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                <title>Kabirdham - दैनिक जागरण</title>
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                <title>धंसी सड़क की जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी, दो इंजीनियर निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[कबीरधाम में पीएम जनमन योजना की सड़क की गुणवत्ता जांच में तकनीकी खामियां सामने आईं, भारी वाहनों के संचालन और मॉनिटरिंग में लापरवाही को माना गया नुकसान की बड़ी वजह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/major-flaw-revealed-in-investigation-of-sunken-road-two-engineers/article-58382"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surajpur-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बनाई गई सड़क के धंसने की शिकायत आखिरकार सही साबित हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान सड़क की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी खामियां सामने आईं। इसके बाद निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दलदली मेन रोड से खारिया होते हुए अगरी तक बनाई गई इस सड़क के कई हिस्सों में धंसने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा लगातार की जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का निरीक्षण किया। सड़क की गुणवत्ता का सही आकलन करने के लिए कोर कटिंग सहित विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए गए। जांच में पाया गया कि सड़क का अधिकांश निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप था, लेकिन कुछ तकनीकी कमियों और क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के संचालन के कारण सड़क को नुकसान पहुंचा।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान सामने आया कि जिस सड़क पर केवल 10 से 12 टन क्षमता तक के वाहनों के संचालन की अनुमति थी, वहां 60 से 70 टन तक वजन वाले रेत परिवहन करने वाले भारी वाहनों का लगातार आवागमन हो रहा था। सड़क की डिजाइन इतनी अधिक भार क्षमता के लिए तैयार नहीं की गई थी। भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क की सतह और अंदरूनी संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे सड़क धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। तकनीकी जांच में यह भी पाया गया कि सड़क के किनारों यानी शोल्डर का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार नहीं किया गया था। कॉम्पैक्शन परीक्षण में कई स्थानों पर शोल्डर की मजबूती तय मानकों से कम मिली। निर्धारित 100 प्रतिशत कॉम्पैक्शन के मुकाबले कुछ हिस्सों में यह केवल 95 प्रतिशत और एक स्थान पर 94.68 प्रतिशत पाया गया। इसके अलावा एक पुलिया के एप्रोच क्षेत्र में बैकफिलिंग का कार्य भी मानकों के अनुरूप नहीं मिला। बारिश के दौरान इसी हिस्से से पानी सड़क की निचली परत तक पहुंच गया, जिससे सड़क की संरचना कमजोर हो गई और कई स्थानों पर धंसाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">निरीक्षण के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक अभियंता सौरभ देशमुख और उप अभियंता जे. रितेश नायडू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं कार्यपालन अभियंता (ईई) संतोष कुमार ठाकुर के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उनके निलंबन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क के जिन हिस्सों में नुकसान हुआ है, उन्हें पूरी तरह हटाकर दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। साथ ही पूरी सड़क के शोल्डर को भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:14:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वक्फ संपत्ति विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- ऐसे मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल ही करेगा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वक्फ संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, ट्रिब्यूनल को दो महीने में फैसला करने का निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-big-decision-in-waqf-property-dispute-said/article-57132"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/waqf-property-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों की सुनवाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों के निपटारे के लिए वक्फ ट्रिब्यूनल ही सक्षम और वैधानिक मंच है। अदालत ने कहा कि जब वक्फ अधिनियम के तहत विवादों के समाधान के लिए विशेष व्यवस्था उपलब्ध है, तब सीधे हाईकोर्ट में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मामला पहले से ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है तो वहीं उसकी सुनवाई होगी और उसी मंच पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने संबंधित ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया है कि लंबित मामले का कानून के अनुसार दो महीने के भीतर निपटारा किया जाए। मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता मोहम्मद अजमल खान ने कवर्धा स्थित जामा मस्जिद मुस्लिम ट्रस्ट की वक्फ संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि वक्फ संपत्ति के मुतवल्ली यानी प्रबंधक की ओर से नियमों के विपरीत निर्माण कराया जा रहा है, जिससे वक्फ संपत्ति के प्रबंधन और उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने कथित अवैध निर्माण को रोकने के लिए पहले ही आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना था कि आदेश जारी होने के बाद भी निर्माण को रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण उन्हें न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता पहले ही वक्फ अधिनियम की धारा 83(2) के तहत वक्फ ट्रिब्यूनल में आवेदन प्रस्तुत कर चुके थे। हालांकि उस समय ट्रिब्यूनल में आवश्यक कोरम उपलब्ध नहीं होने के कारण मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी। मामले में राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड की ओर से अदालत में कहा गया कि वक्फ अधिनियम के तहत इस प्रकार के विवादों के निपटारे के लिए विशेष रूप से ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। अब ट्रिब्यूनल पूरी तरह कार्यशील है और संबंधित मामला पहले से वहीं लंबित है। इसलिए हाईकोर्ट को इस स्तर पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। उनका तर्क था कि जब कानून ने किसी विशेष विवाद के लिए अलग मंच निर्धारित किया है तो उसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड के तर्कों से सहमति जताई। अदालत ने कहा कि वक्फ अधिनियम में स्पष्ट रूप से ट्रिब्यूनल को ऐसे मामलों की सुनवाई और निर्णय का अधिकार दिया गया है। इसलिए हाईकोर्ट समानांतर रूप से इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपना पक्ष वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष ही रखें। साथ ही हाईकोर्ट ने संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि यदि मामला अभी भी लंबित है तो कानून के अनुरूप उसकी सुनवाई कर दो महीने के भीतर निर्णय दिया जाए। अदालत ने माना कि न्याय में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और यदि ट्रिब्यूनल अब कार्यशील है तो मामले का शीघ्र निपटारा किया जाना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस विवाद के गुण-दोष यानी मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्य, साक्ष्य और कानूनी प्रश्न ट्रिब्यूनल के समक्ष विचार के लिए खुले रहेंगे। ट्रिब्यूनल स्वतंत्र रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड और कानून के आधार पर अपना निर्णय देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह फैसला भविष्य में वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि जहां किसी विशेष कानून के तहत विवाद निपटाने के लिए वैधानिक मंच उपलब्ध हो, वहां सीधे हाईकोर्ट का रुख करने के बजाय पहले उसी मंच पर न्यायिक प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। इससे न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ भी कम होगा और विशेष मामलों का निपटारा विशेषज्ञ मंचों के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। वक्फ संपत्तियों को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में संपत्ति के प्रबंधन, उपयोग, निर्माण कार्य और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई तरह के कानूनी प्रश्न उठते हैं। वक्फ अधिनियम इन्हीं विवादों के समाधान के लिए ट्रिब्यूनल की व्यवस्था करता है ताकि मामलों का त्वरित और विधिसम्मत निपटारा हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:41 +0530</pubDate>
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