेरित है। बताया जा रहा है कि मसौदे का लगभग 90 प्रतिशत भाग गुजरात के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे पारिवारिक मामलों के लिए सभी समुदायों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव शामिल है। सरकार का उद्देश्य विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना बताया जा रहा है, जिससे नागरिकों के अधिकारों और जिम्मेदारियों में एकरूपता लाई जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले सार्वजनिक रूप से यह संकेत दे चुके हैं कि जुलाई में होने वाले विधानसभा मानसून सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता कानून का स्वरूप ले सकती है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा था कि सरकार मानसून सत्र में ही विधेयक पेश कर सकती है। इसी बीच 2 जुलाई को मुख्यमंत्री के समक्ष यूसीसी के प्रारूप का विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी किया गया था। इस बैठक में मसौदे के विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि समिति का कार्यकाल बढ़ने के बाद स्थिति कुछ बदलती हुई नजर आ रही है। विधानसभा सत्र 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा, जबकि समिति को 26 जुलाई तक का समय दिया गया है। इस कारण तकनीकी रूप से समिति की अंतिम रिपोर्ट सत्र समाप्त होने के बाद उपलब्ध होगी। यही वजह है कि विधेयक को मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना कम मानी जा रही है। फिर भी प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चा बनी हुई है कि यदि समिति निर्धारित समय से पहले अपना अंतिम मसौदा सरकार को सौंप देती है तो सरकार उपलब्ध समय के भीतर विधेयक पेश करने की संभावना पर विचार कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूसीसी केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और संवैधानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए सरकार किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से बचना चाहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के व्यापक कानून के लिए सभी कानूनी पहलुओं, विभिन्न समुदायों की आवश्यकताओं और संभावित प्रशासनिक प्रभावों का गहन अध्ययन आवश्यक होता है। इसी कारण मसौदे को अंतिम रूप देने में अतिरिक्त समय लिया जाना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है। विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में सरकार के सामने कई अन्य विधायी और प्रशासनिक विषय भी रहेंगे। ऐसे में यदि यूसीसी विधेयक इस सत्र में प्रस्तुत नहीं हो पाता है, तो संभावना है कि सरकार इसे किसी आगामी सत्र या विशेष विधानसभा सत्र में पेश करने पर विचार करे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:19:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले, शहडोल-शाजापुर समेत कई जिलों में नई जिम्मेदारियां</title>
                                    <description><![CDATA[रुचि वर्धन मिश्रा बनीं भोपाल ग्रामीण की आईजी, सागर और नर्मदापुरम रेंज को भी मिले नए आईजी, राज्य सरकार ने देर रात जारी किए तबादला आदेश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/9-ips-officers-transferred-in-madhya-pradesh-new-responsibilities-in/article-57824"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-ips-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 9 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। गृह विभाग की ओर से देर रात जारी आदेशों में कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस बदलाव के तहत शहडोल और शाजापुर जिलों के पुलिस अधीक्षक भी बदल दिए गए हैं। संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है, जबकि प्रियंका शुक्ला को शाजापुर जिले की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा भोपाल ग्रामीण, सागर और नर्मदापुरम में नए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की भी पदस्थापना की गई है। माना जा रहा है कि यह प्रशासनिक बदलाव कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा पुलिस व्यवस्था में बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">तबादला सूची के अनुसार रुचि वर्धन मिश्रा को भोपाल ग्रामीण जोन का नया आईजी बनाया गया है। वह अब तक पुलिस मुख्यालय में आईजी प्रशासन के पद पर कार्यरत थीं। उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें राजधानी से जुड़े ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं मिथिलेश शुक्ला को सागर रेंज का आईजी नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान में नर्मदापुरम जोन के आईजी के रूप में कार्य कर रहे थे और सागर रेंज का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास था। हिमानी खन्ना के सेवानिवृत्त होने के बाद सागर रेंज का आईजी पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के जरिए संचालित किया जा रहा था। अब सरकार ने इस व्यवस्था