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                <title>New Delhi News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>अखिला सेवक समाज काउंसिल ने ‘निष्काम सेवा’ पर आधारित राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की</title>
                                    <description><![CDATA[संस्थापक डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने भारतीय मूल्यों और जमीनी प्रभाव पर आधारित दृष्टि को रखा सामने
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/akhila-sevak-samaj-council-launches-national-campaign-based-on-nishkaam/article-52163"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/nishkam-seva-campaign.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में अखिला सेवक समाज काउंसिल (ASSC) ने अपने औपचारिक शुभारंभ की घोषणा की है। यह राष्ट्रीय स्तर का संगठन ‘निष्काम सेवा’ यानी निस्वार्थ सेवा के सिद्धांत पर कार्य करते हुए सामाजिक न्याय, सामुदायिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>“सेवा परमोधर्मः” के मूल विचार से प्रेरित यह काउंसिल एक सशक्त मंच तैयार करने का लक्ष्य रखती है, जो जमीनी स्तर पर काम करने वाले समुदायों को सरकारी योजनाओं और सामाजिक संगठनों से जोड़ सके। अपने प्रारंभिक चरण में संगठन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक और प्रभावी पहलों की मजबूत नींव रखने पर कार्य कर रहा है।</p>
<p><strong>दृष्टि और कार्यप्रणाली</strong></p>
<p>“वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को केंद्र में रखते हुए, ASSC स्वयं को एक सेतु के रूप में स्थापित करना चाहता है—जो लोगों तक योजनाओं की जानकारी, उनकी पहुंच और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सके। संगठन का कार्य पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है: सामाजिक न्याय, सामुदायिक सशक्तिकरण, कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं कल्याण, और भारतीय संस्कृति का संरक्षण।</p>
<p>ASSC एक सहयोगात्मक मॉडल अपनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें समुदाय की भागीदारी, संस्थागत साझेदारी और नीतिगत समन्वय के माध्यम से स्थायी और सार्थक बदलाव सुनिश्चित किया जा सके।</p>
<p>इस अवसर पर ASSC के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने कहा, “अखिला सेवक समाज काउंसिल की परिकल्पना इस सोच से प्रेरित है कि सेवा केवल भावना तक सीमित न रहे, बल्कि वह ठोस और मापनीय परिणामों में भी दिखाई दे। ‘निष्काम सेवा’ के माध्यम से हम ऐसा मंच तैयार करना चाहते हैं, जहां समुदाय सशक्त बने और शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचें।”</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, “हमारा ध्यान ऐसे प्रभावी तंत्र विकसित करने पर है, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन जवाबदेही और निरंतरता के साथ हो सके। फिलहाल हम समन्वय तंत्र को मजबूत कर रहे हैं, ताकि हमारे प्रयास समुदाय की जरूरतों और संस्थागत ढांचे दोनों के अनुरूप रहें।”</p>
<p>सतत विकास और साझेदारी पर जोर देते हुए डॉ. मल्लप्पा ने कहा, “जमीनी स्तर पर स्थायी विकास के लिए वित्तीय अनुशासन और स्थानीय सहयोग दोनों आवश्यक हैं। हम पारदर्शी प्रक्रियाओं और मजबूत साझेदारियों के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।”</p>
<p>ASSC ने सामुदायिक पहुंच, जागरूकता अभियानों, कौशल विकास कार्यक्रमों और जनकल्याणकारी योजनाओं के समर्थन जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रारंभिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। वर्तमान में संगठन साझेदारियों को मजबूत करने, जमीनी नेटवर्क को विस्तार देने और ऐसे कार्यक्रम मॉडल विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिन्हें आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:38:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरिवंश नारायण सिंह तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति बने, सदन ने जताया भरोसा</title>
