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                <title>सरकारी अपडेट - दैनिक जागरण</title>
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                <title>आरंग में अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, 400 एकड़ खेती बंजर होने पर लीज एरिया से बाहर उत्खनन रोकने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच ने खनिज सचिव से मांगा शपथपत्र; 30 करोड़ के जुर्माने का नोटिस, 26 फरवरी को अगली सुनवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-strict-on-illegal-mining-in-arang-instructions-to/article-45856"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/cg-(28).jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर से सटे आरंग क्षेत्र के ग्राम निसदा में कथित अवैध खनन के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने लीज क्षेत्र के बाहर हो रहे उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने खनिज विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर वर्तमान जांच स्थिति और कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी तय की गई है।</p>
<p>जनहित याचिका ग्राम निसदा के निवासी ओम प्रकाश सेन ने दायर की है। याचिका के अनुसार, फ्लैग स्टोन और चूना पत्थर के उत्खनन के लिए 15 व्यक्तियों को लीज दी गई थी, लेकिन लीजधारकों ने स्वीकृत सीमा से कई गुना अधिक क्षेत्र में खनन शुरू कर दिया। आरोप है कि खनन से निकला मलबा और पत्थर महानदी में डंप किए जा रहे हैं, जिससे नदी के प्रवाह पर असर पड़ा है और आसपास की करीब 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है।</p>
<p>याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित खदानों की पर्यावरणीय अनुमति तीन वर्ष पहले समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद क्षेत्र में उत्खनन और ब्लास्टिंग जारी रही। अदालत ने राज्य से स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय मंजूरी समाप्त होने के बाद गतिविधियां कैसे संचालित हुईं और निगरानी तंत्र ने क्या कदम उठाए।</p>
<p>सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग ने जांच की। जांच में सात लीजधारकों को नियम उल्लंघन का दोषी पाया गया है। इन पर 30 करोड़ रुपये के जुर्माने का नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, अदालत ने पूछा कि महानदी में माइनिंग वेस्ट फेंकने के आरोपों पर आपराधिक या दंडात्मक कार्रवाई क्या हुई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए।</p>
<p>डिवीजन बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई लीजधारक जारी कार्रवाई के खिलाफ अलग से याचिका दायर करता है, तो उसे इसी जनहित याचिका के साथ टैग कर सुनवाई की जाएगी, ताकि मामले की समग्रता बनी रहे। अदालत के निर्देशों के बाद खनन गतिविधियों की निगरानी और पर्यावरणीय अनुपालन पर प्रशासन की सक्रियता बढ़ने की संभावना है।</p>
<p>यह मामला पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में उभरा है, क्योंकि इसका सीधा असर कृषि, जल स्रोत और स्थानीय आजीविका पर पड़ रहा है। आज की ताज़ा खबरें और भारत समाचार अपडेट के तहत यह मुद्दा हिन्दी न्यूज़ पोर्टल्स पर प्रमुखता से उभर रहा है। आगे की सुनवाई में राज्य का शपथपत्र और विस्तृत रिपोर्ट अहम होगी।</p>
<p>-----</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:43:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 26 ट्रेनें रद्द, 7 राज्यों के यात्रियों पर असर</title>
                                    <description><![CDATA[रेलवे ब्लॉक और निर्माण कार्य के चलते फरवरी और अप्रैल में बदलेगा ट्रेनों का संचालन, यात्रियों को यात्रा से पहले जांच की सलाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/26-trains-passing-through-chhattisgarh-cancelled-impact-on-passengers-of/article-45854"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/cg-(27).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाली कुल 26 यात्री ट्रेनों को रेलवे ने रद्द कर दिया है। यह फैसला रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े निर्माण और रखरखाव कार्यों के चलते लिया गया है। ट्रेनों के रद्द होने से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और पंजाब की ओर यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। रेलवे के अनुसार, कुछ ट्रेनें 14 और 15 फरवरी को, जबकि बड़ी संख्या में गाड़ियां 4 अप्रैल से 26 अप्रैल तक संचालित नहीं होंगी।</p>
