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                <title>Donation - दैनिक जागरण</title>
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                            <item>
                <title>राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़: 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा, सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[दान गिनने वाले कर्मचारियों ने बढ़े कार्यभार और बदली व्यवस्था पर जताई नाराजगी, दान प्रबंधन और कथित गड़बड़ी मामले में CBI जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-twist-in-ram-temple-donation-dispute-mass-resignation-of/article-58425"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा श्रद्धालुओं की आस्था या धार्मिक आयोजन को लेकर नहीं, बल्कि मंदिर में आने वाले दान की गिनती और उससे जुड़े प्रशासनिक विवाद को लेकर हो रही है। दान की गिनती का जिम्मा संभाल रहे 23 कर्मचारियों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि दान चोरी का मामला सामने आने के बाद दान की प्रकृति बदल गई है, जिससे उनका कार्यभार पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। इसी बीच इस पूरे मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा, जिससे इस विवाद पर सभी की नजरें टिक गई हैं। मंदिर में आने वाले दान की गिनती का कार्य बैंक कर्मचारियों की टीम करती थी। पहले दान में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, जिससे गिनती का काम अपेक्षाकृत तेजी से पूरा हो जाता था। कर्मचारियों के मुताबिक पहले प्रतिदिन 500 रुपये के नोटों के 70 से 80 बंडल तैयार हो जाते थे। लेकिन दान चोरी की खबरें सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके में बदलाव देखने को मिला है। अब मंदिर में 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है, जबकि 500 रुपये के नोटों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्मचारियों का कहना है कि छोटे मूल्य के नोटों की गिनती में अधिक समय लगता है। पहले जहां दो शिफ्टों में काम होता था और प्रत्येक कर्मचारी लगभग छह घंटे की ड्यूटी करता था, वहीं अब पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार काम करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनके वेतन में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई। बढ़े हुए कार्यभार और लंबी ड्यूटी के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता गया और अंततः 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। बताया जा रहा है कि इस्तीफों के बाद अब केवल 13 कर्मचारी ही दान गिनने का काम संभाल रहे हैं। ऐसे में मंदिर में प्रतिदिन आने वाले दान की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि जल्द ही नई नियुक्तियां नहीं की गईं या कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में दान प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, राम मंदिर दान प्रबंधन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में दान चोरी के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है। इन सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ 13 जुलाई को सुनवाई करेगी। इस सुनवाई को पूरे देश में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आगे की जांच और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर दिशा तय हो सकती है। दान विवाद पर देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी नेपाल से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। नेपाल के जनकपुर स्थित प्रसिद्ध जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के किसी मंदिर में दान से जुड़ी ऐसी घटना पहले कभी सुनने या देखने को नहीं मिली। उनके अनुसार, जब से उन्हें अयोध्या में दान से जुड़े विवाद की जानकारी मिली है, तब से वे बेहद दुखी और चिंतित हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। राम मंदिर देशभर के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर की दान व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। श्रद्धालु यह उम्मीद कर रहे हैं कि दान की राशि का पूरी पारदर्शिता के साथ उपयोग हो और उसकी गिनती एवं प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनी रहे। अब सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देशों के आधार पर इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है या दान प्रबंधन प्रणाली में बदलाव के निर्देश दिए जाते हैं, तो इसका असर भविष्य में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया, बोले- SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद दूंगा हर सवाल का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीरामचरितमानस की चौपाई साझा कर तोड़ी चुप्पी, पत्र जारी कर कहा- मौन इसलिए हूं क्योंकि जांच पूरी होने का इंतजार है; ट्रस्ट और SIT की कार्रवाई जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/champat-rais-first-reaction-on-the-ram-temple-offering-controversy/article-58124"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रीरामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई साझा करते हुए संकेत दिया कि कठिन समय में धैर्य और सत्य की परीक्षा होती है। इसके साथ ही उन्होंने रामभक्तों के नाम एक हस्तलिखित पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी भी आरोप का जवाब नहीं देंगे और विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। चंपत राय ने अपने संदेश में लिखा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, लेकिन उन्होंने जांच की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए मौन रहने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद उससे जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक हो गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा और सच्चाई सभी के सामने होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1991 में उन्हें संगठन की ओर से अयोध्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और तब से लेकर अब तक का उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा संगठन और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया है। इधर, चढ़ावा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अब जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी अब राम मंदिर से जुड़े प्रमुख आयोजनों में हुए खर्च का भी परीक्षण कर रही है। विशेष रूप से 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह और नवंबर 2025 में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित बिल, भुगतान और वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। जांच एजेंसियां इन खर्चों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं ताकि वित्तीय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी प्रकार की अंतिम टिप्पणी या निष्कर्ष सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार चंपत राय का इस कथित मामले से कोई व्यक्तिगत या चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ चूक हुई होगी, जिसका फायदा कुछ लोगों ने उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्रस्ट में नए महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन दास ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। ट्रस्ट प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह जारी रहेगी और आवश्यक प्रशासनिक सुधार भी किए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड भी मिली है। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी चंपत राय को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। संगठन का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप जांच में सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसी कारण चंपत राय संगठन में अपनी वर्तमान जिम्मेदारी पर बने रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सलकनपुर देवी धाम के प्रबंधन पर विक्रम मस्ताल के सवाल, दान राशि की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता और अभिनेता विक्रम मस्ताल ने मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग उठाई, दान राशि और सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vikram-mastal-questions-on-the-management-of-salkanpur-devi-dham/article-57407"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/salkanpur-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सीहोर जिले के प्रसिद्ध सलकनपुर विजयासन देवी धाम के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। बुधनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी और अभिनेता विक्रम शर्मा मस्ताल ने मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और दान राशि के उपयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर दावा किया कि मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि उनके आरोपों पर मंदिर प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। विक्रम शर्मा मस्ताल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में धार्मिक संस्थानों से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने सलकनपुर देवी धाम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यहां भी दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल लंबे समय से उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी धार्मिक संस्था में जनता की आस्था से जुड़ा धन आता है तो उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है। उन्होंने मंदिर में पहले हुई चोरी की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि मंदिर जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर बड़ी चोरी होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में आखिर कहां चूक हुई और चोरी के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चोरी में कितनी राशि या सामग्री का नुकसान हुआ और इस संबंध में जनता को अब तक स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। विक्रम मस्ताल ने कहा कि सलकनपुर देवी धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में नकद दान, आभूषण और अन्य भेंट अर्पित करते हैं। उनका कहना है कि यह धन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। इसलिए मंदिर की वार्षिक आय, व्यय और विकास कार्यों पर खर्च की जाने वाली राशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने मंदिर प्रबंधन समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि लंबे समय से मंदिर के संचालन और प्रबंधन में सीमित लोगों का प्रभाव बना हुआ है और इसमें व्यापक पारदर्शिता दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों का संचालन नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की शंका की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिए जाएं तो विवाद अपने आप समाप्त हो सकते हैं। अपने बयान में विक्रम मस्ताल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने मांग की कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, दान राशि के उपयोग और प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से अनुरोध किया कि मंदिर की वार्षिक आय और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। सलकनपुर देवी धाम प्रदेश का प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंधन को लेकर उठने वाले किसी भी सवाल का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से आरोप लगाए जाते हैं तो उनकी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। विक्रम मस्ताल ने जिन बिंदुओं को उठाया है, उनकी पुष्टि किसी जांच एजेंसी या सक्षम प्राधिकरण द्वारा नहीं की गई है। दूसरी ओर, मंदिर प्रबंधन की ओर से भी अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:16:40 +0530</pubDate>
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