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                <title>Religion - दैनिक जागरण</title>
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                            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया, बोले- SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद दूंगा हर सवाल का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीरामचरितमानस की चौपाई साझा कर तोड़ी चुप्पी, पत्र जारी कर कहा- मौन इसलिए हूं क्योंकि जांच पूरी होने का इंतजार है; ट्रस्ट और SIT की कार्रवाई जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/champat-rais-first-reaction-on-the-ram-temple-offering-controversy/article-58124"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रीरामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई साझा करते हुए संकेत दिया कि कठिन समय में धैर्य और सत्य की परीक्षा होती है। इसके साथ ही उन्होंने रामभक्तों के नाम एक हस्तलिखित पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी भी आरोप का जवाब नहीं देंगे और विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। चंपत राय ने अपने संदेश में लिखा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, लेकिन उन्होंने जांच की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए मौन रहने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद उससे जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक हो गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा और सच्चाई सभी के सामने होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1991 में उन्हें संगठन की ओर से अयोध्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और तब से लेकर अब तक का उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा संगठन और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया है। इधर, चढ़ावा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अब जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी अब राम मंदिर से जुड़े प्रमुख आयोजनों में हुए खर्च का भी परीक्षण कर रही है। विशेष रूप से 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह और नवंबर 2025 में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित बिल, भुगतान और वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। जांच एजेंसियां इन खर्चों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं ताकि वित्तीय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी प्रकार की अंतिम टिप्पणी या निष्कर्ष सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार चंपत राय का इस कथित मामले से कोई व्यक्तिगत या चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ चूक हुई होगी, जिसका फायदा कुछ लोगों ने उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्रस्ट में नए महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन दास ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। ट्रस्ट प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह जारी रहेगी और आवश्यक प्रशासनिक सुधार भी किए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड भी मिली है। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी चंपत राय को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। संगठन का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप जांच में सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसी कारण चंपत राय संगठन में अपनी वर्तमान जिम्मेदारी पर बने रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमरनाथ यात्रा 2026 शुरू: जम्मू और पहलगाम से पहला जत्था बाबा बर्फानी के दर्शन को रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जम्मू और पहलगाम के नुनवान बेस कैंप से अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था पवित्र गुफा के लिए रवाना हुआ। 57 दिनों तक चलने वाली यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4743bba9a6c/article-57751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/amarnath-yatra-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में शामिल श्री अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ शुक्रवार को श्रद्धा, उत्साह और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हुआ। जम्मू और पहलगाम के नुनवान बेस कैंप से श्रद्धालुओं का पहला जत्था बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए रवाना हुआ। इसके साथ ही 57 दिनों तक चलने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई। यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा वातावरण "हर-हर महादेव", "बम-बम भोले" और "चलो बुलावा आया है, बाबा बर्फानी ने बुलाया है" के जयघोष से गूंज उठा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जम्मू से रवाना हुए पहले जत्थे को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस जत्थे में 4,800 से अधिक श्रद्धालु शामिल थे। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में सभी श्रद्धालुओं को वाहनों के काफिले के साथ कश्मीर घाटी तक पहुंचाया गया। घाटी में प्रवेश के बाद विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रशासन की ओर से फूल-मालाओं और पारंपरिक स्वागत के साथ यात्रियों का अभिनंदन किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहलगाम के नुनवान बेस कैंप और बालटाल बेस कैंप से शुक्रवार सुबह श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा की ओर अपनी पैदल यात्रा शुरू की। दोनों मार्गों पर प्रशासन ने चिकित्सा, सुरक्षा, संचार, भोजन और ठहरने की व्यापक व्यवस्था की है। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर, विश्राम केंद्र और आपातकालीन सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। यात्रा शुरू होने से पहले पहलगाम क्षेत्र में कुछ समय के लिए भारी बारिश हुई, जिसके कारण सुरक्षा के मद्देनजर पहलगाम मार्ग पर यात्रियों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई। मौसम में सुधार होने और मार्ग की स्थिति सामान्य होने के बाद प्रशासन ने यात्रा दोबारा शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की व्यापक तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन निगरानी और आधुनिक संचार प्रणाली के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए हैं ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके। यात्रा के नोडल अधिकारी राहुल यादव ने बताया कि जिला प्रशासन ने बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सुविधाओं, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, आपातकालीन सेवाओं और यातायात प्रबंधन के लिए अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रशासन लगातार यात्रा मार्ग की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पारंपरिक धार्मिक वेशभूषा में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुए। कई श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग भी यात्रा में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने कहा कि वर्षों से बाबा बर्फानी के दर्शन की इच्छा थी और इस बार यात्रा शुरू होते ही उन्हें पवित्र गुफा जाने का अवसर मिला है। उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमरनाथ यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी गुफा में माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यही कारण है कि इस यात्रा को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रशासन ने यात्रियों से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी जांच पूरी करने, मौसम के अनुसार आवश्यक सामान साथ रखने और प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। यात्रा मार्ग पर चिकित्सा दल, बचाव दल और आपदा प्रबंधन की टीमें भी लगातार तैनात हैं। इस वर्ष यात्रा अवधि 57 दिनों की निर्धारित की गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि पूरे यात्रा काल में लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आवास, भोजन, चिकित्सा और परिवहन की व्यवस्थाओं को पहले की तुलना में और मजबूत किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां भी पूरे यात्रा मार्ग पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:25:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बागेश्वर धाम पहुंचे अनंत अंबानी, बालाजी की पूजा और यज्ञ में हुए शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[बागेश्वर धाम पहुंचे उद्योगपति अनंत अंबानी ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ बालाजी के दर्शन किए, महाआरती में शामिल हुए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ-हवन में आहुतियां अर्पित कर देश, धर्म और जनकल्याण की कामना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/anant-ambani-reached-bageshwar-dham-and-participated-in-the-worship/article-57739"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bageshwar-dham.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के प्रमुख उद्योगपति अनंत अंबानी गुरुवार शाम विशेष विमान से मध्य प्रदेश के खजुराहो पहुंचे, जहां उनका स्वागत बागेश्वर धाम सेवा समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने किया। स्वागत के दौरान खजुराहो सांसद एवं पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी मौजूद रहे। एयरपोर्ट से अनंत अंबानी सीधे बागेश्वर धाम रवाना हुए। उनके आगमन की सूचना पहले से होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम परिसर में मौजूद रहे और उन्होंने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। बागेश्वर धाम पहुंचने के बाद अनंत अंबानी की मुलाकात कथा वाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से हुई। दोनों ने एक-दूसरे का आत्मीय भाव से अभिवादन किया। इस दौरान फोटो सेशन के दौरान एक रोचक पल देखने को मिला, जब अनंत अंबानी ने मुस्कुराते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का हाथ पकड़कर अपने पास खींच लिया और सहज अंदाज में कहा, "आपने आने के लिए कहा था, तो मैं आ गया।" वहां मौजूद लोगों ने इस पल का स्वागत तालियों के साथ किया। दोनों के बीच हुई यह आत्मीय बातचीत चर्चा का विषय बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अनंत अंबानी को बागेश्वर बालाजी भगवान, सन्यासी बाबा और प्रेतराज सरकार के दर्शन कराए। दर्शन के दौरान उन्होंने धाम की धार्मिक परंपराओं, आध्यात्मिक महत्व और यहां की मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अनंत अंबानी ने मंदिर परिसर में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और भगवान से देश की समृद्धि, समाज के कल्याण तथा सभी नागरिकों के सुख-शांति की प्रार्थना की। मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दर्शन के बाद अनंत अंबानी और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्री बागेश्वर बालाजी भगवान की महाआरती में भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच आयोजित महाआरती में दोनों ने पूरे श्रद्धाभाव से पूजा की। मंदिर परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने भी आरती में भाग लेकर धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। आरती के दौरान देश, धर्म, समाज और मानव कल्याण की मंगलकामना की गई। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालु जयकारों के साथ पूजा-अर्चना में शामिल हुए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाआरती के बाद दोनों धाम परिसर स्थित यज्ञशाला पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ-हवन का आयोजन चल रहा था। अनंत अंबानी ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं और वैदिक परंपराओं का पालन करते हुए धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस अनुष्ठान के दौरान विशेष मंत्रों का उच्चारण किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यज्ञ को सकारात्मक ऊर्जा, लोककल्याण और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यज्ञ संपन्न होने के बाद अनंत अंबानी ने धाम में 11 कन्याओं का विधिवत पूजन किया। उन्होंने सभी कन्याओं को दक्षिणा भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही काशी से आए विद्वान ब्राह्मणों का सम्मान किया और उनसे शुभाशीष लिया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे शुभ कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस अवसर पर मौजूद श्रद्धालुओं ने भी इस धार्मिक आयोजन को श्रद्धा और आस्था के साथ देखा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अनंत अंबानी और पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बीच पहले भी कई बार मुलाकातें हो चुकी हैं। दोनों के बीच लंबे समय से आत्मीय संबंध रहे हैं, जिसकी झलक विभिन्न धार्मिक आयोजनों में देखने को मिलती रही है। अनंत अंबानी समय-समय पर बागेश्वर धाम की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सहयोग भी करते रहे हैं। विशेष रूप से धाम में 24 घंटे संचालित होने वाली 'अन्नपूर्णा रसोई' (भंडारा) में उनके सहयोग का उल्लेख कई अवसरों पर किया गया है। यही कारण है कि धाम में उनके आगमन को केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि लंबे समय से जुड़े धार्मिक संबंधों की निरंतरता के रूप में भी देखा जा रहा है। अनंत अंबानी की इस यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और यातायात की निगरानी की। दर्शन, महाआरती, यज्ञ-हवन और कन्या पूजन जैसे सभी कार्यक्रम निर्धारित समय के अनुसार आयोजित किए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 09:58:02 +0530</pubDate>
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                <title>सलकनपुर देवी धाम के प्रबंधन पर विक्रम मस्ताल के सवाल, दान राशि की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता और अभिनेता विक्रम मस्ताल ने मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग उठाई, दान राशि और सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vikram-mastal-questions-on-the-management-of-salkanpur-devi-dham/article-57407"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/salkanpur-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सीहोर जिले के प्रसिद्ध सलकनपुर विजयासन देवी धाम के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। बुधनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी और अभिनेता विक्रम शर्मा मस्ताल ने मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और दान राशि के उपयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर दावा किया कि मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि उनके आरोपों पर मंदिर प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। विक्रम शर्मा मस्ताल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में धार्मिक संस्थानों से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने सलकनपुर देवी धाम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यहां भी दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल लंबे समय से उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी धार्मिक संस्था में जनता की आस्था से जुड़ा धन आता है तो उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है। उन्होंने मंदिर में पहले हुई चोरी की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि मंदिर जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर बड़ी चोरी होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में आखिर कहां चूक हुई और चोरी के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चोरी में कितनी राशि या सामग्री का नुकसान हुआ और इस संबंध में जनता को अब तक स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। विक्रम मस्ताल ने कहा कि सलकनपुर देवी धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में नकद दान, आभूषण और अन्य भेंट अर्पित करते हैं। उनका कहना है कि यह धन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। इसलिए मंदिर की वार्षिक आय, व्यय और