को समाप्त करते हुए मिथिलेश शुक्ला की नियमित पदस्थापना कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी क्रम में चंद्रशेखर सोलंकी को नर्मदापुरम जोन का नया आईजी बनाया गया है। वह फिलहाल इंदौर एसएएफ रेंज में पदस्थ थे। उनके स्थानांतरण के साथ नर्मदापुरम जोन को नया नेतृत्व मिल गया है। वहीं हरि नारायणचारी मिश्रा को पुलिस मुख्यालय में आईजी प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह आईजी एससीआरबी के पद पर कार्यरत थे। पुलिस मुख्यालय में प्रशासनिक स्तर पर यह बदलाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आईजी प्रशासन का दायित्व पुलिस विभाग की कई अहम व्यवस्थाओं से जुड़ा होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जारी आदेशों में जिला स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। संजय कुमार अग्रवाल को शहडोल जिले का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वहीं प्रियंका शुक्ला को शाजापुर जिले की कमान सौंपी गई है। इससे पहले शाजापुर के पुलिस अधीक्षक रहे यशपाल सिंह राजपूत का तबादला पुलिस अधीक्षक रेल, इंदौर के पद पर किया गया है। दूसरी ओर शहडोल के पुलिस अधीक्षक रहे रामजी श्रीवास्तव को पुलिस अकादमी भौंरी में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) के पद पर भेजा गया है। इन बदलावों के बाद दोनों जिलों में नए नेतृत्व के साथ पुलिस व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">तबादला आदेश में सिमाला प्रसाद को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें खरगोन रेंज का डीआईजी बनाया गया है। सिमाला प्रसाद इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और पुलिस जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। उनके अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस अहम पद पर नियुक्त किया है। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली को मजबूत करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने केवल नियमित तबादले ही नहीं किए, बल्कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं। विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) आदर्श कटियार को उनकी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ स्पेशल डीजी दूरसंचार, पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसके अलावा आईजी इंदौर ग्रामीण जोन अनुराग को आईजी एसएएफ इंदौर रेंज और आईजी आरएपीटीसी इंदौर का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है। इन अतिरिक्त प्रभारों को विभागीय कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग में समय-समय पर इस तरह के प्रशासनिक बदलाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। सरकार विभिन्न जिलों और रेंजों में अधिकारियों की कार्यशैली, अनुभव और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई जिम्मेदारियां तय करती है। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि समय पर किए गए तबादले प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ पुलिसिंग की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद करते हैं। नई तैनाती के बाद अधिकारियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की चुनौती होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश में हाल के महीनों में कई जिलों में अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और पुलिस आधुनिकीकरण जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है। ऐसे में नए अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी रणनीति बनाकर पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करेंगे। खासकर शहडोल, शाजापुर, भोपाल ग्रामीण, सागर और नर्मदापुरम जैसे क्षेत्रों में नई नियुक्तियों के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चलते ई-रिक्शा को रोकने वाले 7 ऐप पर सरकार सख्त, बैटरी सुरक्षा में बड़ी खामी आई सामने</title>
                                    <description><![CDATA[ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी बंद करने की शिकायतों के बाद कार्रवाई, सरकार ने ऐप स्टोर से हटाने के दिए निर्देश; इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर फिलहाल सुरक्षित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/government-strict-on-7-apps-that-stop-e-rickshaws-from-moving/article-57821"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/e-rickshaw.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">दिल्ली समेत देश के कई शहरों में ई-रिक्शा चालकों के लिए परेशानी का कारण बने कुछ मोबाइल ऐप्स पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ऐसे सात ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं, जिनका कथित तौर पर दुरुपयोग कर चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी को ब्लूटूथ के जरिए बंद किया जा रहा था। इनमें BAT-BMS, Smart BMS, Lossigy और Epoch Li-Ion जैसे ऐप शामिल हैं। