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                <title>Puri - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Puri RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा पर नया विवाद, पुरी गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ISKCON द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित करने पर जताई आपत्ति, शास्त्रीय परंपराओं की रक्षा और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a507984676f8/article-58357"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jagannath-rath-yatra.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को लेकर एक बार फिर परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं के बीच विवाद गहरा गया है। ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्राचीन धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत इस्कॉन (ISKCON) द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह परंपरा, शास्त्रों और भगवान जगन्नाथ की निर्धारित धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है तथा इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">8 जुलाई को लिखे गए इस पत्र में गजपति महाराज ने कहा कि जगन्नाथ संस्कृति केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में यदि अलग-अलग संस्थाएं अपनी सुविधा के अनुसार रथयात्रा की तिथियां तय करेंगी तो मूल परंपरा कमजोर होगी और श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार कर उचित कदम उठाए जाएं, ताकि भगवान जगन्नाथ की प्राचीन परंपराओं की गरिमा बनी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">गजपति महाराज दिव्यसिंह देव केवल पुरी राजघराने के प्रमुख ही नहीं, बल्कि श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के स्थायी अध्यक्ष भी हैं। जगन्नाथ परंपरा में उन्हें 'ठाकुर राजा' का विशेष सम्मान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वे भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाते हैं। हर वर्ष रथयात्रा के दौरान तीनों रथों पर सोने की झाड़ू से सफाई करने की प्रसिद्ध 'छेरा पंहरा' सेवा भी गजपति महाराज द्वारा ही संपन्न की जाती है। यह सेवा राजसत्ता के बजाय भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिव्यसिंह देव का राज्याभिषेक वर्ष 1970 में मात्र 17 वर्ष की आयु में हुआ था। उन्होंने विधि की उच्च शिक्षा प्राप्त की है और लंबे समय से श्रीजगन्नाथ मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं तथा परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके द्वारा उठाया गया यह मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विवाद की मुख्य वजह इस वर्ष विभिन्न देशों में अलग-अलग समय पर आयोजित रथयात्राएं हैं। इस्कॉन ने जून और जुलाई के दौरान लंदन, न्यूयॉर्क तथा सिडनी सहित कई शहरों में रथयात्रा निकाली, जबकि पुरी में इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को आयोजित होनी है। इसके अलावा स्नान पूर्णिमा का आयोजन 29 जून को हुआ था। गजपति महाराज का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार इन धार्मिक आयोजनों की निश्चित तिथियां निर्धारित हैं और उनसे अलग जाकर आयोजन करना उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">गजपति महाराज ने मध्य प्रदेश में प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार उज्जैन स्थित इस्कॉन मंदिर द्वारा 16 से 25 जुलाई के बीच राज्य के 66 स्थानों पर रथयात्रा निकालने की योजना बनाई गई है। इस पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में रथयात्रा को आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारंभ होने वाला नौ दिवसीय उत्सव बताया गया है। इसलिए अलग-अलग स्थानों पर अलग तिथियों में रथयात्रा आयोजित करना शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने पत्र में स्कंद पुराण का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित स्कंद पुराण में स्वयं भगवान जगन्नाथ ने स्नान यात्रा और रथयात्रा की तिथियों का उल्लेख किया है। ऐसे में इन तिथियों में परिवर्तन करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। गजपति महाराज का मानना है कि यदि इस प्रकार की परंपराएं लगातार बदलती रहीं तो आने वाली पीढ़ियों तक मूल धार्मिक स्वरूप सुरक्षित रखना कठिन हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, इस्कॉन ने अपने पक्ष में स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी भी परंपरा का उल्लंघन करना नहीं है। संगठन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ केवल पुरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। विदेशों में स्थानीय परिस्थितियां, सरकारी नियम, जलवायु और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अलग-अलग होती हैं। कई देशों में निर्धारित तिथि पर विशाल रथयात्रा निकालने की अनुमति या आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। इसलिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तिथियों पर आयोजन किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इसमें शामिल हो सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस्कॉन ने पहले भी स्पष्ट किया था कि रूस सहित कई देशों में मौसम और प्रशासनिक नियमों के कारण शास्त्रों में वर्णित तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल भगवान जगन्नाथ की भक्ति और भारतीय संस्कृति का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है। रथयात्रा को लेकर यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराज ने इस्कॉन से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी रथयात्रा पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार आयोजित की जाए। हालांकि उस समय भी इस्कॉन ने स्थानीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने कार्यक्रमों का बचाव किया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:42:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रथयात्रा के लिए गोंदिया–पुरी स्पेशल ट्रेन चलेगी, रायपुर-दुर्ग के यात्रियों को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[रथयात्रा के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने जुलाई में गोंदिया और पुरी के बीच विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/gondia-puri-special-train-will-run-for-rath-yatra-a-big/article-57419"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gondia-puri-special-train.