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                <title>Mohan Yadav - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Mohan Yadav RSS Feed</description>
                
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                <title>इंदौर में आज होगा ‘माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026’, 5 हजार युवा लेंगे विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। शिक्षा, स्टार्टअप, कौशल, खेल और नवाचार जैसे विषयों पर युवाओं से सीधा संवाद होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/my-youth-my-pride-conclave-2026-will-be-held-in-indore/article-58473"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/my-youth-my-pride-conclave.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंदौर आज प्रदेशभर के हजारों युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और नए विचारों का साक्षी बनने जा रहा है। शहर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में<strong> </strong>‘माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब पांच हजार युवा भाग लेंगे। ‘वन स्टेट, वन जनरेशन, वन संकल्प’ थीम पर आधारित इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को प्रदेश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके विचारों को नीति निर्माण की दिशा में स्थान देना है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से शामिल होंगे और युवाओं को संबोधित करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सुबह से ही प्रतिभागियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है। प्रशासन और आयोजकों ने कार्यक्रम को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं ताकि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले युवाओं को बेहतर अनुभव मिल सके। यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि युवाओं के विचार, नवाचार और नेतृत्व क्षमता को सामने लाने का एक बड़ा मंच माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होगा, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर करीब 12 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचकर युवाओं से संवाद करेंगे। इस दौरान वे विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे। आयोजन में शिक्षा, कौशल विकास, स्टार्टअप, एमएसएमई, खेल, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, पर्यटन, संस्कृति और जनभागीदारी जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े युवा शामिल होंगे। पूरे दिन अलग-अलग विषयों पर संवाद सत्र और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें प्रतिभागी अपने अनुभव, सुझाव और नए विचार साझा करेंगे। आयोजकों के अनुसार कॉन्क्लेव की सबसे बड़ी विशेषता पांच समानांतर विषयगत कार्यशालाएं होंगी। इन कार्यशालाओं में युवा केवल चर्चा ही नहीं करेंगे, बल्कि व्यवहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझाव भी तैयार करेंगे। इन सुझावों को संकलित कर प्रदेश के युवाओं का सामूहिक ‘युवा संकल्प’ दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसे भविष्य में विकास की योजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को केवल श्रोता बनाना नहीं, बल्कि उन्हें विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना है। इसी सोच के साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और युवा उद्यमी भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे, जो प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉन्क्लेव में केवल संवाद और कार्यशालाएं ही नहीं, बल्कि कई प्रेरणादायी और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम की शुरुआत मोटर साइकिल और साइकिल रैली से होगी, जिसमें बड़ी संख्या में युवा भाग लेंगे। इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, म्यूजिक स्टेज, संवादात्मक सत्र और इंदौरी फूड स्ट्रीट भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहेंगे। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित होती है और उन्हें समाज तथा प्रदेश के विकास में योगदान देने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के समापन पर सभी पांच हजार युवा एक साथ विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का सामूहिक संकल्प लेंगे। यह संकल्प केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के भविष्य को लेकर युवाओं की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाएगा। राज्य सरकार का भी मानना है कि विकसित मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब युवाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ेगी और उनके सुझावों को योजनाओं में स्थान मिलेगा। यही वजह है कि इस कॉन्क्लेव को केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं और शासन के बीच संवाद का प्रभावी मंच माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई को लहार दौरे पर, लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त करेंगे जारी</title>
                                    <description><![CDATA[भिण्ड जिले के लहार में आयोजित कार्यक्रम से मुख्यमंत्री लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करेंगे। साथ ही भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा की माताजी के निधन पर उनके निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/chief-minister-dr-mohan-yadav-will-release-the-38th-installment/article-58452"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई को भिण्ड जिले के लहार के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे प्रदेश की महत्वाकांक्षी <strong>लाड़ली बहना योजना</strong> की 38वीं किस्त की राशि प्रदेशभर की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से हस्तांतरित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और लाभार्थी महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री लहार पहुंचने के बाद भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा (गुड्डू) के निवास भी जाएंगे, जहां वे उनकी माताजी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा पहले मेहगांव में प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम में बदलाव कर इसे लहार स्थानांतरित कर दिया गया। गुरुवार देर रात इस बदलाव की आधिकारिक जानकारी सामने आई, जिसके बाद प्रशासन ने नई व्यवस्थाओं के अनुसार तैयारियां तेज कर दीं।</p>
<p>मुख्यमंत्री का कार्यक्रम दोपहर करीब 1 बजे शुरू होगा और वे लगभग दो घंटे तक लहार में रहेंगे। इस दौरान उनका सार्वजनिक कार्यक्रम दोपहर 3 बजे तक प्रस्तावित है। गुरुवार शाम तक कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। प्रशासन की ओर से बारिश की संभावना को देखते हुए ऐसे स्थान की तलाश की जा रही थी, जहां बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के बावजूद आयोजन सुचारु रूप से कराया जा सके। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम के लिए पक्के और सुरक्षित स्थल को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, मंच व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इससे पहले जब कार्यक्रम मेहगांव में प्रस्तावित था, तब भी संबंधित अधिकारियों ने मंडी परिसर का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए थे। अब कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद पूरी तैयारियों को नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है।</p>