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए थे, जिनमें चलते हुए ई-रिक्शा अचानक बीच सड़क पर रुक जाते थे। इसके बाद शिकायतें मिलने पर सरकार ने मामले का संज्ञान लिया। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्देश जारी होने के बावजूद कुछ ऐप्स अभी भी डाउनलोड के लिए उपलब्ध दिखाई दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित प्लेटफॉर्म से इन्हें पूरी तरह हटाने की प्रक्रिया जारी है। इस पूरे मामले ने ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाली कुछ लीथियम-आयन बैटरियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या किसी एक ऐप की नहीं, बल्कि उन बैटरियों की है जिनके ब्लूटूथ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। ऐसे सिस्टम बिना मजबूत पासवर्ड या एन्क्रिप्शन के खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति सीमित दूरी के भीतर उनसे कनेक्ट होकर बैटरी की सेटिंग्स बदल सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार BAT-BMS जैसे ऐप मूल रूप से बैटरी की निगरानी और रखरखाव के लिए विकसित किए गए थे। इनका उद्देश्य बैटरी की चार्जिंग, तापमान, वोल्टेज, क्षमता और अन्य तकनीकी जानकारियों पर नजर रखना है। जरूरत पड़ने पर अधिकृत उपयोगकर्ता इन ऐप्स के जरिए बैटरी को ऑन या ऑफ भी कर सकता है। यही सुविधा कुछ मामलों में गलत तरीके से इस्तेमाल की गई। बताया जा रहा है कि जिन ई-रिक्शा में ब्लूटूथ आधारित लीथियम-आयन बैटरी लगी है और जिनका ब्लूटूथ बिना पासवर्ड के खुला छोड़ा गया है, वहां यह जोखिम ज्यादा है। ऐसे ऐप लगभग 10 से 15 मीटर की दूरी से बैटरी से कनेक्ट हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि सभी ई-रिक्शा इस समस्या से प्रभावित नहीं हैं। देश में बड़ी संख्या में ऐसे ई-रिक्शा अब भी चल रहे हैं जिनमें पारंपरिक लेड-एसिड बैटरियां लगी हैं। इनमें ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होता, इसलिए ऐसे वाहनों पर इन ऐप्स का कोई असर नहीं पड़ता। वहीं जिन लीथियम बैटरियों में निर्माता ने मजबूत और यूनिक पासवर्ड सेट किया है, उन्हें भी सामान्य तरीके से एक्सेस नहीं किया जा सकता। इलेक्ट्रिक कारों और स्कूटरों के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि उनमें कहीं अधिक उन्नत साइबर सुरक्षा, एन्क्रिप्शन और मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल होता है। इसलिए किसी सामान्य मोबाइल ऐप के जरिए उन्हें नियंत्रित करना संभव नहीं है। यही वजह है कि फिलहाल यह खतरा मुख्य रूप से कुछ कम कीमत वाले ई-रिक्शा की बैटरियों तक सीमित माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित ऐप्स को मूल रूप से ई-रिक्शा नियंत्रित करने के लिए नहीं बनाया गया था। इनका उपयोग सौर ऊर्जा प्रणाली, नावों और अन्य उपकरणों में लगी लीथियम बैटरियों की निगरानी के लिए किया जाता था। भारत में कुछ स्थानीय बैटरी असेंबलरों और कम लागत वाले निर्माताओं ने इन्हीं सिस्टम का उपयोग ई-रिक्शा में भी करना शुरू कर दिया, लेकिन कई मामलों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में डिफॉल्ट पासवर्ड जैसे "1234" या "0000" ही छोड़ दिए जाएं या बिल्कुल पासवर्ड न लगाया जाए, तो कोई भी व्यक्ति आसानी से उससे कनेक्ट हो सकता है। इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान मजबूत और यूनिक पासवर्ड सेट करना है। सरकार और तकनीकी विशेषज्ञ ई-रिक्शा चालकों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपने नजदीकी बैटरी डीलर या अधिकृत मैकेनिक से संपर्क कर यह सुनिश्चित करें कि उनकी बैटरी का ब्लूटूथ सिस्टम पासवर्ड से सुरक्षित है। यदि डिफॉल्ट पासवर्ड लगा हो तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। इसके अलावा यदि यात्रा के दौरान ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाए तो घबराने के बजाय वाहन को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर मुख्य बैटरी स्विच या एमसीबी को बंद करके दोबारा चालू करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि तकनीकी सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और ऐसे ऐप्स के दुरुपयोग पर रोक लगाने से भविष्य में इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों के 500 मीटर दायरे में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय, नियम तोड़ने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई; राज्यभर में खाद्य जांच व्यवस्था भी होगी मजबूत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-decision-of-maharashtra-government-ban-on-sale-of-sting/article-57786"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित खानपान को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य के सभी स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में स्थित दुकानों पर <strong>'स्टिंग' (Sting) एनर्जी ड्रिंक</strong> की बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने शुक्रवार को विधानसभा में इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार बच्चों में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर गंभीर है और उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री नरहरि जिरवाल ने विधानसभा में बताया कि यदि किसी स्कूल परिसर या उसके आसपास के 500 मीटर के दायरे में छात्रों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों अथवा कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री होती पाई जाती है, तो संबंधित दुकानदारों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को ऐसे उत्पादों से दूर रखना है, जिनका अधिक सेवन उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला विधानसभा में उस समय उठा जब विधायक विक्रम पचपुते ने 'स्टिंग' एनर्जी ड्रिंक के सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर प्रश्न किया। इस दौरान विधायक राहुल कुल और वरुण सरदेसाई ने भी इस विषय पर पूरक प्रश्न पूछे। जवाब देते हुए मंत्री जिरवाल ने कहा कि सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्कूलों के आसपास ऐसे उत्पादों की बिक्री पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने केवल प्रशासनिक अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्राचार्यों और जिला परिषदों को भी इस अभियान में भागीदारी निभाने की अपील की है। यदि किसी स्कूल के आसपास प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों की बिक्री होती दिखाई देती है, तो उसकी जानकारी तत्काल खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को देने को कहा गया है। ऐसी शिकायतों पर जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि बच्चों और किशोरों में एनर्जी ड्रिंक का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैफीन और अधिक शर्करा वाले पेय पदार्थों का नियमित सेवन बच्चों में नींद की समस्या, बेचैनी, हृदय गति बढ़ने, एकाग्रता में कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी कारण सरकार ने एहतियात के तौर पर स्कूलों के आसपास इनकी बिक्री सीमित करने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में मंत्री जिरवाल ने राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुंबई, नागपुर और संभाजीनगर में खाद्य एवं दवा परीक्षण की तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा रायगढ़, नासिक, यवतमाल और पुणे में नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत राज्य में 22 अतिरिक्त प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना है। इन प्रयोगशालाओं के शुरू होने से खाद्य और पेय पदार्थों के नमूनों की जांच अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने विधानसभा में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की जांच से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। मंत्री ने बताया कि अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के कुल 27 खाद्य नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए। इनमें से 10 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके अलावा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच विभिन्न ब्रांडों के एनर्जी ड्रिंक्स के कुल 115 नमूनों की जांच की गई। इनमें 63 नमूने मानक गुणवत्ता के पाए गए, जबकि एक नमूना सब-स्टैंडर्ड और छह नमूने मिसब्रांडेड घोषित किए गए। शेष नमूनों की जांच अभी जारी है।  खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नियमित जांच और सख्त निगरानी आवश्यक है। विशेष रूप से ऐसे उत्पाद, जिनका उपयोग बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर करते हैं, उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का विस्तार कर रही है, ताकि संदिग्ध उत्पादों की जांच समय पर हो सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस फैसले को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिक्षा संस्थानों के आसपास जंक फूड, तंबाकू उत्पादों और अब कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर नियंत्रण की पहल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित करने के लिए स्कूल परिसर और उसके आसपास का वातावरण सुरक्षित होना आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मध्यप्रदेश में अल्पवर्षा की आशंका पर सरकार अलर्ट, हर जिले में बनेगी जल संकट आकस्मिक योजना</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संभावित कम बारिश से निपटने के लिए सभी विभागों के साथ समीक्षा बैठक की। जल डैशबोर्ड, कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान, जल संरक्षण अभियान और किसानों के लिए वैज्ञानिक खेती पर विशेष जोर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-alert-on-possibility-of-short-rainfall-in-madhya-pradesh/article-57709"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जल