                                    <description><![CDATA[पहली बार मनोनीत सदस्य को मिली यह जिम्मेदारी, पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा– अनुभव का सदन को मिला लाभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/harivansh-narayan-singh-becomes-deputy-chairman-of-rajya-sabha-for/article-51472"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rajya-sabha-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली में राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जहां हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार उपसभापति चुना गया। शुक्रवार को हुए चुनाव में वे निर्विरोध चुने गए, क्योंकि विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा गया था।</p>
<p>यह पहली बार है जब किसी मनोनीत सदस्य को राज्यसभा का उपसभापति बनाया गया है। उनके समर्थन में कुल पांच प्रस्ताव पेश किए गए। इनमें पहला प्रस्ताव केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री जेपी नड्डा ने रखा, जबकि दूसरा प्रस्ताव नितिन नवीन की ओर से प्रस्तुत किया गया।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश के पुनः चयन पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सदन के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उपसभापति के रूप में उनके अनुभव से राज्यसभा को लगातार लाभ मिला है और उन्होंने सभी सदस्यों को साथ लेकर काम करने का प्रयास किया है।</p>
<p>हरिवंश नारायण सिंह का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था। इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पुनः मनोनीत किया गया। वे 2032 तक राज्यसभा के सदस्य बने रहेंगे। संविधान के अनुसार राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत होते हैं, जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में योगदान के आधार पर नामित किया जाता है।</p>
<p>राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो हरिवंश मूल रूप से पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं और बाद में राजनीति में आए। उन्होंने जनता दल यूनाइटेड के माध्यम से राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व किया। वे 2018 में पहली बार उपसभापति बने और 2020 में दोबारा इस पद पर चुने गए थे।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, 18 मार्च को बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उनके कार्यकाल को लेकर संकेत दिए थे। उन्होंने सदन में कहा था कि हरिवंश ने लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाई है और उनका योगदान सराहनीय रहा है, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।</p>
<p>विपक्ष की ओर से कोई नामांकन न आने के कारण चुनाव निर्विरोध रहा। सदन में इस निर्णय को सहमति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:14:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>डीएमई मीडिया स्कूल में मनोज शर्मा ने ली पीआर मास्टरक्लास</title>
                                    <description><![CDATA[मीडिया संबंध, कैंपेन और बदलते पीआर क्षेत्र पर चर्चा ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/manoj-sharma-took-pr-masterclass-in-dme-media-school/article-48627"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/dr.-manoj-d.jpg" alt=""></a><br /><p>पीआर गुरु के प्रबंध निदेशक मनोज शर्मा ने डीएमई मीडिया स्कूल, आईपी यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस (पीआर) पर एक मास्टरक्लास ली। इस सत्र में मीडिया संबंध, कैंपेन की योजना और रणनीतिक पीआर जैसे अहम विषयों पर बात की गई।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/whatsapp-image-2026-03-21-at-12.20.59-am-(1).jpeg" alt="manoj" width="396" height="264"></img></p>
<p>इस सत्र का उद्देश्य पढ़ाई और इंडस्ट्री के काम के बीच के अंतर को कम करना था, ताकि छात्रों को पीआर के बदलते स्वरूप की सही और व्यावहारिक समझ मिल सके। आसान उदाहरणों और चर्चा के जरिए मनोज शर्मा ने समझाया कि आज के समय में पीआर किस तरह लोगों की सोच बनाने, संबंध मजबूत करने और संस्थाओं के लिए भरोसा बनाने में मदद करता है।</p>
<p>सत्र के दौरान छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बातचीत में आज के पीआर से जुड़े मुद्दों, मीडिया के काम करने के तरीके और रणनीतिक संचार के महत्व पर चर्चा हुई।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/whatsapp-image-2026-03-21-at-12.20.59-am.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-03-21 at 12.20.59 AM" width="371" height="297"></img></p>
