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                <title>Digital Governance - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Digital Governance RSS Feed</description>
                
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                <title>MP Govt Austerity Rules: मध्य प्रदेश में सरकारी खर्च पर नई पाबंदी</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">सरकारी खर्च में बड़ी कटौती और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए सरकारी आदेश के तहत, अब राज्य के आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और सचिव स्तर के शीर्ष अधिकारियों को सरकारी खर्चे पर दिल्ली, गुजरात या देश-विदेश के किसी भी हिस्से में यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव (Chief Secretary) से अनिवार्य रूप से लिखित अनुमति लेनी होगी।</p>
<p dir="ltr">वहीं, मध्यम और कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों को राज्य से बाहर किसी भी शासकीय दौरे पर जाने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mp-govt-austerity-rules-new-restrictions-on-government-expenditure-in/article-56582"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-government-issues-austerity-decree-official-visits-beyond-state-borders-now-require-prior-sanction,-focus-shifts-to-minimizing-edible-oil-consumption-(2).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">सरकारी खर्च में बड़ी कटौती और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए सरकारी आदेश के तहत, अब राज्य के आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और सचिव स्तर के शीर्ष अधिकारियों को सरकारी खर्चे पर दिल्ली, गुजरात या देश-विदेश के किसी भी हिस्से में यात्रा करने से पहले मुख्य सचिव (Chief Secretary) से अनिवार्य रूप से लिखित अनुमति लेनी होगी।</p>
<p dir="ltr">वहीं, मध्यम और कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों को राज्य से बाहर किसी भी शासकीय दौरे पर जाने के लिए अपने-अपने विभागीय सचिव की पूर्व मंजूरी लेना आवश्यक कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।</p>
<h3 dir="ltr">फिजिकल मीटिंग्स पर रोक, अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चलेंगे सरकारी काम</h3>
<p dir="ltr">प्रशासनिक कामकाज के पारंपरिक तरीकों को बदलते हुए सरकार ने साफ किया है कि विभागीय बैठकों, कार्यशालाओं, ट्रेनिंग प्रोग्राम और सेमिनारों को अब ज्यादा से ज्यादा डिजिटल माध्यमों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही निपटाया जाए। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जिस भी काम को ऑनलाइन पूरा किया जा सकता है, उसके लिए अनावश्यक यात्राओं और दफ्तरों में भौतिक मौजूदगी से पूरी तरह बचा जाए।</p>
<p dir="ltr">इसके साथ ही, सरकारी महकमे में पर्यावरण अनुकूल आदतों को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को दफ्तर आने-जाने के लिए निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन, बसों और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।</p>
<h3 dir="ltr">पीएम मोदी के मितव्ययिता फार्मूले पर अमल</h3>
<p dir="ltr">मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने इन कड़े वित्तीय निर्देशों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मितव्ययिता (Austerity) और सीमित संसाधनों के कुशल उपयोग के राष्ट्रीय विजन से जोड़कर लागू किया है। सरकार का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और बदलती चुनौतियों को देखते हुए प्रशासनिक खर्चों को कम करना, ऊर्जा का संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा करना बेहद जरूरी हो गया है।</p>
<h3 dir="ltr">बिजली की बर्बादी पर नकेल, दफ्तरों में होगा एनर्जी ऑडिट</h3>
<p dir="ltr">इस वित्तीय सुधार अभियान का असर अब सरकारी दफ्तरों की बिजली खपत पर भी दिखेगा। सरकार ने सभी शासकीय कार्यालयों में अनिवार्य रूप से 'ऊर्जा ऑडिट' कराने और बिजली की रोजाना खपत पर नजर रखने को कहा है।</p>
<p dir="ltr">"सभी कार्यालय प्रमुखों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शाम 7 बजे के बाद दफ्तरों में गैर-जरूरी पंखे, लाइटें, कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह बंद कर दिए जाएं। इसके साथ ही, सरकारी भवनों पर पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने के काम में तेजी लाई जाएगी।" — सामान्य प्रशासन विभाग का निर्देश</p>
<h3 dir="ltr">नकली एलपीजी कनेक्शनों पर चलेगा हंटर, फ्लाई ऐश से बनेंगी सड़कें</h3>
<p dir="ltr">इस व्यापक नीति के तहत कृषि विभाग को पूरे प्रदेश में प्राकृतिक और जैविक खेती के रकबे को बढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं, लोक निर्माण और अन्य निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सड़कों और सरकारी भवनों के निर्माण में फ्लाई ऐश (कोयले की राख) और प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन जैसी पर्यावरण अनुकूल सामग्रियों का उपयोग अनिवार्य रूप से बढ़ाएं।</p>
<p dir="ltr">इसके अलावा, सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क के विस्तार में तेजी लाने को कहा है। जमीनी स्तर पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और सामान्य घरेलू एलपीजी कनेक्शनों की सघन जांच के लिए एक विशेष अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि अपात्र और डुप्लीकेट (फर्जी) कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें तुरंत सिस्टम से हटाया जा सके।</p>
