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                <title>Energy Department - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Energy Department RSS Feed</description>
                
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                <title>बिजली कटौती पर हाईकोर्ट की सख्ती, कहा- सिर्फ योजना नहीं, जनता को जमीन पर राहत दिखनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[बार-बार बिजली गुल होने पर शासन ने पेश किया एक्शन प्लान, हाईकोर्ट ने प्रगति रिपोर्ट मांगी; अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-strictness-on-power-cuts-said-not-just/article-58286"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-power-cut.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारिश और आंधी-तूफान के दौरान बिलासपुर में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और बिजली विभाग के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया गया है और कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट होने के बजाय स्पष्ट कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। जब तक उनका असर जमीन पर दिखाई नहीं देगा और आम लोगों को वास्तविक राहत नहीं मिलेगी, तब तक ऐसे दावों का कोई खास महत्व नहीं रहेगा। कोर्ट ने प्रशासन को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने और प्रगति रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से ऊर्जा सचिव और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक ने अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बिलासपुर शहर की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तर पर बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नौ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों के तहत बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की योजना तैयार की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल यह पूरा मामला बिलासपुर में कुछ दिनों पहले हुई भारी बारिश और तेज आंधी के बाद सामने आया था। शहर के कई हिस्सों में पूरी रात बिजली आपूर्ति बाधित रही। हालात ऐसे थे कि वीवीआईपी क्षेत्र माने जाने वाले कलेक्ट्रेट और सिविल लाइन जैसे इलाकों में भी लंबे समय तक बिजली नहीं रही। इससे आम लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों ने लगातार बिजली गुल रहने, बार-बार फॉल्ट आने और विभाग की धीमी कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई थी। इस घटना के बाद मीडिया में प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में मामले की सुनवाई शुरू की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े सुधार प्रस्तावित हैं। शहर में अब पुराने और क्षतिग्रस्त सीमेंट के बिजली खंभों की जगह लोहे के पोल लगाए जाएंगे, ताकि तेज हवा या अन्य कारणों से बार-बार खंभे गिरने की समस्या कम हो सके। इसके अलावा जहां नए बिजली पोल लगाए जाएंगे, वहां भी स्टील के खंभों का ही उपयोग किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित और स्थायी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का तेजी से समाधान करने और बढ़ते लोड को नियंत्रित करने के लिए शहर में दो नए सप्लाई जोन बनाने की योजना भी तैयार की गई है। मंगला और कोनी क्षेत्रों को नए सप्लाई जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण एवं सामान्य विकास योजना के तहत करीब 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से ऐसे क्षेत्रों में खुले बिजली तार हटाकर कवर्ड केबल बिछाई जाएगी, जहां बार-बार फॉल्ट की समस्या सामने आती रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि शहर में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए नए सब-स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक मुख्य सब-स्टेशन और दो 33/11 केवी क्षमता वाले नए सब-स्टेशन बनाने के लिए जिला प्रशासन से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। वहीं पेड़ों की शाखाओं से बिजली लाइनों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए अतिरिक्त स्काईलिफ्ट वाहन तैनात किए जाएंगे। विभाग में तकनीकी कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्तियों की प्रक्रिया भी शुरू करने की जानकारी अदालत को दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से भी शपथ पत्र पेश किया गया। निगम आयुक्त ने बताया कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए विकास भवन में बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। यहां अधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। निगम ने यह भी बताया कि अप्रैल 2026 से ही शहर के सभी आठ जोनों में नालियों की सफाई और गाद निकालने का अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्य की जियो-टैग्ड तस्वीरें भी अदालत में प्रस्तुत की गई हैं। जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए 14 विशेष वाहनों का बेड़ा भी चौबीसों घंटे तैयार रखा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इन