विकास कार्यों पर खर्च की जाने वाली राशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने मंदिर प्रबंधन समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि लंबे समय से मंदिर के संचालन और प्रबंधन में सीमित लोगों का प्रभाव बना हुआ है और इसमें व्यापक पारदर्शिता दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों का संचालन नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की शंका की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिए जाएं तो विवाद अपने आप समाप्त हो सकते हैं। अपने बयान में विक्रम मस्ताल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने मांग की कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, दान राशि के उपयोग और प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से अनुरोध किया कि मंदिर की वार्षिक आय और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। सलकनपुर देवी धाम प्रदेश का प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंधन को लेकर उठने वाले किसी भी सवाल का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से आरोप लगाए जाते हैं तो उनकी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। विक्रम मस्ताल ने जिन बिंदुओं को उठाया है, उनकी पुष्टि किसी जांच एजेंसी या सक्षम प्राधिकरण द्वारा नहीं की गई है। दूसरी ओर, मंदिर प्रबंधन की ओर से भी अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:16:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर विवाद पर बोले धीरेंद्र शास्त्री, कहा- कुकृत्य करने वालों को महादंड मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल दौरे पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने राम मंदिर से जुड़े विवाद, धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और सामाजिक सौहार्द पर अपनी प्रतिक्रिया दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/dhirendra-shastri-spoke-on-ram-temple-controversy-and-said/article-57401"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dhirendra-krishna-shastri.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल दौरे पर पहुंचे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस घटना ने करोड़ों रामभक्तों की आस्था को आहत किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता और गरिमा बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति भगवान के धाम में रहकर अनुचित कार्य करता है तो उसे उसके कर्मों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि धर्मस्थलों की मर्यादा का उल्लंघन केवल एक संस्थान का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज के विश्वास का विषय है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि धार्मिक परंपराओं में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अधर्म और अन्याय का अंत निश्चित होता है। उन्होंने धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि रावण ने माता सीता का हरण किया था और अंत में उसे अपने कर्मों का फल मिला। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि जो भी व्यक्ति धर्मस्थलों की पवित्रता को भंग करेगा, उसे भी अपने कर्मों का परिणाम अवश्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल कानूनी विषय नहीं बल्कि आस्था और नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ा मामला भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थानों के संचालन की जिम्मेदारी ऐसे लोगों के हाथों में होनी चाहिए जो सनातन परंपराओं, धार्मिक मूल्यों और सेवा भावना के प्रति पूरी निष्ठा रखते हों। उनके अनुसार धार्मिक संस्थानों की गरिमा तभी सुरक्षित रह सकती है जब उनका प्रबंधन पारदर्शी, जिम्मेदार और धर्म के प्रति समर्पित लोगों के हाथों में हो। उन्होंने कहा कि समाज को भी इस दिशा में जागरूक रहना चाहिए ताकि धार्मिक स्थलों की प्रतिष्ठा बनी रहे। अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत के मुसलमानों के संदर्भ में इंडोनेशिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में अलग-अलग धार्मिक समुदाय अपनी-अपनी आस्था का पालन करने के साथ-साथ एक-दूसरे के त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं का भी सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो नियमित रूप से नमाज अदा करते हैं और साथ ही दिवाली जैसे भारतीय सांस्कृतिक पर्वों में भी भाग लेते हैं। उन्होंने इस उदाहरण के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, पारस्परिक सम्मान और सांस्कृतिक सहभागिता का संदेश देने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उनके इस बयान के बाद विभिन्न स्तरों पर चर्चा भी शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे सामाजिक सौहार्द का संदेश बताया, जबकि कई लोगों ने इसे अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा। हालांकि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि समाज में आपसी सम्मान, संवाद और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसके सांस्कृतिक मूल्यों और पारस्परिक विश्वास से तय होती है। भोपाल दौरे के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कैंसर हीलर सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में भी शामिल होने वाले हैं। हबीबगंज क्षेत्र में स्थापित इस सेंटर का उद्देश्य कैंसर मरीजों को एक ही स्थान पर