<h3 dir="ltr">खाद्य तेल के खिलाफ मुहिम और 90 दिनों का महा-अभियान</h3>
<p dir="ltr">इस प्रशासनिक सुधार योजना में स्वास्थ्य से जुड़ा एक बेहद अनूठा बिंदु भी जोड़ा गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह आम जनता के बीच रिफाइंड और खाद्य तेल (Food Oil) के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाली गंभीर बीमारियों को लेकर एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाए, ताकि लोगों के खान-पान के व्यवहार में बदलाव लाया जा सके।</p>
<p dir="ltr">इन सभी सरकारी योजनाओं और बचत के नियमों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जनसंपर्क विभाग पूरे राज्य में 90 दिनों का एक विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाएगा। वहीं, पर्यटन विभाग को घरेलू टूरिज्म को रफ्तार देने के लिए "देखो अपना देश" और "सबसे पहले मध्य प्रदेश" जैसे अभियानों को जमीनी स्तर पर प्रमोट करने की जिम्मेदारी दी गई है। सभी विभागों के लिए इन नियमों की मासिक प्रगति रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को भेजना अनिवार्य कर दिया गया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 15:10:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डेटा सुरक्षा भी सीमा सुरक्षा जितनी जरूरी, साइबर रिसर्च सेंटर बनेगा: मुख्यमंत्री मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में साइबर सुरक्षा कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- डेटा आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति, प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2fecf36a849/article-56019"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cyber-security-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डिजिटल युग में तेजी से बढ़ती तकनीक और साइबर खतरों के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” विषयक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज के दौर में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है और इसकी सुरक्षा देश की सीमाओं की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा करते हुए साइबर अपराधों से निपटने के लिए मजबूत और आधुनिक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदला है। हर दिन नए प्रकार के साइबर हमले और डिजिटल अपराध सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के दौरान आधुनिक तकनीकों और ड्रोन आधारित गतिविधियों ने सुरक्षा के नए आयाम सामने रखे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य की चुनौतियां पहले से कहीं अधिक जटिल होंगी। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समय रहते साइबर अपराध, डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को गंभीरता से लिया और देशभर में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई पहल शुरू कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों का भरोसा बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा अनिवार्य है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना की घोषणा की। यह केंद्र महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह साइबर हमलों की पूर्व पहचान और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा, जिससे संभावित खतरों को समय रहते रोका जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार डिजिटल प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभिन्न योजनाओं और सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाया जा रहा है। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने पारदर्शिता बढ़ाई है और लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाना संभव बनाया है। दुनिया आज भारत की यूपीआई भुगतान प्रणाली की सराहना कर रही है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामले कई बार ऐसे होते हैं जिनमें लोगों की वर्षों की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में ठगी का शिकार हो जाती है। ऐसे अपराध दिखाई नहीं देते, लेकिन उनका प्रभाव बेहद गंभीर होता है। इसलिए साइबर अपराधों की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई और जनजागरूकता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डेटा ब्रीच जैसी घटनाओं में सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय होती है, इसलिए डेटा सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में नागरिकों को बड़ी संख्या में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इन्हें सुरक्षित बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि और वित्तीय जानकारी जैसे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत नीतिगत और तकनीकी ढांचे की आवश्यकता है। एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इन प्रणालियों को और उन्नत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में एडीजी ए. साई मनोहर ने बताया कि प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए लगातार क्षमता बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में साइबर कमांडो की विशेष टीम कार्यरत है और आने वाले समय में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि सिंहस्थ-2028 से पहले 44 साइबर कमांडो तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों और युवा स्वयंसेवकों को साइबर वॉरियर के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है। कार्यशाला के दौरान डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, साइबर अपराध नियंत्रण, डिजिटल अवसंरचना सुरक्षा, सुरक्षित एआई तकनीक और डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुति दी। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने समूह चर्चाओं में भाग लेकर साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर सुझाव भी साझा किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:09:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में 9 जून से शुरू होगी CM हेल्पलाइन 1076, एक कॉल पर दर्ज होगी शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे शुभारंभ, कॉल, व्हाट्सएप, मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए नागरिक दर्ज करा सकेंगे शिकायत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cm-helpline-1076-will-start-in-chhattisgarh-from-june-9/article-54827"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline-1076.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ की जनता के लिए प्रशासनिक सेवाओं और शिकायत निवारण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य सरकार 9 जून से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के जरिए आम नागरिक अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे और उनके समाधान की प्रक्रिया की निगरानी भी की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस हेल्पलाइन सेवा का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को कम करेगी तथा शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण में मदद करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्य शासन के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 को सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार शिकायतों के निपटारे में देरी होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई हेल्पलाइन व्यवस्था का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है। हेल्पलाइन के संचालन को लेकर मंत्रालय स्थित महानदी भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों को शिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। साथ ही तकनीकी प्लेटफॉर्म के संचालन और जवाबदेही से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने की। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल एक शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने का माध्यम भी बनेगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करना सभी विभागों की जिम्मेदारी होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार द्वारा विकसित नई शिकायत प्रबंधन प्रणाली को इस तरह तैयार किया गया है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है तो वह स्वतः अगले स्तर पर पहुंच जाएगी। यह प्रक्रिया एल-1 से एल-4 स्तर तक लागू होगी। इससे शिकायतों की लगातार निगरानी संभव होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से शिकायतों के लंबित रहने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई प्रणाली की एक और महत्वपूर्ण विशेषता शिकायतकर्ता का फीडबैक है। शिकायत के निराकरण के बाद संबंधित व्यक्ति से प्रतिक्रिया ली जाएगी। इससे यह पता चल सकेगा कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ है या नहीं। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है तो मामले की पुनः समीक्षा की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत बंद करना नहीं बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है। संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू होने के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को आसानी होगी और वे अपनी सुविधा के अनुसार माध्यम का चयन कर सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। नागरिक अपनी शिकायत की स्थिति को भी ट्रैक कर सकेंगे। इससे उन्हें बार-बार कार्यालयों में जाकर जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रशासनिक स्तर पर भी शिकायतों के डेटा का विश्लेषण कर उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी जहां सबसे अधिक समस्याएं सामने आ रही हैं। यदि इस हेल्पलाइन का प्रभावी संचालन किया गया तो यह शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। कई राज्यों में इसी तरह की हेल्पलाइन सेवाओं ने नागरिकों को त्वरित राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी मॉडल को अपनाकर प्रशासनिक सेवाओं को और अधिक जनहितैषी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। अक्सर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को अपनी समस्याएं संबंधित विभागों तक पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब वे एक फोन कॉल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उसके समाधान की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के शुभारंभ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह व्यवस्था जनता और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद स्थापित करेगी। साथ ही नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के जरिए सुशासन की अवधारणा को और मजबूत करेगी। 9 जून से शुरू होने वाली यह सेवा आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:47:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल में बना देश का पहला AI मंत्रालय, जानें कैसे काम करेगी यह मिनिस्ट्री</title>
