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                <title>Rahul Gandhi - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Rahul Gandhi RSS Feed</description>
                
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                <title>Rahul Gandhi Chhattisgarh Visit: राहुल के दौरे पर भाजपा-कांग्रेस में तीखी जंग</title>
                                    <description><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी के 4 घंटे के दौरे पर सियासी घमासान। भाजपा ने कसा तंज, तो कांग्रेस ने भाजपा विधायक को बताया मानसिक रूप से बीमार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/rahul-gandhi-visit-chhattisgarh-heated-battle-between-bjp-and-congress/article-56564"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi’s-chhattisgarh-visit-sparks-political-slugfest;-bjp-swipes-at-&#039;alula-gold&#039;-pitch,-congress-labels-mla-&#039;mentally-ill&#039;-(1).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे से पहले राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। गांधी रायपुर जिले के अभनपुर में आयोजित 10 दिवसीय आवासीय पार्टी प्रशिक्षण शिविर में लगभग चार घंटे बिताने वाले हैं, जहां वे आगामी राजनीतिक रणनीति तैयार करने के लिए जिला और शहर अध्यक्षों के साथ सीधे संवाद करेंगे।</p>
<p dir="ltr">आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, कांग्रेस नेता दोपहर 2:00 बजे रायपुर हवाई अड्डे पर उतरेंगे और शाम 6:00 बजे दिल्ली के लिए वापस रवाना हो जाएंगे। हालांकि, उनके आगमन से कुछ घंटे पहले ही दोनों खेमों की ओर से की गई तीखी बयानबाजी के कारण राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है।</p>
<h3 dir="ltr">'क्या वे आलू से सोना निकालने की ट्रेनिंग देंगे?'</h3>
<p dir="ltr">राहुल गांधी के इस दौरे पर कड़ा प्रहार करते हुए रायपुर से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने इस प्रशिक्षण सत्र के असली मकसद पर सवाल उठाए हैं। मिश्रा ने कहा, "भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में उनका स्वागत है। लेकिन यह मत भूलिए कि ये वही भगवान राम हैं जिनके अस्तित्व पर कभी राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने सवाल उठाए थे।"</p>
<p dir="ltr">भाजपा विधायक ने आगे सवाल किया कि गांधी आखिर कार्यकर्ताओं को किस बात की ट्रेनिंग देने आ रहे हैं। मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा, "वे यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं को क्या सिखाने आ रहे हैं? क्या वे भ्रष्टाचार का कोई नया कोर्स कराने आए हैं, या फिर उन्हें आलू से सोना निकालने का अपना पुराना फॉर्मूला सिखाएंगे?"</p>
<p dir="ltr">भाजपा के इस हमले को और धार देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अंबिकापुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री साय ने कहा, "राहुल गांधी जहां भी जाते हैं, वहां उनकी पार्टी के हश्र को हर कोई अच्छी तरह जानता है।"</p>
<h3 dir="ltr">'मिश्रा मानसिक रूप से बीमार हैं, कांग्रेस कराएगी उनका इलाज'</h3>
<p dir="ltr">भाजपा के इस तीखे वार पर कांग्रेस ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाया और भाजपा विधायक पर सीधा व्यक्तिगत हमला बोल दिया। पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने दावा किया कि पुरंदर मिश्रा अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं और उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत है।</p>
<p dir="ltr">उपाध्याय ने कहा, "पुरंदर मिश्रा मानसिक रूप से अस्वस्थ हो चुके हैं और उन्हें इलाज की सख्त जरूरत है। अगर भाजपा उनके इलाज का खर्च नहीं उठा सकती, तो कांग्रेस आगे बढ़कर उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार है।"</p>
<p dir="ltr">मिश्रा को 'एक्सीडेंटल विधायक' करार देते हुए उपाध्याय ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता केवल अपना राजनीतिक कद बढ़ाने और क्षेत्रीय मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह की बेतुकी बयानबाजी कर रहे हैं।</p>
<h3 dir="ltr">बंद कमरे के भीतर: संगठन को दोबारा खड़ा करने की कवायद</h3>
<p dir="ltr">हाई-डेसिबल राजनीतिक बयानबाजी के बीच, अभनपुर के चांदी मोड़ के पास एक निजी परिसर में शुक्रवार से शुरू हुआ 10 दिवसीय 'संगठन सृजन' आवासीय शिविर कांग्रेस के लिए एक बड़ा संगठनात्मक कदम माना जा रहा है। तैयारियों का जायजा लेने पहले ही रायपुर पहुंच चुके प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि एक "अत्यंत अहंकारी" भाजपा सरकार का मुकाबला करने के लिए कई राज्यों में जमीनी स्तर पर ऐसे अभियान चलाए जा रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">"यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं है। नए नियुक्त जिला और शहर अध्यक्षों को फील्डवर्क सौंपा गया है, जिसमें गांवों में रात बिताना, मनरेगा के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और नशे की लत जैसी स्थानीय सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का अध्ययन करना शामिल है।" — कांग्रेस पार्टी सूत्र</p>
<p dir="ltr">शिविर की दिनचर्या सुबह योग और मार्शल आर्ट सत्रों के साथ शुरू होती है, जिसके बाद राजनीतिक विशेषज्ञों द्वारा विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इन सत्रों में डेटा प्रबंधन, बूथ स्तर का समन्वय, मीडिया हैंडलिंग और भाजपा के खिलाफ मजबूत नैरेटिव तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उम्मीद है कि राहुल गांधी आज दोपहर बंद कमरे में होने वाले इस सत्र के दौरान राज्य नेतृत्व को आगामी स्थानीय निकाय और संस्थागत चुनावों से निपटने का अंतिम चुनावी मंत्र देंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 13:27:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>INDIA ब्लॉक की बैठक में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, SIR पर CJI को पत्र लिखेगा गठबंधन</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में दो साल बाद हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक में पांच प्रमुख मुद्दों पर बनी सहमति, NEET-CBSE विवाद, चुनावी पारदर्शिता और महंगाई पर सरकार को घेरने की रणनीति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/alliance-will-write-letter-to-cji-demanding-resignation-of-education/article-55315"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-bloc-meeting-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली में सोमवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। करीब दो साल बाद हुई इस बैठक को विपक्षी राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कई दलों के नेता शामिल हुए। कुछ नेता ऑनलाइन माध्यम से जुड़े, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं ने बैठक में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। लगभग दो घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की गई।</p>
