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                <title>Transparency - दैनिक जागरण</title>
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                <title>दिग्विजय सिंह का ऐलान: महाकाल से अयोध्या तक करेंगे 1000 किमी पदयात्रा, राम मंदिर चंदे का हिसाब मांगेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[2 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा, कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी; यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की घोषणा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48b697e584e/article-57851"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा ऐलान किया है। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या की राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य किसी दल या संगठन के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और न ही वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे। उनके अनुसार उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था और आज भी उस दान की रसीद तथा चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उनका कहना है कि जिन श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया है, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने बताया कि पदयात्रा शुरू होने से पहले वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि 5 या 6 जुलाई को वकीलों से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी है। उनका कहना है कि न्यायालय से राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों की आस्था बहुत गहरी होती है, इसलिए आर्थिक मामलों में भी स्पष्टता बनी रहनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या आम नागरिक को यदि चंदे के उपयोग में पारदर्शिता की अपेक्षा है तो वह इस यात्रा में शामिल हो सकता है। उनके अनुसार यात्रा के दौरान वह अपने साथ दान की रसीद और चेक की प्रतियां भी रखेंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने स्वयं भी इस अभियान में योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए स्वेच्छा से दान दिया था और ऐसे में यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई सवाल उठते हैं तो उनका समाधान भी पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वह अपना दिया गया चंदा वापस लेकर उसे किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र में बने एक गेस्ट हाउस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी सभी संस्थाओं और ट्रस्टों के आर्थिक लेन-देन का समय-समय पर सार्वजनिक विवरण उपलब्ध होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल एक ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक ट्रस्टों के लिए समान रूप से पारदर्शिता लागू होनी चाहिए। उन्होंने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाने की भी घोषणा की, जिस पर लिखा होगा कि "मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।" इसे उन्होंने प्रतीकात्मक संदेश बताया। दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि उनकी पूरी यात्रा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि दानदाताओं के मन में उठ रहे सवालों को उचित मंच पर रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:19 +0530</pubDate>
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                <title>सलकनपुर देवी धाम के प्रबंधन पर विक्रम मस्ताल के सवाल, दान राशि की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता और अभिनेता विक्रम मस्ताल ने मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की मांग उठाई, दान राशि और सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vikram-mastal-questions-on-the-management-of-salkanpur-devi-dham/article-57407"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/salkanpur-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सीहोर जिले के प्रसिद्ध सलकनपुर विजयासन देवी धाम के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। बुधनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी और अभिनेता विक्रम शर्मा मस्ताल ने मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और दान राशि के उपयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर दावा किया कि मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि उनके आरोपों पर मंदिर प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। विक्रम शर्मा मस्ताल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में धार्मिक संस्थानों से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने सलकनपुर देवी धाम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यहां भी दान राशि और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल लंबे समय से उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी धार्मिक संस्था में जनता की आस्था से जुड़ा धन आता है तो उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है। उन्होंने मंदिर में पहले हुई चोरी की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि मंदिर जैसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर बड़ी चोरी होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में आखिर कहां चूक हुई और चोरी के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चोरी में कितनी राशि या सामग्री का नुकसान हुआ और इस संबंध में जनता को अब तक स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। विक्रम मस्ताल ने कहा कि सलकनपुर देवी धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में नकद दान, आभूषण और अन्य भेंट अर्पित करते हैं। उनका कहना है कि यह धन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। इसलिए मंदिर की वार्षिक आय, व्यय और विकास कार्यों पर खर्च की जाने वाली राशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने मंदिर प्रबंधन समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि लंबे समय से मंदिर के संचालन और प्रबंधन में सीमित लोगों का प्रभाव बना हुआ है और इसमें व्यापक पारदर्शिता दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों का संचालन नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की शंका की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिए जाएं तो विवाद अपने आप समाप्त हो सकते हैं। अपने बयान में विक्रम मस्ताल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने मांग की कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, दान राशि के उपयोग और प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से अनुरोध किया कि मंदिर की वार्षिक आय और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। सलकनपुर देवी धाम प्रदेश का प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंधन को लेकर उठने वाले किसी भी सवाल का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से आरोप लगाए जाते हैं तो उनकी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। विक्रम मस्ताल ने जिन बिंदुओं को उठाया है, उनकी पुष्टि किसी जांच एजेंसी या सक्षम प्राधिकरण द्वारा नहीं की गई है। दूसरी ओर, मंदिर प्रबंधन की ओर से भी अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:16:40 +0530</pubDate>
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