संकट, कृषि, सिंचाई और पेयजल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तर पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए आधुनिक जल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जिससे जलाशयों, भूजल और पेयजल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। सरकार का कहना है कि समय रहते वैज्ञानिक योजना और विभागों के बेहतर समन्वय से संभावित अल्पवर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संभावित कम बारिश को केवल संकट के रूप में नहीं बल्कि बेहतर योजना और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि किसानों तक समय पर सही जानकारी और तकनीकी सलाह पहुंचाई जाए ताकि मौसम की चुनौती के बावजूद कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर न्यूनतम असर पड़े। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित कई विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकती हैं। इसके साथ ही किसानों से जल्दबाजी में बुआई नहीं करने की अपील करने के निर्देश भी दिए गए। सरकार चाहती है कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए ताकि फसलों को शुरुआती नुकसान से बचाया जा सके। बैठक में आधुनिक कृषि तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह गांव-गांव तक पहुंचाई जाए ताकि किसान अपने क्षेत्र की जल उपलब्धता और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने की योजना तैयार की गई है। साथ ही कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत बीज किस्मों के उपयोग को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जल प्रबंधन को लेकर सरकार ने कई दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम शुरू करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा की जाएगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा। वहीं शहरी निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 योजना के तहत लंबित जल प्रदाय परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने "जलाभिषेक 2.0" अभियान के तहत प्रदेश के पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं और अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं का सर्वे और पुनर्जीवन करने की योजना बनाई है। मनरेगा के समन्वय से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके अलावा भूजल पुनर्भरण अभियान के अंतर्गत रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में पूरा किया जाएगा। सरकार "खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में" की अवधारणा को भी व्यापक स्तर पर लागू करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश के सभी प्रमुख जलाशयों जैसे इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर में जल उपयोग के लिए स्पष्ट प्राथमिकता तय की जाएगी। सरकार ने पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके बाद सिंचाई और फिर जलविद्युत उत्पादन के लिए जल उपयोग किया जाएगा। साथ ही नहरों की सफाई और मरम्मत रबी सीजन से पहले पूरी करने तथा अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी। कृषि क्षेत्र के लिए प्रत्येक जिले में कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जाएगा। कम जल मांग वाली फसलों, दलहन, तिलहन और श्रीअन्न को बढ़ावा देने के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा (AWD) तकनीक को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई गई है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी आधारित फसल क्षति आकलन और फसल बीमा दावों के त्वरित निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच सरकार की तैयारियों को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यदि संभावित अल्पवर्षा के संकेत पहले से मौजूद थे तो अप्रैल और मई में ही तैयारी क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है और अब समीक्षा बैठकों के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और किसानों के लिए जमीनी स्तर पर तत्काल राहत उपाय लागू करने की मांग की। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं और संभावित जल संकट से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:59 +0530</pubDate>