<p>लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। इस योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिलती है। योजना की प्रत्येक किस्त का लाभ प्रदेश की लाखों महिलाओं को मिलता है और लाभार्थी हर माह निर्धारित तिथि का इंतजार करती हैं। 12 जुलाई को जारी होने वाली 38वीं किस्त भी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ऑनलाइन हस्तांतरित की जाएगी। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और परिवार में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान योजना से जुड़ी अन्य जानकारियां भी साझा की जा सकती हैं। वहीं, मुख्यमंत्री का भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा के निवास पहुंचकर उनकी माताजी को श्रद्धांजलि देना भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। हाल ही में विधायक की माताजी का निधन हुआ था, जिसके बाद मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से शोक व्यक्त करने के लिए उनके निवास जाने वाले हैं। मुख्यमंत्री के लहार आगमन की सूचना मिलते ही विधायक अम्बरीश शर्मा ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपते हुए कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने के निर्देश दिए। दूसरी ओर प्रशासन भी मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहीं लाभार्थी महिलाओं के लिए भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान उनके खातों में नई किस्त की राशि हस्तांतरित की जाएगी। ऐसे में 12 जुलाई का यह दौरा भिण्ड जिले के साथ-साथ प्रदेशभर की लाखों महिलाओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मालवा को विकास की नई रफ्तार, 5,017 करोड़ की उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना का होगा भूमि पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे 98.73 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड फोरलेन का शुभारंभ, 35 लाख लोगों और 62 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी मिलेगी मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-pace-of-development-for-malwa-bhoomi-pujan-of-5017/article-58373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-jaora-greenfield-fourlane.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में आधारभूत संरचना के विकास को नई गति देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को 5,017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क परियोजना का भूमि पूजन करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद मालवा क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। साथ ही व्यापार, उद्योग, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को भी इसका व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। करीब 98.73 किलोमीटर लंबी यह आधुनिक फोरलेन सड़क उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगी। इससे प्रदेश के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मालवा क्षेत्र के आर्थिक विकास और निवेश को नई दिशा देने वाली आधारभूत परियोजना साबित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सड़क का निर्माण मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा किया जाएगा। परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए दो वर्ष का लक्ष्य तय किया गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। सड़क के दोनों ओर आधुनिक यातायात सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे भविष्य की बढ़ती ट्रैफिक जरूरतों को भी आसानी से पूरा किया जा सके। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना उज्जैन दक्षिण, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट और जावरा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसके दायरे में आने वाले लगभग 62 गांवों के लोगों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध होगी। अनुमान है कि करीब 35 लाख नागरिक इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना को प्रदेश के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सड़क सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और तेज यातायात सुविधा उपलब्ध होगी। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी और उज्जैन की पहुंच पहले से अधिक आसान हो जाएगी। परियोजना के अंतर्गत केवल फोरलेन सड़क का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग सुविधाओं का भी समावेश होगा। इसमें तीन रेल ओवरब्रिज, नौ बड़े पुल, 26 मध्यम पुल तथा 417 पुलियों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा जावरा बायपास पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे इंटरचेंज से महू-नीमच फोरलेन तक दोनों ओर सर्विस रोड विकसित की जाएगी। इससे स्थानीय यातायात और लंबी दूरी के वाहनों की आवाजाही अलग-अलग सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नई सड़क बनने से किसानों को सबसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने में समय कम लगेगा और परिवहन लागत में भी कमी आएगी। बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके साथ ही डेयरी, बागवानी और कृषि आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और नए उद्योगों के लिए निवेश का वातावरण मजबूत होगा। मालवा क्षेत्र पहले से ही कृषि, उद्योग और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। आधुनिक परिवहन सुविधाओं के जुड़ने से यहां औद्योगिक गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बाजार तक आसान पहुंच मिलने से प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।पर्यटन क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। उज्जैन विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। सड़क संपर्क बेहतर होने से महाकाल लोक, श्री महाकालेश्वर मंदिर और आसपास के अन्य धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा। इससे होटल, परिवहन, पर्यटन सेवाओं और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:29:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नर्मदा जल विवाद पर तीन दशक बाद समझौता, मप्र का 7,669 करोड़ का दावा खारिज; अब गुजरात को देगा 550 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में चार राज्यों के बीच वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर, सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वित्तीय विवाद का हुआ समाधान; केंद्र की मौजूदगी में बनी सहमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/agreement-on-narmada-water-dispute-after-three-decades-mps-claim/article-58146"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmada-water-dispute-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">करीब तीन दशक से सरदार सरोवर परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच चला आ रहा वित्तीय विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार की मध्यस्थता में चारों राज्यों के बीच वन टाइम सेटलमेंट पर सहमति बन गई। इस समझौते के साथ ही मध्यप्रदेश का गुजरात पर किया गया 7,669 करोड़ रुपये का दावा भी समाप्त हो गया। इसके उलट अब मध्यप्रदेश गुजरात को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और राजस्थान भी गुजरात को 550-550 करोड़ रुपये देंगे। इस तरह गुजरात को तीनों भागीदार राज्यों से कुल 1,650 करोड़ रुपये मिलेंगे। लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान को नर्मदा परियोजना से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए। बैठक में परियोजना से जुड़े वित्तीय दावों