<p>बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि गठबंधन के नेताओं ने पांच प्रमुख मुद्दों पर एकमत होकर निर्णय लिया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे NEET और CBSE से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। खड़गे ने कहा कि इन मामलों में सामने आई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित किया है। उनका आरोप था कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई और कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में गंभीरता और पारदर्शिता आवश्यक है।</p>
<p>बैठक में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विपक्षी नेताओं ने SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चिंता व्यक्त की। खड़गे ने कहा कि विपक्ष इस विषय को गंभीरता से उठा रहा है और चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने का निर्णय लिया गया है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा होना बेहद जरूरी है और इस विषय पर गठबंधन एकजुट होकर आगे बढ़ेगा।</p>
<p>बैठक के दौरान महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की स्थिति भी चर्चा के केंद्र में रही। विपक्षी नेताओं का मानना है कि ये ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़गे ने कहा कि गठबंधन ने फैसला किया है कि इन विषयों पर नियमित रूप से चर्चा और रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि हर दो महीने में इस तरह की बैठक आयोजित की जाएगी ताकि राष्ट्रीय मुद्दों पर संयुक्त रुख तैयार किया जा सके और सरकार को जवाबदेह बनाया जा सके।</p>
<p>बैठक में शामिल नेताओं ने आगामी संसद सत्र को लेकर भी विचार-विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार विपक्ष संसद के भीतर और बाहर कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। नेताओं का मानना है कि संसद लोकतांत्रिक संवाद का सबसे बड़ा मंच है और जनता से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी दलों के बीच समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी है।</p>
<p>राजनीतिक गतिविधियों के बीच दिल्ली में सोमवार को एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के खिलाफ लगाए गए कुछ पोस्टरों को लेकर विवाद सामने आया। राजधानी के अकबर रोड क्षेत्र में लगे इन पोस्टरों में कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर टिप्पणियां की गई थीं। बाद में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और पोस्टरों को हटा दिया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि पोस्टर लगाने वालों की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी।</p>
<p>बैठक के दौरान विपक्षी दलों के बीच एकता बनाए रखने के मुद्दे पर भी जोर दिया गया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि मौजूदा समय में गठबंधन की मजबूती सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने माना कि विभिन्न दलों के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते हैं, लेकिन संवाद के माध्यम से उनका समाधान निकाला जा सकता है। पवार ने कहा कि गठबंधन में शामिल वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा कर सभी मुद्दों का रास्ता निकाला जाएगा। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में विपक्षी दलों के लिए एकजुट रहना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p>इस बैठक का एक बड़ा उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना भी था। पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन से कुछ दलों की दूरी बढ़ी है, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में दिल्ली में आयोजित यह बैठक विपक्षी दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन और संगठनात्मक मजबूती का अवसर भी मानी जा रही है। नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह संदेश देने की कोशिश की कि राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष एक साथ खड़ा है और आने वाले समय में भी साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।</p>
<p>बैठक में यह भी तय किया गया कि अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित होगी। इस दौरान विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, आगामी चुनावी रणनीतियों और राष्ट्रीय मुद्दों पर फिर से चर्चा की जाएगी। नियमित संवाद से गठबंधन की एकजुटता मजबूत होगी और जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा।</p>
<p>दो साल बाद हुई इस बैठक ने यह संकेत दिया है कि विपक्ष आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने में जुट गया है। NEET और CBSE विवाद से लेकर चुनावी पारदर्शिता, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने संयुक्त रुख अपनाने की कोशिश की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:06:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दो साल बाद जुटे INDIA ब्लॉक के नेता, एकजुटता पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की सातवीं बैठक में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत 23 दलों के नेता शामिल; शरद पवार ने कहा- सभी दलों को साथ रखना जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/leaders-of-india-block-gathered-after-two-years-emphasis-on/article-55313"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-bloc-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली में सोमवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की सातवीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की राजनीति के कई बड़े चेहरे एक मंच पर दिखाई दिए। करीब दो साल बाद आयोजित इस बैठक को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी में हुई इस बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और एनसीपी-एससीपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे स्वास्थ्य और अन्य कारणों से ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े।</p>
<p>बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई दिनों से चर्चा चल रही थी। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी गठबंधन की यह पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है, जिसमें विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, संसद के आगामी सत्र और विपक्षी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना जताई गई। कांग्रेस ने दावा किया कि बैठक में 23 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक शुरू होने से पहले नेताओं के बीच गर्मजोशी भी देखने को मिली। सोनिया गांधी और ममता बनर्जी एक-दूसरे से मिलते हुए गले लगीं, जबकि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे आपसी बातचीत के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में नजर आए। इन तस्वीरों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।</p>
<p>INDIA ब्लॉक की पिछली बड़ी बैठक जून 2024 में हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक गठबंधन के शीर्ष नेता एक साथ किसी बड़े मंच पर दिखाई नहीं दिए थे। ऐसे में दो साल बाद हुई इस बैठक को विपक्षी दलों के लिए संगठनात्मक मजबूती और आपसी समन्वय बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन को कई झटके भी लगे हैं। गठबंधन से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रीय दल अलग हुए और कई राज्यों में विपक्षी दलों के बीच स्थानीय स्तर पर मतभेद भी सामने आए। इसके बावजूद नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए विपक्षी एकजुटता आवश्यक है।</p>