<p>रेलवे अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल अंतर्गत गोंदिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर वॉशेबल एप्रन को हटाकर नया बैलेस्टेड ट्रैक बिछाने का कार्य किया जाना है। इस कार्य के लिए लगभग 20 दिनों का ट्रैफिक ब्लॉक लिया गया है। इसके अलावा रायपुर मंडल के हथबंद–भाटापारा सेक्शन में रोड अंडर ब्रिज निर्माण के लिए गर्डर लॉन्चिंग की जाएगी, जिसके चलते फरवरी में भी कुछ ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा।</p>
<p>रद्द की गई ट्रेनों में कई लंबी दूरी की महत्वपूर्ण एक्सप्रेस गाड़ियां शामिल हैं। कोरबा–अमृतसर एक्सप्रेस, शालीमार–लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस, रायगढ़–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस और विशाखापट्टनम–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को अलग-अलग तिथियों में रद्द किया गया है। इसके अलावा कई मेमू और पैसेंजर ट्रेनें भी इस अवधि में नहीं चलेंगी, जिससे दैनिक यात्रियों पर सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p>रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ ट्रेनें अपने अंतिम गंतव्य तक नहीं जाएंगी और बीच रास्ते में ही समाप्त कर दी जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, गोंदिया–बल्लारशाह रूट की पैसेंजर ट्रेनें अप्रैल माह में हिरदामाली स्टेशन तक ही चलेंगी। वहीं बरौनी–गोंदिया एक्सप्रेस को दुर्ग स्टेशन तक सीमित किया जाएगा, जिससे दुर्ग से आगे का सफर रद्द रहेगा।</p>
<p>यात्रियों का कहना है कि पहले से टिकट बुक करा चुके लोगों के लिए अचानक ट्रेनों का रद्द होना असुविधाजनक है, खासकर शादी और परीक्षा सीजन को देखते हुए। हालांकि रेलवे का तर्क है कि यह कार्य यात्रियों की सुरक्षा और भविष्य में बेहतर रेल सुविधाओं के लिए आवश्यक है।</p>
<p>रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति आधिकारिक वेबसाइट, हेल्पलाइन या नजदीकी स्टेशन से जरूर जांच लें। जिन यात्रियों की ट्रेन रद्द की गई है, उन्हें टिकट रिफंड या वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था की सुविधा नियमों के तहत दी जाएगी। आने वाले दिनों में रेलवे द्वारा और ट्रेनों के संचालन में बदलाव की सूचना जारी की जा सकती है।</p>
<p>-----</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:43:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्रिप्टो टैक्स नीति की उलटी मार : क्या मौजूदा व्यवस्था गैर-अनुपालन को बढ़ावा दे रही है ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिसंबर 2025 में पहली बार केंद्र सरकार ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह स्वीकार किया कि भारतीय यूजर्स को सेवाएं दे रहे कुछ ऑफशोर क्रिप्टो एक्सचेंज आयकर अधिनियम के तहत टीडीएस (TDS) नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय आई, जब सरकार को 2022 के आम बजट में क्रिप्टो लेनदेन पर 1% टीडीएस लागू किए लगभग चार साल हो चुके हैं। उस वक्त सरकार ने इस कदम को क्रिप्टो इकोसिस्टम पर नजर रखने और निवेश को हतोत्साहित करने के तौर पर पेश किया था। लेकिन अब यह साफ होता जा रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/crypto-tax-policy-backfires-is-the-current-system-encouraging-non-compliance/article-45783"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/digital-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>दिसंबर 2025 में पहली बार केंद्र सरकार ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह स्वीकार किया कि भारतीय यूजर्स को सेवाएं दे रहे कुछ ऑफशोर क्रिप्टो एक्सचेंज आयकर अधिनियम के तहत टीडीएस (TDS) नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय आई, जब सरकार को 2022 के आम बजट में क्रिप्टो लेनदेन पर 1% टीडीएस लागू किए लगभग चार साल हो चुके हैं। उस वक्त सरकार ने इस कदम को क्रिप्टो इकोसिस्टम पर नजर रखने और निवेश को हतोत्साहित करने के तौर पर पेश किया था। लेकिन अब यह साफ होता जा रहा है कि यह नीति अपने किसी भी उद्देश्य को हासिल नहीं कर पाई और इसके कई अनचाहे नतीजे सामने आए हैं।</p>