और लागत के बंटवारे पर विस्तृत चर्चा के बाद सभी राज्यों ने सहमति जताई। केंद्र सरकार का कहना है कि इस समझौते से वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद का स्थायी समाधान निकल गया है और भविष्य में परियोजना से जुड़े मामलों में समन्वय बेहतर होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरदार सरोवर बांध नर्मदा नदी पर बनी देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का निर्माण गुजरात में हुआ और इसका संचालन भी गुजरात सरकार के नियंत्रण में है। हालांकि बांध बनने से सबसे अधिक भूमि मध्यप्रदेश की जलमग्न हुई। परियोजना के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि, वन क्षेत्र, सरकारी संपत्तियां और बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हुए। मध्यप्रदेश का लगातार कहना था कि उसकी सबसे अधिक जमीन डूब क्षेत्र में आने के कारण उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए। इसी आधार पर राज्य सरकार ने गुजरात पर 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था। इसमें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, वन भूमि, सरकारी परिसंपत्तियों और अन्य मदों का खर्च शामिल किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर गुजरात का तर्क था कि सरदार सरोवर परियोजना की लागत समय के साथ काफी बढ़ गई थी और निर्माण में आए अतिरिक्त खर्च में भागीदार राज्यों को भी हिस्सा देना चाहिए। गुजरात ने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान पर कुल 7,974.86 करोड़ रुपये की वसूली का दावा किया था। इसमें सबसे अधिक 5,516.50 करोड़ रुपये का दावा मध्यप्रदेश पर किया गया था। महाराष्ट्र पर 1,883.84 करोड़ और राजस्थान पर 574.52 करोड़ रुपये का दावा किया गया था। इसी मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच वर्षों तक सहमति नहीं बन सकी और मामला लगातार लंबित रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मध्यप्रदेश का कहना था कि सरदार सरोवर परियोजना के कारण राज्य की लगभग 55.5 प्रतिशत भूमि जलमग्न हुई। डूब क्षेत्र में बड़ी संख्या में वन, खेती की जमीन और कुल 178 गांव शामिल थे। बाद में वर्ष 2014 में बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने के निर्णय के बाद अतिरिक्त पांच हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि भी जलमग्न हो गई। इससे प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 192 तक पहुंच गई। राज्य सरकार ने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और उस समय के बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की राशि का संशोधित आकलन तैयार किया और गुजरात पर 7,669 करोड़ रुपये का दावा प्रस्तुत किया। दूसरी ओर गुजरात पुरानी दरों के आधार पर केवल 281 करोड़ रुपये देने की बात कहता रहा। इसी अंतर के कारण विवाद लगातार गहराता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र ने भी अपने नंदुरबार जिले में डूबी वन भूमि, सरकारी परिसंपत्तियों और अन्य मदों के आधार पर गुजरात से लगभग 3,000 करोड़ रुपये की मांग की थी। वहीं राजस्थान का कहना था कि उसने परियोजना में 556 करोड़ रुपये की लागत साझेदारी की थी और वह पूरे खर्च के ऑडिट तथा वित्तीय समायोजन की मांग कर रहा था। चारों राज्यों के अलग-अलग दावों के कारण वर्षों तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। कई दौर की बैठकों और तकनीकी चर्चाओं के बावजूद विवाद बना रहा। अब केंद्र सरकार की पहल पर सभी पक्षों ने वन टाइम सेटलमेंट को स्वीकार कर लिया है। समझौते के अनुसार पुराने सभी दावे और प्रतिदावे समाप्त माने जाएंगे। इसके बदले मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550-550 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। माना जा रहा है कि इससे भविष्य में परियोजना के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और राज्यों के बीच समन्वय में आसानी होगी। सरकार का कहना है कि लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाप्त होने से प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं भी कम होंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:16:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड: 45 सूत्रीय एजेंडे पर मंत्रियों से जवाब मांगेंगे सीएम मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभागवार समीक्षा बैठकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, निवेश, पर्यटन, कृषि, हवाई सेवाओं और प्रशासनिक सुधार सहित 45 बिंदुओं पर मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट लेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-will-seek-answers-from-ministers-on-45-point/article-57747"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद सरकार की प्राथमिकताओं और विभागीय कार्यों की व्यापक समीक्षा करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय ने इसके लिए 45 सूत्रीय एजेंडा तैयार कर सभी विभागों को भेज दिया है। समीक्षा बैठकों में मंत्रियों के साथ अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। प्रत्येक विभाग से अब तक हुए कार्यों का लेखा-जोखा लिया जाएगा और अगले ढाई वर्षों के लिए कार्ययोजना भी तय की जाएगी। पहले इन बैठकों का आयोजन 8 मई से प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था। अब नई तारीख जल्द जारी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि आगामी वर्षों के लिए विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करना भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री सभी विभागों के कार्यों की अलग-अलग समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विभाग से योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग, लंबित परियोजनाओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुति मांगी जाएगी। समीक्षा के दौरान समय-सीमा में काम पूरा करने और जनता से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान पर विशेष जोर रहेगा। सरकार चाहती है कि विकास योजनाओं का लाभ तय समय में लोगों तक पहुंचे और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो। इसी उद्देश्य से सभी विभागों के लिए अलग-अलग एजेंडा तैयार किया गया है। राजस्व एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा में स्वामित्व योजना प्रमुख विषय रहेगा। मुख्यमंत्री ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर निशुल्क रजिस्ट्री, प्रधानमंत्री के माध्यम से 50 लाख पट्टों के सिंगल क्लिक वितरण और नई आबादी भूमि के चिन्हांकन की प्रगति की समीक्षा करेंगे। ग्राम पंचायतों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को तेज करने और ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में भी विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद कम करना और संपत्ति के अधिकारों को स्पष्ट करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की समीक्षा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव प्रस्तावित है। सरकार राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों में विभाजित करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में नए विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव समीक्षा बैठक में प्रमुख विषय रहेगा। इसी तरह मेडिकल यूनिवर्सिटी को भी तीन भागों में विभाजित करने की योजना पर चर्चा होगी। सरकार सांदीपनि विद्यालयों के भवनों का दोपहर की पाली में महाविद्यालयों, कोचिंग सेंटर और स्किल डेवलपमेंट सेंटर के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर भी रिपोर्ट लेगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन