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                <title>startup - दैनिक जागरण</title>
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                <description>startup RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इंदौर में आज होगा ‘माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026’, 5 हजार युवा लेंगे विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। शिक्षा, स्टार्टअप, कौशल, खेल और नवाचार जैसे विषयों पर युवाओं से सीधा संवाद होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/my-youth-my-pride-conclave-2026-will-be-held-in-indore/article-58473"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/my-youth-my-pride-conclave.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंदौर आज प्रदेशभर के हजारों युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और नए विचारों का साक्षी बनने जा रहा है। शहर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में<strong> </strong>‘माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब पांच हजार युवा भाग लेंगे। ‘वन स्टेट, वन जनरेशन, वन संकल्प’ थीम पर आधारित इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को प्रदेश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके विचारों को नीति निर्माण की दिशा में स्थान देना है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से शामिल होंगे और युवाओं को संबोधित करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सुबह से ही प्रतिभागियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है। प्रशासन और आयोजकों ने कार्यक्रम को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं ताकि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले युवाओं को बेहतर अनुभव मिल सके। यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि युवाओं के विचार, नवाचार और नेतृत्व क्षमता को सामने लाने का एक बड़ा मंच माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होगा, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर करीब 12 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचकर युवाओं से संवाद करेंगे। इस दौरान वे विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे। आयोजन में शिक्षा, कौशल विकास, स्टार्टअप, एमएसएमई, खेल, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, पर्यटन, संस्कृति और जनभागीदारी जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े युवा शामिल होंगे। पूरे दिन अलग-अलग विषयों पर संवाद सत्र और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें प्रतिभागी अपने अनुभव, सुझाव और नए विचार साझा करेंगे। आयोजकों के अनुसार कॉन्क्लेव की सबसे बड़ी विशेषता पांच समानांतर विषयगत कार्यशालाएं होंगी। इन कार्यशालाओं में युवा केवल चर्चा ही नहीं करेंगे, बल्कि व्यवहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझाव भी तैयार करेंगे। इन सुझावों को संकलित कर प्रदेश के युवाओं का सामूहिक ‘युवा संकल्प’ दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसे भविष्य में विकास की योजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को केवल श्रोता बनाना नहीं, बल्कि उन्हें विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना है। इसी सोच के साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और युवा उद्यमी भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे, जो प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉन्क्लेव में केवल संवाद और कार्यशालाएं ही नहीं, बल्कि कई प्रेरणादायी और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम की शुरुआत मोटर साइकिल और साइकिल रैली से होगी, जिसमें बड़ी संख्या में युवा भाग लेंगे। इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, म्यूजिक स्टेज, संवादात्मक सत्र और इंदौरी फूड स्ट्रीट भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहेंगे। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित होती है और उन्हें समाज तथा प्रदेश के विकास में योगदान देने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के समापन पर सभी पांच हजार युवा एक साथ विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का सामूहिक संकल्प लेंगे। यह संकल्प केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के भविष्य को लेकर युवाओं की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाएगा। राज्य सरकार का भी मानना है कि विकसित मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब युवाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ेगी और उनके सुझावों को योजनाओं में स्थान मिलेगा। यही वजह है कि इस कॉन्क्लेव को केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं और शासन के बीच संवाद का प्रभावी मंच माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में कारोबार को नई उड़ान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रिपरिषद ने विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा विधेयक के प्रारूप को दी स्वीकृति, निवेशकों को मिलेगी आसान प्रक्रिया, उद्योगों और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/new-udaan-for-business-in-chhattisgarh-ease-of-doing-business/article-58383"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-ease-of-doing-business-bill-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में निवेश, उद्योग और कारोबार को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां कारोबार को आसान बनाने के लिए इस तरह का व्यापक और आधुनिक विधेयक लागू होगा। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाना है, जिससे निवेशकों को बेहतर कारोबारी माहौल मिल सके। सरकार का मानना है कि किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में उद्योग और निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया आसान होगी, तो घरेलू और बाहरी निवेशक राज्य में निवेश करने के लिए अधिक उत्साहित होंगे। इसी सोच के साथ तैयार किए गए इस विधेयक में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे उद्योग लगाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होगी और सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय भी कम होगा। विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य अनावश्यक नियमों और जटिल प्रक्रियाओं को कम करना है। कई बार उद्योग स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेने में लंबा समय लग जाता है। इससे निवेशक परेशान होते हैं और कई परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं। नए कानून के लागू होने के बाद ऐसी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा ताकि कारोबार शुरू करने में अनावश्यक बाधाएं न आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस विधेयक में डीम्ड परमिशन की व्यवस्था भी शामिल की है। इसका अर्थ यह है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो कुछ मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने की समस्या कम होगी और उद्योगों को समय पर मंजूरी मिलने का रास्ता आसान होगा। विधेयक में स्व-प्रमाणीकरण (Self Certification) और तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third Party Verification) जैसे आधुनिक प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य उद्योगों पर अनावश्यक निरीक्षण और कागजी औपचारिकताओं का बोझ कम करना है। इससे उद्योगों को नियमों का पालन करते हुए भी अधिक सुविधा मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।