<p>उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि टीडीएस लागू होने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय यूजर्स उन ऑफशोर एक्सचेंजों की ओर शिफ्ट हो गए, जो टीडीएस नहीं काटते थे। एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, टैक्स अधिकारियों को करीब 11,000 करोड़ रुपए के टीडीएस का नुकसान हुआ है, जबकि अक्टूबर 2024 से 2025 के बीच भारतीय यूजर्स ने ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपए का ट्रेडिंग वॉल्यूम पैदा किया। इससे पहले एस्या सेंटर और नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च के सेंटर फॉर टैक्स लॉज़ की रिपोर्ट्स में भी यही रुझान सामने आया था। इन अध्ययनों की सबसे अहम बात यह रही कि 2022 में टीडीएस लागू होने के बाद भारत का लगभग 90% क्रिप्टो ट्रेडिंग वॉल्यूम देश से बाहर शिफ्ट हो गया।</p>
<p>ये आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि टीडीएस क्रिप्टो निवेश को रोकने में नाकाम रहा। उल्टा, इसने भारतीय नियमों का पालन करने वाले घरेलू एक्सचेंजों से यूजर्स को दूर कर दिया और उन्हें उन ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स की ओर धकेल दिया, जो न तो टीडीएस काटते हैं और न ही लेनदेन की रिपोर्टिंग करते हैं। इससे सरकार की ट्रेडिंग गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता भी कमजोर पड़ी। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत पंजीकरण न कराने के चलते सरकार ने कुछ ऐसे प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक भी किया। हालांकि, इनमें से कुछ एक्सचेंज बाद में जुर्माना भरकर और FIU-India में रजिस्ट्रेशन कराकर वापस लौट आए, लेकिन वे अब भी टैक्स ढांचे से बाहर ही काम कर रहे हैं। नतीजतन, भारत में क्रिप्टो सर्विस प्रोवाइडर्स की दो अलग-अलग श्रेणियां बन चुकी हैं।</p>
<p>ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स न तो भारत में भौतिक रूप से मौजूद हैं और न ही उनकी कार्यप्रणाली में पर्याप्त पारदर्शिता है। इससे सरकार की निगरानी और नियंत्रण की क्षमता बेहद सीमित हो जाती है। यही कारण है कि कई ऐसे एक्सचेंज अवैध लेनदेन के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं। इस तरह का रेगुलेटरी आर्बिट्राज न सिर्फ यूजर्स को घरेलू एक्सचेंजों से दूर कर रहा है, बल्कि सरकार की निगरानी व्यवस्था को भी कमजोर कर रहा है।</p>
<p>सरकार लगातार यह कहती रही है कि वर्चुअल डिजिटल एसेट सेक्टर का प्रभावी नियमन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना संभव नहीं है। लेकिन मौजूदा हालात में इस नियामक खालीपन का नुकसान सभी को हो रहा है। नियमों का पालन करने वाले भारतीय कारोबार यूजर्स खो रहे हैं, सरकार को राजस्व और नियंत्रण दोनों में नुकसान हो रहा है, और भारतीय यूजर्स ऐसे हाई-रिस्क प्लेटफॉर्म्स के संपर्क में आ रहे हैं, जहां न तो उपभोक्ता सुरक्षा है और न ही शिकायत निवारण की ठोस व्यवस्था। दुनिया में सबसे ज्यादा क्रिप्टो यूजर्स भारत में हैं, ऐसे में उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मौजूदा स्थिति, जिसमें जोखिम ज्यादा और सुरक्षा के उपाय बेहद सीमित हैं, लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।</p>
<p>ऑफशोर एक्सचेंजों के नियमन से बाहर होने की सरकारी स्वीकारोक्ति एक सकारात्मक कदम जरूर है और इससे यह संकेत मिलता है कि सेक्टर पर अब ज्यादा बारीकी से नजर रखी जा रही है। लेकिन सिर्फ स्वीकार करना काफी नहीं है। सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय यूजर्स को सेवाएं देने वाले सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों पर समान अनुपालन नियम लागू हों, चाहे वे देश में स्थित हों या विदेश में। ऐसा करने से रेगुलेटरी आर्बिट्राज खत्म होगा, प्रतिस्पर्धा का असंतुलन दूर होगा, टैक्स बेस बढ़ेगा, राजस्व संग्रह सुधरेगा और निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी। अंततः यही कदम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करेंगे और देश के व्यापक आर्थिक व नियामक उद्देश्यों को पूरा करने में मददगार साबित होंगे।</p>