                                    <description><![CDATA[केरल देश का पहला राज्य बना जहां AI के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया। पी. के. कुन्हालीकुट्टी को AI विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/countrys-first-ai-ministry-formed-in-kerala-know-how-this/article-53962"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-ai-minister-ai-ministry.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत में पहली बार किसी राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI) <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। यह कदम केंद्रीय सरकार की बजाय केरल सरकार ने उठाया है। नई सरकार में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता पी. के. कुन्हालीकुट्टी को </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह केरल देश का पहला राज्य बन गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए न केवल एक मंत्रालय बल्कि एक मंत्री भी बनाया गया है। यह निर्णय तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक और आर्थिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">अब सिर्फ मोबाइल ऐप या चैटबॉट तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और रोजगार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकारी सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय का काम विभिन्न विभागों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को एक नीति के तहत लाना होगा। पहले टेक्नोलॉजी से जुड़े फैसले अलग-अलग विभाग अपने तरीके से लेते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">से संबंधित कार्यों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाई जाएगी। खबर है कि अस्पतालों में बीमारियों की जल्दी पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक सिस्टम को स्मार्ट बनाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी शिकायतों के निपटारे और ऑनलाइन सेवाओं को तेज करने में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार इस दिशा में रिसर्च और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ भी सहयोग कर सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल हमेशा से शिक्षा और डिजिटल साक्षरता में अग्रणी रहा है। अब </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय की स्थापना के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य स्टार्टअप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च सेंटर और निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगा। सूत्रों के मुताबिक</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">आधारित उद्योग आने वाले वर्षों में एक बड़ा रोजगार क्षेत्र बन सकती है। इसीलिए सरकार कॉलेजों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों और प्रोफेशनल संस्थानों में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">और डिजिटल स्किल्स से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु करने की योजना बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि पारंपरिक नौकरियों में बदलाव के खतरे को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार नए तकनीक के मुताबिक लोगों को तैयार करना चाहती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल के इस कदम से पड़ोसी राज्य तमिलनाडु पर भी प्रभाव पड़ा है। चुनावी प्रचार के दौरान टीवीके प्रमुख थलपति विजय ने भी अलग </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय या </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">गवर्नेंस सिस्टम बनाने का वादा किया था। राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि तमिलनाडु सरकार भी जल्द इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर अपनी नीतियाँ बना सकते हैं। अब </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">को केवल टेक्नोलॉजी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रशासन और अर्थव्यवस्था का नया इंजन माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर हम दुनिया के दूसरे देशों पर नजर डालें तो संयुक्त अरब अमीरात ने 2017 में ही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्री नियुक्त कर लिया था। </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">आज स्मार्ट सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटोमेशन और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च में भारी निवेश कर रहा है। वहीं सऊदी अरब और सिंगापुर भी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति और सुरक्षा ढांचे पर तेजी से काम कर रहे हैं। ऐसे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल का यह कदम भारत में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">गवर्नेंस की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी कर्मचारियों को राहत, अब एक हफ्ते में मिलेगी ग्रेच्युटी, ऑनलाइन सिस्टम भी शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[एमपी में ग्रेच्युटी भुगतान अब एक सप्ताह में होगा। ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से कर्मचारियों को बड़ी राहत, सरकारी अपडेट में बड़ा बदलाव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/government-employees-will-now-get-relief-gratuity-online-system-launched/article-50043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/madhya-pradesh-gratuity-payment-update.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मध्यप्रदेश सरकार ने ग्रेच्युटी भुगतान को लेकर बड़ा प्रशासनिक सुधार लागू किया है। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत आने वाले शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद मात्र एक सप्ताह के भीतर ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन पेंशन सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया है, जिससे कर्मचारियों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अधिकारियों के मुताबिक यह व्यवस्था राज्य में लंबे समय से लंबित भुगतान और शिकायतों को खत्म करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। यह निर्णय न सिर्फ समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करेगा, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नई व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को पहले से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वित्त विभाग ने निर्देश दिया है कि ग्रेच्युटी से जुड़ी सभी प्रविष्टियों का सत्यापन पेंशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाएगा। यह प्रक्रिया सेवानिवृत्ति से तीन महीने पहले शुरू की जा सकेगी, जिससे अंतिम समय में देरी की संभावना कम हो जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ऑनलाइन प्रक्रिया का लाभ</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नई व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को आसान और पारदर्शी सुविधा देना है। अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से फाइलों की देरी और मानवीय हस्तक्षेप कम होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी शासकीय सेवक की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो भी ग्रेच्युटी से संबंधित प्रक्रिया सात दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। इससे मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता समय पर मिल सकेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पृष्ठभूमि देखें तो राज्य में लंबे समय से यह शिकायत रही है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने बकाया भुगतान के लिए महीनों</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">—</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कभी-कभी वर्षों तक भटकते रहते हैं। पेंशन और ग्रेच्युटी भुगतान में देरी के साथ-साथ रिश्वतखोरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। कई मामलों में अदालतों ने भी समय पर भुगतान को कर्मचारी का अधिकार बताते हुए सख्त टिप्पणी की है, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल में कमी देखी जाती रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सरकार की सख्ती</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वित्त विभाग ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय समयसीमा का पालन अनिवार्य होगा। देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने से विभागों की जवाबदेही भी तय होगी। डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए हर चरण की निगरानी की जा सकेगी, जिससे किसी भी प्रकार की लापरवाही तुरंत सामने आ जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस बीच राज्य सरकार ने हाल ही में श्रमिकों के लिए भी राहतभरा फैसला लिया है। श्रम विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से नई न्यूनतम वेतन दरें लागू की हैं, जिससे करीब 40 लाख निजी और औद्योगिक श्रमिकों को लाभ मिलेगा। सरकारी विभागों के करीब 10 लाख श्रमिक भी इस वृद्धि से प्रभावित होंगे। परिवर्तनशील महंगाई भत्ते (VDA) के तहत दैनिक वेतन में औसतन 9 रुपये और मासिक वेतन में लगभग 234 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विश्लेषण के तौर पर देखा जाए तो सरकार के ये कदम कर्मचारियों और श्रमिकों दोनों वर्गों को राहत देने की दिशा में हैं। ग्रेच्युटी भुगतान को समयबद्ध और पारदर्शी बनाना न केवल प्रशासनिक सुधार है, बल्कि यह कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा भी करता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है। यदि विभाग समयसीमा का पालन करते हैं, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:03:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट से पहले वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने की पूजा, 12:30 बजे पेश होगा छत्तीसगढ़ बजट</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाओं, ग्रामीण विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस के संकेत; विधानसभा में साय सरकार का तीसरा बजट आज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/finance-minister-op-chaudhary-performed-puja-before-the-budget-chhattisgarh/article-47053"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh-(77).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ की साय सरकार आज वित्त वर्ष 2026-27 का राज्य बजट पेश करने जा रही है। बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">ओपी चौधरी</span></span> ने पारंपरिक रूप से पूजा कर प्रदेश के समग्र विकास की कामना की। उनकी पत्नी अदिति चौधरी ने संकेत दिया कि इस बार बजट में महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं का प्रावधान हो सकता है।</p>