<p>मनोज शर्मा ने कहा, “आज पब्लिक रिलेशंस सिर्फ दिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसा बनाने और लंबे समय तक संबंध बनाए रखने का काम करता है। इस स्तर पर छात्रों से बातचीत करना उन्हें आगे के लिए तैयार करने में मदद करता है।”</p>
<p>डीएमई मीडिया स्कूल, आईपी यूनिवर्सिटी की प्रमुख डॉ. पारुल मेहरा ने कहा, “हम कोशिश करते हैं कि छात्रों को इंडस्ट्री से सीधे जुड़ने का मौका मिले। ऐसे सत्र उन्हें किताबों से आगे जाकर असली काम को समझने में मदद करते हैं।”</p>
<p>सत्र के बारे में बताते हुए छात्र वृंद अग्रवाल ने कहा, “यह सत्र काफी उपयोगी रहा। इससे हमें समझ आया कि असल जिंदगी में पीआर कैसे काम करता है। इंटरैक्टिव तरीके से पढ़ाने की वजह से चीजें आसानी से समझ आईं।”</p>
<p>मनोज शर्मा ने डॉ.  पारुल  मेहरा का आमंत्रण के लिए धन्यवाद किया और माननीय न्यायमूर्ति भंवर सिंह के साथ मंच साझा करने को सम्मान की बात बताया।</p>
<p>-----------------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 09:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शशि थरूर ने AI समिट पर दी प्रतिक्रिया: बड़े आयोजनों में गड़बड़ियां संभव, वैश्विक भागीदारी को सराहा</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी के ‘PR तमाशा’ बयान के बीच समिट पर सियासी मतभेद; तकनीकी सहयोग और पारदर्शिता पर चर्चा तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/shashi-tharoor-reacts-on-ai-summit-potential-glitches-in-big/article-46747"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/busniess-(90).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong> में जारी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026</span></span> को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शुरुआती स्तर पर कुछ गड़बड़ियां होना असामान्य नहीं है। उन्होंने समिट में वैश्विक नेताओं की भागीदारी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग की भावना को सकारात्मक संकेत बताया।</p>
<p>थरूर ने यह टिप्पणी दिल्ली में अपनी पुस्तक विमोचन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान की। उन्होंने कहा कि समिट के शुरुआती दिनों में प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति ने AI विकास के लिए एकीकृत वैश्विक दृष्टिकोण का संदेश दिया। उनके अनुसार तकनीकी सहयोग भविष्य की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों को प्रभावित करेगा।</p>
<p>यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस आयोजन को ‘डिसऑर्गनाइज्ड पीआर स्पेक्टेकल’ करार दिया था। राहुल गांधी का आरोप था कि देश की प्रतिभा और डेटा क्षमता का प्रभावी उपयोग करने के बजाय आयोजन प्रबंधन की कमियों के कारण इसकी साख प्रभावित हुई है।</p>
<p>समिट के दौरान <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">गलगोटिया यूनिवर्सिटी</span></span> से जुड़ा विवाद भी चर्चा में रहा। आरोप लगा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत रोबोटिक उपकरण को विश्वविद्यालय का स्वदेशी नवाचार बताया गया, जबकि बाद में स्पष्ट किया गया कि तकनीक विदेशी स्रोत से प्राप्त थी। विवाद के बाद आयोजकों ने संबंधित प्रदर्शनी को हटाने की कार्रवाई की।</p>
<p>थरूर ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी एक घटना के आधार पर पूरे आयोजन को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रक्षा क्षेत्र को मजबूत करना रणनीतिक आवश्यकता है और तकनीकी आत्मनिर्भरता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
<p>समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को किया था। यह आयोजन <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारत मंडपम</span></span> में 20 फरवरी तक चलेगा। कार्यक्रम में दुनिया भर की तकनीकी कंपनियां, स्टार्टअप्स और नीति निर्माता AI आधारित समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन भारत को वैश्विक तकनीकी मंच पर मजबूत पहचान दिलाने का अवसर प्रदान करते हैं, हालांकि प्रबंधन और प्रस्तुति से जुड़ी चुनौतियां भविष्य में सुधार की मांग करती हैं।</p>
<p>----------------------------</p>
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<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:03:42 +0530</pubDate>
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