<p>----</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 21:17:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों को राहत: पहली से 11वीं तक की परीक्षाएं अब स्कूल खुद लेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[डीईओ के माध्यम से परीक्षा कराने का आदेश वापस, स्कूल संचालकों के विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने बदला फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/relief-to-private-schools-in-chhattisgarh-now-the-schools-themselves/article-45370"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/cg-(22).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों के लिए बड़ी राहत की खबर है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली से 11वीं कक्षा तक की स्थानीय परीक्षाएं जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से कराने संबंधी आदेश को वापस ले लिया है। अब राज्य के निजी स्कूल पहले की तरह अपने स्तर पर वार्षिक परीक्षाओं का आयोजन कर सकेंगे। विभाग ने यह फैसला निजी स्कूल संगठनों के विरोध और बढ़ते दबाव के बाद लिया है।</p>
<p>दरअसल, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने 3 फरवरी को एक आदेश जारी कर यह निर्देश दिया था कि पांचवीं, आठवीं, दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को छोड़कर शेष सभी कक्षाओं की परीक्षाएं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कराई जाएंगी। इसके तहत 25 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच डीईओ के माध्यम से परीक्षाएं आयोजित करने और 30 अप्रैल तक परिणाम घोषित करने के निर्देश दिए गए थे।</p>
<p>इस आदेश में यह भी कहा गया था कि परीक्षा संचालन के लिए जिला स्तर पर संचालन समिति, प्रश्नपत्र निर्माण समिति और मॉडरेशन समिति गठित की जाएगी। यह व्यवस्था शासकीय, अनुदान प्राप्त, अशासकीय और स्वामी आत्मानंद स्कूलों पर लागू की गई थी।</p>
<h5><strong>निजी स्कूलों में बढ़ा असंतोष</strong></h5>
<p>आदेश जारी होते ही निजी स्कूल संचालकों में नाराजगी फैल गई। उनका कहना था कि वे पहले से ही अपनी वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी कर चुके हैं और सत्र के अंतिम चरण में परीक्षा प्रणाली बदलने से छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ेगा। कई स्कूल संगठनों ने सरकार को आंदोलन की चेतावनी भी दी।</p>
<p>छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने लोक शिक्षण संचालक को पत्र लिखकर आदेश वापस लेने की मांग की थी। संगठन का तर्क था कि आरटीई अधिनियम में बोर्ड परीक्षाओं के अलावा अन्य परीक्षाओं को विभागीय स्तर पर कराने का कोई प्रावधान नहीं है और यह निजी स्कूलों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप है।</p>
<h5><strong>सिलेबस और मूल्यांकन पर उठे सवाल</strong></h5>
<p>स्कूल संचालकों ने यह मुद्दा भी उठाया कि कई निजी स्कूल अतिरिक्त विषय और निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई कराते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं था कि उन विषयों का प्रश्नपत्र और मूल्यांकन किस आधार पर होगा। बिना स्पष्ट ब्लूप्रिंट और सिलेबस के परीक्षा कराने का निर्णय अव्यावहारिक बताया गया।</p>
<h5><strong>24 घंटे में बदला आदेश</strong></h5>
<p>बढ़ते विरोध को देखते हुए शिक्षा विभाग ने 4 फरवरी को संशोधित आदेश जारी कर अनुदान प्राप्त और अशासकीय स्कूलों को इस व्यवस्था से बाहर कर दिया। अब केवल स्वामी आत्मानंद स्कूलों में डीईओ के माध्यम से परीक्षाएं कराने का प्रावधान रखा गया है।</p>
<p>निजी स्कूल संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए शिक्षा मंत्री और विभाग का आभार जताया है। उनका कहना है कि इस निर्णय से छात्रों और स्कूलों दोनों को अनावश्यक तनाव से राहत मिली है।</p>
<p>------</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:33:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेंटल हॉस्पिटल में संविदा नियुक्तियों पर हाईकोर्ट की सख्ती, स्थायी समाधान पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[नियमित भर्ती की समय-सीमा स्पष्ट न होने पर कोर्ट नाराज़, स्वास्थ्य सचिव को नया शपथपत्र दाखिल करने का आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-strictness-on-contractual-appointments-in-mental-hospital-emphasis/article-45371"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/cg-(23).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के एकमात्र मानसिक चिकित्सालय में स्टाफ की कमी और संविदा नियुक्तियों पर निर्भर व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बिलासपुर स्थित सकरी मेंटल हॉस्पिटल की बदहाल स्थिति से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अस्थायी उपायों के बजाय समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने नियमित भर्ती की स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताए जाने पर असंतोष जताया। कोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे 24 मार्च से पहले नया शपथपत्र दाखिल करें, जिसमें यह बताया जाए कि अस्पताल में आवश्यक पदों पर स्थायी नियुक्ति कब तक पूरी की जाएगी।</p>
