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                <title>Ministry of Home Affairs - दैनिक जागरण</title>
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                <title>केंद्र का नया निर्देश: सरकारी कार्यक्रमों में पहले वंदे मातरम्, फिर होगा जन-गण-मन</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक शब्द, सही उच्चारण और निर्धारित क्रम का पालन अनिवार्य बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/centres-new-instructions-first-vande-mataram-and-then-jana-gana-mana-in/article-58450"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vande-mataram.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन-गण-मन के गायन और वादन को लेकर एक बार फिर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों शामिल किए जाते हैं, वहां पहले वंदे मातरम् और उसके बाद जन-गण-मन प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यह व्यवस्था पहले से निर्धारित नियमों के अनुरूप है और सभी संबंधित विभागों को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। 9 जुलाई को जारी इस पत्र की जानकारी अब सामने आई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन राज्यों का अपना राज्य गीत है, वहां भी निर्धारित क्रम में पहले राष्ट्रगीत और फिर राष्ट्रगान का पालन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, उद्देश्य पूरे देश में एक समान प्रोटोकॉल लागू करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।</p>
<p>निर्देश में राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान हमेशा उनके आधिकारिक और मूल शब्दों के साथ ही गाए या बजाए जाएं। उच्चारण, प्रस्तुति और समय से जुड़े तय मानकों का भी पालन किया जाना जरूरी होगा। इसके लिए दोनों की आधिकारिक प्रतियां मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई हैं ताकि किसी तरह की त्रुटि या भ्रम की स्थिति न बने। मंत्रालय ने संबंधित विभागों और संस्थानों से कहा है कि कार्यक्रम आयोजित करते समय इन्हीं अधिकृत संस्करणों का उपयोग किया जाए। बताया जा रहा है कि यह दूसरा अवसर है जब केंद्र सरकार ने इस विषय पर राज्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले 28 जनवरी को भी इसी संबंध में आदेश जारी किया गया था। उस समय स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से करने, वंदे मातरम् के दौरान सभी लोगों के खड़े रहने और पूरे छह अंतरे गाने की बात कही गई थी। छह अंतरों को गाने की कुल अवधि लगभग तीन मिनट दस सेकंड बताई गई थी, जबकि पहले सामान्य तौर पर केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाते थे। हालांकि, सिनेमाघरों को इन नियमों से अलग रखा गया था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम् बजाना या दर्शकों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। इसी तरह यदि किसी समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाता है, तो उस दौरान दर्शकों के लिए खड़ा होना आवश्यक नहीं माना जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और देश के इतिहास में विशेष स्थान रहा है। इसे साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था और बाद में 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में इसे शामिल किया गया। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सार्वजनिक मंच से वंदे मातरम् का गायन किया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख नारा भी बना। संस्कृत भाषा के इस वाक्यांश का अर्थ है, "हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूं।" आजादी के बाद इसे राष्ट्रगीत का दर्जा मिला और तब से यह राष्ट्रीय समारोहों और विशेष अवसरों पर सम्मानपूर्वक गाया जाता है। हाल के वर्षों में भी वंदे मातरम् राष्ट्रीय आयोजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है। इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की थीम भी वंदे मातरम् रखी गई थी। संस्कृति मंत्रालय ने इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष झांकी प्रस्तुत की थी, जिसे मंत्रालयों और विभागों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार भी मिला। वहीं, संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस भी देखने को मिली थी। विभिन्न दलों ने इसके इतिहास, महत्व और प्रस्तुति को लेकर अपने-अपने पक्ष रखे थे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी चर्चा हुई थी, जिसमें ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े संदर्भ भी सामने आए थे। हालांकि, केंद्र सरकार के ताजा निर्देश प्रशासनिक स्तर पर तय प्रोटोकॉल के पालन पर केंद्रित हैं। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीतों के सम्मान से जुड़े नियमों का एक समान अनुपालन देशभर में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:32 +0530</pubDate>