आधुनिक जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सेंटर के निदेशक डॉ. तरंग कृष्ण ने बताया कि संस्थान में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के साथ कैंसर की जांच और उपचार की सुविधाएं विकसित की गई हैं। उनका कहना है कि समय पर जांच और उचित इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस सेंटर का उद्देश्य भोपाल के साथ-साथ आसपास के जिलों के मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें उपचार के लिए बड़े महानगरों का रुख न करना पड़े। उद्घाटन समारोह के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे। इसके बाद चिकित्सा विशेषज्ञ सेंटर की कार्यप्रणाली, उपलब्ध सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। आयोजन में कैंसर के प्रति जागरूकता, समय पर जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था पर भी विशेष चर्चा प्रस्तावित है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:59:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले पर मुकेश खन्ना का गुस्सा, बोले- भगवान को भी लूट रहे हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेता ने चढ़ावा घोटाले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नकद और गहनों का चढ़ावा बंद करने की अपील की, मामले में अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/mukesh-khannas-anger-on-ram-temple-offering-issue-says/article-57142"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mukesh-khanna.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में सामने आए कथित चढ़ावा अनियमितता मामले को लेकर वरिष्ठ अभिनेता मुकेश खन्ना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए मंदिरों में चढ़ावे की व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि जो लोग भगवान के नाम पर चढ़ाए गए धन में गड़बड़ी करते हैं, वे साधारण चोर या बेईमान नहीं, बल्कि उनसे भी बड़े अपराधी हैं। अभिनेता ने श्रद्धालुओं से अपील की कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी नहीं हो जाती, तब तक मंदिरों में नकद राशि और गहनों का चढ़ावा देने से बचना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। मुकेश खन्ना ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली नकद राशि हमेशा भगवान तक नहीं पहुंचती और बीच में ही उसका दुरुपयोग हो जाता है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि समाज में पहले भी चोर, डाकू और बेईमान लोगों की चर्चा होती रही है, लेकिन मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी करने वाले लोग उनसे भी आगे हैं क्योंकि वे केवल भक्तों का ही नहीं बल्कि भगवान के नाम पर दिए गए विश्वास का भी नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि यदि चढ़ावा ही नहीं चढ़ेगा तो ऐसे घोटालों की संभावना भी खत्म हो जाएगी। अभिनेता ने विशेष रूप से लोगों से अपील की कि मंदिरों में नकद धनराशि और कीमती गहने चढ़ाने के बजाय अन्य माध्यमों से धार्मिक कार्यों में सहयोग करें। उनका कहना था कि भगवान आस्था से प्रसन्न होते हैं, धन से नहीं। उन्होंने अपने संदेश में एक कहावत का उल्लेख करते हुए लिखा कि यदि चढ़ावा ही नहीं होगा तो घोटाले की गुंजाइश भी समाप्त हो जाएगी। यह बयान सामने आने के बाद उनके समर्थकों और अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच इस विषय पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पूरा मामला 7 जून को सामने आया था, जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। शुरुआती जांच में दान, चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़े कुछ मामलों में अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई। इसके आधार पर आगे की जांच शुरू की गई और संबंधित दस्तावेजों व रिकॉर्ड की भी जांच की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। इसी घटनाक्रम के बीच मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ बड़े प्रशासनिक बदलाव भी देखने को मिले। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। मंदिर निर्माण से जुड़े प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर की व्यवस्थाओं से अलग कर दिया गया है। हालांकि इन बदलावों के पीछे आधिकारिक तौर पर क्या कारण रहे, इस पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।मामले के सामने आने के बाद देशभर में मंदिरों के दान प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी एक मामले के आधार पर सभी धार्मिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा और जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।चूंकि मामला जांच के दायरे में है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस और जांच एजेंसियां अपने स्तर पर साक्ष्य जुटाने में लगी हैं। यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो आरोपियों की संख्या या धाराओं में बदलाव भी संभव है। वहीं जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उन्हें कानून के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है। मुकेश खन्ना के बयान ने इस पूरे मामले को एक नई चर्चा दे दी है। एक ओर लोग उनके बयान को आस्था और पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे व्यक्तिगत राय मान रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 16:08:29 +0530</pubDate>
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