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रथयात्रा के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस दौरान ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहती है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने गोंदिया और पुरी के बीच रथयात्रा स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की है। यह विशेष ट्रेन जुलाई महीने में चार-चार फेरों के लिए संचालित की जाएगी। रेलवे का मानना है कि इस व्यवस्था से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के हजारों यात्रियों को यात्रा के दौरान बेहतर सुविधा मिलेगी और नियमित ट्रेनों पर अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। रेलवे के अनुसार ट्रेन संख्या 08801 गोंदिया–पुरी रथयात्रा स्पेशल का संचालन 2, 9, 16 और 29 जुलाई 2026 को किया जाएगा। यह ट्रेन दोपहर 1:30 बजे गोंदिया से रवाना होगी। इसके बाद शाम 3:58 बजे दुर्ग और शाम 5:10 बजे रायपुर पहुंचेगी। निर्धारित समय के अनुसार यह ट्रेन अगले दिन सुबह 10 बजे पुरी पहुंचेगी। इस विशेष सेवा से रायपुर, दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को सीधे पुरी जाने का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी। वापसी यात्रा के लिए भी रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। ट्रेन संख्या 08802 पुरी–गोंदिया रथयात्रा स्पेशल 3, 10, 17 और 30 जुलाई 2026 को पुरी से दोपहर 1 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन अगले दिन तड़के 3:10 बजे रायपुर पहुंचेगी। इसके बाद सुबह 4:28 बजे दुर्ग होते हुए सुबह 7 बजे गोंदिया पहुंचेगी। इस तरह आने और जाने दोनों दिशाओं में यात्रियों को अतिरिक्त रेल सेवा का लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">रेलवे ने इस विशेष ट्रेन का ठहराव कई प्रमुख स्टेशनों पर रखा है, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके। गोंदिया से पुरी के बीच यह ट्रेन डोंगरगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, महासमुंद, खरियार रोड, कांटाबांजी, टिटलागढ़, बलांगीर, बरगढ़ रोड, संबलपुर, अंगुल, तालचेर रोड, ढेंकानाल, कटक, भुवनेश्वर और खुर्दा रोड जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी। इससे इन शहरों और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालु भी बिना अतिरिक्त परेशानी के यात्रा कर सकेंगे। हर वर्ष रथयात्रा के समय पुरी जाने वाली ट्रेनों में लंबी प्रतीक्षा सूची देखने को मिलती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से टिकट बुक कराने के बावजूद कन्फर्म सीट नहीं प्राप्त कर पाते। ऐसे में रेलवे द्वारा चलाई जा रही यह विशेष ट्रेन यात्रियों के लिए काफी राहत लेकर आई है। अतिरिक्त फेरे शुरू होने से टिकट उपलब्धता में सुधार होने की उम्मीद है और यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा सुविधा भी मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस स्पेशल ट्रेन में कुल 20 आईसीएफ कोच लगाए गए हैं। इनमें दिव्यांग यात्रियों के लिए अनुकूल सह गार्ड कोच, 10 शयनयान (स्लीपर), 3 थर्ड एसी और 2 सेकेंड एसी कोच शामिल हैं। इसके अलावा सामान्य श्रेणी के यात्रियों के लिए भी आवश्यक व्यवस्था की गई है, ताकि सभी वर्गों के लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार यात्रा कर सकें। रेलवे का कहना है कि अतिरिक्त कोचों की वजह से अधिक संख्या में यात्रियों को सीट उपलब्ध कराना संभव होगा।रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही टिकट बुक करें और समय रहते अग्रिम आरक्षण करा लें। त्योहार के दौरान भीड़ अधिक रहने की संभावना है, इसलिए अंतिम समय तक इंतजार करने के बजाय पहले से योजना बनाकर टिकट लेना अधिक सुविधाजनक रहेगा। रेलवे ने यह भी कहा है कि यात्रा के दौरान यात्रियों को अपने टिकट, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज साथ रखने चाहिए ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।</p>
<p class="isSelectedEnd">रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक उत्सवों में भी गिनी जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस दौरान रेलवे पर यात्रियों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण रेलवे समय-समय पर विशेष ट्रेनों का संचालन करता है ताकि यात्रियों की सुविधा बनी रहे और नियमित ट्रेनों में भीड़ कम हो सके। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की यह पहल छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रायपुर और दुर्ग जैसे बड़े शहरों से सीधे जुड़ने वाली यह विशेष ट्रेन हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>108 कलशों के पवित्र जल से महाप्रभु का महाअभिषेक, खुले मंच से दिए भक्तों को दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन का वैदिक विधि-विधान से स्नान, अब 15 दिनों तक रहेंगे अनासार गृह में, इसके बाद होगा नवयौवन दर्शन और रथयात्रा का शुभारंभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahaprabhus-mahaabhishek-with-the-holy-water-of-108-kalash-was/article-57321"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jagannath-puri.