सभी दावों के बावजूद हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर बनाई गई योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। यदि बारिश के दौरान फिर बिजली गुल होती है या सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनती है, तो इसका अर्थ होगा कि योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हुआ। अदालत ने निर्देश दिया कि मानसून के पूरे दौर में बिजली आपूर्ति यथासंभव निर्बाध रखी जाए और किसी भी शिकायत का तत्काल समाधान किया जाए। डिवीजन बेंच ने नगर निगम आयुक्त और ऊर्जा सचिव को निर्देश दिया है कि वे शपथ पत्र के साथ विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक घोषित योजनाओं पर कितना काम हुआ है और जनता को उसका क्या लाभ मिला है। अदालत ने यह भी कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाकर फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका असर शहर की व्यवस्था में साफ दिखाई देना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बिलासपुर करंट हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, बिजली विभाग से मांगा विस्तृत जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[तीन लोगों की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान, हाईकोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था, इलेक्ट्रिक फेंसिंग और रोकथाम नीति पर मांगा शपथपत्र।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-strict-on-bilaspur-current-accident-demands-detailed-answer/article-58077"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-news-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की मौत के मामले ने अब न्यायपालिका का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस गंभीर घटना पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर और राज्य के ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य में बिजली व्यवस्था की निगरानी, रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्थाएं लागू हैं तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य के कई हिस्सों में खेतों, फार्महाउसों और निजी परिसरों के आसपास बिजली प्रवाहित फेंसिंग लगाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई लोग अपनी फसल, पशुओं या संपत्ति की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली युक्त तारों का उपयोग करते हैं, लेकिन इसकी चपेट में आने से अनजान लोगों की जान चली जाती है। अदालत ने माना कि यह केवल व्यक्तिगत लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था होना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान में ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिए जाते हैं, लेकिन केवल एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। यदि लगातार एक जैसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं, तो इसका अर्थ है कि रोकथाम के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। अदालत ने सरकार और बिजली विभाग से पूछा है कि क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्पष्ट नीति, दिशा-निर्देश या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू है। यदि नहीं, तो इसे तैयार करने और लागू करने की समय-सीमा भी बताई जाए। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले में CSPDCL के मैनेजिंग डायरेक्टर को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया जाए। साथ ही ऊर्जा विभाग के सचिव और बिजली कंपनी से विस्तृत शपथपत्र मांगा गया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि बिजली ढांचे का निरीक्षण कितनी नियमितता से किया जाता है, जर्जर तारों और खुले विद्युत स्रोतों की पहचान और मरम्मत की क्या व्यवस्था है तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जाती है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिस घटना के आधार पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया, वह बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव की है। यहां करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल बन गया था। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए स्वतः सुनवाई शुरू की। अदालत का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। पिछले दो महीनों में बिलासपुर जिले में करंट लगने की अलग-अलग घटनाओं में आठ लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कई मामले खेतों के आसपास लगे बिजली प्रवाहित तारों या जर्जर विद्युत लाइनों से जुड़े बताए गए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने बिजली सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पुराने और ढीले बिजली तार लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। कई बार घरेलू पशु और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। इसलिए यह विषय मानव सुरक्षा के साथ-साथ पशु संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सके। पूरे मामले पर राज्य सरकार और बिजली विभाग की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है। अदालत के निर्देशों के बाद अब यह स्पष्ट होगा कि बिजली सुरक्षा को लेकर वर्तमान व्यवस्था कितनी प्रभावी है और भविष्य में किन सुधारात्मक कदमों की योजना बनाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:11 +0530</pubDate>