इसके अलावा, जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली (Risk-Based Inspection) को भी लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत हर उद्योग का बार-बार निरीक्षण करने के बजाय केवल जोखिम के आधार पर जांच की जाएगी। इससे ईमानदारी से काम करने वाले उद्योगों को अनावश्यक निरीक्षण से राहत मिलेगी, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर प्रभावी निगरानी बनी रहेगी। सरकार ने विधेयक में दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने का भी प्रावधान किया है। कई मामलों में एक ही कार्य के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी जटिलताओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में माइक्रो ब्रुअरी को मंजूरी, अब मिलेगा फ्रेश क्राफ्ट बीयर का नया विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी नीति लागू की, 10 लाख रुपये सालाना लाइसेंस फीस तय, 4 हजार वर्गफीट परिसर अनिवार्य, होटल और पर्यटन उद्योग को मिलने की उम्मीद नई रफ्तार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/micro-brewery-gets-approval-in-chhattisgarh-now-new-option-of/article-57134"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-microbrewery.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में बीयर पसंद करने वालों के लिए अब नया विकल्प उपलब्ध होने जा रहा है। राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने की अनुमति दे दी है, जिसके बाद प्रदेश में पहली बार अलग-अलग फ्लेवर वाली ताजा यानी क्राफ्ट बीयर का उत्पादन और परोसने का रास्ता खुल गया है। नई आबकारी नीति के तहत इच्छुक कारोबारी तय नियमों का पालन करते हुए लाइसेंस लेकर माइक्रो ब्रुअरी शुरू कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे न केवल उपभोक्ताओं को नया अनुभव मिलेगा बल्कि होटल, रेस्तरां और पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब तक छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर तैयार होने वाली सामान्य बीयर ही उपलब्ध थी, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद सीमित मात्रा में तैयार होने वाली फ्रेश क्राफ्ट बीयर भी लोगों को मिल सकेगी। माइक्रो ब्रुअरी में बीयर का उत्पादन छोटे बैच में किया जाता है और इसे उसी परिसर में स्थित रेस्तरां या ब्रूपब में ग्राहकों को परोसा जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ताजा स्वाद और अलग-अलग फ्लेवर होते हैं। यही वजह है कि देश के कई बड़े शहरों में क्राफ्ट बीयर की मांग लगातार बढ़ रही है। राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी के संचालन के लिए स्पष्ट नियम भी तय किए हैं। नई नीति के अनुसार माइक्रो ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का कुल क्षेत्रफल कम से कम चार हजार वर्गफीट होना चाहिए। इसके अलावा भवन में फायर सेफ्टी, मशीनों की सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है ताकि संचालन पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से हो सके।सरकार ने सालाना लाइसेंस फीस 10 लाख रुपये निर्धारित की है। पहले यह राशि 25 लाख रुपये थी, जिसे कम करके कारोबारियों को राहत दी गई है। हालांकि लाइसेंस लेने के समय कुल फीस का 25 प्रतिशत सुरक्षा राशि के रूप में जमा कराना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि लाइसेंस फीस कम होने से अधिक निवेशक इस क्षेत्र में आगे आएंगे और आतिथ्य उद्योग में नए अवसर पैदा होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई नीति के तहत प्रत्येक माइक्रो ब्रुअरी प्रतिदिन अधिकतम एक हजार बल्क लीटर क्राफ्ट बीयर का उत्पादन कर सकेगी। सालभर में कुल उत्पादन की सीमा तीन लाख पैंसठ हजार बल्क लीटर तय की गई है। सरकार ने उत्पादन और बिक्री दोनों पर निगरानी रखने की व्यवस्था भी बनाई है। आबकारी विभाग नियमित रूप से रिकॉर्ड की जांच करेगा और टैक्स भुगतान की निगरानी भी करेगा। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और अवैध उत्पादन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। क्राफ्ट बीयर सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से कई मायनों में अलग होती है। इसे छोटे बैच में तैयार किया जाता है, जिससे स्वाद और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। इसमें बेहतर गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि इसका स्वाद अधिक ताजा और अलग महसूस होता है। इसमें व्हीट, फ्रूट, चॉकलेट, कॉफी, एप्पल, मैंगो और कई अन्य फ्लेवर भी तैयार किए जा सकते हैं, जो युवाओं और पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। माइक्रो ब्रुअरी केवल बीयर बेचने का कारोबार नहीं है बल्कि यह पर्यटन और फूड इंडस्ट्री से भी जुड़ा हुआ मॉडल है। देश के बेंगलुरु, गोवा, पुणे, गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे शहरों में माइक्रो ब्रुअरी लंबे समय से सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। खासकर बेंगलुरु को देश की क्राफ्ट बीयर कैपिटल माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है, जिससे राज्य की पर्यटन पहचान को भी नया आयाम मिल सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नई नीति से होटल और रेस्तरां उद्योग में निवेश बढ़ेगा। बड़े शहरों में थीम आधारित रेस्टोरेंट और ब्रूपब विकसित होने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। प्रशिक्षित ब्रूमास्टर, तकनीकी कर्मचारी, सर्विस स्टाफ और होटल प्रबंधन से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं। इसके अलावा सरकार को लाइसेंस फीस और उत्पाद शुल्क के रूप में अतिरिक्त आय भी प्राप्त होगी। सरकार ने क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क तय किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत लगभग 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि वास्तविक कीमत होटल या रेस्तरां की श्रेणी, स्थान और उपलब्ध फ्लेवर के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। नई नीति लागू होने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य में पहली माइक्रो ब्रुअरी कब शुरू होती है और निवेशकों की इसमें कितनी रुचि रहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:36:56 +0530</pubDate>
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