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                <title>E20 पेट्रोल पर भूटान का बड़ा फैसला, भारत से मांगा सिर्फ नॉर्मल पेट्रोल</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने फ्यूल स्टोरेज, पानी रिसाव और पहाड़ी इलाकों में इंजन पर असर की आशंका जताई; भारत से एडवांस सूचना और लीक-प्रूफ टैंक की भी मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bhutans-big-decision-on-e20-petrol-asked-for-only-normal/article-57925"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhutan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत सरकार जहां देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है, वहीं पड़ोसी देश भूटान ने इस ईंधन को लेने से फिलहाल इनकार कर दिया है। भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) से स्पष्ट रूप से अनुरोध किया है कि जब तक भारत में सामान्य (बिना एथेनॉल मिश्रण वाला) पेट्रोल उपलब्ध है, तब तक उसे वही सप्लाई किया जाए। भूटान का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में E20 पेट्रोल का उपयोग उसके लिए तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। सरकार ने इस फैसले के पीछे कई अहम कारण बताए हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण देश का पुराना फ्यूल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर, अंडरग्राउंड टैंकों में पानी रिसने की समस्या और पहाड़ी इलाकों में वाहनों की परफॉर्मेंस को लेकर चिंता शामिल है। भूटान का मानना है कि इन परिस्थितियों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल वाहनों और ईंधन भंडारण व्यवस्था दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पुराना स्टोरेज सिस्टम बना सबसे बड़ी चिंता</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ईंधन को जमीन के नीचे बने स्टील के टैंकों में संग्रहित किया जाता है। कई स्थानों पर ये टैंक पुराने हो चुके हैं और उनमें पानी के रिसाव की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल में नमी को तेजी से सोखने की क्षमता होती है। यदि स्टोरेज टैंक में थोड़ी भी नमी या पानी मौजूद हो तो E20 पेट्रोल उसे अपने अंदर मिला सकता है। ऐसी स्थिति में ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित होती है और वाहनों के इंजन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके अलावा स्टील टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे भविष्य में रखरखाव की लागत अधिक हो सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पहाड़ी रास्तों पर प्रदर्शन को लेकर आशंका</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान का अधिकांश भूभाग पहाड़ी है, जहां तीखी चढ़ाइयों और घुमावदार सड़कों पर वाहन चलाने के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है। अधिकारियों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कुछ कम होती है। इससे कठिन पहाड़ी मार्गों पर इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि भारत सरकार और कई ऑटोमोबाइल निर्माता E20 को सुरक्षित बताते हैं, लेकिन भूटान का कहना है कि वह अपने स्थानीय भौगोलिक हालात और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस ईंधन को अपनाने के लिए तैयार नहीं है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में भी जारी है बहस</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देश में E20 पेट्रोल को लेकर पहले से ही चर्चा और बहस जारी है। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले बनी कई पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों ने दावा किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण माइलेज में कमी आती है और कुछ मामलों में इंजन के रखरखाव की लागत बढ़ जाती है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि E20 ईंधन से प्रदूषण कम होता है, विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता घटती है और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। सरकार का यह भी दावा है कि E20 के कारण इंजन की कार्यक्षमता पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत से ही खरीदता है पूरा ईंधन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान अपनी पेट्रोल और डीजल की लगभग पूरी आवश्यकता भारत से पूरी करता है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। वर्तमान में भूटान को उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन उपलब्ध कराया जाता है। भूटानी अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में गलती से भी E20 पेट्रोल की आपूर्ति हो जाती है तो उसकी पहचान करना कठिन नहीं होगा। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में यदि पानी मिल जाए तो उसका रंग दूधिया दिखाई देने लगता है, जिससे परीक्षण के दौरान आसानी से पता लगाया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भविष्य के लिए पहले से सूचना की मांग</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भूटान ने भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से यह भी अनुरोध किया है कि यदि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बढ़ाया जाता है या सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया जाता है, तो इसकी जानकारी पहले से दी जाए। इससे भूटान को अपने स्टोरेज सिस्टम और वितरण नेटवर्क में आवश्यक बदलाव करने का समय मिल सकेगा। इसके साथ ही भूटान ने लीक-प्रूफ और आधुनिक ईंधन भंडारण टैंक उपलब्ध कराने में भी भारत से सहयोग की अपेक्षा जताई है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद भविष्य में E20 जैसे ईंधन को अपनाने पर पुनर्विचार किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 15:42:28 +0530</pubDate>
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                <title>पेट्रोल-डीजल खरीद पर सभी पाबंदियां खत्म, 1 जुलाई से रीटेल पंपों से मिलेगी पूरी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[1 जुलाई से कॉमर्शियल खरीदार भी रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे, 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा भी समाप्त होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/all-restrictions-on-purchase-of-petrol-and-diesel-ended-complete/article-57373"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-or-diesel.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद पर लागू सभी आपातकालीन पाबंदियों को 1 जुलाई 2026 से हटाने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद अब कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता भी सामान्य ग्राहकों की तरह रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही एक वाहन में एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 29 जून को नया आदेश जारी करते हुए पहले लगाए गए प्रतिबंध वापस ले लिए। मंत्रालय का कहना है कि देश में ईंधन की आपूर्ति अब सामान्य हो चुकी है, इसलिए इन प्रतिबंधों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रही। सरकार ने 11 जून को पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर पैदा हुई चिंता के बीच कई अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। उस समय वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई थी। हालात को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की थी। इन नियमों के तहत बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, फैक्ट्रियों, टेलीकॉम कंपनियों और अन्य कमर्शियल खरीदारों को रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं थी। उन्हें केवल बल्क सेल प्वाइंट्स या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन लेना पड़ता था। प्रतिबंधों के दौरान आम वाहनों और ट्रकों के लिए भी एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा तय की गई थी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कृत्रिम कमी पैदा न हो और सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से आपूर्ति बनी रहे। हालांकि पिछले कुछ दिनों में सप्लाई की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। मंत्रालय के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई भी पहले की तुलना में सामान्य हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रीटेल और थोक बाजार में डीजल की कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला था। उदाहरण के तौर पर, रीटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत काफी कम थी, जबकि थोक खरीदारों के लिए इसकी कीमत कहीं अधिक पड़ रही थी। इसी कारण कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, बस ऑपरेटर और टेलीकॉम कंपनियां सीधे रीटेल पंपों से ईंधन खरीदने लगी थीं। इससे कुछ क्षेत्रों में मांग अचानक बढ़ गई और सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बनने लगा। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अस्थायी प्रतिबंध लागू किए थे। सरकार का कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति पहले की तुलना में स्थिर हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति सामान्य होने के कारण भारत को कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति मिलने लगी है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली ऑयल शिपमेंट्स फिर से सुचारु होने से घरेलू स्तर पर स्टॉक मजबूत हुआ है। इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। पहले ट्रक ऑपरेटरों और बस कंपनियों को निर्धारित सीमा के कारण कई बार अलग-अलग पेट्रोल पंपों से डीजल लेना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। इसी तरह निर्माण कार्यों, औद्योगिक इकाइयों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों को भी ईंधन की उपलब्धता पहले की तरह आसान हो जाएगी। प्रतिबंध हटने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और ईंधन की खरीद की प्रक्रिया सामान्य होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू सप्लाई की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगी। यदि भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति संबंधी चुनौती सामने आती है तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की बात नहीं बताई गई है। 1 जुलाई से लागू होने वाले इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं और बड़े व्यावसायिक खरीदारों दोनों को राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिबंध जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:20:45 +0530</pubDate>
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