<p>बैठक के बीच महाराष्ट्र से एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार का बयान भी चर्चा में रहा। बारामती में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में INDIA ब्लॉक के सभी दलों को एकजुट रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके इस बयान को विपक्षी गठबंधन के भीतर एकता बनाए रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों और संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति के लिए विपक्षी दलों का साथ रहना जरूरी होगा।</p>
<p>इधर बैठक के दिन राजधानी दिल्ली में एक और घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। अकबर रोड क्षेत्र में कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ कुछ पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ आलोचनात्मक टिप्पणियां लिखी गई थीं। कुछ पोस्टरों में शरद पवार की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने की कोशिश भी की गई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति द्वारा लगाए गए थे।</p>
<p>दोपहर होते-होते यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और इन पोस्टरों को हटा दिया। कार्यकर्ताओं ने पोस्टरों को फाड़ते हुए विरोध जताया और कहा कि विपक्षी एकता को कमजोर करने के लिए इस तरह की कोशिशें की जा रही हैं। इस दौरान कुछ देर के लिए वहां राजनीतिक नारेबाजी भी देखने को मिली। हालांकि स्थिति शांतिपूर्ण रही और किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।</p>
<p>INDIA ब्लॉक की यह बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि विपक्षी राजनीति के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। संसद के आगामी सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, संघीय ढांचे और विभिन्न राज्यों से जुड़े राजनीतिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी दलों के बीच समन्वय पर विचार हो सकता है।</p>
<p>बैठक में शामिल नेताओं की संख्या और प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया है कि विपक्षी दल अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर साझा मंच बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि गठबंधन के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। कई राज्यों में दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और सीट बंटवारे जैसे मुद्दे भविष्य में परीक्षा बन सकते हैं। इसके बावजूद सोमवार की बैठक ने यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष अभी भी एकजुट होकर राजनीतिक लड़ाई लड़ने का दावा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:03:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>संसदीय समिति ने NTA और CBSE से पेपर लीक पर मांगे जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[NEET पेपर लीक और OSM सिस्टम विवाद पर दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों संस्थानों से कड़े सवाल पूछे, बैकग्राउंड जांच और परिभाषा पर उठे गंभीर प्रश्न]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/parliamentary-committee-seeks-answers-from-nta-and-cbse-on-paper/article-55242"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nta-paper-leak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Testing Agency) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) से जुड़े परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था पर कई गंभीर और सीधे सवाल उठाए हैं। NEET पेपर लीक विवाद और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर चल रही जांच के बीच समिति की बैठक में माहौल काफी सख्त रहा और अधिकारियों से लिखित जवाब भी मांगे गए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सांसद (Digvijaya Singh) की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सबसे पहले यही सवाल किया कि आखिर ‘पेपर लीक’ की परिभाषा सरकारी परीक्षा एजेंसियों के हिसाब से क्या मानी जाती है, और क्या इस परिभाषा को लेकर किसी तरह की स्पष्ट गाइडलाइन मौजूद है या नहीं। बैठक में यह भी पूछा गया कि जब संस्थान खुद यह दावा करते हैं कि सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ, तो फिर अलग-अलग स्तर पर सामने आने वाली गड़बड़ियों और लीक जैसे आरोपों को किस श्रेणी में रखा जाए। इस पूरे सवाल-जवाब के दौरान समिति ने यह भी संकेत दिया कि केवल तकनीकी सफाई देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को भी स्पष्ट करना जरूरी है, क्योंकि देशभर में लाखों छात्र इन परीक्षाओं पर निर्भर हैं और किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति ने विशेष रूप से National Testing Agency से 2018 के बाद आयोजित सभी प्रमुख परीक्षाओं का पूरा रिकॉर्ड मांगा है और पूछा है कि क्या कभी आधिकारिक रूप से किसी परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई है या केवल अफवाह और तकनीकी गड़बड़ी के आधार पर ही ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही में एजेंसी की ओर से यह दावा किया गया था कि उनके सिस्टम में वास्तविक पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि केवल एक ‘गेस पेपर’ या अनुमानित प्रश्न पत्र प्रसारित हुआ था, जिस पर समिति ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह केवल अनुमानित सामग्री थी तो फिर परीक्षा सुरक्षा प्रणाली की मजबूती पर सवाल क्यों खड़े होते हैं। इसके अलावा समिति ने NTA से उसके आंतरिक ढांचे, मानव संसाधन, तकनीकी टीम और पिछले तीन वर्षों में की गई सभी नियुक्तियों का पूरा ब्योरा भी तलब किया है। बताया जा रहा है कि समिति यह समझने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी परीक्षा एजेंसी के भीतर स्टाफिंग, निगरानी और तकनीकी नियंत्रण की व्यवस्था कितनी मजबूत है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बार-बार सामने आने वाले विवाद केवल बाहरी समस्या हैं या फिर सिस्टम के भीतर कोई संरचनात्मक कमजोरी मौजूद है। इसी संदर्भ में यह सवाल भी उठा कि क्या परीक्षा संचालन के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही या निगरानी की कमी रही है, जिसके कारण छात्रों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी समिति ने विस्तृत सवाल पूछे हैं। सबसे बड़ा सवाल कोएम्प्ट (Coempt) कंपनी को दिए गए ठेके और उसके चयन की प्रक्रिया पर केंद्रित रहा। समिति ने पूछा कि क्या बोर्ड ने टेंडर देने से पहले कंपनी का विस्तृत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया था या नहीं, और क्या यह जानकारी थी कि कंपनी के डायरेक्टर पहले ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज से जुड़े रहे हैं, जिस पर पहले परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, समिति ने यह भी पूछा कि विवादित इतिहास वाली कंपनियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने की शर्त को तीसरे टेंडर में क्यों हटा दिया गया और क्या यह किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था या तकनीकी कारणों से। इसके अलावा 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया में आधुनिक रोबोटिक स्कैनर के बजाय सामान्य स्कैनर के उपयोग की अनुमति देने पर भी सवाल उठाए गए। समिति का कहना है कि जब परीक्षा मूल्यांकन जैसे संवेदनशील कार्य में तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, तो उसमें गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसी बीच राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा तेजी से गरमाया हुआ है, खासकर जब कांग्रेस नेता (Rahul Gandhi) ने सार्वजनिक रूप से कोएम्प्ट कंपनी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अब समिति की ओर से मांगे गए जवाबों के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण पर और अधिक राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:07:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली में 8 जून को INDIA ब्लॉक की बैठक संभव, विपक्षी रणनीति पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना, भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति पर हो सकती है चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-block-meeting-possible-on-june-8-in-delhi-brainstorming/article-54765"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-bloc-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर विपक्षी एकजुटता की चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के वरिष्ठ नेताओं की 8 जून को नई दिल्ली में बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे सहित करीब 15 विपक्षी दलों के नेता शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना और विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में कई राज्यों में बदलते राजनीतिक समीकरणों और आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए विपक्षी दल एक बार फिर साझा मंच को सक्रिय करने की कोशिश में जुटे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों की आवाज कई बार एकजुट दिखाई दी, लेकिन कई मामलों में मतभेद भी सामने आए। ऐसे में यह बैठक INDIA ब्लॉक के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि प्रमुख विपक्षी दल एक साथ बैठकर भविष्य की रणनीति तय करते हैं तो इसका असर आने वाले चुनावों और संसद के भीतर विपक्ष की भूमिका पर भी पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में देश के मौजूदा राजनीतिक हालात, संसद के आगामी सत्र, राज्यों में संगठनात्मक मजबूती और जनता से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दल बेरोजगारी, महंगाई, किसानों से जुड़े मुद्दों और संघीय ढांचे से संबंधित विषयों को लेकर साझा अभियान की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में भाजपा के खिलाफ प्रभावी चुनावी रणनीति बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि इस प्रस्तावित बैठक को लेकर कुछ दलों की भागीदारी को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के इस बैठक में शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है। इसके पीछे तमिलनाडु की राजनीति और कांग्रेस द्वारा तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को समर्थन दिए जाने को कारण माना जा रहा है। हालांकि गठबंधन के कुछ नेता टीवीके को भी बैठक में शामिल कराने के प्रयास कर रहे हैं ताकि विपक्षी एकता का दायरा और व्यापक हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं आम आदमी पार्टी पहले ही सार्वजनिक तौर पर INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है। ऐसे में पार्टी के इस बैठक में शामिल होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर मानी जा रही है। दिल्ली और पंजाब की राजनीति को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ी दूरी भी इसकी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके बावजूद विपक्षी खेमे की कोशिश है कि अधिक से अधिक दल साझा मंच पर बने रहें।</p>
<p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी इस बैठक में अपने राज्य से जुड़े कुछ राजनीतिक मुद्दे उठा सकती हैं। बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों का मामला बैठक में रख सकती है और इस पर अन्य विपक्षी दलों का समर्थन मांग सकती है। यदि ऐसा होता है तो बैठक में क्षेत्रीय दलों की चिंताओं और राज्य-स्तरीय राजनीतिक मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">INDIA गठबंधन की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। इसकी पहली बैठक 23 जून 2023 को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित की गई थी। उस समय बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक की मेजबानी की थी। इस बैठक में देश के प्रमुख विपक्षी दल शामिल हुए थे और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ संयुक्त रूप से मुकाबला करने की रणनीति बनाई गई थी। बाद में बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली समेत कई शहरों में गठबंधन की बैठकों का आयोजन किया गया, जहां सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">लोकसभा चुनाव 2024 में INDIA गठबंधन को कुल 234 सीटें मिली थीं। इनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। हालांकि गठबंधन बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया, लेकिन उसने भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश की थी। इसके बाद विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में गठबंधन को मिले-जुले परिणाम देखने को मिले। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जबकि कुछ अन्य राज्यों में विपक्षी दलों का प्रदर्शन बेहतर रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सितंबर 2025 में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने सरकारी आवास पर INDIA ब्लॉक के नेताओं के लिए डिनर मीटिंग आयोजित की थी। उस बैठक को विपक्षी एकजुटता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था। कांग्रेस नेताओं ने तब दावा किया था कि बैठक सकारात्मक रही और सभी दलों ने मिलकर आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। अब जून में प्रस्तावित बैठक को उसी प्रक्रिया का अगला चरण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:58:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्नाटक में सत्ता बदलाव तय, डीके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद दिल्ली में तेज हुई हलचल, कांग्रेस 4 डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर कर रही मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/change-of-power-fixed-in-karnataka-dk-shivakumar-may-become/article-54495"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-cm-change.