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                <title>बिलासपुर की बदहाल बिजली व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, विभाग से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[आंधी-बारिश के बाद घंटों ब्लैकआउट और जलभराव पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए ऊर्जा विभाग व निगम अधिकारियों से जवाब तलब किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-demands-strict-response-from-the-department-on-the/article-57672"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-news-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बिजली व्यवस्था की लगातार बिगड़ती स्थिति अब न्यायपालिका की निगरानी में पहुंच गई है। शहर में आधे घंटे की आंधी और बारिश के बाद पूरी रात बिजली गुल रहने और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए ऊर्जा विभाग, नगर निगम और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की गई है।</p>
<p>दरअसल, सोमवार शाम बिलासपुर में तेज आंधी और बारिश के बाद शहर के अधिकांश हिस्सों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई थी। कई इलाकों में रात करीब तीन बजे तक ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही। गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली नहीं मिलने से लोग पूरी रात परेशान रहे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि नाराज नागरिक बिजली विभाग के नेहरू नगर जोन कार्यालय पहुंच गए और अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप था कि विभाग की लापरवाही और कमजोर व्यवस्था के कारण हर बार हल्की बारिश या तेज हवा के बाद शहर को लंबे बिजली संकट का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार सरकंडा क्षेत्र के बंधवापारा फीडर, महर्षि स्कूल फीडर, ओम नगर, सिंधी कॉलोनी, वेयरहाउस क्षेत्र और शेफर स्कूल सहित कई प्रमुख फीडर पूरी तरह बंद हो गए थे। कई स्थानों पर बिजली के खंभे गिर गए, इंसुलेटर क्षतिग्रस्त हो गए और कलेक्टर बंगले के पास एक बड़ा पेड़ गिरने से 11 केवी की मुख्य बिजली लाइन भी टूट गई। इसके अलावा बृहस्पति बाजार सब स्टेशन में तकनीकी खराबी आने से वहां देर रात तक सुधार कार्य प्रभावित रहा। कई इलाकों में ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण अगले दिन तक भी पूरी तरह बिजली बहाल नहीं हो सकी।</p>
<p>शहरवासियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से बिलासपुर में बिजली कटौती लगातार बढ़ती जा रही है। मामूली बारिश या तेज हवा के बाद कई घंटे तक बिजली गुल रहना अब सामान्य बात हो गई है। लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग समय रहते आवश्यक रखरखाव नहीं करता, जिसके कारण हर बार ऐसी स्थिति बनती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को रातभर बिजली नहीं मिलने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।</p>
<p>बिजली विभाग के अधिकारियों ने भी माना है कि वे संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। विभाग के अनुसार आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी रात केवल तीन मरम्मत टीमें मैदान में थीं, जिनमें कुल 12 कर्मचारी शामिल थे। एक साथ कई जगह फॉल्ट आने के कारण प्रत्येक लाइन की मरम्मत में दो से तीन घंटे का समय लग रहा था। अधिकारियों का कहना है कि सीमित स्टाफ और लगातार बढ़ती शिकायतों के कारण बिजली आपूर्ति बहाल करने में अपेक्षा से अधिक समय लगा।</p>
<p>इस पूरे मामले को मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लिया। अदालत ने माना कि यह केवल बिजली कटौती का मामला नहीं बल्कि आम नागरिकों के जीवन और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ा गंभीर विषय है। इसी कारण इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए संबंधित विभागों से जवाब मांगा गया है।</p>
<p>हाईकोर्ट ने ऊर्जा विभाग के सचिव, बिलासपुर नगर निगम आयुक्त और सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पूछा है कि शहर में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या योजना तैयार की गई है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए विभाग किस प्रकार की कार्ययोजना पर काम कर रहा है।</p>
<p>केवल बिजली व्यवस्था ही नहीं, बल्कि शहर में जलभराव की समस्या भी अदालत की चिंता का विषय बनी है। हाईकोर्ट ने नगर निगम से सड़कों, गलियों और निचले इलाकों में पानी भरने से रोकने के लिए ड्रेनेज सिस्टम की वर्तमान स्थिति और उसके सुधार को लेकर भी विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत का मानना है कि बारिश के दौरान जलभराव और बिजली व्यवस्था दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इनका प्रभाव सीधे आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दुर्ग में स्मार्ट मीटर के विरोध में फूटा गुस्सा, लोगों ने तोड़े मीटर</title>