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                <title>मध्य प्रदेश पुलिस में अवकाश प्रक्रिया हुई डिजिटल, अब eHRMS से ऑनलाइन होगी छुट्टी मंजूर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश की सभी 120 पुलिस इकाइयों में ई-लीव मॉड्यूल लागू, एक लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी घर बैठे कर सकेंगे ऑनलाइन अवकाश आवेदन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/leave-process-in-madhya-pradesh-police-has-become-digital-now/article-57715"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-police.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश पुलिस विभाग ने अपने प्रशासनिक कामकाज को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी छुट्टी के लिए कागजी आवेदन देने की बजाय ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने 1 जुलाई 2026 से eHRMS (इलेक्ट्रॉनिक ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) का ई-लीव मॉड्यूल पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत पुलिस विभाग की सभी 120 इकाइयों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी eHRMS पोर्टल या मोबाइल एप के जरिए अवकाश के लिए आवेदन कर सकेंगे। छुट्टी की मंजूरी, उसकी स्थिति और पूरी प्रक्रिया अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। विभाग का मानना है कि इससे अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस कर्मचारियों को छुट्टी के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कर्मचारी अपने मोबाइल या कंप्यूटर से लॉगिन कर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित लीव क्लर्क उसे डिजिटल माध्यम से सक्षम अधिकारी तक भेजेगा। इसके बाद अधिकारी भी ऑनलाइन ही आवेदन पर अनुशंसा और स्वीकृति देंगे। कर्मचारी अपने लॉगिन के माध्यम से यह भी देख सकेंगे कि उनका आवेदन किस स्तर पर लंबित है या उसे स्वीकृति मिल चुकी है। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अनावश्यक देरी की संभावना काफी कम हो जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय के अनुसार eHRMS के ई-लीव मॉड्यूल का उपयोग फिलहाल प्रदेश सरकार के कुछ विभागों में ही किया जा रहा है, लेकिन पुलिस विभाग इस प्रणाली का सबसे अधिक उपयोग करने वाले विभागों में शामिल हो गया है। वर्तमान में लगभग 1,01,928 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इस डिजिटल सुविधा से जुड़ चुके हैं। विभाग का कहना है कि सभी कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी पहले से ही सिस्टम में दर्ज की जा चुकी है। इसमें प्रत्येक कैडर के अनुसार अवकाश के प्रकार, पात्रता और उपलब्ध छुट्टियों का पूरा विवरण भी शामिल है। इससे आवेदन करते समय किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस ऑनलाइन प्रणाली को सीधे पूरे प्रदेश में लागू नहीं किया गया था। पहले इसे कुछ चुनिंदा इकाइयों में परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया। स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB), कार्मिक शाखा, विशेष शाखा, पुलिस अधीक्षक रेल भोपाल और 25वीं वाहिनी भोपाल में ई-लीव मॉड्यूल का ट्रायल किया गया। इन इकाइयों से मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर तकनीकी सुधार किए गए। परीक्षण सफल रहने के बाद अब इसे प्रदेश की सभी लगभग 120 पुलिस इकाइयों में लागू कर दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग ने बताया कि सेवा प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने की प्रक्रिया जुलाई 2025 से ही शुरू कर दी गई थी। इस दौरान विभाग ने पुराने मैनुअल रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप देने का अभियान चलाया। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं की स्कैनिंग कर उनका पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सुरक्षित किया गया। इस काम में मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPSEDC) की भी मदद ली गई। विभाग के अनुसार एक लाख से अधिक सेवा पुस्तिकाओं का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण किया जा चुका है और लगभग सभी पुलिस अधिकारी-कर्मचारी eHRMS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केवल अवकाश प्रबंधन ही नहीं, बल्कि सेवा संबंधी अन्य रिकॉर्ड को भी डिजिटल बनाया जा रहा है। इसी दिशा में 23 मार्च 2026 से eHRMS का ऑर्डर बुक (O.B.) मॉड्यूल भी लागू किया गया है। इसके माध्यम से पुलिस विभाग में जारी होने वाले सभी महत्वपूर्ण सेवा आदेश ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। पहले कर्मचारियों को कई बार पुराने आदेशों या सेवा संबंधी दस्तावेजों के लिए कार्यालयों में संपर्क करना पड़ता था, लेकिन अब आवश्यक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा और जरूरत पड़ने पर आसानी से देखा जा सकेगा। इससे दस्तावेजों के संरक्षण और रिकॉर्ड प्रबंधन में भी काफी सुधार आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम होगी। ऑनलाइन सिस्टम के कारण आवेदन की निगरानी भी आसान होगी और किसी स्तर पर फाइल लंबे समय तक लंबित रहने की संभावना घटेगी। साथ ही कर्मचारियों को अपने अवकाश की स्थिति जानने के लिए अलग से कार्यालयों में संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पूरी जानकारी उनके लॉगिन पर उपलब्ध रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा दावा, TVK विधायकों को करोड़ों की रिश्वत का ऑफर; सरकार गिराने की कथित साजिश की जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[TVK विधायक ने ₹35 करोड़ की पेशकश और धमकी मिलने का आरोप लगाया, शिकायत के