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में पिछले तीन दिनों से चल रही हलचल अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। करीब आधे घंटे चली इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान अब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को अंतिम रूप देने में जुटा है और अगले हफ्ते डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;"> दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान सिद्धारमैया ने हाईकमान के सामने अपनी कई राजनीतिक मांगें रखीं। इनमें उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में अहम मंत्रालय देने की मांग भी शामिल बताई जा रही है। चर्चा यह भी है कि नई सरकार में सिद्धारमैया गुट का प्रभाव बरकरार रहेगा और कैबिनेट गठन में उनकी राय को अहमियत दी जाएगी। यही वजह है कि इस्तीफे के तुरंत बाद उनका दिल्ली पहुंचना काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">उधर कांग्रेस पार्टी के भीतर अब 4 डिप्टी सीएम बनाने का फॉर्मूला तेजी से चर्चा में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए यह रणनीति तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि डीके शिवकुमार के साथ अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और मौजूदा मंत्री प्रियंक खड़गे का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">नई कैबिनेट में बड़े फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है। खबरें हैं कि मौजूदा सरकार के करीब 10 मंत्रियों को हटाया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई टीम के जरिए सरकार के खिलाफ बन रही नाराजगी को कम किया जाए। पिछले कुछ महीनों में वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले जैसे मामलों ने सरकार को घेरा था। कांग्रेस हाईकमान को लग रहा है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से एंटी-इंकम्बेंसी का असर कम किया जा सकता है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिल्ली में बैठकों के समानांतर बेंगलुरु में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों की ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई थी। इस दौरान एक तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जिसमें डीके शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते नजर आए। बाद में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया और साथ बैठकर नाश्ता किया। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और समझौते का संकेत मान रहे हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दरअसल कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलें नई नहीं हैं। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद भी मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में लंबी खींचतान चली थी। चुनाव में कांग्रेस ने AHINDA फॉर्मूले के सहारे बड़ी जीत हासिल की थी। AHINDA यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित वोट बैंक। सिद्धारमैया खुद कुरुबा समुदाय से आते हैं, जिसका असर चुनावी नतीजों में भी दिखाई दिया था। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार ने दावा किया था कि उन्होंने पार्टी को मुश्किल दौर से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दोनों नेताओं की दावेदारी के चलते कांग्रेस हाईकमान को मुख्यमंत्री तय करने में करीब एक हफ्ता लग गया था। उस समय यह चर्चा भी चली कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री रहने का फॉर्मूला तय हुआ है, हालांकि कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। अब तीन साल बाद वही फॉर्मूला फिर चर्चा में है और सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि समझौते का दूसरा चरण लागू किया जा रहा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">26 मई को कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया था। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती दौर में सिद्धारमैया पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। यहां तक कि उन्होंने समर्थक विधायकों के साथ अलग रुख अपनाने के संकेत भी दिए थे। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगठन में बड़ी भूमिका और सम्मानजनक राजनीतिक स्पेस देने का भरोसा दिया।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इधर डीके शिवकुमार का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए लगभग तय माना जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले डीके की पहचान संकटमोचक नेता के तौर पर रही है। पार्टी विधायकों को टूटने से बचाने से लेकर चुनाव प्रबंधन तक में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। हालांकि उनके खिलाफ कई आपराधिक और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच भी चल रही है। 2019 में उन्हें ईडी ने गिरफ्तार भी किया था और उन्हें करीब 50 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:20:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय, सिद्धारमैया आज 3 बजे इस्तीफा देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[डीके शिवकुमार होंगे नए मुख्यमंत्री, कांग्रेस में लंबे विवाद के बाद फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a17e9ebebac8/article-54404"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/karnataka-cm.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रहा नेतृत्व परिवर्तन का विवाद अब लगभग खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज दोपहर 3 बजे अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित उनके सरकारी आवास पर गुरुवार सुबह हुई अहम बैठक में इस फैसले की जानकारी मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को दी गई। कांग्रेस हाईकमान की सहमति के बाद अब डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह हुई बैठक में उस समय भावुक माहौल देखने को मिला जब डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मिलने पहुंचे। बैठक के दौरान शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और दोनों नेता एक-दूसरे से गले मिले। इस दृश्य को कांग्रेस के भीतर सत्ता हस्तांतरण और राजनीतिक संतुलन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में मौजूद कर्नाटक सरकार के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बना ली है और वही अगले मुख्यमंत्री होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय मांगा था, लेकिन राज्यपाल फिलहाल पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा राजभवन कार्यालय को सौंप सकते हैं। संवैधानिक नियमों के मुताबिक मुख्यमंत्री राज्यपाल की अनुपस्थिति में भी लिखित इस्तीफा ई-मेल या राजभवन कार्यालय के माध्यम से भेज सकते हैं। इस्तीफा स्वीकार होने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा पिछले कई महीनों से चल रही थी। मई 2023 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान सामने आई थी। उस समय पार्टी नेतृत्व ने समझौते के तहत रोटेशनल मुख्यमंत्री फार्मूला तय किया था। सूत्रों के मुताबिक समझौते में ढाई-ढाई साल तक दोनों नेताओं को मौका देने की बात कही गई थी। अब सरकार के ढाई साल पूरे होने के करीब हैं, ऐसे में शिवकुमार समर्थक लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई बैठकों के बाद स्थिति तेजी से बदली। 