                                    <description><![CDATA[जनदर्शन में पहुंचे सैकड़ों उपभोक्ताओं ने बढ़े बिजली बिल का विरोध किया, पुराने मीटर बहाल करने और बिजली दरें घटाने की मांग उठाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/anger-erupted-against-smart-meters-in-durg-people-broke-meters/article-57542"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/durg-smart-meter-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बुधवार को आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष उपभोक्ता अपने घरों से उतारे गए स्मार्ट मीटर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने अपने साथ लाए स्मार्ट मीटर जमीन पर पटककर तोड़ दिए और सरकार तथा बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्मार्ट मीटर हटाने, पुराने मीटर दोबारा लगाने और बढ़ी हुई बिजली दरों को वापस लेने की मांग की। पूरे घटनाक्रम के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि राज्य में बिजली का उत्पादन स्थानीय संसाधनों, खासकर कोयले के जरिए किया जाता है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर लगातार बिजली दरों का बोझ बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले से ही महंगाई के कारण घरेलू बजट प्रभावित है और अब बिजली के बढ़े हुए बिलों ने आम परिवारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई लोगों ने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद उनके मासिक बिजली बिल पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गए हैं। उनका कहना था कि उन्होंने अपने घरों में कोई नया बिजली उपकरण नहीं लगाया, फिर भी हर महीने बिल लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी वजह से लोगों के बीच स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली को लेकर संदेह और असंतोष बढ़ता जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। उनका कहना है कि कई इलाकों में लोगों की इच्छा के खिलाफ मीटर लगाए गए। विरोध करने पर उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई और दबाव बनाकर पुराने मीटर हटाए गए। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि मीटर लगाने पहुंचे कर्मचारियों के पास किसी अधिकृत संस्था का पहचान पत्र तक नहीं था। इससे लोगों के मन में पूरी प्रक्रिया को लेकर अविश्वास पैदा हुआ। उनका कहना है कि यदि नई तकनीक लागू की जा रही है तो पहले लोगों को उसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए थी और उनकी सहमति भी ली जानी चाहिए थी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों की एक बड़ी चिंता इसकी तकनीकी व्यवस्था को लेकर भी सामने आई। प्रदर्शन में शामिल उपभोक्ताओं का कहना था कि इलेक्ट्रॉनिक मीटरों के जरिए बिजली विभाग दूर से ही रीडिंग ले सकता है और जरूरत पड़ने पर बिना घर पहुंचे बिजली कनेक्शन काट या जोड़ सकता है। उनका मानना है कि इससे उपभोक्ताओं के अधिकार कमजोर हो सकते हैं और किसी तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि मीटर में कोई खराबी आती है तो आम उपभोक्ता उसे समझ भी नहीं पाएगा, जबकि पारंपरिक मीटर में रीडिंग स्पष्ट दिखाई देती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जनदर्शन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई महिलाओं ने कहा कि बढ़ते बिजली बिल का सीधा असर घर के मासिक बजट पर पड़ रहा है। रसोई का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों के बीच बिजली बिल का बढ़ता बोझ परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गया है। उनका कहना था कि यदि यही स्थिति बनी रही तो निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए आर्थिक संकट और गहरा सकता है। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि आम उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और जल्द राहत दी जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की कि स्मार्ट मीटरों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए और जिन क्षेत्रों से अधिक बिल आने की शिकायतें मिली हैं, वहां विशेष जांच अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही पुराने मीटर दोबारा लगाने की व्यवस्था की जाए और बिजली दरों में हाल में हुई बढ़ोतरी को वापस लिया जाए। लोगों का कहना था कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा और राज्य के अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लेकर उनकी शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी शिकायतों की जांच कर संबंधित विभाग को भेजा जाएगा। हालांकि बिजली विभाग की ओर से इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना है कि आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाले फैसलों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 16:41:08 +0530</pubDate>
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