बाद तीन लोग गिरफ्तार; राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामले की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-claim-in-tamil-nadu-politics-tvk-mlas-offered-bribe/article-57556"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tamil-nadu-politics-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अभिनेता और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के संस्थापक विजय की अगुवाई वाली सरकार को कथित रूप से अस्थिर करने की साजिश का दावा किया गया है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि उसके विधायकों को करोड़ों रुपये की रिश्वत देकर सरकार गिराने की कोशिश की गई। इस मामले में एक विधायक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर TVK इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर डीएमके ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक नैरेटिव करार दिया है। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">विधायक ने लगाया 35 करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप</h5>
<p style="text-align:justify;">TVK के ऊथंगुरै विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. एन. इलैयाराजा ने चेन्नई पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उन्हें फोन के माध्यम से संपर्क कर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ आने वाले एक प्रस्ताव में विशेष तरीके से मतदान करने के लिए कहा गया। इसके बदले उन्हें 35 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार, फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को इंडियन पॉलिटिकल डेमोक्रेटिक स्ट्रैटेजीज (IPDS) नामक संगठन का प्रतिनिधि बताया। विधायक का दावा है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया और दोबारा संपर्क न करने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;">15 विधायकों के इस्तीफे की कथित योजना</h5>
<p style="text-align:justify;">यह केवल एक विधायक तक सीमित मामला नहीं था। कथित योजना के तहत TVK के 15 विधायकों से एक साथ इस्तीफा दिलाकर सरकार के बहुमत को प्रभावित करने की रणनीति बनाई गई थी। हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले का खुलासा नहीं होता तो राज्य की राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती थी। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">शिकायत के बाद तीन लोगों की गिरफ्तारी</h5>
<p style="text-align:justify;">विधायक की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान चेन्नई स्थित एक कंसल्टेंसी फर्म से जुड़े तीन लोगों—तिरुनावुक्करासु, नरेश और त्यागराजन—को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में इन लोगों के कुछ राजनीतिक संपर्कों की भी जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी राजनीतिक दल या नेता की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">TVK ने लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप</h5>
<p style="text-align:justify;">TVK नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई विधायकों से संपर्क कर उन्हें दल बदलने या सरकार के खिलाफ मतदान करने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की गई। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK का दावा है कि कई विधायकों को 20 करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक की पेशकश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">डीएमके ने आरोपों को बताया निराधार</h5>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर डीएमके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता ए. सरवनन ने कहा कि TVK बिना तथ्यों के राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। डीएमके का कहना है कि मामले की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए और बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK और डीएमके के बीच पिछले कुछ समय से राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है। चुनावी सभाओं और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान दोनों दलों के नेताओं के बीच कई बार तीखी टिप्पणियां देखने को मिली हैं। हाल के महीनों में भी विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा है। मौजूदा मामला उसी राजनीतिक माहौल के बीच सामने आया है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच</h5>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में रिश्वत या सरकार गिराने की किसी संगठित साजिश के प्रमाण मिलते हैं तो यह राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मामला साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:46:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वॉट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार की नजर, साइबर फ्रॉड की आशंका