26 मई को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ लंबी बैठक की थी। करीब छह घंटे चली इस बैठक में सत्ता हस्तांतरण, संगठनात्मक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि समय रहते नेतृत्व परिवर्तन करने से सरकार के खिलाफ बन रही एंटी-इंकम्बेंसी को कम किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस इस बदलाव के जरिए राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं और दक्षिण कर्नाटक में उनकी मजबूत पकड़ है। वहीं सिद्धारमैया को ओबीसी वर्ग का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। कांग्रेस नेतृत्व दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> केवल मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि पूरे मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल भी हो सकता है। मौजूदा 35 मंत्रियों में से बड़ी संख्या में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। पार्टी नए चेहरों को मौका देकर सरकार की छवि सुधारने की कोशिश कर सकती है। साथ ही दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा है, जिनमें एक दलित और दूसरा लिंगायत या ओबीसी समुदाय से हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस के भीतर यह बदलाव केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं बल्कि संगठनात्मक अनुशासन का संदेश भी माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नेतृत्व विवादों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान समय रहते स्थिति संभालने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच डीके शिवकुमार के समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। बेंगलुरु में उनके आवास के बाहर सुबह से ही समर्थकों की भीड़ जमा रही। कई समर्थक फूलों के गुलदस्ते और मिठाइयों के साथ पहुंचे। घर के बाहर टेंट और स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गईं। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी जाहिर की और डीके शिवकुमार के समर्थन में नारे लगाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर सिद्धारमैया समर्थकों में भावुक माहौल देखा गया। कई नेताओं ने कहा कि सिद्धारमैया ने राज्य में कई जनहित योजनाएं लागू कीं और कांग्रेस सरकार को मजबूत नेतृत्व दिया। हालांकि पार्टी नेतृत्व के फैसले को सभी नेताओं ने स्वीकार करने की बात कही है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर नजर है कि डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार किस तरह काम करेगी और कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलेगी। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाकर औपचारिक रूप से डीके शिवकुमार को नेता चुना जाएगा। इसके बाद राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिद्दारमैया के इस्तीफे की तैयारी, कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन लगभग तय</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी की बैठकों के बाद बनी सहमति, डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparations-for-siddaramaiahs-resignation-change-of-power-in-karnataka-almost/article-54397"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/siddaramaiah-resignation.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कई महीनों से चल रहा नेतृत्व संकट अब खत्म होता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने आखिरकार पद छोड़ने का मन बना लिया है और माना जा रहा है कि वह जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ लगातार चली बैठकों और राजनीतिक मंथन के बाद यह फैसला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने सत्ता साझेदारी के पुराने फार्मूले को लागू करने का संकेत साफ तौर पर दे दिया है, जिसके बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं।</p>
<p>कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं, जिनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने हिस्सा लिया। इन बैठकों में कर्नाटक के मौजूदा राजनीतिक हालात, सरकार के भीतर बढ़ती खींचतान और नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं।</p>
<p>पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्दारमैया को 2023 विधानसभा चुनाव के बाद हुए सत्ता साझेदारी समझौते की याद दिलाई। उस समय कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद यह तय हुआ था कि मुख्यमंत्री पद को लेकर ढाई-ढाई साल का फार्मूला लागू किया जाएगा। शुरुआती कार्यकाल सिद्दारमैया को दिया गया था, जबकि बाद में नेतृत्व परिवर्तन कर डीके शिवकुमार को मौका देने की बात कही गई थी।</p>
<p>बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में कुछ और समय मांगा था। उनका तर्क था कि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश करने और कुछ लंबित योजनाओं को पूरा करने के बाद पद छोड़ना चाहते हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व तत्काल बदलाव के पक्ष में दिखाई दिया। पार्टी हाईकमान का मानना था कि अगर तय समझौते को लागू नहीं किया गया तो इससे पार्टी की विश्वसनीयता और संगठनात्मक अनुशासन पर असर पड़ सकता है।</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान राहुल गांधी ने साफ कहा कि पार्टी को अपने वादों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और अनुशासित तरीके से लागू करना जरूरी है। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दोनों नेताओं से पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की।</p>
<p>राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में यह तर्क दिया कि 2025 या 2026 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक लिखित समझौता नहीं हुआ था। लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें समझाया कि संगठन और सरकार दोनों के संतुलन के लिए अब बदलाव जरूरी है।</p>
<p>दिल्ली में बैठकों के बाद सिद्दारमैया ने अपने करीबी नेताओं और समर्थक मंत्रियों से भी चर्चा की। बताया जाता है कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने विश्वस्त सहयोगियों के साथ लंबी बैठक की। कुछ नेताओं ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन अंत में उन्होंने हाईकमान के निर्णय को स्वीकार करने का संकेत दे दिया।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार सिद्दारमैया ने अपने समर्थकों से कहा कि वह हमेशा से यह कहते रहे हैं कि राहुल गांधी जब भी कहेंगे, वह इस्तीफा दे देंगे। अब जब पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दे दिया है, तो वह और इंतजार नहीं करेंगे। इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई।</p>
<p>इस घटनाक्रम के बीच डीके शिवकुमार की सक्रियता भी बढ़ गई है। पार्टी कार्यालय और विधानसभा के भीतर उनके समर्थक लगातार उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं। कई नेताओं का मानना है कि शिवकुमार ने 2023 चुनाव में संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस को सत्ता में लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री पद देना राजनीतिक रूप से संतुलित कदम माना जा रहा है।</p>
<p>हालांकि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी भी तरह के सार्वजनिक विवाद से बचना चाहता है। पार्टी नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसी स्थिति बने, जहां अंदरूनी खींचतान लंबे समय तक सुर्खियों में रही थी। इसी वजह से कांग्रेस हाईकमान लगातार दोनों नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>कर्नाटक में यह बदलाव कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। 2014 के बाद कई राज्यों में पार्टी को क्षेत्रीय नेताओं और संगठन के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई हुई है। ऐसे में कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण सफलतापूर्वक होने पर कांग्रेस इसे अनुशासित संगठन की मिसाल के रूप में पेश कर सकती है।</p>