<p>यह बजट ऐसे समय प्रस्तुत किया जा रहा है जब राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, औद्योगिक निवेश और डिजिटल प्रशासन को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका बढ़ाने के उद्देश्य से ‘जी राम जी’ योजना के तहत ग्राम पंचायतों के विकास पर जोर दिया जा सकता है।</p>
<p>राजधानी को मेट्रो सिटी की तर्ज पर विकसित करने, जल प्रबंधन सुधार के लिए जल बोर्ड गठन और स्टार्टअप व MSME क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के प्रस्तावों पर भी नजर रहेगी। उद्योगों को जिला स्तर तक विस्तार देने और निवेश आकर्षित करने के लिए नई नीतिगत घोषणाएं संभावित मानी जा रही हैं।</p>
<p>सरकार के एजेंडे में सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार भी शामिल है। किसानों के लिए सिंचाई, कृषि अधोसंरचना और समर्थन योजनाओं में अतिरिक्त आवंटन की संभावना जताई जा रही है। वहीं, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में प्रावधान किए जा सकते हैं।</p>
<p>विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने पर अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्य दीनदयाल सिंह पोर्ते को श्रद्धांजलि दी गई और सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित रही। मुख्यमंत्री ने बजट को विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।</p>
<p>------------------------------</p>
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<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 12:08:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में होंगे शामिल, वैश्विक टेक कंपनियों से करेंगे सीधी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[एआई के जरिए आर्थिक विकास, डिजिटल सुशासन और नवाचार को गति देने पर रहेगा फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/69970be060ede/article-46721"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/mp-(9)3.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">डॉ. मोहन यादव</span></span></strong> शुक्रवार 20 फरवरी को <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नई दिल्ली</span></span></strong> में आयोजित <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट‑2026</span></span></strong> में भाग लेंगे। भारत मंडपम में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के समिट में मुख्यमंत्री उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा में शामिल होकर राज्य स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग पर अपने विचार रखेंगे।</p>
<p>समिट के दौरान मुख्यमंत्री एआई आधारित तकनीकों के जरिए आर्थिक विकास को गति देने, डिजिटल सुशासन को मजबूत करने और आधुनिक डिजिटल अवसंरचना विकसित करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पैनल चर्चा में यह भी मंथन होगा कि शासन और सेवा वितरण प्रणाली में एआई के उपयोग से पारदर्शिता और दक्षता कैसे बढ़ाई जा सकती है।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर एआई कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड इकोसिस्टम और जनरेटिव एआई के क्षेत्र में काम कर रही प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में एडवांस्ड सेमीकंडक्टर एक्सीलरेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर विकास और सॉवरेन एआई मॉडलिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>
<p>इसके अलावा मुख्यमंत्री टियर-2 शहरों से उभर रहे स्टार्ट-अप्स और नवप्रवर्तकों से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे एआई आधारित नवाचारों, उनके व्यावसायिक मॉडल और शासन तथा उद्योग में उनके संभावित उपयोग की जानकारी लेंगे। राज्य सरकार का उद्देश्य इन नवाचारों को नीति और निवेश से जोड़कर रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देना है।</p>
<p>समिट में मध्यप्रदेश की विशेष उपस्थिति ‘मध्यप्रदेश पेवेलियन’ के माध्यम से दर्ज की गई है। हॉल-4 के प्रथम तल पर बूथ संख्या 4F-32 और 4F-34 में स्थापित यह पेवेलियन “एआई इनेबल्ड गवर्नेंस फॉर एन एम्पावर्ड भारत” थीम पर आधारित है। इसमें 14 एआई स्टार्ट-अप्स, <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">आईआईटी इंदौर</span></span></strong>, आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन तथा राज्य के चार प्रमुख शासकीय विभाग शामिल हैं।</p>
<p>पेवेलियन में ऐसे एआई समाधान प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जिन्हें मध्यप्रदेश में पहले ही धरातल पर लागू किया जा चुका है। ये समाधान यह दर्शाते हैं कि एआई के माध्यम से सरकारी सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी, बेहतर निर्णय-प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है। राज्य का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, एमपीएसईडीसी के सहयोग से, इस राष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की योजनाबद्ध और लक्ष्य-आधारित एआई पहलों को प्रस्तुत कर रहा है।</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 19:08:37 +0530</pubDate>
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