के बीच होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल नंबर छिपाकर चैट की सुविधा पर केंद्र सतर्क, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/government-eyes-investigation-on-whatsapp-username-feature-amid-fear-of/article-57554"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-khanna-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में करोड़ों लोग रोजमर्रा की बातचीत के लिए वॉट्सएप का इस्तेमाल करते हैं और अब इस लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का नया यूजरनेम फीचर लॉन्च होने से पहले ही चर्चा में आ गया है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस नए फीचर की विस्तार से जांच की जाएगी। सरकार की चिंता यह है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत कर सकेंगे, तो इसका गलत इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। विशेष रूप से साइबर अपराध, फर्जी पहचान बनाकर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। वॉट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा ने हाल ही में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसके जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से बातचीत कर सकेंगे। इस सुविधा में हर यूजर अपना एक अलग और यूनिक यूजरनेम बना सकेगा। भविष्य में कोई नया व्यक्ति मोबाइल नंबर की बजाय इसी यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेगा। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स की निजता को पहले से अधिक मजबूत बनाना है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर सतर्क हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इतने बड़े डिजिटल नेटवर्क में यदि फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इसी कारण सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों, पहचान सत्यापन प्रक्रिया और फर्जी खातों को रोकने की व्यवस्था की समीक्षा करेगी। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई डिजिटल सुविधा को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका उपयोग सुरक्षित तरीके से हो और आम नागरिक किसी तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार न बनें। मेटा ने 29 जून से दुनिया के अलग-अलग देशों में यूजरनेम बुकिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। आने वाले महीनों में इसे चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जाएगा। जैसे ही किसी क्षेत्र में यह सुविधा शुरू होगी, संबंधित यूजर्स को वॉट्सएप के भीतर नोटिफिकेशन मिलेगा और वे अपनी पसंद का यूजरनेम सुरक्षित कर सकेंगे। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय और छोटे यूजरनेम पहले बुक होने की संभावना ज्यादा रहती है, इसलिए कई लोग इस फीचर का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वॉट्सएप का कहना है कि यह फीचर खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए उपयोगी होगा, जहां लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं लेकिन अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते। उदाहरण के तौर पर किसी बिजनेस नेटवर्किंग कार्यक्रम, स्कूल के पैरेंट्स ग्रुप, नए सहकर्मी या किसी सामुदायिक कार्यक्रम में मिले व्यक्ति से संपर्क करते समय यूजर सिर्फ अपना यूजरनेम साझा कर सकेगा। इससे मोबाइल नंबर निजी रहेगा और यूजर की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित बनी रहेगी। कंपनी ने यूजरनेम बनाने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। यूजरनेम की लंबाई तीन से 35 कैरेक्टर के बीच होगी। इसमें केवल छोटे अंग्रेजी अक्षर, अंक, डॉट और अंडरस्कोर का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और जरूरत पड़ने पर उसे बदला या हटाया भी जा सकेगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से किसी यूजर का मोबाइल नंबर सेव है या जिनसे पहले बातचीत हो चुकी है, उनके लिए चैटिंग का तरीका नहीं बदलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कंपनी यूजरनेम की नाम का एक वैकल्पिक सुरक्षा फीचर भी ला रही है। यह एक अतिरिक्त सुरक्षा कोड की तरह काम करेगा। यदि कोई यूजर इस सुविधा को सक्रिय करता है, तो सिर्फ यूजरनेम जान लेने से कोई भी व्यक्ति उसे मैसेज नहीं भेज पाएगा। पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को पहले यह सुरक्षा की दर्ज करनी होगी, तभी बातचीत शुरू हो सकेगी। कंपनी का दावा है कि इससे स्पैम मैसेज और अनचाहे संपर्कों को काफी हद तक रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। जहां एक ओर यूजरनेम फीचर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर इसकी आड़ में फर्जी पहचान बनाकर अपराध करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार इस फीचर के तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:45:55 +0530</pubDate>
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