लाने की नीति पर भी विचार किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था, सीवेज प्रबंधन और नई फायर सेफ्टी नीति समीक्षा बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। सरकार शहरी निकायों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के साथ अग्निशमन सेवाओं की एनओसी प्रक्रिया को सरल बनाने की तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग से प्रदेश में कैंसर अस्पतालों के विस्तार की कार्ययोजना मांगी जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। सरकार जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की तैयारियां अभी से शुरू कर रही है। औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग को निवेश आकर्षित करने के लिए नई रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में आईटी नॉलेज सिटी और उज्जैन में डीप टेक पार्क विकसित करने की योजना पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक उद्योगों में निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष नीतियों पर भी चर्चा होगी। सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को उभरते हुए औद्योगिक और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करना है। पर्यटन विभाग की समीक्षा में राम वन पथ गमन और कृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति प्रमुख विषय होगी। मुख्यमंत्री इन परियोजनाओं की समय-सीमा तय करने और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर विभाग से रिपोर्ट लेंगे। विमानन विभाग को उज्जैन के दताना-मताना क्षेत्र में नए हवाई अड्डे के निर्माण, भूमि अधिग्रहण और पीपीपी मॉडल पर परियोजना आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रदेश के छोटे शहरों में हवाई सेवाओं के विस्तार और एयर कनेक्टिविटी मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। समीक्षा बैठकों में वित्त विभाग से लाड़ली बहना और किसान सम्मान जैसी डीबीटी योजनाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने का मॉडल मांगा जाएगा। कृषि विभाग के साथ मंडी शुल्क में और राहत देने तथा किसानों के लिए बिजली सब्सिडी आधारित सिंचाई योजनाओं पर चर्चा होगी। सरकार अग्निवीर योजना से जुड़े युवाओं को राज्य की सरकारी भर्तियों में आरक्षण देने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगी। गृह विभाग से लंबे समय से लंबित पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन और प्रमुख मंदिरों में होमगार्ड पदों के सृजन की स्थिति पर जवाब मांगा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा जेलों और मंडियों को शहरों से बाहर स्थानांतरित करने, सार्वजनिक भूमि के पुनर्विकास, बीएचईएल भोपाल की भूमि उपयोग रणनीति, यूनियन कार्बाइड की जमीन के उपयोग, सार्वजनिक पार्कों में पीपीपी मॉडल पर खेल और मनोरंजन सुविधाएं विकसित करने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय समीक्षा केवल प्रगति रिपोर्ट लेने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि अगले ढाई वर्षों के विकास रोडमैप को अंतिम रूप देने का आधार भी बनेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, निवेश, पर्यटन, रोजगार, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधारों पर लिए जाने वाले फैसले राज्य की विकास दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:53:35 +0530</pubDate>
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                <title>'क्षिप्रा' नहीं, 'शिप्रा' कहिए: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया नदी का वास्तविक नाम</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में सिंहस्थ और नर्मदा परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी अभिलेखों और प्रस्तुतियों में नदी का मूल एवं प्रामाणिक नाम 'शिप्रा' ही लिखा जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/call-it-shipra-not-kshipra-chief-minister-mohan-yadav-told/article-57742"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cm-mohan-yadav-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में गुरुवार को आयोजित सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और नर्मदा नदी परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिप्रा नदी के नाम को लेकर अधिकारियों का ध्यान एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर आकर्षित किया। बैठक में प्रस्तुत किए गए प्रेजेंटेशन में नदी का नाम "क्षिप्रा" लिखा गया था। इसे देखते ही मुख्यमंत्री ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि नदी का वास्तविक, ऐतिहासिक और प्रामाणिक नाम "शिप्रा" है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में सभी सरकारी दस्तावेजों, प्रस्तुतियों और आधिकारिक अभिलेखों में "शिप्रा" नाम का ही उपयोग सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखने वाली नदियों के नामों को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर भी ऐतिहासिक तथ्यों और प्रामाणिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म, इंटरनेट स्रोतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणालियों में नदी का नाम "क्षिप्रा" भी दर्ज है। अधिकारियों का कहना था कि इसी आधार पर प्रस्तुतीकरण में यह नाम शामिल किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक उपयोगी है, लेकिन केवल एआई या इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि ऐतिहासिक और धार्मिक विषयों में मूल ग्रंथों और प्रामाणिक साहित्य का अध्ययन भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषय पर निर्णय लेते समय तकनीकी स्रोतों के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और प्रमाणित साहित्य का भी सहारा लिया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध संस्कृत काव्य <strong>'मेघदूतम्'</strong> तथा वैदिक ग्रंथों का अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन प्राचीन ग्रंथों में नदी का उल्लेख "शिप्रा" नाम से मिलता है, जो इसके मूल स्वरूप को प्रमाणित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है और उसकी प्रमाणिकता प्राचीन साहित्य में सुरक्षित है। इसलिए प्रशासनिक निर्णय लेते समय उन स्रोतों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सुझाव के बाद उपलब्ध स्रोतों की दोबारा समीक्षा की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित माध्यमों से दोबारा जानकारी की पुष्टि की। पुनः जांच के दौरान एआई ने भी यह स्वीकार किया कि नदी का मूल नाम "शिप्रा" ही माना जाता है और पहले प्रस्तुत जानकारी पूरी तरह सटीक नहीं थी। इस घटनाक्रम के बाद अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण में आवश्यक संशोधन करने की सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की त्रुटियों से बचने के लिए तथ्यों का बहुस्तरीय सत्यापन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि तकनीकी साधन सहायक हो सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय प्रमाणिक स्रोतों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने "शिप्रा" और "क्षिप्र" शब्दों के अर्थ भी समझाए। उन्होंने कहा कि संस्कृत में "क्षिप्र" का अर्थ होता है तेज गति से चलने वाला, जबकि "शिप्रा" का अर्थ शांत, सौम्य और संतुलित प्रवाह वाली नदी माना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिप्रा नदी अपने शांत स्वभाव और धार्मिक महत्व के कारण जानी जाती है। सामान्य परिस्थितियों में इसका प्रवाह संतुलित रहता है और यही इसकी विशेष पहचान भी है। उन्होंने कहा कि किसी नदी के नाम