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                <title>Shashi Tharoor - दैनिक जागरण</title>
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                <title>वंदे मातरम विवाद पर शशि थरूर का सवाल, बोले- हर कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत गाना व्यावहारिक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी आयोजनों में वंदे मातरम के सभी छंद अनिवार्य करने पर उठाए सवाल, सहमति से समाधान निकालने की कही बात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/shashi-tharoors-question-on-vande-mataram-controversy-said-singing/article-54754"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shashi-tharoor.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर जारी बहस के बीच एक बार फिर अपनी राय रखी है। उन्होंने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छंदों को अनिवार्य रूप से गाने या बजाने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यावहारिक रूप से लोगों के लिए बोझिल साबित हो सकता है। थरूर का कहना है कि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान को लेकर कोई विवाद नहीं है, लेकिन हर सार्वजनिक कार्यक्रम में इसके पूरे संस्करण को गाना और लोगों का बार-बार खड़े होना व्यवहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शशि थरूर ने कहा कि वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगीत है और जब भी यह गाया जाता है तो लोग सम्मान के साथ खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश लोगों को वंदे मातरम के पहले एक या दो छंद ही याद हैं, जिन्हें वर्षों से सार्वजनिक आयोजनों में गाया जाता रहा है। थरूर के अनुसार यही परंपरा लंबे समय से स्वीकार की गई है और लोगों के बीच भी यही प्रचलन रहा है। ऐसे में पूरे गीत को हर कार्यक्रम में अनिवार्य बनाने पर पुनर्विचार की आवश्यकता हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">थरूर ने इसी वर्ष फरवरी में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि उस आयोजन में कार्यक्रम की शुरुआत और समापन दोनों समय वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया था। उनके अनुसार गीत की अवधि अपेक्षाकृत लंबी होने के कारण लोगों को दो बार लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ा, जिससे असुविधा महसूस हुई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती, लेकिन व्यवहारिक पक्ष को भी ध्यान में रखना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कांग्रेस सांसद का कहना है कि संसद द्वारा ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया गया है जो वंदे मातरम के सभी छंदों को हर कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से गाने का निर्देश देता हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे का समाधान टकराव के बजाय आपसी सहमति और संवाद से निकाला जाना चाहिए। उनके मुताबिक राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान बनाए रखते हुए ऐसा रास्ता खोजा जा सकता है जो सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">वंदे मातरम को लेकर हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद यह विषय चर्चा में आया है। नए निर्देशों के अनुसार सरकारी कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण प्रस्तुत किया जा सकता है। साथ ही इसके दौरान उपस्थित लोगों के सम्मानपूर्वक खड़े रहने की बात भी कही गई है। पहले अधिकांश स्थानों पर वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद ही गाए जाते थे, जिन्हें सार्वजनिक रूप से स्वीकार्यता प्राप्त थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">शशि थरूर ने अपने ताजा बयान में यह भी कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही वंदे मातरम के शुरुआती छंदों को गाने की परंपरा रही है। उनका मानना है कि यही हिस्सा सबसे अधिक लोकप्रिय है और लोगों की स्मृति में भी मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को कुछ राजनीतिक दल अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। थरूर ने यह भी कहा कि जो लोग सभी छंदों को अनिवार्य करने की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले स्वयं पूरा गीत गाकर दिखाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा था। यह केवल एक गीत नहीं बल्कि आजादी की लड़ाई का प्रतीक बन गया था। ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलनों और जनसभाओं में इसका व्यापक उपयोग किया जाता था। यही कारण है कि स्वतंत्र भारत में भी इसे विशेष सम्मान प्राप्त है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वंदे मातरम की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी। बाद में इसे उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार इसे राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया था। उस समय से लेकर आज तक यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं। इसलिए इनके सम्मान को लेकर सभी पक्षों में एक समान भावना है। हालांकि इनके प्रस्तुतीकरण के तरीके और नियमों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे मुद्दों पर संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान निकालना ही सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। शशि थरूर के बयान ने वंदे मातरम को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच चर्चा जारी रहने की संभावना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:08:57 +0530</pubDate>
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                <title>शशि थरूर ने AI समिट पर दी प्रतिक्रिया: बड़े आयोजनों में गड़बड़ियां संभव, वैश्विक भागीदारी को सराहा</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी के ‘PR तमाशा’ बयान के बीच समिट पर सियासी मतभेद; तकनीकी सहयोग और पारदर्शिता पर चर्चा तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/shashi-tharoor-reacts-on-ai-summit-potential-glitches-in-big/article-46747"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/busniess-(90).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong> में जारी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026</span></span> को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शुरुआती स्तर पर कुछ गड़बड़ियां होना असामान्य नहीं है। उन्होंने समिट में वैश्विक नेताओं की भागीदारी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग की भावना को सकारात्मक संकेत बताया।</p>
<p>थरूर ने यह टिप्पणी दिल्ली में अपनी पुस्तक विमोचन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान की। उन्होंने कहा कि समिट के शुरुआती दिनों में प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति ने AI विकास के लिए एकीकृत वैश्विक दृष्टिकोण का संदेश दिया। उनके अनुसार तकनीकी सहयोग भविष्य की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों को प्रभावित करेगा।</p>
<p>यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस आयोजन को ‘डिसऑर्गनाइज्ड पीआर स्पेक्टेकल’ करार दिया था। राहुल गांधी का आरोप था कि देश की प्रतिभा और डेटा क्षमता का प्रभावी उपयोग करने के बजाय आयोजन प्रबंधन की कमियों के कारण इसकी साख प्रभावित हुई है।</p>
<p>समिट के दौरान <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">गलगोटिया यूनिवर्सिटी</span></span> से जुड़ा विवाद भी चर्चा में रहा। आरोप लगा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत रोबोटिक उपकरण को विश्वविद्यालय का स्वदेशी नवाचार बताया गया, जबकि बाद में स्पष्ट किया गया कि तकनीक विदेशी स्रोत से प्राप्त थी। विवाद के बाद आयोजकों ने संबंधित प्रदर्शनी को हटाने की कार्रवाई की।</p>
<p>थरूर ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी एक घटना के आधार पर पूरे आयोजन को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रक्षा क्षेत्र को मजबूत करना रणनीतिक आवश्यकता है और तकनीकी आत्मनिर्भरता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
<p>समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को किया था। यह आयोजन <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारत मंडपम</span></span> में 20 फरवरी तक चलेगा। कार्यक्रम में दुनिया भर की तकनीकी कंपनियां, स्टार्टअप्स और नीति निर्माता AI आधारित समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन भारत को वैश्विक तकनीकी मंच पर मजबूत पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करते हैं, हालांकि प्रबंधन और प्रस्तुति से जुड़ी चुनौतियां भविष्य में सुधार की मांग करती हैं।</p>
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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:03:42 +0530</pubDate>
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