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                <title>निजी सुरक्षा उद्योग के लिए गृह मंत्रालय का बड़ा कदम, PSARA अनुपालन और कारोबार आसान बनाने पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में गृह मंत्रालय की PSARA संयुक्त कार्यशाला में 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में निजी सुरक्षा उद्योग के लिए नियमों को सरल बनाने, लाइसेंस प्रक्रिया, प्रशिक्षण और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर व्यापक चर्चा हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/home-ministrys-big-step-for-private-security-industry-national-workshop/article-57340"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/psara.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में निजी सुरक्षा उद्योग को अधिक संगठित, पारदर्शी और व्यवसाय के अनुकूल बनाने की दिशा में गृह मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में निजी सुरक्षा कंपनियों के विभिन्न संगठनों ने 25 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब में <strong>"PSARA अनुपालन और लागू करने पर संयुक्त कार्यशाला"</strong> का आयोजन किया। इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्यों के नियंत्रण अधिकारी, डीजीपी एवं एडीजीपी स्तर के पुलिस अधिकारी तथा निजी सुरक्षा उद्योग से जुड़े 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p>कार्यशाला का उद्देश्य <strong>निजी सुरक्षा एजेंसी (विनियमन) अधिनियम, 2005 (PSARA)</strong> के प्रभावी क्रियान्वयन, उद्योग के समक्ष मौजूद व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान तथा निजी सुरक्षा क्षेत्र के लिए "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" को बढ़ावा देना था। यह मंच सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद, सहयोग और नीति सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।</p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-29-at-5.10.14-pm.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-29 at 5.10.14 PM" width="1600" height="1067"></img></p>
<p> </p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत <strong>CAPSI (सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री)</strong> के अध्यक्ष <strong>कुंवर विक्रम सिंह</strong> के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निजी सुरक्षा उद्योग की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सरकार और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया।</p>
<p>इसके बाद गृह मंत्रालय में पुलिस आधुनिकीकरण विभाग की <strong>उप सचिव सुश्री कृति गर्ग (IAS)</strong> ने विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने PSARA के विभिन्न प्रावधानों, सरकार की अपेक्षाओं और निजी सुरक्षा उद्योग को अधिक सक्षम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए किए जा रहे सुधारों की जानकारी साझा की। उन्होंने राज्यों में कानून के प्रभावी और समान क्रियान्वयन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।</p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-29-at-5.10.15-pm.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-29 at 5.10.15 PM" width="1600" height="1067"></img></p>
<p> </p>
<p>कार्यशाला के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में <strong>FICCI, SAI, KSSA, BSRU</strong> सहित विभिन्न उद्योग संगठनों और निजी सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। चर्चा में लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने, नियमों के अनुपालन, सुरक्षा गार्डों के प्रशिक्षण, कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता, डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने तथा विभिन्न राज्यों में एक समान मानकों को लागू करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।</p>
<p>एक विशेष सत्र में विभिन्न राज्यों के नियंत्रण अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा कानून के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। इसके बाद आयोजित खुले प्रश्नोत्तर सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने सीधे सरकारी अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं और सुझाव रखे, जिससे संवाद और समाधान की दिशा में सकारात्मक माहौल बना।</p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-29-at-5.10.15-pm-(1).jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-29 at 5.10.15 PM (1)" width="1600" height="1067"></img></p>
<p> </p>
<p>कार्यक्रम का मुख्य संबोधन गृह मंत्रालय में <strong>संयुक्त सचिव (पुलिस आधुनिकीकरण) श्री आर. प्रसन्ना (IAS)</strong> ने दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार निजी सुरक्षा उद्योग को देश की समग्र सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग मानती है और इसे अधिक सक्षम, पारदर्शी तथा आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और उद्योग के बीच इस प्रकार का सहयोग भविष्य में सुरक्षा क्षेत्र के विकास को नई गति देगा।</p>
<p>कार्यशाला के समापन पर इस बात पर सहमति बनी कि PSARA के प्रभावी क्रियान्वयन, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, उद्योग की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था तथा सरकार और निजी सुरक्षा क्षेत्र के बीच मजबूत समन्वय के लिए ठोस सिफारिशें तैयार की जाएंगी। इन सुझावों से न केवल निजी सुरक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को भी दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 17:33:53 +0530</pubDate>
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