<p>यह मामला सकरी स्थित राज्य मानसिक चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। पूर्व सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अस्पताल की स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन कराने के लिए अधिवक्ता ऋषि राहुल सोनी को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। निरीक्षण रिपोर्ट में मरीजों की संख्या के अनुपात में विशेषज्ञ डॉक्टरों और सहायक स्टाफ की कमी, साफ-सफाई की बदतर स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव की ओर इशारा किया गया।</p>
<h5><strong>शासन का पक्ष</strong></h5>
<p>राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए अंतरिम व्यवस्था के तहत संविदा नियुक्तियां की गई हैं। शासन के अनुसार, 2 जनवरी 2026 के आदेश के तहत दो एमडी (मनोचिकित्सा) डॉक्टरों को दो वर्ष की संविदा पर नियुक्त किया गया है, जिन्होंने 13 जनवरी से कार्यभार संभाल लिया है।</p>
<p>शपथपत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि पैथोलॉजी विशेषज्ञ की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयन सूची जारी कर दी गई है। वहीं, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर (सोशल वर्कर) के पदों पर भर्ती प्रक्रिया लोक सेवा आयोग के माध्यम से प्रचलन में है। इसके अलावा वार्ड बॉय और वार्ड आया की भर्ती व्यापम द्वारा पूरी कर ली गई है, जिनके नियुक्ति आदेश दस्तावेज सत्यापन के बाद जारी किए जाएंगे।</p>
<h5><strong>कोर्ट क्यों नाराज़</strong></h5>
<p>न्यायमित्र ने कोर्ट को अवगत कराया कि स्वास्थ्य सचिव के शपथपत्र में मनोचिकित्सक पदों पर नियमित भर्ती की ठोस योजना, विज्ञापन की अगली तिथि, चयन प्रक्रिया की समय-सीमा और व्यावहारिक अड़चनों का स्पष्ट विवरण नहीं है। इसी कारण कोर्ट ने शासन के जवाब को अधूरा माना।</p>
<p>शपथपत्र में यह भी बताया गया कि मनोचिकित्सकों की भर्ती के लिए 22 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान कोई भी अभ्यर्थी पात्र नहीं पाया गया। सभी उम्मीदवार या तो अनुपस्थित थे या अयोग्य, जिससे भर्ती प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी।</p>
<p>हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि अगली सुनवाई में केवल संविदा समाधान नहीं, बल्कि स्थायी भर्ती की ठोस कार्ययोजना अपेक्षित होगी।</p>
<p>------</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:33:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर में जाम से राहत की कवायद तेज, सड़कों से हटाया गया अतिक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, ट्रैफिक वायलेशन फ्री जोन विकसित करने पर फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/effort-to-relieve-traffic-jam-in-bilaspur-encroachment-removed-from/article-45372"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/cg-(24).jpg" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित आवागमन से निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बुधवार को नगर निगम और यातायात पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाया। इस दौरान दुकानों के सामने फैलाए गए अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई और नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।</p>
<p>प्रशासन ने शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों को पहले ही ‘ट्रैफिक वायलेशन फ्री जोन’ घोषित कर दिया है। इनमें अग्रसेन चौक से पुराना बस स्टैंड, श्रीकांत वर्मा मार्ग, महाराणा प्रताप चौक से नेहरू चौक तक का क्षेत्र शामिल है। इन क्षेत्रों में अब यातायात नियम तोड़ने वालों पर बिना किसी रियायत के कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>यह अभियान सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत चलाया जा रहा है। इसी क्रम में चौथे सेक्टर के रूप में तालापारा क्षेत्र के मगरपारा चौक से भारतीय नगर चौक तक की सड़क को शामिल किया गया है। यहां जिला प्रशासन, नगर निगम और यातायात पुलिस की टीमों ने समन्वित रूप से सड़क पर यातायात बाधित करने वाले अतिक्रमण, ठेले, गुमटियां, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स और होर्डिंग हटाने की कार्रवाई की।</p>