का संबंध केवल भाषा से नहीं बल्कि उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्वरूप से भी होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिप्रा नदी के नाम को लेकर यह पहली बार चर्चा नहीं हुई है। वर्ष 2016 के सिंहस्थ महापर्व से पहले भी "शिप्रा" और "क्षिप्रा" नामों को लेकर बहस सामने आई थी। उस समय भी विभिन्न प्रशासनिक दस्तावेजों और सार्वजनिक उपयोग में दोनों नाम देखने को मिले थे। धार्मिक विद्वानों और इतिहासकारों के बीच भी इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आए थे। हालांकि अनेक प्राचीन ग्रंथों और साहित्यिक संदर्भों में "शिप्रा" नाम का उल्लेख प्रमुख रूप से मिलता है। मुख्यमंत्री के ताजा निर्देश के बाद एक बार फिर यह विषय चर्चा में आ गया है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकारी स्तर पर एकरूपता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और नर्मदा परियोजना की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना के अनुसार सभी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आयोजन के लिए आधारभूत संरचना, यातायात, पेयजल, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी-अपनी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:53:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मध्यप्रदेश में अल्पवर्षा की आशंका पर सरकार अलर्ट, हर जिले में बनेगी जल संकट आकस्मिक योजना</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संभावित कम बारिश से निपटने के लिए सभी विभागों के साथ समीक्षा बैठक की। जल डैशबोर्ड, कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान, जल संरक्षण अभियान और किसानों के लिए वैज्ञानिक खेती पर विशेष जोर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/government-alert-on-possibility-of-short-rainfall-in-madhya-pradesh/article-57709"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जल संकट, कृषि, सिंचाई और पेयजल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तर पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए आधुनिक जल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जिससे जलाशयों, भूजल और पेयजल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। सरकार का कहना है कि समय रहते वैज्ञानिक योजना और विभागों के बेहतर समन्वय से संभावित अल्पवर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संभावित कम बारिश को केवल संकट के रूप में नहीं बल्कि बेहतर योजना और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि किसानों तक समय पर सही जानकारी और तकनीकी सलाह पहुंचाई जाए ताकि मौसम की चुनौती के बावजूद कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर न्यूनतम असर पड़े। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित कई विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकती हैं। इसके साथ ही किसानों से जल्दबाजी में बुआई नहीं करने की अपील करने के निर्देश भी दिए गए। सरकार चाहती है कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए ताकि फसलों को शुरुआती नुकसान से बचाया जा सके। बैठक में आधुनिक कृषि तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर भी बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह गांव-गांव तक पहुंचाई जाए ताकि किसान अपने क्षेत्र की जल उपलब्धता और मौसम के अनुसार उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने की योजना तैयार की गई है। साथ ही कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत बीज किस्मों के उपयोग को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जल प्रबंधन को लेकर सरकार ने कई दीर्घकालिक योजनाओं पर भी काम शुरू करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा की जाएगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा। वहीं शहरी निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 योजना के तहत लंबित जल प्रदाय परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने "जलाभिषेक 2.0" अभियान के तहत प्रदेश के पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं और अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं का सर्वे और पुनर्जीवन करने की योजना बनाई है। मनरेगा के समन्वय से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके अलावा भूजल पुनर्भरण अभियान के अंतर्गत रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में पूरा किया जाएगा। सरकार "खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में" की अवधारणा को भी व्यापक स्तर पर लागू करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदेश के सभी प्रमुख जलाशयों जैसे इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर में जल उपयोग के लिए स्पष्ट प्राथमिकता तय की जाएगी। सरकार ने पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके बाद सिंचाई और फिर जलविद्युत उत्पादन के लिए जल उपयोग किया जाएगा। साथ ही नहरों की सफाई और मरम्मत रबी सीजन से पहले पूरी करने तथा अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी। कृषि क्षेत्र के लिए प्रत्येक जिले में कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जाएगा। कम जल मांग वाली फसलों, दलहन, तिलहन और श्रीअन्न को बढ़ावा देने के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा (AWD) तकनीक को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई गई है। साथ ही डिजिटल क्रॉप सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी आधारित फसल क्षति आकलन और फसल बीमा दावों के त्वरित निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच सरकार की तैयारियों को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यदि संभावित अल्पवर्षा के संकेत पहले से मौजूद थे तो अप्रैल और मई में ही तैयारी क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है और अब समीक्षा बैठकों के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और किसानों के लिए जमीनी स्तर पर तत्काल राहत उपाय लागू करने की मांग की। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि सभी विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं और संभावित जल संकट से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अमरकंटक, धार और सांची के विकास की नई योजना, आज सीएम करेंगे समीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[संस्कृति विभाग आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने तीन बड़े सांस्कृतिक प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रूपरेखा रखेगा, सिंहस्थ 2028 से पहले धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर रहेगा फोकस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%95--%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE--%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE/article-57616"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को नए स्वरूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को संस्कृति विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने तीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की प्रारंभिक रूपरेखा पेश करेगा। इनमें अमरकंटक में नर्मदा लोक, धार में सरस्वती लोक और सांची में बिखरे पड़े पुरातात्विक अवशेषों को एक ही परिसर में संग्रहित कर एक विशाल म्यूजियम विकसित करने की योजना शामिल है। अधिकारियों के अनुसार बैठक में इन परियोजनाओं की अवधारणा, संभावित स्वरूप और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही संस्कृति विभाग के विभिन्न कार्यों और चल रही परियोजनाओं की समीक्षा भी की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार इन योजनाओं को प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन और धार्मिक विरासत से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है। बैठक का सबसे बड़ा फोकस उन परियोजनाओं पर रहेगा जिन्हें सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन प्रोजेक्ट के पूरे होने से न केवल धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी बल्कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। अमरकंटक, जहां से पवित्र नर्मदा नदी का उद्गम होता है, वहां नर्मदा लोक विकसित करने की योजना लंबे समय से चर्चा में रही है। गंगा के बाद नर्मदा को देश की सबसे अधिक आस्था वाली नदियों में माना जाता है। ऐसे में सरकार यहां ऐसा सांस्कृतिक परिसर विकसित करना चाहती है, जहां नर्मदा से जुड़ी धार्मिक परंपराएं, इतिहास, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक महत्व को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जा सके। </p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह धार में प्रस्तावित सरस्वती लोक भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। हाल के समय में भोजशाला को लेकर हुई गतिविधियों के बाद धार एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री पहले ही सरस्वती लोक के निर्माण की घोषणा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को व्यवस्थित तरीके से विकसित करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को यहां बेहतर सुविधाएं और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। अधिकारियों के अनुसार बैठक में सरस्वती लोक की अवधारणा और इसके संभावित स्वरूप पर भी विस्तार से प्रस्तुति दी जाएगी। सांची के लिए भी सरकार बड़ी योजना तैयार कर रही है। विश्व प्रसिद्ध बौद्ध धरोहर के रूप में पहचान रखने वाले सांची में विभिन्न स्थानों पर बिखरे पुरातात्विक अवशेषों को एक स्थान पर संग्रहित कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पर्यटकों को प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही पुरातात्विक महत्व की कई दुर्लभ वस्तुओं का वैज्ञानिक संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।  बैठक में केवल इन तीन परियोजनाओं पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि प्रदेश के दो बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट राम वन पथ गमन और श्रीकृष्ण पाथेय का कॉन्सेप्ट प्रेजेंटेशन भी मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। सरकार की योजना भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मध्य प्रदेश के प्रमुख स्थलों को धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित करने की है। इसके जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों परियोजनाओं का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, ताकि सिंहस्थ 2028 से पहले इन पर तेजी से काम शुरू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">चित्रकूट में प्रस्तावित परिक्रमा पथ और भारत घाट के विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश की कई ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा भी मुख्यमंत्री करेंगे। भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय में लाइट एंड साउंड शो शुरू करने की योजना पर चर्चा होने की संभावना है। ग्वालियर किले में चल रहे संरक्षण कार्यों, आगा खान ट्रस्ट के सहयोग से हो रहे विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल है। इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा और लाल बाग पैलेस के भविष्य के संचालन, संरक्षण और 'अडॉप्टिव रियूज' की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। वहीं उज्जैन स्थित वीर दुर्गादास छतरी पर आने वाले पर्यटकों के लिए आधुनिक तकनीक आधारित 'इमर्सिव एक्सपीरियंस' विकसित करने के प्रस्ताव पर भी मंथन होगा। संस्कृति विभाग की यह समीक्षा बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश को सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, धार्मिक स्थलों का आधुनिक विकास और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। यदि इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जाता है तो मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन राज्यों में नई पहचान मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:16:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मोहन यादव का बड़ा फैसला: वन्यजीव प्रबंधन में नए कदम तेज हुए</title>
                                    <description><![CDATA[आंध्रप्रदेश से बाघ-गौर के आदान-प्रदान, मानव-वन्यजीव संघर्ष राज्य आपदा घोषित करने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-decision-of-mohan-yadav-new-steps-in-wildlife-management/article-56374"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने वन विभाग की गतिविधियों और आने वाले समय की योजनाओं को लेकर कई बड़े और अहम फैसले लिए। बैठक में वन्यजीव संरक्षण से लेकर पर्यटन और मानव-वन्यजीव संघर्ष तक कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी दौरान आंध्रप्रदेश और अन्य राज्यों के साथ वन्यजीव आदान-प्रदान को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। बैठक में बताया गया कि Andhra Pradesh की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर बाघ और गौर भेजने की कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स और अन्य वन्य प्रजातियों को प्राप्त करने की दिशा में भी काम किया जाए। इसी तरह राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त करने पर सहमति बनी है, जिसे घाटीगांव और गांधीसागर जैसे वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। यह पूरा आदान-प्रदान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने वन पर्यटन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जंगल क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं और मजबूत की जाएं। होम-स्टे मॉडल को बढ़ावा देने की बात भी सामने आई, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके और पर्यटक सीधे वन जीवन के अनुभव से जुड़ सकें। इसके अलावा सफारी वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए, जिससे पर्यटन गतिविधियों में तेजी आए। बैठक में मानव और वन्यजीव संघर्ष को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि इस समस्या को राज्य आपदा घोषित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इससे प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियां मिलकर एक समन्वित प्रणाली के तहत ऐसे मामलों को संभाल सकेंगी। यह निर्णय आने वाले समय में ग्रामीण और वन क्षेत्रों में होने वाले संघर्षों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन विभाग ने बैठक में बताया कि प्रदेश में टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर अब एक राज्य स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी, जिसका उद्देश्य वनों में संगठित अपराधों पर सख्त नियंत्रण रखना होगा। इसके साथ ही वन मुख्यालय में कमांड और कंट्रोल रूम स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है, जिससे निगरानी और प्रतिक्रिया प्रणाली और मजबूत होगी। खनिज परिवहन से जुड़े अनुज्ञा शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है, जिससे विभागीय संसाधनों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य में चीतों की संख्या वर्तमान में 52 हो चुकी है, जिनमें से 32 का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ है। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को तीसरे चीता घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण्य में भी जल्द ही नए चीतों को छोड़े जाने की तैयारी है। वन विभाग का दावा है कि बाघ, तेंदुआ, चीता, गिद्ध और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के संरक्षण में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। इसी बीच, प्रदेश के डिंडोरी और अनूपपुर जिलों में साल बोरर नामक वन रोग फैलने की जानकारी भी सामने आई है, जो लगभग तीन दशक बाद दोबारा दिखाई दिया है। इसके नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण और वन ग्रामों के राजस्व ग्राम में परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी तेजी से काम चल रहा है। सरकार का फोकस अब संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर भी है, ताकि वन क्षेत्र विकास और रोजगार दोनों का केंद्र बन सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:15:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्यप्रदेश पुलिस में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती फिर शुरू, हर साल 60 पदों पर मिलेगी नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नियमों में संशोधन, अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी बन सकेंगे पुलिस अधिकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/direct-recruitment-of-players-starts-again-in-madhya-pradesh-police/article-56283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-police-recruitment-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए पुलिस विभाग में खेल कोटे से सीधी भर्ती प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर दिया है। लंबे समय से खेल जगत से जुड़े खिलाड़ियों की मांग थी कि उन्हें उनकी उपलब्धियों के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर मिलें। अब राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में संशोधन किया है। संशोधित नियमों की अधिसूचना 15 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी है। नई व्यवस्था के तहत हर वर्ष पुलिस विभाग में खेल कोटे से 60 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इनमें 10 पद उप निरीक्षक (एसआई) और 50 पद आरक्षक (कांस्टेबल) के लिए निर्धारित किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे खिलाड़ियों को रोजगार मिलेगा और प्रदेश में खेल संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव पात्रता को लेकर किया गया है। पहले केवल पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र होंगे। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि उन खिलाड़ियों को भी अवसर मिल सके जिन्होंने देश और प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है, भले ही वे पदक जीतने में सफल न हुए हों। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है और ऐसे खिलाड़ियों को सम्मानजनक अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">संशोधित नियमों के अनुसार पुलिस मुख्यालय प्रत्येक वर्ष भर्ती के लिए अलग से विज्ञापन जारी करेगा। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह खेल उपलब्धियों के आधार पर संचालित होगी। खिलाड़ियों को शैक्षणिक योग्यता, शारीरिक मापदंड, लिखित परीक्षा तथा शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में विशेष छूट प्रदान की जाएगी। इससे खिलाड़ियों को लंबी और जटिल चयन प्रक्रिया से राहत मिलेगी। हालांकि अंतिम चयन के लिए खेल उपलब्धियों का सत्यापन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सरकार ने उप निरीक्षक और आरक्षक पदों के लिए पात्रता भी अलग-अलग निर्धारित की है। उप निरीक्षक पद के लिए वही खिलाड़ी आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया हो। वहीं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ी आरक्षक पद के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। इस व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप अवसर देने का प्रयास किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">खेल विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले से प्रदेश के हजारों खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी। अक्सर देखा जाता है कि कई खिलाड़ी वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करते हैं, लेकिन खेल जीवन समाप्त होने के बाद रोजगार की चुनौती सामने आ जाती है। ऐसे में पुलिस विभाग में सीधी भर्ती उनके लिए सुरक्षित भविष्य का रास्ता खोल सकती है। साथ ही पुलिस बल को भी अनुशासित, फिट और प्रशिक्षित युवा मिलेंगे, जो विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले भी कई मंचों से खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की बात कह चुके हैं। सरकार का कहना है कि खिलाड़ियों को केवल पुरस्कार और सम्मान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए स्थायी रोजगार के अवसर भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसी सोच के तहत खेल कोटे की भर्ती को दोबारा सक्रिय किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">खेल संगठनों और खिलाड़ियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। कई पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि इससे युवा पीढ़ी खेलों की ओर अधिक आकर्षित होगी। ग्रामीण और छोटे शहरों के खिलाड़ी, जो सीमित संसाधनों में मेहनत कर रहे हैं, उन्हें भी उम्मीद की नई किरण दिखाई देगी। प्रदेश में हॉकी, एथलेटिक्स, कुश्ती, कबड्डी, तीरंदाजी और अन्य खेलों में प्रतिभाएं लगातार उभर रही हैं। रोजगार की गारंटी मिलने से इन खिलाड़ियों का मनोबल और मजबूत होगा। खेल और रोजगार को जोड़ने वाली ऐसी नीतियां किसी भी राज्य के खेल विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। मध्यप्रदेश सरकार का यह निर्णय न केवल खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को राज्य सम्मान और अवसर दोनों देने के लिए तैयार है। आने वाले समय में इस भर्ती प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी पुलिस विभाग का हिस्सा बन सकते हैं और मैदान के साथ-साथ कानून व्यवस्था के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:01:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एमपी तबादला नीति में छूट से 17 हजार से अधिक ट्रांसफर हुए</title>
                                    <description><![CDATA[मोहन सरकार की एक दिन की छूट में विभागों में ताबड़तोड़ तबादले, 16 दिन में बड़ी प्रशासनिक हलचल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/more-than-17-thousand-transfers-took-place-due-to-relaxation/article-56267"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-transfer.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मोहन यादव सरकार द्वारा तबादलों पर दी गई अस्थायी छूट के बाद मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर जबरदस्त हलचल देखने को मिली है। मध्य प्रदेश तबादला नीति के तहत 16 दिन के भीतर 17 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण किए गए हैं। खास बात यह रही कि केवल एक दिन की विशेष छूट के दौरान ही करीब ढाई हजार तबादले महज़ कुछ घंटों में पूरे कर दिए गए। यह पूरा घटनाक्रम सोमवार और मंगलवार की रात के बीच अधिक सक्रिय रूप में देखा गया, जब विभागों ने देर रात तक आदेश जारी किए। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 15 जून को तबादला अवधि समाप्त होने के बाद मंत्रियों की मांग पर एक दिन की विशेष रियायत दी गई थी, जो मंगलवार रात 12 बजे तक प्रभावी रही। इस अवधि में कई विभागों ने तेजी से अपने स्तर पर तबादला आदेश जारी किए। स्कूल शिक्षा विभाग में प्रक्रिया अभी ऑनलाइन आवेदन स्तर पर होने के कारण आदेश पूरी तरह जारी नहीं हुए हैं, लेकिन बाकी विभागों में बड़े पैमाने पर स्थानांतरण हुए हैं। आबकारी विभाग, जेल विभाग, वन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग, पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग और पर्यावरण विभाग जैसे अहम विभागों में तबादलों की लंबी सूची तैयार हुई है। इसके अलावा राजस्व, भू-संसाधन, पीएचई, जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, आयुष, किसान कल्याण, कृषि विकास, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और सहकारिता विभागों में भी व्यापक स्तर पर अधिकारियों का फेरबदल किया गया है। कई जगहों पर फाइलें देर रात तक चलती रहीं और आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य स्तर पर विभागवार आंकड़ों की बात करें तो प्रशासनिक स्तर पर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार राजस्व विभाग में लगभग 400, नगरीय विकास एवं आवास में करीब 900, पंचायत एवं ग्रामीण विकास में 1100 और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में लगभग 1700 तबादले हुए हैं। जनजातीय कार्य विभाग में करीब 1200, लोक निर्माण विभाग में 500 और वन विभाग में 200 से अधिक स्थानांतरण दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग में 200 से ज्यादा, आबकारी विभाग में 75, परिवहन विभाग में 50, वाणिज्यिक कर विभाग में लगभग 150 और जल संसाधन विभाग में 300 से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। जिला स्तर पर भी हजारों की संख्या में आदेश जारी होने से प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। बताया जा रहा है कि कई जिलों में एक ही दिन में बड़ी संख्या में फाइलें निपटाई गईं, जिससे विभागीय कामकाज की गति भी प्रभावित हुई। अधिकारियों के अनुसार तबादलों का आधिकारिक रिकॉर्ड सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति स्तर पर तैयार किया जाता है, लेकिन हर विभाग में वास्तविक संख्या का अलग-अलग संकलन होता है। यही वजह है कि कुल आंकड़े को जोड़ने में भी प्रशासनिक स्तर पर थोड़ा अंतर देखा जाता है। बावजूद इसके, एक दिन की छूट के भीतर हुई यह तेज़ी इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकार की रियायत के बाद विभागों में लंबित तबादलों को तेजी से निपटाया गया। अब आने वाले दिनों में स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश भी जारी होने की संभावना है, जिसके बाद कुल आंकड़ा और बढ़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में यूसीसी ड्राफ्ट अंतिम चरण में, लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य प्रस्ताव पर विवाद तेज</title>
                                    <description><![CDATA[विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में समान कानून लागू करने की तैयारी, लिव-इन संबंधों और बच्चों के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस गर्म]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-intensifies-over-mandatory-live-in-registration-proposal-in-ucc-draft/article-56256"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uniform-civil-code.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा दिए हैं। प्रस्तावित ड्राफ्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान पारिवारिक कानून व्यवस्था लागू करना है, जिससे विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक स्पष्ट और समान कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस ड्राफ्ट पर व्यापक स्तर पर कार्य किया है। सात सदस्यीय इस समिति ने प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद स्थापित किया है। इसके साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी आम जनता से सुझाव लिए जा रहे हैं, जिसमें लोगों से सरल प्रश्नों के माध्यम से उनकी राय प्राप्त की जा रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित कानून व्यापक जनभागीदारी के आधार पर तैयार हो।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित यूसीसी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को सभी धर्मों के लिए समान बनाने की दिशा में प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ अलग-अलग हैं, जिसके कारण कई बार कानूनी प्रक्रियाओं में असमानता और जटिलता देखने को मिलती है। सरकार का मानना है कि एक समान कानून लागू होने से इन जटिलताओं में कमी आएगी और न्याय व्यवस्था अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी ड्राफ्ट में विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत ऐसे संबंधों में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण या घोषणा को आवश्यक बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे संबंधों में रहने वाले व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। यदि ऐसे संबंधों से बच्चे पैदा होते हैं, तो उन्हें संपत्ति और भरण-पोषण से जुड़े सभी कानूनी अधिकार प्रदान करने का प्रावधान प्रस्तावित है, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का यह भी कहना है कि यह कानून पूरी तरह से जेंडर समानता पर आधारित होगा। पुरुष और महिला दोनों को पारिवारिक कानूनों में समान अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाएंगी। संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार और विवाह संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही तलाक की प्रक्रिया को भी सभी धर्मों के लिए एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाने की योजना है, जिससे सभी नागरिकों को एक समान प्रक्रिया का लाभ मिल सके। प्रस्तावित यूसीसी को संविधान के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का मानना है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत समानता का अधिकार और अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता का मार्गदर्शन इस कानून का आधार है। इसी कारण इसे एक आधुनिक और सुधारात्मक कानून के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति द्वारा तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट में यह भी ध्यान रखा गया है कि समाज के विभिन्न वर्गों की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया जाए और किसी भी प्रकार की असमानता या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। इसी कारण व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों की राय शामिल की गई है। राज्य सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से नागरिकों को एक समान और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था प्राप्त होगी, जिससे पारिवारिक विवादों में कमी आने की संभावना है। साथ ही न्याय प्रणाली पर बोझ कम होगा और मामलों का निपटारा अधिक तेजी से हो सकेगा। यह पहल समाज में एकरूपता और समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ रही है और आगामी विधानसभा सत्र में इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सुधारात्मक कदम समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में एक अधिक संगठित और समान कानूनी व्यवस्था स्थापित हो सके। मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और यह प्रस्ताव राज्य में एक बड़े कानूनी और सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:11 +0530</pubDate>
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