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सनातन आस्था के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल देव स्नान पूर्णिमा का पर्व सोमवार को ओडिशा के श्रीजगन्नाथ धाम पुरी में पूरे श्रद्धा, उत्साह और वैदिक परंपराओं के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा, सुदर्शन और मदनमोहन का 108 पवित्र कलशों के जल से महाअभिषेक किया गया। हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन होने वाला यह दिव्य अनुष्ठान विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा महापर्व की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु इस दुर्लभ अवसर के साक्षी बनने पुरी पहुंचे। सुबह से ही श्रीमंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा क्षेत्र शंखध्वनि, घंटानाद तथा वैदिक मंत्रों से गूंजता रहा। देव स्नान पूर्णिमा वर्ष का एकमात्र ऐसा दिन माना जाता है जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को खुले मंच से प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं। सुबह मंगला आरती, अबकाश और अन्य दैनिक नीतियां पूरी होने के बाद पारंपरिक पहंडी विजय के माध्यम से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन को गर्भगृह से बाहर स्नान मंडप तक लाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ महाप्रभु का स्वागत किया। पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालुओं में भगवान के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">स्नान अनुष्ठान के लिए मंदिर परिसर स्थित पवित्र सुना कुआं यानी स्वर्ण कूप से जल निकाला गया। इस जल में चंदन, कपूर, अगरु, केसर, पुष्प और विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों को मिलाकर उसे सुगंधित बनाया गया। इसके बाद 108 स्वर्ण कलशों में इस जल को भरकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का राजकीय स्नान कराया गया। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ को 35 कलश, भगवान बलभद्र को 33, देवी सुभद्रा को 22 तथा सुदर्शन को 18 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया गया। यह अनुष्ठान श्रीजगन्नाथ परंपरा की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक विधियों में से एक माना जाता है। महाअभिषेक के बाद गजपति महाराजा ने पारंपरिक 'छेरा पहंरा' की रस्म निभाई। इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र को दुर्लभ 'हाती बेश' अर्थात गजानन स्वरूप में सजाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान ने अपने परम भक्त गणपति भट्ट को दर्शन देने के लिए हाथी स्वरूप धारण किया था। तभी से देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान को हाती बेश में सजाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु विशेष रूप से इस अवसर पर पुरी पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 108 कलशों के शीतल जल से स्नान कराने के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद उन्हें अनासार गृह में विश्राम के लिए ले जाया जाता है, जहां अगले 15 दिनों तक आम श्रद्धालुओं के लिए प्रत्यक्ष दर्शन बंद रहते हैं। इस अवधि में केवल दैतापति सेवक भगवान की विशेष सेवा करते हैं और आयुर्वेदिक औषधियों से उनकी सेवा-सुश्रुषा की जाती है। इसे भगवान के विश्राम काल के रूप में देखा जाता है। अनासार अवधि पूरी होने के बाद नवयौवन दर्शन का आयोजन होता है, जिसमें भगवान नए स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके तुरंत बाद विश्वविख्यात रथयात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसका इंतजार देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">स्कंद पुराण के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा की परंपरा का संबंध राजा इंद्रद्युम्न से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के विग्रहों की स्थापना के बाद राजा इंद्रद्युम्न ने पहली बार इस महाअभिषेक का आयोजन कराया था। तभी से ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन को भगवान जगन्नाथ के प्राकट्य दिवस के रूप में भी माना जाता है। यही कारण है कि देव स्नान पूर्णिमा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन परंपरा, ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत और भगवान जगन्नाथ के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक बन चुकी है। इस वर्ष भी मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंधन किया गया ताकि बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के महाप्रभु के दर्शन कर सकें। पूरे दिन भजन-कीर्तन, वैदिक अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा। श्रद्धालुओं का मानना है कि देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान के खुले मंच से दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। देव स्नान पूर्णिमा के साथ अब जगन्नाथ संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। अगले 15 दिनों तक भगवान अनासार गृह में रहेंगे, जिसके बाद नवयौवन दर्शन होगा और फिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने भव्य रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और परंपरा का ऐसा उत्सव है, जिसकी पहचान पूरी दुनिया में है। पुरी की यह परंपरा सदियों से सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत को आगे बढ़ाती आ रही है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:57:39 +0530</pubDate>
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