<h5><strong>बुलडोजर से हटाए गए अवैध कब्जे</strong></h5>
<p>संयुक्त अभियान के दौरान सड़क किनारे दुकानों के सामने किए गए स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण को बुलडोजर की मदद से हटाया गया। अधिकारियों का कहना है कि इन अवैध कब्जों के कारण सड़क संकरी हो गई थी, जिससे रोजाना जाम की स्थिति बन रही थी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा था।</p>
<h5><strong>एक माह तक चलेगा पायलट प्रोजेक्ट</strong></h5>
<p>प्रशासन ने इस अभियान को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एक माह तक चलाने का निर्णय लिया है। इस दौरान शहर के प्रमुख मार्गों से ठेला-गुमटी, चलित दुकानें, अव्यवस्थित पार्किंग और यातायात बाधित करने वाली अन्य संरचनाओं को हटाया जाएगा। साथ ही सड़क किनारे पार्किंग पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी।</p>
<h5><strong>ट्रैफिक पुलिस की अपील</strong></h5>
<p>यातायात पुलिस ने नागरिकों और व्यापारियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वाहन केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़े करें और दुकानों के सामने सड़क पर अतिक्रमण न करें, ताकि आवागमन सुचारु और सुरक्षित बनाया जा सके।</p>
<h5><strong>अधिकारी बोले</strong></h5>
<p>एडिशनल एसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे ने बताया कि शहर को चरणबद्ध तरीके से ट्रैफिक वायलेशन फ्री जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए शहर को अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है और प्रत्येक सेक्टर में क्रमशः कार्रवाई की जा रही है। मगरपारा रोड पर हुई कार्रवाई इसी योजना का हिस्सा है।</p>
<p>-----</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:33:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में शासकीय खरीदी पर अस्थायी रोक, बजट के बाद ही होंगे नए क्रय आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[15 फरवरी से 31 मार्च तक लागू रहेगा प्रतिबंध, विशेष परिस्थितियों में वित्त विभाग की अनुमति जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/temporary-ban-on-government-purchases-in-chhattisgarh-new-purchase-orders/article-45362"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/cg-(20).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था को संतुलित रखने के उद्देश्य से शासकीय खरीदी पर अस्थायी रोक लगा दी है। वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 15 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान सामान्य परिस्थितियों में किसी भी विभाग को नई शासकीय खरीदी करने की अनुमति नहीं होगी।</p>
<p>महानदी भवन से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि केवल विशेष और अत्यावश्यक मामलों में ही संबंधित विभाग वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति लेकर खरीदी कर सकेंगे। आदेश सभी विभागों, निगमों और स्वायत्त संस्थाओं पर समान रूप से लागू होगा।</p>
<h5><strong>वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का निर्णय</strong></h5>
<p>वित्त विभाग ने अपने आदेश में बताया है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में कई विभाग केवल बजट खर्च करने के उद्देश्य से बिना वास्तविक आवश्यकता के सामग्री और सेवाओं की खरीदी कर लेते हैं। इससे शासन की राशि अनावश्यक रूप से अवरुद्ध हो जाती है और वित्तीय अनुशासन प्रभावित होता है। इसी प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।</p>
<h5><strong>15 मार्च तक अनिवार्य भुगतान</strong></h5>
<p>निर्देशों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के बजट प्रावधानों के अंतर्गत 15 फरवरी 2026 के बाद कोई भी नया क्रय आदेश जारी नहीं किया जाएगा। वहीं, 15 फरवरी 2026 तक जारी किए गए सभी वैध क्रय आदेशों का भुगतान 15 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से करना होगा। तय समय-सीमा में भुगतान नहीं होने की स्थिति में संबंधित विभाग स्वयं जिम्मेदार होगा।</p>
<h5><strong>इन मदों को मिली छूट</strong></h5>