<p>अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सिद्दारमैया औपचारिक रूप से कब इस्तीफा देते हैं और कांग्रेस विधायक दल की अगली बैठक में किसे नया नेता चुना जाता है। फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है और आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:54:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि पर वीरभूमि पहुंचे सोनिया-राहुल, दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस नेताओं ने वीरभूमि पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/sonia-rahul-reached-veerbhoomi-on-rajiv-gandhis-35th-death-anniversary-and/article-53859"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rajiv-gandhi-death-anniversary.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि पर बुधवार सुबह दिल्ली के वीरभूमि में कांग्रेस नेताओं का एकत्र होना देखा गया। सुबह से ही श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू हो चुका था। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने वीरभूमि जाकर राजीव गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा और बेटी मिराया वाड्रा भी मौजूद रहे। श्रद्धांजलि कार्यक्रम का माहौल काफी शांत और भावुक था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या भी वहां उपस्थित थी। कई कार्यकर्ताओं ने राजीव गांधी की तस्वीरें और पार्टी के झंडे अपने हाथों में लिए हुए थे। बताया गया कि सुबह से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें भी तैनात थीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी वीरभूमि जाकर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी। उनके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम समेत कई प्रमुख नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए। पार्टी के नेताओं ने राजीव गांधी के कार्यकाल और उनके देश के लिए योगदान को याद किया। कांग्रेस की तरफ से सोशल मीडिया पर भी कई पोस्ट साझा किए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें राजीव गांधी को आधुनिक भारत के विचार रखने वाला नेता बताया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देशभर में भी कांग्रेस की राज्य इकाइयों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कई जगहों पर रक्तदान शिविर और पौधारोपण जैसे कार्यक्रम भी शामिल थे। दिल्ली में वीरभूमि के बाहर सुबह से कांग्रेस समर्थकों की आवाजाही रही। कुछ लोग फूल लेकर आए और कुछ कार्यकर्ता नारेबाजी करते नजर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में एक चुनावी सभा के दौरान हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलटीटीई से जुड़ी एक महिला आत्मघाती हमलावर धनु उनके करीब आई थी। वह माला पहनाने के बहाने आगे बढ़ी और पैर छूने के दौरान विस्फोट कर दिया। यह विस्फोट इतना भयानक था कि मौके पर ही राजीव गांधी सहित कई लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। उस समय राजीव गांधी कांग्रेस के प्रमुख चेहरे थे और चुनाव प्रचार में जुटे थे। उनकी हत्या के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई थी। आज भी कांग्रेस पार्टी हर साल 21 मई को उन्हें श्रद्धांजलि देती है और उनके राजनीतिक योगदान को याद करती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:15:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी के बयान पर भड़के CM साय, कहा- लोकतांत्रिक मर्यादा टूटी</title>
                                    <description><![CDATA[CM विष्णुदेव साय ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लिए अपमानजनक भाषा दुर्भाग्यपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A5%87-cm-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AF--%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80/article-53861"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/cm-vishnudeo-sai-rahul-gandhi&#039;s-statement.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए बयान के बाद सियासी बहस और भी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा बयान देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जैसे उच्च संवैधानिक पदों के लिए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गद्दार</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में दिनभर चर्चा होती रही। भाजपा के नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है और कांग्रेस की ओर से भी जवाबी हमले जारी हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री साय ने ये भी कहा कि कांग्रेस अब सत्ता से दूर रहने के कारण मानसिक संतुलन खोती नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब लोकतंत्र की सीमाएं पार कर चुकी है और सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति पर उतर आई है। रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जिस नेतृत्व ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ कड़े फैसले लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी नेतृत्व के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना निंदनीय है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा संगठन भी इस बयान पर आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। प्रदेश के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस पर निशाना साधा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीएम साय ने आगे कहा कि लोकतंत्र में विरोध का पूरा स्थान है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियाँ और अपमानजनक भाषा किसी भी राजनीतिक दल के लिए उचित नहीं हैं। उनके अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री और गृह मंत्री केवल व्यक्ति नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल खड़े करती है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा इस मुद्दे को जल्दी ही और जोर-शोर से उठाने की योजना बना रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल में वीडी सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, राहुल, प्रियंका और खरगे समेत कई बड़े कांग्रेस नेता हुए शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[तिरुवनंतपुरम में वीडी सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खरगे समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/in-kerala-vd-satheesan-took-oath-as-chief-minister-many/article-53663"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-v.d.-satheesan-congress-rahul-gandhi-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल की नई सरकार ने सोमवार को आधिकारिक रूप से अपने कार्यभार संभाल लिया। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में हुए शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस समारोह में कई प्रमुख कांग्रेस नेता भी शामिल हुए। राहुल गांधी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रियंका गांधी वाड्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उपस्थिति ने इसे राजनीतिक तौर पर खास बना दिया। सुबह से ही स्टेडियम के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह साफ नजर आ रहा था। वीडी सतीशन के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच काफी समय से चल रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब नई सरकार के गठन के साथ यह वास्तविकता में बदल गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने वीडी सतीशन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शपथ लेने के बाद राज्यपाल ने उन्हें बधाई भी दी। सिर्फ मुख्यमंत्री ने ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी शपथ ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">के मुरलीधरन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठबंधन सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेताओं को भी सरकार में जगह मिली। पीके कुन्हालीकुट्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीके बशीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एन समसुद्दीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केएम शाजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वीई अब्दुल गफूर ने मंत्री पद की शपथ ली। मंत्रिमंडल गठन को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठकों का दौर चल रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नाम तय किए गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस समारोह के दौरान मॉन्स जोसेफ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिबू बेबी जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनूप जैकब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीपी जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपी अनिल कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टी सिद्दीकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीसी विष्णुनाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजी एम जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिंदू कृष्णा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एम लिजू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केए थुलसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ओ जे जनीश ने भी मंत्री पद की शपथ ली। समारोह में कार्यकर्ताओं ने कई बार नारेबाजी की। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की उपस्थिति के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी दक्षिण भारत में अपने संगठन को मजबूत करने का संदेश देने के लिए इस कार्यक्रम को देख रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडी सतीशन ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया था कि वरिष्ठ नेता थिरुवनचूर राधाकृष्णन विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि शनिमोल उस्मान उपाध्यक्ष के पद पर होंगे। विधायक अपू जॉन जोसेफ को मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। नई सरकार के सामने महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और राज्य की वित्तीय स्थिति जैसे मुद्दों पर तेजी से फैसले लेने की चुनौती होगी। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस समर्थकों में नई सरकार को लेकर खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:51:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>थलापति विजय बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, शपथ समारोह में दिखा शक्ति प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[टीवीके प्रमुख थलापति विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कांग्रेस, लेफ्ट और सहयोगी दलों के समर्थन से बनी सरकार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/thalapathy-vijay-becomes-chief-minister-of-tamil-nadu-show-of/article-53030"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t104008.203.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब टीवीके प्रमुख और अभिनेता थलापति विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित समारोह में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुबह से ही स्टेडियम के बाहर विजय समर्थकों की भारी भीड़ जुटी रही। कई लोग पार्टी के झंडे और विजय की तस्वीरें लेकर पहुंचे थे। समारोह के दौरान </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">थलापति</span>… <span lang="hi" xml:lang="hi">थलापति</span>…” <span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे लगातार गूंजते रहे। विजय सरकार के गठन के साथ ही राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री बनने तक का सफर हालांकि आसान नहीं रहा। 4 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद से ही तमिलनाडु में सियासी हलचल तेज हो गई थी। टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई। ऐसे में विजय लगातार सहयोगी दलों से बातचीत करते रहे। 6 मई को कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के साथ वह पहली बार राज्यपाल से मिले थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जरूरी संख्या पूरी नहीं होने पर उन्हें इंतजार करने को कहा गया। अगले दिन लेफ्ट पार्टियों </span>CPI <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>CPI(M) <span lang="hi" xml:lang="hi">के समर्थन के बाद फिर मुलाकात हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर तब भी आंकड़ा कम पड़ गया। इस दौरान चेन्नई में राजनीतिक बैठकों का दौर देर रात तक चलता रहा। टीवी चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक बस इसी चर्चा ने जगह बना ली थी कि क्या विजय सरकार बना पाएंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">8 मई को हालात अचानक बदले जब </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">VCK <span lang="hi" xml:lang="hi">ने समर्थन के संकेत दिए। हालांकि देर रात तक औपचारिक पुष्टि नहीं होने से मामला फिर अटक गया था। आखिरकार 9 मई को </span>IUML <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>VCK <span lang="hi" xml:lang="hi">ने आधिकारिक तौर पर समर्थन दे दिया। इसके बाद विजय 121 विधायकों का समर्थन पत्र लेकर राजभवन पहुंचे। बहुमत के लिए 118 विधायकों की जरूरत थी। राज्यपाल ने दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें सरकार बनाने का न्योता दे दिया। बताया जा रहा है कि राजभवन से बाहर निकलते ही विजय ने अपने करीबी नेताओं से लंबी चर्चा की और देर रात मंत्रिमंडल की रूपरेखा तय हुई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी दलों के नेता भी मौजूद रहे। मंच पर विजय काफी भावुक नजर आए। शपथ के बाद उन्होंने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। उनके समर्थकों ने इसे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">रील से रियल हीरो बनने का दिन</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">बताया। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को नई चुनौती दी है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 10:48:24 +0530</pubDate>
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