<p>हालांकि शासन ने कुछ आवश्यक सेवाओं और परियोजनाओं को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा है। इनमें केंद्र प्रवर्तित योजनाएं, केंद्रीय क्षेत्रीय योजनाएं, विदेशी सहायता प्राप्त परियोजनाएं, केंद्रीय वित्त आयोग अनुदान, नाबार्ड, सिडबी, राष्ट्रीय आवास बैंक और विशेष केंद्रीय सहायता से पोषित योजनाएं शामिल हैं।</p>
<p>इसके अलावा लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और वन विभाग की चालू परियोजनाओं के लिए आगामी एक माह में आवश्यक सामग्री की खरीदी की अनुमति दी गई है। जेलों, सरकारी अस्पतालों, ईएसआई अस्पतालों, छात्रावासों और आश्रमों के लिए भोजन, वस्त्र और दवाइयों की खरीदी भी प्रतिबंध से बाहर रखी गई है।</p>
<h5><strong>रोजमर्रा की आवश्यक खरीदी रहेगी जारी</strong></h5>
<p>आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पोषण आहार, परिवहन व्यवस्था, आसवनियों से देशी मदिरा की खरीदी, पेट्रोल-डीजल, वाहन मरम्मत और प्रतिस्थापन, 5 हजार रुपए तक की लेखन सामग्री तथा अन्य आकस्मिक व्यय को भी छूट दी गई है। साथ ही प्रथम अनुपूरक अनुमान के अंतर्गत स्वीकृत प्रावधानों के विरुद्ध क्रय भी जारी रहेंगे।</p>
<p>-----</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 13:08:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>रायपुर में जुटेंगे दुनिया भर के छत्तीसगढ़िया, 27–28 मार्च को होगा प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव</title>
                                    <description><![CDATA[निवेश, रोजगार और विकास की रणनीति पर होगा मंथन, विदेशों में बसे छत्तीसगढ़ियों से जुड़ेगी राज्य सरकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarhians-from-all-over-the-world-will-gather-in-raipur/article-45360"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/cg-(19).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में 27 और 28 मार्च को दो दिवसीय <em>प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव</em> का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में देश-विदेश में रह रहे छत्तीसगढ़ मूल के नागरिक एक मंच पर जुटेंगे और राज्य के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।</p>
<p>कॉन्क्लेव का आयोजन नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन (NACHA) और छत्तीसगढ़ एनआरआई संघ के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को राज्य की विकास योजनाओं, निवेश अवसरों और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना है, ताकि उनके अनुभव और संसाधनों का उपयोग प्रदेश के हित में किया जा सके।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान निवेश की संभावनाओं, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यटन, उद्योग, स्टार्टअप और नवाचार जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार और प्रवासी समुदाय के बीच सीधा संवाद स्थापित करने पर भी विशेष जोर रहेगा। आयोजन के लिए पंजीयन प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।</p>
<h5><strong>अनुभव और विशेषज्ञता साझा करेंगे प्रवासी</strong></h5>
<p>कॉन्क्लेव में शामिल होने वाले प्रवासी छत्तीसगढ़ी अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा करेंगे। विदेशों में कार्यरत उद्योग विशेषज्ञ, उद्यमी, प्रोफेशनल्स और सामाजिक कार्यकर्ता राज्य में निवेश, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के नए अवसरों पर अपने विचार रखेंगे। आयोजन के माध्यम से यह भी प्रयास किया जाएगा कि प्रवासी समुदाय और स्थानीय संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग की रूपरेखा तैयार हो सके।</p>
<h5><strong>सरकार की विकास साझेदारी पर फोकस</strong></h5>
<p>मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कॉन्क्लेव को लेकर कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी राज्य की महत्वपूर्ण पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में रह रहे छत्तीसगढ़ी नागरिकों का ज्ञान, तकनीकी दक्षता और वैश्विक अनुभव प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। राज्य सरकार चाहती है कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ाएं।</p>
<p>सरकार का मानना है कि इस कॉन्क्लेव के माध्यम से न केवल निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>-----</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 13:07:56 +0530</pubDate>
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